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दो बैलों की कथा – NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga

दो बैलों की कथा – NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga includes all the questions with solution given in NCERT Class 9 हिंदी (गंगा) textbook.

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दो बैलों की कथा – NCERT Solutions


Q.1:

कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?

Options:
(1) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
(2) एकता और सहयोग ✅
(3) गर्व और दंभ
(4) विद्रोह और क्रोध

Explanation:

दोनों बैल हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देते हैं- चाहे साँड़ से लड़ाई हो, दीवार तोड़ना हो या काँजीहाउस में रुकना। मोती हीरा को छोड़कर नहीं गया – यही सच्ची एकता है।


Q.2:

हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?

Options:
(1) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
(2) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
(3) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा। ✅
(4) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।

Explanation:

झूरी के साले के यहाँ जाने पर उन्हें लगा कि उन्हें बेच दिया गया। अपने घर और मालिक के प्रति उनका लगाव था, इसलिए उन्होंने नई जगह अपनाने से इनकार किया।


Q.3:

बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?

Options:
(1) कष्टों से बचने के लिए
(2) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
(3) अभिमान की रक्षा के लिए
(4) अपनापन पाने के लिए ✅

Explanation:

गया के घर न प्यार था, न ढंग का चारा। झूरी का घर उनका अपना था। अपनेपन की चाहत ने उन्हें वापस खींचा।


Q.4:

गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?

Options:
(1) स्वाभिमान ✅
(2) अहिंसा
(3) पराधीनता
(4) अन्याय की रक्षा

Explanation:

बिना कारण मार खाना मोती को स्वीकार नहीं था। उसने हल लेकर भागने की कोशिश की। यह स्वाभिमान की भावना है।


Q.5:

कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?

Options:
(1) कहानी को रोचक बनाने के लिए
(2) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए ✅
(3) संवादों को छोटा रखने के लिए
(4) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए

Explanation:

मूक-भाषा के माध्यम से लेखक यह दर्शाना चाहते हैं कि पशुओं में भी भावनाएँ, विचार और चेतना होती है- जो कभी-कभी मनुष्यों से भी श्रेष्ठ होती है।


Q.6:

‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?

Options:
(1) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
(2) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
(3) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
(4) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के ✅

Explanation:

हीरा और मोती का अन्याय सहने के बाद विद्रोह करना, जेल (काँजीहाउस) जाना, और अंततः मुक्ति पाना – ये सब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक हैं।


Q.7:

“दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता, पर इन दोनों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।” जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?

Solution:

बैलों ने नए मालिक के यहाँ काम करने से इसलिए इनकार किया क्योंकि – पहली बात यह थी कि उन्हें लगा उन्हें बेच दिया गया है, जो उनके लिए अपमानजनक था। दूसरे, गया ने उनके साथ प्रेम और सम्मान का व्यवहार नहीं किया। तीसरे, उनका हृदय झूरी के घर में था – वह जगह उनकी अपनी थी। बिना अपनेपन के काम करना उन्हें स्वीकार नहीं था। यह उनके स्वाभिमान और वफादारी का प्रमाण है।


Q.8:

“गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी।” बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?

Solution:

बैलों का घर लौटना इसलिए असाधारण था क्योंकि – उन्होंने मजबूत खूँटे तोड़े, रात में अपरिचित रास्तों से गुजरे, और बिना किसी मार्गदर्शन के अपने घर पहुंचे। यह उनकी स्मृति, बुद्धि और भावनात्मक लगाव का प्रमाण है। झूरी के मन में उनके प्रति प्रेम था और बैलों के मन में झूरी के प्रति। यह पारस्परिक प्रेम और वफादारी की भावना इस घटना को अविस्मरणीय बनाती है।


Q.9:

“मोती ने मूक-भाषा में कहा- अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!”
‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।

Solution:

कहानी में संघर्ष की अनिवार्यता कई स्थानों पर दिखती है –

  • पहला उदाहरण: जब गया ने बिना कारण बैलों को मारा, तो मोती ने हल लेकर भागने की कोशिश की-अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध का पहला संकेत।
  • दूसरा उदाहरण: साँड़ से मुठभेड़ – यदि दोनों मित्र संगठित होकर न लड़ते तो जान से हाथ धो बैठते। संघर्ष आत्मरक्षा के लिए अनिवार्य था।
  • तीसरा उदाहरण: काँजीहाउस की दीवार तोड़ना – स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किए बिना मुक्ति संभव नहीं थी।

