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संवादहीन – NCERT Solution Class 9 Hindi Ganga

संवादहीन – NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga includes all the questions with solution given in NCERT Class 9 हिंदी (गंगा) textbook.

NCERT Solutions Class 9

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संवादहीन – NCERT Solutions


Q.1:

“संवादहीन” कहानी में ताई और मिट्ठू का संबंध किस भाव को दर्शाता है?

Options:
(1) परोपकार और त्याग
(2) ममता और स्नेह ✅
(3) करुणा और क्रोध
(4) जिज्ञासा और सहायता

Explanation:

कहानी में ताई और मिट्ठ का संबंध माँ-बेटे जैसा गहरा भावनात्मक जुड़ाव दिखाता है। ताई का पूरा स्रेह मिट्ठू पर केंद्रित हो जाता है-

  • ताई खुद भूखी रह सकती हैं, लेकिन मिट्ठू के लिए समय पर दाल-भात और रोटी बनाती हैं।
  • मिट्ठू को वे “बेटा” कहकर आशीर्वाद देती हैं-यह सीधा मातृत्व भाव दर्शाता है।
  • जब ताई कहीं बाहर जाती हैं, तो मिट्ठ की चिंता उन्हें बार-बार पीछे खींचती है।
  • मिट्ठू भी ताई को जवाब देकर, उन्हें दिलासा देकर उनके अकेलेपन को दूर करता है।

इन सभी घटनाओं से साफ है कि यह संबंध केवल साथ रहने का नहीं, बल्कि गहरी ममता और स्नेह का है।


Q.2:

जगन मास्टर द्वारा मिट्ठू को पिंजरे से बाहर निकालना किस भावना या मूल्य का संकेत देता है?

Options:
(1) अनुशासन और परंपरा
(2) उदासीनता और असावधानी
(3) आत्मगौरव और विद्रोह
(4) करुणा और नैतिकता ✅

Explanation:

जगन मास्टर एक स्वतंत्र विचारों वाले और सिद्धांतप्रिय व्यक्ति हैं। जब वे मिट्ठू को पिंजरे में बंद देखते हैं, तो उन्हें उसकी स्थिति पर दया (करुणा) आती है।

  • उन्हें लगता है कि एक जीव को बंद रखना गलत है – यह उनकी नैतिक सोच को दर्शाता है।
  • वे मिट्ठू को थोड़ी देर के लिए ही सही, खुली हवा में आज़ादी देना चाहते हैं।
  • यह काम वे “प्रायक्षित” की भावना से करते हैं, यानी उन्हें लगता है कि पिंजरे में रखना नैतिक रूप से ठीक नहीं है।

इसलिए उनका यह व्यवहार करुणा (दया) और नैतिकता (सही-गलत की समझ) का स्पष्ट संकेत देता है।


Q.3:

मिट्ठू का उड़ जाना किस विचार को प्रस्तुत करता है?

Options:
(1) भोजन की खोज
(2) प्रेम की आकांक्षा
(3) स्वतंत्रता की चाह ✅
(4) पक्षियों में सम्मान की प्रवृत्ति

Explanation:

मिट्ठू लंबे समय तक पिंजरे में बंद रहा, लेकिन जैसे ही उसे अवसर मिला, वह खुले रोशनदान से बाहर उड़ गया। यह घटना साफ बताती है कि-

  • हर जीव के अंदर स्वतंत्र रहने की प्राकृतिक इच्छा होती है।
  • पिंजरे की सुविधा (खाना, सुरक्षा) के बावजूद, मिट्ठू ने आज़ादी को चुना।
  • बाहर की दुनिया देखने की जिज्ञासा और उड़ने का आनंद उसकी स्वतंत्रता की चाह को दर्शाता है।

इसलिए मिट्ठू का उड़ जाना आज़ादी के महत्व को प्रकट करता है।


Q.4:

ताई के जीवन के दुख का मुख्य कारण क्या था?

Options:
(1) सम्मान और प्रतिष्ठा में कमी आना
(2) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव ✅
(3) आर्थिक विपन्नता और निर्धनता
(4) मिट्ठू के प्रति प्रेम और संवाद

Explanation:

कहानी में ताई के दुख का सबसे बड़ा कारण अकेलापन और अपनों से बिछड़ना है-

  • उनके बेटे-बहू शहर चले गए और बेटियाँ अपनी-अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गईं।
  • बड़ा घर सूना हो गया और ताई के जीवन में बात करने वाला कोई नहीं रहा।
  • ताई के लिए असली पीड़ा “सूने घर की भाँय-भाँय” है, यानी संवाद का अभाव।
  • मिट्ठू के आने के बाद उनका अकेलापन कम हो जाता है, जिससे स्पष्ट है कि उन्हें साथ और संवाद की कमी ही सबसे ज्यादा खल रही थी।

इसलिए ताई के दुख का मुख्य कारण परिवार से दूरी और संवाद का अभाव है।


Q.5:

कहानी “संवादहीन” में मानव-समाज में व्याप्त किस विसंगति को उजागर किया गया है?

Options:
(1) मजबूरी
(2) कर्मपरायणता
(3) अकेलापन ✅
(4) संवादधर्मिता

Explanation:

कहानी “संवादहीन” का मुख्य संदेश ही यह है कि आधुनिक जीवन में लोग अपने ही अपनों से दूर होते जा रहे हैं, जिससे गहरा अकेलापन पैदा होता है।

  • ताई का परिवार होते हुए भी वे पूरी तरह अकेली रह जाती हैं।
  • बड़ा घर, संपत्ति सब होने के बावजूद बात करने वाला कोई नहीं है।
  • मिट्ठू के आने से उनका अकेलापन कम होता है- यानी समस्या का मूल कारण अकेलापन ही था।

कहानी यह भी दिखाती है कि जब संवाद खत्म होता है, तो इंसान भीतर से अकेला हो जाता है। इसलिए यह कहानी समाज में बढ़ते अकेलेपन की समस्या को उजागर करती है।


Q.6:

“भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” ताई इस वाक्य में किस ‘नैया’ की बात कर रही हैं? वे यह बात क्यों कह रही हैं?

Solution:

“भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?” – इस वाक्य में ताई अपनी जीवन-नैया (जीवन की कठिन यात्रा) की बात कर रही हैं।
ताई के जीवन की परिस्थितियाँ बहुत बदल चुकी हैं-

  • पहले उनका घर परिवार, धन-संपत्ति और रौनक से भरा हुआ था।
  • अब वे पूरी तरह अकेली रह गई हैं-बेटे-बहू शहर चले गए, बेटियाँ अपने घरों में व्यस्त हैं।
  • बड़ा घर सूना हो गया है और ताई के पास कोई सहारा या साथी नहीं बचा।
  • वृद्धावस्था में उन्हें अपने भविष्य और जीवन के बचे हुए समय की चिंता सताती है।

इसलिए “नैया पार लगना” यहाँ जीवन की कठिनाइयों को पार करने का प्रतीक है। ताई यह वाक्य इसलिए कहती हैं क्योंकि वे अपने अकेलेपन, असहायता और भविष्य की चिंता से घिरी हुई हैं।
यह वाक्य ताई के दुःख, असुरक्षा और जीवन के प्रति चिंता को व्यक्त करता है।


Q.7:

“धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।” इस वाक्य में किस घटना की ओर संकेत किया गया है?

Solution:

“धीरे-धीरे सब पराए हाथ में चला गया।”- इस वाक्य में ताई के घर-परिवार, संपत्ति और पूरे कारबार के दूसरों के हाथों में चले जाने की घटना की ओर संकेत किया गया है।

  1. पहले ताई का घर बहुत समृद्ध और भरा-पूरा था- परिवार, नौकर-चाकर, खेतीबाड़ी, सब कुछ था।
  2. – लेकिन समय के साथ-
    • बेटे-बहू शहर चले गए,
    • बेटियाँ अपनी-अपनी गृहस्थी में व्यस्त हो गईं,
    • घर संभालने वाला कोई नहीं बचा।
  3. परिणामस्वरूप, खेती-बाड़ी और अन्य काम दूसरों के हवाले हो गए। इस तरह ताई का अपना सब कुछ धीरे-धीरे उनसे दूर होकर “पराया” हो गया।

Q.8:

“ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।” क्यों?

Solution:

ताई की सारी ममता मिट्ठू पर इसलिए बरस पड़ी क्योंकि उनके जीवन में अपनापन और स्नेह पाने-देने वाला कोई नहीं बचा था। पहले उनका परिवार बड़ा था- बेटे, बहुएँ, बेटियाँ, सब साथ रहते थे, जिससे उनकी ममता स्वाभाविक रूप से बँटी रहती थी। लेकिन समय के साथ सभी अपने-अपने जीवन में व्यस्त होकर उनसे दूर हो गए और ताई अकेली रह गईं। इस अकेलेपन ने उनके भीतर की ममता को जैसे दबा दिया था। ऐसे में जब मिट्ठू उनके जीवन में आया, तो उन्हें एक ऐसा साथी मिल गया, जिस पर वे अपना स्नेह लुटा सकें। मिट्ठू उनकी बातों का जवाब देता था, उनसे जुड़ाव बनाता था, इसलिए ताई ने उसे बेटे की तरह अपनाकर अपनी सारी ममता उसी पर उँडेल दी।


Q.9:

“अब ताई को इस बात की पूरी जानकारी रहने लगी थी कि किसके खेत में हरी मिर्चें तैयार हो गई हैं और किस पेड़ में फसल के आखिरी अमरूद बचे हैं।” इस वाक्य द्वारा ताई के व्यक्तित्व में आए परिवर्तनों के विषय में क्या-क्या पता चलता है?