Q.10:

“जब पेट भर गया और दोनों ने आजादी का अनुभव किया…” हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।

Solution:

हीरा और मोती अपनापन की भावना से अधिक प्रेरित थे। जब वे काँजीहाउस से भागे, तो स्वतंत्रता मिलने के बावजूद वे झूरी के घर की ओर दौड़े – किसी अज्ञात जगह नहीं गए। हीरा ने मोती से कहा भी – “नहीं-नहीं, दौड़कर थान पर चलो। वहाँ से हम आगे न जाएँगे।” यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए ‘अपना घर’ और ‘अपना मालिक’ ही सर्वोपरि था।


Q.11:

“बैलों ने जैसे पाँव न उठाने की कसम खा ली थी।”
‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’- क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए।

Solution:

हाँ, मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। जब हम चुपचाप अत्याचार सहते रहते हैं तो अत्याचारी और अधिक साहसी हो जाता है। बैलों ने भी यही किया – काम न करके, दीवार तोड़कर, साँड़ से लड़कर उन्होंने विरोध जताया। यदि वे सब कुछ चुपचाप सहते रहते, तो उनकी स्थिति कभी नहीं बदलती। इतिहास भी यही सिखाता है कि अन्याय का विरोध न करने वाले समाज कभी प्रगति नहीं करते।


Q.12:

“बहुत दिनों साथ रहते-रहते दोनों में भाईचारा हो गया था।” हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। कहानी की किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? कम से कम तीन बिंदु लिखिए।

Solution:

निम्नलिखित घटनाएँ उनकी गहरी मित्रता सिद्ध करती हैं –

  • पहली बात: वे हल या गाड़ी में जुते होने पर अधिकतम बोझ खुद उठाने की कोशिश करते थे ताकि मित्र को कम कष्ट हो।
  • दूसरी बात: साँड़ से दोनों ने मिलकर लड़ाई की – एक अकेले नहीं लड़ा।
  • तीसरी बात: काँजीहाउस में जब मोती को भागने का मौका मिला, उसने हीरा को छोड़ने से इनकार कर दिया।
  • चौथी बात: हीरा ने कहा “जाओ, मुझे यहीं पड़ा रहने दो” – पर मोती बोला – “इतने दिनों साथ रहे, आज विपत्ति में कैसे छोड़ूँ?”

Q.13:

“उसी समय मालकिन ने आकर दोनों के माथे चूम लिए।” “दो बैलों की कथा” कहानी में मालकिन और छोटी लड़की, दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।

Solution:

कहानी में मालकिन और छोटी लड़की के व्यवहार में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। मालकिन प्रारंभ में हीरा और मोती के प्रति कठोर और उदासीन थी। उसने क्रोध में आकर उन्हें मायके भेज दिया और उनकी भावनाओं को नहीं समझा। हालांकि, अंत में जब बैल अनेक कष्ट सहकर वापस लौटते हैं, तो उसका हृदय परिवर्तन हो जाता है और वह स्रेह से उनके माथे चूमती है। दूसरी ओर, छोटी लड़की शुरू से ही दयालु और संवेदनशील थी। वह बैलों की पीड़ा को समझती थी और उन्हें चोरी-छिपे रोटियाँ खिलाती थी तथा उनकी रस्सी खोलकर उन्हें भागने में मदद करती है। इस प्रकार, लड़की का व्यवहार निरंतर करुणामय रहा, जबकि मालकिन का व्यवहार बाद में बदलता है।


Q.14:

“उसने उनके माथे सहलाए और बोली- खोले देती हूँ। चुपके से भाग जाओ…” यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?

Solution:

यदि मैं वह छोटी लड़की होता/होती, तो मैं न केवल उन्हें रोटियाँ खिलाता/खिलाती, बल्कि गाँव के लोगों को उनके साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी देता/देती। मैं किसी बुजुर्ग या पंचायत से न्याय दिलाने की माँग करता/करती। मैं चाहता/चाहती कि बैल झूरी के पास वापस पहुँचें, इसलिए झूरी को पत्र या संदेश भी भेजता/भेजती।


Q.15:

“दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? इस वाक्य के संबंध में कहानी और अपने अनुभवों से उदाहरण लेते हुए अपने विचार लिखिए।

Solution:

मैं इस कथन से सहमत हूँ कि भय और संकोच कई बार इंसान को अवसर मिलने पर भी आगे बढ़ने से रोक देते हैं। कहानी में होजखास के गधे इसका उदाहरण हैं-जब हीरा और मोती ने दीवार तोड़कर सबको आज़ाद होने का मौका दिया, तब भी गधे डर और हिचकिचाहट के कारण वहीं खड़े रहे। वे स्वतंत्र हो सकते थे, परंतु भय ने उन्हें जकड़ लिया। ऐसा ही वास्तविक जीवन में भी होता है। कई बार विद्यार्थी उत्तर जानते हुए भी संकोच के कारण कक्षा में हाथ नहीं उठाते या लोग सही बात जानते हुए भी बोलने से डरते हैं। इससे अवसर हाथ से निकल जाता है। इसलिए डर पर काबू पाकर सही समय पर निर्णय लेना आवश्यक है।


Q.16:

“दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता।” क्या आप इस बात से सहमत हैं? आपको ऐसा क्यों लगता है? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए।

Solution:

हाँ, मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ। जब दोस्ती सच्ची और गहरी होती है, तो औपचारिकता खत्म हो जाती है। हम अपने घनिष्ठ मित्रों के साथ बिना सोचे-समझे मजाक करते हैं, उन्हें छेड़ते हैं – यही घनिष्ठता की पहचान है। मेरे जीवन में भी मेरे सबसे अच्छे मित्र के साथ यही होता है – हम एक-दूसरे को चिढ़ाते भी हैं और ज़रूरत में साथ भी देते हैं।


Q.17:

“हीरा ने तिरस्कार किया- गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“यह सब ढोंग है। बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।”
आपका इस संबंध में क्या विचार है? आप किसके साथ हैं- हीरा के या मोती के या दोनों के? क्यों?

Solution:

मैं हीरा के विचारों से पूर्णतः सहमत हूँ। उसका मानना है कि गिरे हुए शत्रु पर वार करना न केवल कायरता है, बल्कि यह दया, मानवता और नैतिक मूल्यों के भी विरुद्ध है। यह दृष्टिकोण हमें सिखाता है कि सच्ची वीरता केवल जीत हासिल करने में नहीं, बल्कि जीत के बाद अपने आचरण में संयम और करुणा बनाए रखने में है। किसी पराजित और असहाय व्यक्ति पर आक्रमण करना क्रूरता को दर्शाता है, जो एक सच्चे वीर के गुणों के विपरीत है।
दूसरी ओर, मोती का विचार क्रोध और प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। यह भावना कठिन परिस्थितियों में स्वाभाविक तो हो सकती है, लेकिन इसे सही ठहराना उचित नहीं है। यदि मनुष्य अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रखता, तो वह नैतिकता से भटक सकता है।
मेरे विचार में सच्ची शक्ति वही है, जो व्यक्ति को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखने, क्षमा करने और न्यायपूर्ण आचरण करने की प्रेरणा दे। इसलिए हीरा का दृष्टिकोण अधिक संतुलित, मानवीय और प्रेरणादायक है।


Q.18:

“हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे। आज तुम विपत्ति में पड़ गए तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?” क्या कभी आपने किसी विपत्ति या चुनौती का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? उस घटना के विषय में बताइए।

Solution:

हाँ, मैंने एक बार अपने मित्र के साथ मिलकर एक कठिन परिस्थिति का सामना किया था। मेरे मित्र की तबीयत परीक्षा के समय खराब हो गई थी। वह बहुत परेशान था क्योंकि वह पढ़ाई नहीं कर पा रहा था। तब मैंने उसकी मदद करने का निश्चय किया। मैं रोज़ उसके घर जाता था और उसे पढ़ाई समझाता था। हम दोनों मिलकर धीरे-धीरे तैयारी करते रहे। आखिरकार, उसने परीक्षा दी और अच्छे अंक भी प्राप्त किए। इस अनुभव से मुझे समझ आया कि सच्चा मित्र वही होता है जो मुश्किल समय में साथ देता है।


Q.19:

कहानी ऐसी रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास सभी उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।