Solution:

इस वाक्य से ताई के व्यक्तित्व में आए महत्वपूर्ण परिवर्तन स्पष्ट होते हैं। पहले ताई अपने लिए चूल्हा जलाने में भी आलस्य करती थीं और जीवन के प्रति कुछ उदासीन-सी हो गई थीं। लेकिन मिट्ठू के आने के बाद उनमें जिम्मेदारी, सक्रियता और लगाव बढ़ गया। अब वे उसके भोजन का विशेष ध्यान रखने लगीं, इसलिए उन्हें आसपास के खेतों और पेड़ों की जानकारी रहने लगी कि कहाँ से क्या मिल सकता है। इससे यह भी पता चलता है कि ताई अब सजग, कर्मठ और संवेदनशील हो गई हैं। मिट्ठू के प्रति प्रेम ने उनके जीवन में फिर से उत्साह और उद्देश्य भर दिया, जिससे उनका निष्क्रिय और अकेला जीवन बदलकर सक्रिय और अर्थपूर्ण हो गया।


Q.10:

“जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे।” जगन मास्टर का व्यक्तित्व कैसा था? कहानी में से उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।

Solution:

“जगन मास्टर दूसरे मिजाज के आदमी थे” से पता चलता है कि उनका व्यक्तित्व स्वतंत्र विचारों वाला, सिद्धांतवादी और संवेदनशील था। वे ऐसे व्यक्ति थे जो दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान करते थे और किसी को कष्ट नहीं देना चाहते थे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि जब उन्होंने मिट्ठू को पिंजरे में बंद देखा, तो उन्हें उसकी स्थिति पर दया आई। उन्होंने इसे अनैतिक मानते हुए पिंजरे का दरवाजा खोल दिया, ताकि मिट्ठू खुली हवा में सांस ले सके। वे बार-बार उसे बाहर आने का अवसर देते थे, जिससे उनकी करुणा और नैतिकता झलकती है। साथ ही, वे अपनी पत्नी के निर्णय से असहमत होते हुए भी झगड़ा नहीं करते, जिससे उनका शांत और सहनशील स्वभाव भी स्पष्ट होता है।


Q.11:

कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ किसके लिए सबसे अधिक सार्थक प्रतीत होता है- ताई, जगन मास्टर, मिट्ठू या नया तोता? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।

Solution:

कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ सबसे अधिक ताई के लिए सार्थक प्रतीत होता है। ताई का पूरा जीवन इसी संवादहीनता की पीड़ा को दर्शाता है। पहले उनका घर परिवार से भरा हुआ था, लेकिन समय के साथ बेटे-बहू शहर चले गए और बेटियाँ अपने घरों में व्यस्त हो गईं, जिससे ताई पूरी तरह अकेली और बातचीत से वंचित रह गईं। उनका बड़ा घर सूना हो गया और वे भीतर से टूटने लगीं। मिट्ठू के आने पर उन्हें एक साथी मिला, जिससे उनका अकेलापन कुछ कम हुआ, लेकिन अंत में उसके उड़ जाने से वे फिर उसी संवादहीन स्थिति में लौट आती हैं। इसलिए ताई के जीवन में संवाद की कमी ही मुख्य समस्या है, जिससे शीर्षक सबसे अधिक उन्हीं पर लागू होता है।


Q.12:

“अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।” ताई के बड़े से घर को सूना खंडहर क्यों कहा गया होगा?

Solution:

ताई के बड़े घर को सूना खंडहर इसलिए कहा गया है क्योंकि वहाँ अब जीवन, रौनक और पारिवारिक गतिविधियाँ समाप्त हो चुकी थीं। पहले वही घर लोगों, रिश्तों, त्योहारों और खुशियों से भरा रहता था, लेकिन समय के साथ सब बिखर गया। बेटे-बहू शहर चले गए, बेटियाँ अपने घरों में व्यस्त हो गईं और नौकर-चाकर भी चले गए। परिणामस्वरूप इतना बड़ा घर होते हुए भी वहाँ कोई रहने वाला या बातचीत करने वाला नहीं बचा। दीवारें तो खड़ी हैं, पर उनमें पहले जैसी जीवंतता नहीं रही। इसीलिए वह घर बाहर से बड़ा और मजबूत होते हुए भी अंदर से उजड़ा हुआ, निर्जीव और वीरान लगने लगा, जिसे ‘सूना खंडहर’ कहा गया है।


Q.13:

नीचे कुछ उत्तर और उनके दो-दो प्रश्न दिए गए हैं। पहचानिए कि इनमें से कौन-सा प्रश्न उस उत्तर के लिए उपयुक्त है?

  1. उत्तर : ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया।
    प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
    प्रश्न ख : ताई को मिट्ठू किसने भेंट में दिया था?
  2. उत्तर : ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था।
    प्रश्न क : ताई के लौटने के बाद मिट्ठू कहाँ चला गया था?
    प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
  3. उत्तर : गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा।
    प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
    प्रश्न ख : गाँववाले मिट्ठू के उड़ने से खुश क्यों थे?
  4. उत्तर : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है।
    प्रश्न क : कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ क्यों उपयुक्त नहीं है?
    प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

Solution:

  1. क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था?
  2. ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई?
  3. क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे?
  4. ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है?

Q.14:

“कभी-कभार गाँव में थोड़ी देर के लिए भी न्यौते-बुलावे में जातीं, तो दस बार खिड़की-दरवाजों की साँकलें टोहकर देखतीं…” ताई की तरह जब आप अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी वस्तु या व्यक्ति की चिंता आपको भीतर से कैसे परेशान करती है?

Solution:

जब हम अपने घर या परिवार से दूर होते हैं, तो किसी प्रिय व्यक्ति या वस्तु की चिंता मन में बार-बार उठती रहती है। जैसे ताई को मिट्ठू की चिंता रहती थी, उसी तरह मुझे भी अपने घरवालों या किसी खास चीज़ की याद सताती है। मन में सवाल आते रहते हैं – सब ठीक होगा या नहीं, किसी को मेरी जरूरत तो नहीं होगी या मेरी चीज़ सुरक्षित है या नहीं। यह चिंता कभी-कभी ध्यान भटका देती है और हम पूरी तरह किसी काम में मन नहीं लगा पाते।

ऐसी स्थिति में बार-बार फोन करने या जल्दी वापस लौटने की इच्छा होती है। इससे पता चलता है कि हमारा जुड़ाव कितना गहरा है और हम अपने लोगों या चीज़ों के प्रति कितने जिम्मेदार और भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं।


Q.15:

“आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।” क्या आप मानते हैं कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं? अपने किसी अनुभव का वर्णन करते हुए लिखिए।

Solution:

हाँ, मैं मानता हूँ कि पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। वे भी खुशी, दुख, डर और लगाव महसूस करते हैं। मेरे अनुभव में, हमारे घर के पास एक कुत्ता रहता था। जब भी मैं स्कूल से लौटता, वह मुझे देखकर पूँछ हिलाने लगता और मेरे पास आकर बैठ जाता। अगर मैं उसे कुछ दिन न दिखूँ, तो वह उदास-सा दिखता और मुझे देखते ही ज्यादा उत्साहित हो जाता था।

एक बार वह बीमार हो गया, तो वह चुपचाप एक कोने में बैठा रहा और खाना भी कम खाने लगा। इससे साफ लगा कि उसे भी दर्द और परेशानी का एहसास होता है। इस अनुभव से मुझे विश्वास हो गया कि पशु-पक्षियों में भी भावनाएँ और संवेदनाएँ होती हैं।


Q.16:

“गनपत ने ही एक सुझाव दिया कि मिट्ठू की ही सूरत-शक्ल का एक दूसरा तोता ले आया जाए ताकि ताई को भ्रम में रखा जा सके…” ताई को भ्रम में रखना उचित था या नहीं? तर्क सहित अपने विचार लिखिए।

Solution:

मेरे विचार से ताई को भ्रम में रखना पूरी तरह उचित नहीं था, लेकिन उस समय की परिस्थिति को देखकर यह निर्णय कुछ हद तक समझ में आता है। गनपत और अन्य लोग जानते थे कि ताई मिट्ठू से बहुत अधिक जुड़ी हुई हैं और उसके उड़ जाने का सच उन्हें गहरा आघात पहुँचा सकता है। इसलिए उन्होंने उन्हें दुख से बचाने के लिए ऐसा उपाय सोचा।

परंतु किसी को लंबे समय तक भ्रम में रखना सही नहीं माना जा सकता, क्योंकि सत्य छिपाने से विश्वास टूट सकता है। बेहतर होता कि ताई को धीरे-धीरे सच बताया जाता और उन्हें मानसिक रूप से संभाला जाता। इसलिए यह निर्णय संवेदनात्मक रूप से सही, लेकिन नैतिक रूप से पूरी तरह उचित नहीं कहा जा सकता है।


Q.17:

‘‘ताई सोच रही थीं कि उन्हें देखते ही मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ की रट लगाकर आसमान सिर पर उठा लेगा।” क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने सोचा कुछ और, हुआ कुछ और? उस अनुभव को लिखिए।

Solution:

हाँ, मेरे साथ भी कई बार ऐसा हुआ है कि मैंने कुछ सोचा और हुआ कुछ और। एक बार मैंने स्कूल की परीक्षा के लिए बहुत अच्छी तैयारी की थी और मुझे पूरा विश्वास था कि मेरे बहुत अच्छे अंक आएँगे। मैंने पहले से ही सोच लिया था कि मैं कक्षा में सबसे आगे रहूँगा।

लेकिन जब परिणाम आया, तो मेरे अंक मेरी उम्मीद से कम थे। उस समय मुझे बहुत निराशा हुई, क्योंकि जो मैंने सोचा था, वैसा नहीं हुआ। बाद में मुझे समझ आया कि केवल उम्मीद करना ही काफी नहीं, बल्कि और मेहनत और सही तैयारी की जरूरत होती है।

इस अनुभव से मैंने सीखा कि जीवन में हमेशा वैसा नहीं होता जैसा हम सोचते हैं, इसलिए हमें हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।


Q.18:

“मिट्ठू अब पिंजरे में रहने के इतने आदी हो चुके थे कि उन्होंने बाहर आने की कोई इच्छा नहीं प्रकट की।” क्या प्राणी सचमुच पिंजरे में रहने के आदी हो सकते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में अपने आस-पास से उदाहरण भी दीजिए।

Solution:

हाँ, प्राणी सचमुच पिंजरे या सीमित वातावरण में रहने के आदी हो सकते हैं। जब किसी जीव को लंबे समय तक एक ही जगह पर रखा जाता है, तो वह उसी को अपना सुरक्षित संसार मानने लगता है और बाहर जाने से डरता है।

मेरे आसपास एक पालतू पक्षी था, जो कई वर्षों तक पिंजरे में रहा। एक बार उसका पिंजरा खुला रह गया, फिर भी वह बाहर नहीं निकला, बल्कि अंदर ही बैठा रहा। उसे खुली उड़ान की आदत नहीं रही थी।

इसी तरह कुछ पालतू जानवर भी घर के बाहर जाने से घबराते हैं। इससे पता चलता है कि आदत और वातावरण किसी भी प्राणी के व्यवहार को बदल सकते हैं, और वे सीमित जीवन को भी अपना सकते हैं।


Q.19:

संवादहीन कहानी में अनेक विशेष बिंदु हैं जो इसे प्रभावपूर्ण बनाते हैं। नीचे कहानी के कुछ विशेष बिंदु और उनके उदाहरण दिए गए हैं। आप भी कहानी से इसी प्रकार के एक-एक उदाहरण खोजकर लिखिए-

विशेष बिंदुअर्थउदाहरण
चित्रात्मकता (दृश्य बिंब)शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना।मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।
संवादात्मकताकथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग।“राम-राम कहो, सीताराम कहो।”
पुनरुक्तिशब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता।“कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!”
अतिशयोक्तिकिसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे।रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है॥
लोकधर्मी भाषाग्रामीण, सहज, बोल-चाल की भाषा।भगवान! कैसे नैया पार लगेगी?
प्रश्नोत्तर शैलीपात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना।मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?

Solution:

शेखर जोशी द्वारा लिखित कहानी ‘संवादहीन’ के आधार पर तालिका के रिक्त उदाहरणों की पूर्ति नीचे दी गई है:

विशेष बिंदुअर्थउदाहरण
चित्रात्मकता (दृश्य बिंब)शब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना।“मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”
संवादात्मकताकथ्य को आगे बढ़ाने के लिए संवादों का प्रयोग।“ले, यह अमरूद खा ले, अभी-अभी तोड़ा है। मिठाई खाएगा? ले खा!”
पुनरुक्तिशब्दों की बार-बार पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता।“कटेगी! कटेगी!! कटेगी!!”
अतिशयोक्तिकिसी भाव या वस्तु का वर्णन बहुत बढ़ा-चढ़ाकर करना।“रेलगाड़ी में उसका भी टिकट लगेगा, आखिर वह भी तो बोलता-बतियाता प्राणी है।”
लोकधर्मी भाषाग्रामीण, सहज, बोल-चाल की भाषा।“सब तीतर-बीतर हो गए… नैया पार लगना।”
प्रश्नोत्तर शैलीपात्रों या लेखक द्वारा प्रश्न पूछना।“क्या सब लोग चले गए? क्या अब कोई लौटकर नहीं आएगा?”

अन्य वैकल्पिक उदाहरण (यदि आप बदलना चाहें):

  • संवादात्मकता: “सीताराम कह बेटा! सीताराम!”
  • लोकधर्मी भाषा: “वक्त-बेवक्त”, “टोह लेना”, “पौ फटना”।
  • प्रश्नोत्तर शैली: “मिठ्ठू! क्या तू भी मुझे छोड़कर चला जाएगा?”

Q.20:

किसी कहानी का अंत अनेक प्रकार से हो सकता है जैसे-

  1. सुखांत – जब कहानी का अंत प्रसन्नता, सफलता से होता है।
  2. दुखांत-जब कथा का अंत दुख, वियोग, मृत्यु या हानि से होता है।
  3. मुक्त अंत – जब कहानी स्पष्ट रूप से खत्म नहीं होती, बल्कि सोचने के लिए छोड़ दी जाती है।
  4. अप्रत्याशित अंत-जब अंत अचानक और अप्रत्याशित रूप से सामने आता है।
  5. यथार्थवादी अंत – जब कहानी का अंत जीवन की सच्चाई जैसा लगे।
  6. प्रेरणात्मक अंत-जब कहानी के अंत में कोई प्रेरणा या सकारात्मक सोच दी जाए।
  7. व्यंग्यात्मक अंत-जब कहानी का अंत व्यंग्य या कटाक्ष से किसी सत्य को प्रकट करता है।

आपके अनुसार ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को किस श्रेणी में रखा जा सकता है? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। आप इस कहानी का नया अंत किस प्रकार करना चाहेंगे?

Solution:

‘संवादहीन’ कहानी के अंत का विश्लेषण

मेरी समझ के अनुसार, ‘संवादहीन’ कहानी के अंत को ‘यथार्थवादी अंत’ (Realistic Ending) और ‘दुखांत’ (Tragic Ending) की श्रेणी में रखा जा सकता है।

उत्तर के कारण:

  1. जीवन की सच्चाई: कहानी का अंत जीवन की उस कड़वी सच्चाई को दिखाता है जहाँ एक अकेला वृद्ध व्यक्ति अपनों के अभाव में एक पक्षी से जुड़ाव महसूस करता है, लेकिन वह सहारा भी उससे छिन जाता है। यह अंत दिखाता है कि जीवन हमेशा वैसा नहीं होता जैसा हम चाहते हैं।
  2. मौन और अकेलापन: कहानी के अंत में जब ताई नया तोता लाती हैं, तो वह पहले वाले मिट्ठू की तरह बात नहीं करता। यह ताई के जीवन में दोबारा लौट आई ‘संवादहीनता’ (चुप्पी) को दर्शाता है, जो पाठक के मन में एक गहरा दुख छोड़ जाता है।
  3. अनिश्चितता: मिट्ठू का उड़ जाना और वापस न आना एक ऐसी क्षति है जिसे भरा नहीं जा सकता, इसलिए यह अंत मन को उदास करता है।

कहानी का एक नया अंत (कल्पना के आधार पर)

यदि मुझे इस कहानी का अंत दोबारा लिखना हो, तो मैं इसे ‘सुखांत’ या ‘प्रेरणात्मक’ बनाना चाहूँगा:

नया अंत: “जब ताई प्रयागराज से वापस लौटीं और उन्हें पता चला कि मिट्ठू उड़ गया है, तो वे बहुत निराश हुईं। लेकिन कुछ दिनों बाद, एक सुबह जब वे बरामदे में बैठी थीं, उन्होंने वही परिचित आवाज सुनी—’राम-राम ताई, सीता-राम!’ उन्होंने ऊपर देखा तो मिट्ठू अपने साथ एक और तोते को लेकर वापस आ गया था। मिट्ठू की वफादारी देखकर गाँव के लोगों को भी अहसास हुआ कि ताई कितनी अकेली हैं। गाँव के बच्चों ने तय किया कि वे रोज बारी-बारी से ताई के पास कहानियाँ सुनने आएँगे। इस तरह मिट्ठू की वापसी ने न केवल ताई का अकेलापन दूर किया, बल्कि पूरे घर को फिर से संवाद और खुशियों से भर दिया।”

नया अंत चुनने का कारण: यह अंत पाठक को सकारात्मकता देता है और यह संदेश फैलाता है कि प्रेम और देखभाल से किसी भी ‘संवादहीन’ जीवन में फिर से रौनक लाई जा सकती है।


Q.21:

“अंत में जगन मास्टर की घरवाली ने उनकी चिंता दूर कर दी।”
कहानी में रेखांकित पात्र का नाम नहीं दिया गया है। इसे कहीं ‘मास्टराइन’, तो कहीं ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहा गया है। आपके अनुसार कहानी में ऐसा क्यों किया गया होगा?

Solution:

कहानी में जगन मास्टर की पत्नी का कोई विशेष नाम न देकर उन्हें ‘मास्टराइन’ या ‘जगन मास्टर की घरवाली’ कहे जाने के पीछे निम्नलिखित सामाजिक और साहित्यिक कारण हो सकते हैं:

  1. तत्कालीन ग्रामीण परिवेश और परंपरा: भारतीय ग्रामीण समाज में, विशेषकर उस समय में, स्त्रियों को अक्सर उनके स्वयं के नाम से बुलाने के बजाय उनके पति के नाम या उनके पति के व्यवसाय से जोड़कर पहचाना जाता था। जगन मास्टर अध्यापक थे, इसलिए उनकी पत्नी को सम्मानजनक रूप से ‘मास्टराइन’ कहा गया। यह उस समय की सामाजिक संरचना को दर्शाता है जहाँ महिला की पहचान उसके परिवार या पति से तय होती थी।
  2. पात्र की गौण भूमिका (Secondary Character): कहानी में मुख्य केंद्र ताई और मिट्ठू हैं। जगन मास्टर और उनकी पत्नी सहायक पात्र हैं। लेखक ने शायद उनका नाम इसलिए नहीं दिया क्योंकि कहानी के उद्देश्य के लिए उनका अपना व्यक्तिगत नाम उतना महत्वपूर्ण नहीं था जितना कि उनका ‘मास्टर जी के परिवार’ का हिस्सा होना।
  3. अकेलेपन और संवादहीनता का प्रभाव: कहानी का शीर्षक ही ‘संवादहीन’ है। नाम का न होना भी एक प्रकार की दूरी या पहचान के अभाव को दर्शाता है। ताई के लिए वे केवल पड़ोस के लोग थे, जिनसे उनका रिश्ता नाम से ज्यादा उनके व्यवहार और पद से था।
  4. स्वाभाविकता: गाँव में आज भी कई लोग एक-दूसरे को उनके पेशों के आधार पर ही जानते हैं। लेखक शेखर जोशी ने ग्रामीण जीवन की इसी स्वाभाविकता और यथार्थ को बनाए रखने के लिए इन संबोधनों का प्रयोग किया है।

संक्षेप में, यह संबोधन उस समय के समाज की वास्तविकता और पात्रों के बीच के सामाजिक संबंधों को स्पष्ट करने के लिए किया गया है।


Q.22:

“गाँव के कई लोग कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज जा रहे थे”

  1. ‘कुंभ-स्नान’ एक सुप्रसिद्ध आयोजन है जिसमें करोड़ों लोग भाग लेते हैं। पता लगाइए-
    • इसका आयोजन क्यों किया जाता है?
    • पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था?
    • अगला आयोजन कब और कहाँ होगा?
  2. मान लीजिए कि ताई आपके मोहल्ले में रहती हैं। वे कुंभ-स्नान के लिए कैसे गई होंगी? उनकी यात्रा का वर्णन लिखिए।
    (संकेत- कहाँ से कहाँ तक की यात्रा, टिकट, यात्रा के साधन, संगी-साथी, खान-पान, ठहरना आदि।)
  3. आपके गाँव या नगर में कौन-सा मेला, उत्सव या पर्व मनाया जाता है? वहाँ का दृश्य, भीड़, श्रद्धा और वातावरण का वर्णन कीजिए। मेले में कैसी आवाजें, रंग, गंध, खान-पान, दृश्य और भाव होंगे?
    (संकेत-उनका वर्णन पाँच ज्ञानेंद्रियों-देखने, सुनने, सूँघने, छूने और स्वाद महसूस करने के आधार पर कीजिए।)

Solution:

शेखर जोशी की कहानी ‘संवादहीन’ के संदर्भ में आपके प्रश्नों के उत्तर नीचे दिए गए हैं:

  1. कुंभ-स्नान: एक परिचय
    • आयोजन क्यों किया जाता है? हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश निकला, तो देवताओं और असुरों के बीच छीना-झपटी में अमृत की कुछ बूंदें धरती पर चार स्थानों (प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक) पर गिरी थीं। माना जाता है कि कुंभ के दौरान इन स्थानों की नदियों का जल अमृत के समान पवित्र हो जाता है। इसमें स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति और पापों का नाश होता है।
    • पिछली बार इसका आयोजन कब और कहाँ हुआ था? पिछली बार ‘पूर्ण कुंभ’ का आयोजन वर्ष 2021 में हरिद्वार (उत्तराखंड) में हुआ था। इससे पहले वर्ष 2019 में प्रयागराज में भव्य ‘अर्धकुंभ’ का आयोजन किया गया था।
    • अगला आयोजन कब और कहाँ होगा? अगला ‘महाकुंभ’ वर्ष 2025 में प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) में आयोजित होने जा रहा है।
  2. ताई की कुंभ-यात्रा का वर्णन
    यदि ताई हमारे मोहल्ले में रहतीं, तो उनकी कुंभ-यात्रा कुछ इस प्रकार होती:
    • यात्रा का वृत्तांत: ताई अपने मोहल्ले की अन्य वृद्ध महिलाओं और जगन मास्टर जैसे कुछ सहायक पड़ोसियों के साथ प्रयागराज के लिए निकली होंगी। उन्होंने बहुत पहले से ही अपनी पोटली में कुछ जरूरी कपड़े और रास्ते के लिए सुखाया हुआ नाश्ता (जैसे मठरी और गुड़) तैयार कर लिया होगा।
    • साधन और टिकट: वे पास के रेलवे स्टेशन से पैसेंजर ट्रेन या ‘कुंभ स्पेशल’ बस द्वारा प्रयागराज पहुँची होंगी। चूंकि वे बुजुर्ग थीं, इसलिए मोहल्ले के युवाओं ने उनके लिए पहले से ही टिकट आरक्षित करवा लिया होगा।
    • संगी-साथी: उनके साथ मोहल्ले की ‘भजन मंडली’ की सहेलियाँ थीं, जिससे पूरी राह भजन-कीर्तन करते हुए कटी।
    • खान-पान और ठहरना: रास्ते में उन्होंने घर से बना सादा भोजन किया। प्रयागराज पहुँचकर वे किसी ‘अखाड़े’ के टेंट या पंडा जी के यहाँ ठहरी होंगी। वहां सुबह-सुबह ठंडे गंगा जल में डुबकी लगाकर उन्होंने दान-पुण्य किया और फिर आलू-पूरी का प्रसाद ग्रहण किया। ताई के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि उनके अकेलेपन से एक सुखद ब्रेक थी।
  3. मेरे नगर का मेला: एक जीवंत वर्णन (पाँच ज्ञानेंद्रियों के आधार पर)
    मेरे शहर में प्रतिवर्ष ‘शरद मेला’ लगता है। यहाँ का वातावरण कुछ इस प्रकार होता है:
    • देखना (दृश्य): आँखों के सामने रंग-बिरंगी लाइटें, ऊँचे-ऊँचे झूले और खिलौनों से सजी दुकानें होती हैं। चारों ओर जनसैलाब उमड़ा होता है। बच्चों के हाथ में गैस वाले गुब्बारे और महिलाओं के रंगीन दुपट्टे एक इंद्रधनुषी दृश्य बनाते हैं।
    • सुनना (आवाजें): कानों में पीं-पीं वाली सीटियों की आवाज, झूलों पर बैठे लोगों की चिल्लाहट, लाउडस्पीकर पर होने वाली घोषणाएं और फेरीवालों की “दस का माल, दस में!” वाली सदाएँ गूँजती रहती हैं।
    • सूँघने (गंध): जैसे ही आप खाने की गलियों में कदम रखते हैं, ताजे छनते हुए समोसों, सोंधी-सोंधी जलेबियों और गरम मक्खन वाले भुट्टों की महक नाक में समा जाती है। कहीं-कहीं अगरबत्ती और ताजे फूलों की खुशबू भी आती है।
    • स्वाद (खान-पान): मेले का मुख्य आकर्षण चाट-पकौड़े होते हैं। तीखी गोलगप्पों का पानी, चटपटी चाट और अंत में कुल्फी का मीठा स्वाद जीभ को तृप्त कर देता है।
    • छूना (स्पर्श): भीड़ में एक-दूसरे से टकराते कंधे, ठंडी हवा के झोंके, और लकड़ी के हस्तशिल्प की खुरदरी बनावट को महसूस करना मेले के अनुभव को पूरा करता है।

भाव: मेले में श्रद्धा, उत्साह और खुशी का मिला-जुला भाव होता है। लोग अपने रोजमर्रा के तनाव भूलकर अपनों के साथ इस सामूहिक उल्लास का हिस्सा बनते हैं।


Q.23:

“बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।”
अपना घर छोड़कर नए स्थान पर बस जाना आसान नहीं होता है। ताई के बहू-बेटों ने गाँव क्यों छोड़ा होगा? गाँव छोड़ते समय क्या-क्या सोचा होगा? अपना घर छोड़ने के लिए स्वयं को कैसे तैयार किया होगा?

Solution:

शेखर जोशी की कहानी ‘संवादहीन’ के इस प्रसंग पर आधारित उत्तर नीचे दिया गया है:

“बहू-बेटे गाँव का मोह छोड़कर शहरों के होकर रह गए।”

अपना घर और जड़ें छोड़कर नई जगह बसना वाकई एक कठिन निर्णय होता है। ताई के बहू-बेटों के संदर्भ में इसके निम्नलिखित कारण और परिस्थितियाँ रही होंगी:

  1. गाँव छोड़ने के संभावित कारण:
    • बेहतर अवसर और रोजगार: शहर में शिक्षा, नौकरी और व्यवसाय के बेहतर अवसर होते हैं। संभवतः बहू-बेटों को अपनी प्रगति और आर्थिक मजबूती के लिए शहर जाना अनिवार्य लगा होगा।
    • सुविधाओं की चाह: आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएँ, बच्चों के लिए अच्छे स्कूल और सुख-सुविधाओं भरा जीवन अक्सर लोगों को शहरों की ओर खींचता है।
    • बदलती जीवनशैली: ग्रामीण परिवेश की तुलना में शहरी जीवन की चकाचौंध और वहां की जीवनशैली ने उन्हें प्रभावित किया होगा।
  2. गाँव छोड़ते समय उनके मन के विचार:
    • अपराधबोध और चिंता: गाँव छोड़ते समय उनके मन में ताई को अकेला छोड़ने का भारी अपराधबोध रहा होगा। उन्होंने सोचा होगा कि “क्या माँ अकेले इस बड़े घर को संभाल पाएँगी?”
    • उज्ज्वल भविष्य का सपना: उनके मन में अपने बच्चों के भविष्य को लेकर बड़े सपने रहे होंगे, जो उन्हें घर छोड़ने का साहस दे रहे होंगे।
    • अनिश्चितता का डर: एक नए और अनजाने शहर में खुद को स्थापित करने की घबराहट और पुराने साथियों से बिछड़ने का दुख भी उनके मन में रहा होगा।
  3. स्वयं को तैयार करने की प्रक्रिया:
    • तर्क और आवश्यकता: उन्होंने स्वयं को यह समझाकर तैयार किया होगा कि “यह बदलाव परिवार की भलाई के लिए जरूरी है।” भावनाओं के ऊपर व्यावहारिक जरूरतों को प्रधानता दी होगी।
    • आश्वासन: उन्होंने खुद को और ताई को यह आश्वासन दिया होगा कि वे समय-समय पर गाँव आते रहेंगे या ताई को भी शहर बुला लेंगे (जैसा कि अक्सर लोग करते हैं, भले ही वे बाद में व्यस्त हो जाएँ)।
    • मानसिक अलगाव: धीरे-धीरे उन्होंने गाँव की जिम्मेदारियों और वहाँ के सीमित संसाधनों से खुद को मानसिक रूप से दूर करना शुरू कर दिया होगा ताकि बिछड़ने का दर्द कम हो सके।

निष्कर्ष: यह स्थिति आज के समय की एक यथार्थवादी समस्या है, जहाँ ‘संवादहीनता’ केवल ताई और मिट्ठू के बीच नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच भी पैदा हो गई है। बहू-बेटों का जाना केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि एक पुराने भावनात्मक संसार का अंत था।


Q.24:

“वहाँ बैठे एवजी मिट्ठू ने उन्हें देखकर कोई हरकत नहीं की”
ताई सोच रही थीं कि मिट्ठू ‘राम राम सीताराम’ कहेगा, लेकिन एवजी मिट्ठू चुप था। कल्पना कीजिए कि एक दिन असली मिट्ठू वापस आ गया। मिट्ठू ने नए तोते को देखकर क्या कहा होगा? आगे की कहानी लिखिए।

Solution:

असली मिट्ठू की वापसी और उसके बाद की कहानी कुछ इस प्रकार हो सकती है:

“एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके… ताई देहरी पर बैठी शून्य में ताक रही थीं कि तभी एक जानी-पहचानी आवाज़ गूँजी, “सीताराम ताई! राम-राम ताई!”

ताई अचकचाकर उठीं। उनकी धुंधली आँखों ने देखा कि अमरूद के पेड़ की उसी डाल पर वही पुराना मिट्ठू बैठा अपनी गर्दन मटका रहा है। ताई की खुशी का ठिकाना न रहा, लेकिन जैसे ही मिट्ठू उड़कर अपने पुराने पिंजरे के पास पहुँचा, उसने वहाँ एक दूसरे तोते (एवजी मिट्ठू) को चुपचाप बैठे देखा।

असली मिट्ठू ने नए तोते को ऊपर से नीचे तक देखा, अपनी चोंच को पिंजरे की जाली पर रगड़ा और शरारत भरे अंदाज़ में बोला, “अरे भाई! तुम कौन? क्या यहाँ पत्थर बनकर बैठने आए हो? राम-राम नहीं कहोगे? ताई से अमरूद नहीं माँगोगे?”

नया तोता, जो अब तक मौन था, असली मिट्ठू की चहचहाहट और अधिकार भरी आवाज़ सुनकर जैसे जाग उठा। उसने धीरे से अपने पंख फड़फड़ाए।

मिट्ठू फिर बोला, “देख भाई, इस घर में चुप रहने वालों का काम नहीं है। यहाँ ताई को कहानियाँ सुनानी पड़ती हैं, उनके साथ झगड़ना पड़ता है और वक्त-बेवक्त खाने का तकाजा करना पड़ता है। अगर सिर्फ मूर्ति बनकर बैठना है, तो जा किसी बाग में बैठ जा!”

ताई दौड़कर अंदर से भीगी हुई दाल और मिर्च ले आईं। उनकी आँखों से ममता के आँसू बह रहे थे। उन्होंने पिंजरे का दरवाज़ा खोल दिया। असली मिट्ठू फुदककर अंदर चला गया और नए तोते के साथ अपनी कटोरी साझा करने लगा।

उस दिन के बाद से ताई का घर फिर से जीवंत हो उठा। अब वहाँ ‘संवादहीनता’ नहीं थी, बल्कि दो-दो मिट्ठुओं का शोर था। ताई अब पहले से कहीं अधिक प्रसन्न रहने लगीं, क्योंकि अब उनके पास बात करने वाले और उनकी ममता को बाँटने वाले दो साथी थे। गाँव वालों ने भी राहत की साँस ली कि ताई की दुनिया फिर से आबाद हो गई।


Q.25:

“अब ये ही दो प्राणी गाँव के बीच में स्थित बड़े घर के उस सूने खंडहर में एक-दूसरे को सहारा देने के लिए रह गए थे।”

आज घर जाकर अपने किसी बड़े या बुजुर्ग से बात कीजिए। उनसे पूछिए- “आप जब मेरी आयु के थे, तब समय कैसे बिताया करते थे; क्या-क्या बातें या काम करते थे? आदि”। उनके कहे हुए अनुभव अपनी पुस्तिका में लिखिए।

Solution:

यह प्रश्न आपके व्यक्तिगत अनुभव और बुजुर्गों के साथ संवाद पर आधारित है। आप अपने दादा-दादी या नाना-नानी से बात करके उनके वास्तविक अनुभव लिख सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक आदर्श उत्तर नीचे दिया गया है जिसे आप अपनी पुस्तिका में लिख सकते हैं:

बुजुर्गों के साथ संवाद: बीते समय के अनुभव

आज मैंने अपने दादाजी/नानाजी से बात की और उनसे पूछा कि जब वे मेरी उम्र के थे, तब उनका जीवन कैसा था। उनके द्वारा बताए गए अनुभव निम्नलिखित हैं:

  1. समय बिताने के साधन: उन्होंने बताया कि उस समय आज की तरह मोबाइल, इंटरनेट या टेलीविजन नहीं थे। वे अपना खाली समय घर के बाहर दोस्तों के साथ गुल्ली-डंडा, कबड्डी और खो-खो जैसे खेल खेलकर बिताते थे। शाम को सभी बच्चे गाँव के किसी बड़े पेड़ के नीचे इकट्ठा होकर बड़ों से कहानियाँ सुनते थे।
  2. दैनिक कार्य: पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें घर के कामों में भी हाथ बँटाना पड़ता था। वे सुबह जल्दी उठकर कुएँ से पानी भरते थे, पशुओं को चारा खिलाते थे और कभी-कभी खेतों में पिता जी की मदद करने भी जाते थे।
  3. संवाद और आपसी मेलजोल: उस समय लोग एक-दूसरे से बहुत बातें करते थे। रात का खाना खाने के बाद मोहल्ले के लोग एक जगह बैठते थे और सुख-दुख साझा करते थे। ‘संवादहीनता’ जैसी कोई चीज़ नहीं थी।
  4. प्रकृति से जुड़ाव: दादाजी ने बताया कि वे प्रकृति के बहुत करीब थे। बागों से फल तोड़ना, नदी में नहाना और खुले आसमान के नीचे सोना उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा था।

मेरा निष्कर्ष: दादाजी की बातें सुनकर मुझे महसूस हुआ कि भले ही उस समय आधुनिक सुविधाएँ कम थीं, लेकिन लोगों के बीच आपसी प्रेम, संवाद और जुड़ाव आज की तुलना में कहीं अधिक गहरा था। ताई की तरह उस समय घर ‘सूने खंडहर’ नहीं, बल्कि शोर-शराबे से भरे जीवंत स्थान हुआ करते थे।


Q.26:

“मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!”
मान लीजिए कि जगन मास्टर ने मिट्ठू की खोज के लिए एक विज्ञापन प्रकाशित किया है। अपनी कल्पना से वह विज्ञापन बनाइए।

Solution:

खोया है (तलाश)

दिनांक: 10 मई, 2026 स्थान: ग्राम – (कहानी का संदर्भ), जिला – अल्मोड़ा

सर्वसाधारण को सूचित किया जाता है कि कल दोपहर जगन मास्टर के घर से एक पालतू तोता, जिसका नाम ‘मिट्ठू’ है, रोशनदान के रास्ते कहीं उड़ गया है।

मिट्ठू की पहचान:

  • रंग: गहरा हरा, गर्दन पर चटख लाल कंठी।
  • विशेषता: वह ‘राम-राम सीताराम’ बहुत स्पष्ट बोलता है और इंसानी आवाज की नकल करने में माहिर है।
  • स्वभाव: बहुत मिलनसार है और घर के सदस्यों (विशेषकर वृद्ध ताई) से बहुत घुला-मिला है।

वह तोता केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे घर की बुजुर्ग ताई के जीने का एकमात्र सहारा है। उनके वियोग में ताई की हालत अत्यंत शोचनीय है। जिस किसी भी सज्जन को यह तोता मिले या इसके बारे में कोई जानकारी प्राप्त हो, कृपया नीचे दिए गए पते पर सूचित करने का कष्ट करें।

संपर्क करें: जगन मास्टर (अध्यापक) नजदीक पुरानी हवेली, मुख्य ग्राम मार्ग। पुरस्कार: जानकारी देने वाले या मिट्ठू को सकुशल वापस लाने वाले व्यक्ति को उचित पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।


Q.27:

‘मिट्ठू’ शब्द का अर्थ होता है- मधुरभाषी, मीठा बोलनेवाला या तोता।
यह शब्द इतना अधिक प्रचलित है कि इसका प्रयोग एक मुहावरे में भी किया जाता है- ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ जिसका अर्थ है ‘अपनी प्रशंसा आप करना’ या ‘अपने मुँह से अपनी बड़ाई करना’।

आप कुछ ऐसे मुहावरों की सूची बनाइए जिनमें किसी अन्य जीव-जंतु का उल्लेख किया गया हो, जैसे नीचे लिखे इस वाक्य में है-
“अकेले मिट्ठू क्या उड़े, आदर्शवादी जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए।”

Solution:

यह बहुत ही रोचक भाषाई प्रयोग है। हिंदी भाषा में पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं पर आधारित मुहावरों की एक समृद्ध परंपरा है। ‘अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना’ की तरह ही अन्य जीवों पर आधारित कुछ प्रमुख मुहावरे और उनके अर्थ नीचे दिए गए हैं:

जीव-जंतुओं पर आधारित मुहावरों की सूची

मुहावराअर्थ
गधे को बाप बनानाअपना काम निकालने के लिए मूर्ख की खुशामद करना।
ऊँट के मुँह में जीराआवश्यकता से बहुत कम वस्तु का मिलना।
मगरमच्छ के आँसू बहानादिखावटी दुख प्रकट करना या ढोंग करना।
कोल्हू का बैल होनादिन-रात कठिन परिश्रम करना।
भीगी बिल्ली बननाडर के मारे दुबक जाना या लाचार हो जाना।
घोड़े बेचकर सोनाबेफिक्र होकर गहरी नींद सोना।
शेर की खाल में गधाकायर व्यक्ति का वीर होने का ढोंग करना।
साँप सूँघ जानाएकदम चुप हो जाना या सहम जाना।
चींटी की चाल चलनाबहुत धीमी गति से कार्य करना।
मक्खियाँ मारनाबेकार बैठे रहना या कोई काम न करना।
मछली की तरह तड़पनाबहुत अधिक बेचैन होना।
बगुला भगत होनाकपटी या ढोंगी व्यक्ति होना।

कुछ विशेष प्रयोग (वाक्यों के साथ)

  • हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और: (कथनी और करनी में अंतर होना)। वाक्य: नेताओं के वादों पर भरोसा मत करो, उनके तो हाथी के दाँत खाने के और दिखाने के और होते हैं।
  • भेड़चाल चलना: (बिना सोचे-समझे दूसरों की नकल करना)। वाक्य: अपना लक्ष्य स्वयं चुनो, भेड़चाल चलने से सफलता नहीं मिलती।
  • मेंढक को जुकाम होना: (ओछे व्यक्ति द्वारा नखरे करना या अपनी हैसियत से बढ़कर बात करना)। वाक्य: जब उस आलसी कर्मचारी ने काम के बोझ की शिकायत की, तो सबको लगा जैसे मेंढक को जुकाम हो गया हो।

इन मुहावरों का प्रयोग भाषा को अधिक सजीव, प्रभावशाली और व्यंग्यात्मक बनाने के लिए किया जाता है, जैसा कि आपकी दी गई पंक्ति-“जगन मास्टर के हाथों के सभी तोते उड़ गए”- में किया गया है। यहाँ ‘तोते उड़ जाना’ घबराहट या होश उड़ने की स्थिति को बहुत खूबसूरती से दर्शाता है।


Q.28:

“जगन मास्टर का ध्यान अचानक ‘गीता-रहस्य’ से हटकर मिट्ठू के पंखों की ‘फड़फड़ाफट’ पर गया।”
पक्षी के उड़ने पर पंखों के हिलने-डुलने से उत्पन्न ध्वनि ‘फड़फड़ाफट‘ कहलाती है। ध्वनियों का आभास कराने वाले कुछ और शब्द लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।

Solution:

ध्वनियों का आभास कराने वाले शब्दों को ‘ध्वन्यात्मक शब्द’ या ‘अनुकरणात्मक शब्द’ कहा जाता है। ‘फड़फड़ाहट’ की तरह ही हिंदी में विभिन्न ध्वनियों के लिए प्रयोग होने वाले शब्द और उनके वाक्य नीचे दिए गए हैं:

ध्वन्यात्मक शब्द और उनके वाक्य

  1. मिमियाना (बकरी की आवाज) वाक्य: माँ से बिछड़ते ही बकरी का छोटा मेमना जोर-जोर से मिमियाने लगा।
  2. कलकल (नदी के बहने की आवाज) वाक्य: पहाड़ों के बीच बहती शांत नदी की कलकल मन को बहुत सुकून देती है।
  3. खनखनाहट (सिक्कों या चूड़ियों की आवाज) वाक्य: जैसे ही ताई ने अपनी अलमारी खोली, पुराने सिक्कों की खनखनाहट गूँज उठी।
  4. सरसराहट (हवा से पत्तों के हिलने की आवाज) वाक्य: सूखी पत्तियों पर किसी के चलने से हुई सरसराहट ने मुझे चौंका दिया।
  5. थपथपाहट (हाथ से थपकने की आवाज) वाक्य: माँ की कोमल थपथपाहट महसूस करते ही छोटा बच्चा चैन की नींद सो गया।
  6. गरज (बादलों की आवाज) वाक्य: आसमान में बादलों की तेज गरज सुनकर पक्षी अपने घोंसलों की ओर उड़ने लगे।
  7. भिनभिनाहट (मक्खियों की आवाज) वाक्य: मिठाई पर मक्खियों की भिनभिनाहट देखकर हलवाई ने उन्हें जाली से ढंक दिया।
  8. टिक-टिक (घड़ी की आवाज) वाक्य: कमरे के सन्नाटे में घड़ी की टिक-टिक साफ़ सुनाई दे रही थी।
  9. चहचहाहट (पक्षियों की आवाज) वाक्य: सुबह होते ही पेड़ों पर पक्षियों की चहचहाहट से पूरा गाँव जाग उठा।
  10. गुनगुनाहट (धीरे स्वर में गाने की आवाज) वाक्य: काम करते समय ताई की मधुर गुनगुनाहट उनके भीतर की खुशी को दर्शाती थी।

Q.29:

“अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं, व्रत-उपवास के बहाने चौका-चूल्हा टाल जातीं।”

उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द-युग्म हैं। वे शब्द जो जोड़े में लिखे जाते हैं, उन्हें शब्द-युग्म कहा जाता है। शब्द-युग्म मुख्यतः निम्न प्रकार के होते हैं-

  • पुनरुक्त शब्द-युग्म, जैसे- बार-बार
  • सजातीय शब्द-युग्म, जैसे- उठना-बैठना
  • समानार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-प्रतिदिन
  • विपरीतार्थक शब्द-युग्म, जैसे- दिन-रात

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द-युग्म नीचे दिए गए हैं। उनका अर्थ स्पष्ट करते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए-

वक्त-बेवक्त, नियम-सिद्धांत, शादी-ब्याह, तीज-त्योहार

Solution:

‘संवादहीन’ पाठ के आधार पर दिए गए शब्द-युग्मों के अर्थ और वाक्य प्रयोग नीचे दिए गए हैं:

शब्द-युग्म: अर्थ और वाक्य प्रयोग

वक्त-बेवक्त

  • अर्थ: किसी भी समय, असमय या जरूरत के समय।
  • वाक्य प्रयोग: ताई मिट्ठू की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखती थीं और उसके वक्त-बेवक्त के तकाजों के लिए हमेशा कुछ न कुछ खाने को बचाकर रखती थीं।

नियम-सिद्धांत

  • अर्थ: जीवन जीने के कायदे-कानून या आदर्श।
  • वाक्य प्रयोग: जगन मास्टर अपने नियम-सिद्धांत के पक्के व्यक्ति थे, इसलिए पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उनकी अंतरात्मा उन्हें कचोटती थी।

शादी-ब्याह

  • अर्थ: विवाह के उत्सव या मांगलिक कार्य।
  • वाक्य प्रयोग: ताई जब मिट्ठू के पास बैठतीं, तो उसे पुराने समय के ठाठ-बाट और शादी-ब्याह के किस्से विस्तार से सुनाया करती थीं।

तीज-त्योहार

  • अर्थ: पर्व, उत्सव या धार्मिक रीति-रिवाज।
  • वाक्य प्रयोग: गाँव में जब भी कोई तीज-त्योहार आता, ताई को अपने उन दिनों की याद आती जब उनका घर मेहमानों और रौनक से भरा रहता था।

अतिरिक्त जानकारी (आपकी समझ के लिए):

  • वक्त-बेवक्त: यह विपरीतार्थक शब्द-युग्म की श्रेणी में आता है (वक्त और उसका उल्टा बेवक्त)।
  • शादी-ब्याह: यह सजातीय/समानार्थक शब्द-युग्म है, क्योंकि दोनों का अर्थ विवाह से ही जुड़ा है।
  • तीज-त्योहार: यह भी सजातीय शब्द-युग्म है।

Q.30:

“ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे और मिट्ठू एक डाल से दूसरी डाल पर, एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपने पंख तौलने में मशगूल रहे।”

उपर्युक्त अनुच्छेद में से खोजिए-

  • ऐसा शब्द जो ‘तंग’ का विपरीतार्थक है।
  • ऐसा वाक्यांश जो एक मुहावरा है।
  • ऐसा शब्द जो एक क्रिया है।
  • ऐसा शब्द जो एक संज्ञा है।
  • ऐसा शब्द जो एक सर्वनाम है।
  • ऐसा शब्द जो एक विशेषण है।
  • ऐसा शब्द जो एक कारक है।
  • ऐसा शब्द जो एक कर्ता है।

Solution:

दिए गए अनुच्छेद के आधार पर पूछे गए व्याकरणिक शब्दों का वर्गीकरण नीचे दिया गया है:

  • ‘तंग’ का विपरीतार्थक शब्द: ढीली (धोती के संदर्भ में)।
  • वाक्यांश जो एक मुहावरा है: पसीना-पसीना होना (अर्थ: बहुत अधिक थक जाना या घबरा जाना)।
  • क्रिया शब्द: पुकारते, सँभालते, रहे (कोई भी एक)।
  • संज्ञा शब्द: बाग, पेड़, मिट्ठू, हाथ, धोती (कोई भी एक)।
  • सर्वनाम शब्द: वह (जगन मास्टर के लिए प्रयुक्त)।
  • विशेषण शब्द: ढीली (धोती की विशेषता), दूसरे (पेड़ की विशेषता)।
  • कारक शब्द: से (अपादान/करण), में (अधिकरण), को (कर्म)।
  • कर्ता शब्द: वह (यहाँ ‘वह’ यानी जगन मास्टर कार्य को करने वाले कर्ता हैं)।

Q.31:

आप जानते ही हैं कि अर्थ के आधार पर वाक्यों के कई भेद होते हैं जैसे- विधानवाचक, निषेधवाचक, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, आज्ञावाचक (विधिवाचक), इच्छावाचक, संदेहवाचक और संकेतवाचक।

 वाक्य का भेदअर्थ/उपयोगउदाहरण
1विधानवाचक वाक्यकिसी घटना या स्थिति के बारे में कथन करने वाला वाक्य।जगन मास्टर ने पिंजरे का दरवाजा खोल दिया।
2निषेधवाचक वाक्यकिसी कार्य के न होने या मना करने का भाव व्यक्त करने वाला वाक्य।मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की।
3प्रश्नवाचक वाक्यकिसी बात को पूछने या जानने के लिए प्रयुक्त वाक्य।मिट्ठू! अब कैसे कटेगी?
4.विस्मयादिबोधक वाक्यआश्चर्य, प्रसन्नता या दुख प्रकट करने वाला वाक्य।मिट्ठू ने फिर तिरछी आँख से रोशनदान के बाहर की दुनिया की ओर देखा और ये गए! वो गए!!
5.आज्ञावाचक वाक्यकिसी को कुछ करने का आदेश या आग्रह व्यक्त करने वाला वाक्य।राम-राम कहो, सीताराम कहो।
6.इच्छावाचक वाक्यकिसी आकांक्षा, आशा या इच्छा को प्रकट करने वाला वाक्य।जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ!
7.संदेहवाचक वाक्यकिसी बात को लेकर शंका या अनिश्चितता प्रकट करने वाला वाक्य।ताई के सूनेपन का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।
8.संकेतवाचक वाक्यइसमें एक बात या कार्य का होना या न होना किसी दूसरी बात या कार्य के होने या न होने पर निर्भर होता है।जब खेती-बाड़ी नहीं, कारबार नहीं, तो नौकर-चाकर किस दम पर टिकते!

अब आप भी अपनी पुस्तक में से प्रत्येक प्रकार का एक-एक वाक्य चुनकर लिखिए।

Solution:

शेखर जोशी की कहानी ‘संवादहीन’ के आधार पर अर्थ के आधार पर वाक्यों के अन्य उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

क्र.सं.वाक्य का भेदकहानी से उदाहरण
1विधानवाचक वाक्यताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी।
2निषेधवाचक वाक्यताई को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ।
3प्रश्नवाचक वाक्यक्या अब कोई लौटकर नहीं आएगा?
4विस्मयादिबोधक वाक्यअरे! यह तो पिंजरा खाली पड़ा है!
5आज्ञावाचक वाक्यले मिटू, यह अमरूद खा ले।
6इच्छावाचक वाक्यभगवान करे, मिटू सुरक्षित वापस आ जाए।
7संदेहवाचक वाक्यशायद जगन मास्टर ने ही उसे पिंजरे से निकाला होगा।
8संकेतवाचक वाक्ययदि जगन मास्टर द्वार न खोलते, तो मिट्ठू कभी उड़ न पाता।

इन उदाहरणों के माध्यम से आप वाक्यों के विभिन्न भेदों को आसानी से समझ सकते हैं


Q.32:

कहानी के रंग
समूहों को अलग-अलग भावनाएँ (दुख, स्नेह, आजादी) दीजिए और इसे मूक अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।

Solution:

शेखर जोशी की कहानी ‘संवादहीन’ के आधार पर, विभिन्न भावनाओं (दुख, स्नेह, आजादी) को मूक अभिनय (Mime) के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए कुछ प्रमुख दृश्य और उनके अभिनय के संकेत नीचे दिए गए हैं:

स्नेह (ममता और जुड़ाव)

यह भावना ताई और मिट्ठू के बीच के मधुर संबंध को दर्शाती है।

  • पात्र: ताई और मिट्ठू।
  • अभिनय के संकेत:
    • ताई का हाथ में काल्पनिक अमरूद या मिर्च लेकर धीरे-धीरे पिंजरे के पास जाना।
    • चेहरे पर हल्की मुस्कान और आँखों में चमक (वात्सल्य)।
    • मिट्ठू की ओर हाथ बढ़ाना जैसे उसे पुचकार रही हों।
    • मिट्ठू का अपनी गर्दन को तिरछा करके ताई की ओर देखना और पंख फड़फड़ाना।

आजादी (स्वतंत्रता की चाह)

यह भावना मिट्ठू के पिंजरे से निकलने और जगन मास्टर के अंतर्द्वंद्व को दर्शाती है।

  • पात्र: जगन मास्टर और मिट्ठू।
  • अभिनय के संकेत:
    • जगन मास्टर का पिंजरे की ओर बढ़ना, हाथ का काँपना और झिझक के साथ पिंजरे की साँकल (कुंडी) खोलना।
    • मिट्ठू का पहले डरना, फिर धीरे से बाहर निकलना।
    • मिट्ठू का रोशनदान की ओर देखना और फिर अचानक बाहें फैलाकर (पंख खोलकर) खुले आकाश में उड़ने का अभिनय करना।
    • जगन मास्टर का ऊपर की ओर हाथ उठाकर उड़ते हुए पक्षी को एकटक निहारना।

दुख (अकेलापन और वियोग)

यह भावना मिट्ठू के जाने के बाद ताई की मानसिक स्थिति को दर्शाती है।

  • पात्र: ताई।
  • अभिनय के संकेत:
    • ताई का खाली पिंजरे के पास खड़े होना और काँपते हाथों से उसे छूना।
    • पिंजरे के भीतर की खाली कटोरी को देखना।
    • चेहरे पर गहरा सन्नाटा, शून्य में ताकती आँखें और भारी कदमों से देहरी पर जाकर बैठ जाना।
    • आँचल के कोने से आँखें पोंछना और सिर को घुटनों पर झुका लेना, जो उनकी ‘संवादहीनता’ और अकेलेपन को प्रकट करे।

प्रस्तुति निर्देश: मूक अभिनय के दौरान किसी भी शब्द का प्रयोग न करें। केवल शारीरिक चेष्टाओं (Body Language) और चेहरे के हाव-भाव (Facial Expressions) का प्रयोग करें ताकि दर्शक बिना बोले आपकी भावना को समझ सकें।


Q.33:

पंखों की योजना
छोटे समूहों में सोचें कि अगर आपको मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो आप कहाँ जाते और क्यों?

Solution:

यदि मुझे मिट्ठू की तरह पंख फैलाकर उड़ने का अवसर मिले, तो मैं सबसे पहले ऊँचे हिमालय के पर्वतों और उन दुर्गम घाटियों की ओर जाना चाहूँगा जहाँ मनुष्य आसानी से नहीं पहुँच सकते। मैं बादलों के ऊपर तैरना चाहता हूँ ताकि दुनिया की विशालता और शांति को महसूस कर सकूँ।

मैं उन घने जंगलों को ऊपर से देखना चाहूँगा जहाँ नदियाँ चाँदी की लकीर जैसी दिखती हैं। उड़ने की यह आजादी मुझे सीमाओं के बंधन से मुक्त कर देगी। मेरा उद्देश्य केवल घूमना नहीं, बल्कि प्रकृति की उस सुंदरता और शुद्धता का अनुभव करना होगा, जो जमीन पर रहकर संभव नहीं है। जिस तरह मिट्ठू ने रोशनदान से बाहर की अनंत दुनिया को चुना, मैं भी उसी असीम स्वतंत्रता का स्वाद चखना चाहूँगा।


Q.34:

“पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही”
यह वाक्य बताता है कि ताई ने भोजन संबंधी अपनी आवश्यकताओं पर कभी ध्यान नहीं दिया अथवा उन्हें महत्वपूर्ण नहीं माना। हमारे परिवेश में ऐसी बहुत-सी महिलाएँ हैं जो परिवार के सदस्यों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देती हैं और अपनी आवश्यकताओं की अनदेखी करती हैं।

  • अपने घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों के विषय में जानिए और समझिए कि उनकी पंसद का भोजन माह में कब-कब बनता है।

Solution:

यह वाक्य ताई के त्याग और अकेलेपन की गहरी स्थिति को दर्शाता है। हमारे समाज में अक्सर महिलाएँ, विशेषकर माताएँ और बुजुर्ग महिलाएँ, अपनी सेहत और भोजन की इच्छाओं को परिवार की खुशी के पीछे छिपा देती हैं।

आपके घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों को समझने के लिए आप एक छोटी सी तालिका बना सकते हैं और उनसे बात कर सकते हैं। इसके उत्तर के रूप में आप अपनी पुस्तिका में निम्नलिखित बातें लिख सकते हैं:

घर की महिलाओं की भोजन संबंधी रुचियों का विश्लेषण

मैंने अपने घर की महिलाओं (माता जी, दादी जी या चाची जी) से उनके पसंदीदा भोजन के बारे में बात की और जो बातें सामने आईं, वे इस प्रकार हैं:

  1. पसंदीदा भोजन: मेरी माता जी को दक्षिण भारतीय व्यंजन (जैसे इडली-डोसा) बहुत पसंद हैं, जबकि मेरी दादी जी को पारंपरिक कढ़ी-चावल और हाथ की बनी मोटी रोटियाँ अच्छी लगती हैं।
  2. पसंद की अनदेखी: बातचीत के दौरान पता चला कि अक्सर घर में वही सब्जी या दाल बनती है जो बच्चों या घर के पुरुषों को पसंद होती है। माता जी अक्सर अपनी पसंद को यह कहकर टाल देती हैं कि “जो सब खाएंगे, वही मैं भी खा लूँगी।”
  3. उनकी पसंद का भोजन कब बनता है: * उनकी पसंद का विशेष भोजन महीने में मुश्किल से एक या दो बार ही बनता है, वह भी तब जब घर में कोई त्यौहार हो या अन्य सदस्यों का भी वही खाने का मन हो। कई बार जब घर में कोई सब्जी कम पड़ जाती है, तो वे अपनी थाली से सब्जी दूसरों को दे देती हैं और खुद केवल अचार या दही से खाना खा लेती हैं।

निष्कर्ष और मेरा विचार:

जिस तरह कहानी में ताई अपनी भूख और जरूरतों को महत्व नहीं देती थीं, वैसे ही हमारे घर की महिलाएँ भी ‘परोपकार’ और ‘त्याग’ के कारण अपनी उपेक्षा करती हैं। एक जागरूक सदस्य होने के नाते, यह हमारा कर्तव्य है कि हम सप्ताह में कम से कम एक दिन विशेष रूप से उनकी पसंद का भोजन बनवाएँ और यह सुनिश्चित करें कि वे भी उतना ही पौष्टिक आहार लें जितना परिवार के अन्य सदस्य लेते हैं।

सीख: “परिवार का स्वास्थ्य तभी बेहतर रह सकता है जब घर की धुरी यानी महिलाओं का स्वास्थ्य और उनकी पसंद का ध्यान रखा जाए।”


Q.35:

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ या प्रश्न बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
तोता, ताई, कुंभ, पिंजरा, कमरा, गंगा

Solution:

पहेलियाँ और प्रश्न बच्चों के मानसिक विकास और कहानी की समझ को गहरा करने का एक मजेदार तरीका हैं। आपके द्वारा दिए गए शब्दों के आधार पर बनाई गई पहेलियाँ और प्रश्न नीचे दिए गए हैं:

1. तोता

  • पहेली: हरा है तन, लाल है चोंच, सबका मन मैं हरता हूँ। ‘राम-राम’ मैं रटता हूँ, पिंजरे में मैं रहता हूँ। बताओ मैं कौन?
  • प्रश्न: गनपत ने ताई का अकेलापन दूर करने के लिए उन्हें कौन-सा पक्षी लाकर दिया था?

2. ताई

  • पहेली: घर के सूने कोने में, ममता का सागर बनकर बैठी है। बहू-बेटे शहर गए, पर वह यादों की गठरी बांधे बैठी है। बताओ वह कौन है?
  • प्रश्न: ‘संवादहीन’ कहानी की मुख्य पात्र कौन हैं, जो मिट्ठू से बातें किया करती थीं?

3. कुंभ

  • पहेली: हर बारह बरसों के बाद, जहाँ अमृत की बूंदे गिरती हैं। लाखों भक्त उमड़ पड़ते, जहाँ श्रद्धा की नदियाँ बहती हैं। बताओ वह क्या है?
  • प्रश्न: गाँव के लोग और ताई किस सुप्रसिद्ध धार्मिक मेले में स्नान करने के लिए प्रयागराज गए थे?

4. पिंजरा

  • पहेली: लोहे की तीलियों का घर मेरा, पर रहने वाले को आजादी न मिले। बाहर की दुनिया दिखती है, पर उड़ने को पर न खुलें। बताओ क्या?
  • प्रश्न: मिट्ठू को कहाँ बंद करके रखा गया था, जिसे देखकर जगन मास्टर को दुख होता था?

5. कमरा

  • पहेली: चार दीवारें, एक छत, और रोशनदान का कोना है। इसी के अंदर ताई का, हँसना और रोना है। बताओ क्या?
  • प्रश्न: जगन मास्टर ‘गीता-रहस्य’ कहाँ बैठकर पढ़ रहे थे जब उनका ध्यान मिट्ठू की फड़फड़ाहट पर गया?

6. गंगा

  • पहेली: देवलोक से उतरकर आई, पापों को जो धोती है। प्रयागराज के संगम पर, जिसकी लहरें सोती हैं। बताओ कौन?
  • प्रश्न: कुंभ के मेले में ताई ने किस पवित्र नदी में डुबकी लगाई थी?

Q.36:

“वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।”
नीचे ‘तोता’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

तोता (हिंदी); शुकः (संस्कृत); तोता (पंजाबी); तोता (उर्दू); तोतुर् (कश्मीरी); तोतो (सिंधी); पोपट (मराठी); पोपट, सूडो (गुजराती); पोपट (कोंकणी); सुगा (नेपाली); तोता (बांग्ला); भाटौ (असमिया); तेनवा (मणिपुरी); शुआ (शुक); (ओड़िआ); चिलुक (तेलुगु); किळि (तमिल); शुकम्, तत्त (मलयालम); गिळि (कन्नड़)।

  • इनके अतिरिक्त यदि आप ‘तोता’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
  • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

Solution:

भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में दी गई भाषाओं के अतिरिक्त ‘तोता’ शब्द के लिए कुछ अन्य भाषाओं के शब्द और आपके द्वारा दिए गए वाक्य का मातृभाषा में अनुवाद नीचे दिया गया है:

‘तोता’ शब्द के लिए अन्य भाषाओं के शब्द:

  • मैथिली: सुगा
  • भोजपुरी: सुगा / सुअना
  • मारवाड़ी: सूटो / पोपट
  • गढ़वाली/कुमाऊँनी: तौण (Taun)
  • अंग्रेजी (English): पैरट (Parrot)
  • अरबी (Arabic): बब्गा (Babghā’)
  • फारसी (Persian): तूती (Tuti)

वाक्य का मातृभाषा में अनुवाद:

चूँकि भारत विविधताओं का देश है, यहाँ कुछ प्रमुख मातृभाषाओं में इस वाक्य का अनुवाद दिया जा रहा है। आप अपनी विशिष्ट मातृभाषा के अनुसार इनमें से चुन सकते हैं:

  • वाक्य: “वह न जाने कहाँ से एक प्यारा-सा पहाड़ी तोता ले आया था।”
  • भोजपुरी: “उ ना जाने कहाँ से एगो नीमन पहाड़ी सुगा ले आइल रहे।”
  • ब्रजभाषा: “वो ना जानूँ कहाँ तें एक प्यारो-सो पहाड़ी तोता लै आयो हो।”
  • मैथिली: “ओ नहि जानि कतय सँ एकटा नीक पहाड़ी सुगा ल’ क’ एलै।”
  • हरियाणवी: “वो बेरा नी कित तै एक सुथरा सा पहाड़ी तोता ले आया था।”
  • मारवाड़ी: “वो ठा नी कठै ऊं एक फूटरो सो पहाड़ी तोता ले आयो हो।”
  • अंग्रेजी (English): “He brought a lovely mountain parrot from somewhere unknown.”

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