कोई कहानी वास्तविक या काल्पनिक घटनाओं पर आधारित हो सकती है और इसमें वास्तविक या काल्पनिक पात्र भी शामिल हो सकते हैं।

आप कहानी लेखन की इस प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए एक कहानी का शीर्षक चुनिए और दिए गए मुख्य बिंदुओं को पूरा कीजिए-

शीर्षक और लेखक________
विषय________
क्रिया/कार्य________
परिवेश/देश-काल और मुख्य विचार________
चरित्र/पात्र________
परिणाम________

Solution:

शीर्षक और लेखकदो बैलों की कथा-प्रेमचंद बैलों की वफादारी, स्वाभिमान, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष
विषयहल जोतना, गाड़ी खींचना, विद्रोह
क्रिया कार्यग्रामीण भारत, अंग्रेजी काल, स्वतंत्रता संघर्ष
परिवेश/देश-काल और मुख्य विचारहीरा, मोती, झूरी, गया, छोटी लड़की, मालकिन
चरित्र/पात्रबैल घर लौट आए, झूरी ने अपनाया
परिणाम 

Q.20:

“दोनों सिर झुकाकर उसका हाथ चाटने लगे। दोनों की पूँछें खड़ी हो गईं।”
इस वाक्य को पढ़कर आँखों के सामने एक दृश्य-सा बन जाता है। आप जानते हैं कि भाषा की इस विशेषता को चित्रात्मकता कहते हैं। ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ हैं जो इसे अद्भुत और प्रभावपूर्ण बनाती हैं।

नीचे इस कहानी में आए कुछ विशेष बिंदुओं को उदाहरण के साथ दिया गया है। आप भी एक-एक उदाहरण खोजकर तालिका में लिखिए-

विशेषताविशेषता का अर्थउदाहरण 1उदाहरण 2
चित्रात्मक भाषाशब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना।घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं।सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली।
संवादात्मकताकथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग।मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा। 
विरोधाभासएक ही प्रसंग या रचना में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ मौजूद होना।झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गदगद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी। 
व्यंग्यवह शैली जिसमें मजाक, हास्य या कटाक्ष (चुभते हुए संकेतों) के माध्यम से किसी दोष, कुरीति, अन्याय, पाखंड या कमजोरी को प्रकट किया जाता है।भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते। 
संघर्षदो विरोधी शक्तियों, विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपस में टकराना।उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। (बैल बनाम साँड़) 
अतिशयोक्तिकिसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे।झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे। 
संदेह/उलझनजब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता।सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है? 

Solution:

विशेषताविशेषता का अर्थउदाहरण 1उदाहरण 2
चित्रात्मक भाषाशब्दों के माध्यम से पाठक के मन में स्पष्ट और जीवंत चित्र या छवियाँ बनाना।घुटने तक पाँव कीचड़ से भरे हैं।सहसा घर का द्वार खुला और वही लड़की निकली।
संवादात्मकताकथ्य को आगे बढ़ाने के लिए, पात्रों के विचार, भाव आदि व्यक्त करने के लिए बातचीत और संवादों का प्रयोग।मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।
“भागना कायरता है – नहीं, यह स्वाधीनता है”
विरोधाभासएक ही प्रसंग या रचना में दो विपरीत या परस्पर विरोधी बातें एक साथ मौजूद होना।झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गदगद हो गया। झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।“भागना कायरता है – नहीं, यह स्वाधीनता है”
व्यंग्यवह शैली जिसमें मजाक, हास्य या कटाक्ष (चुभते हुए संकेतों) के माध्यम से किसी दोष, कुरीति, अन्याय, पाखंड या कमजोरी को प्रकट किया जाता है।भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सभ्य कहलाने लगते।*अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देते, तो शायद सभ्य कहलाते”
संघर्षदो विरोधी शक्तियों, विचारों, इच्छाओं या परिस्थितियों का आपस में टकराना।उससे भिड़ना जान से हाथ धोना है; लेकिन न भिड़ने पर भी जान बचती नहीं नजर आती। (बैल बनाम साँड़)“मोती और हीरा का अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष”
अतिशयोक्तिकिसी पात्र, घटना, भाव या वस्तु का वर्णन इतना बढ़ाकर करना कि वह असंभव या अविश्वसनीय लगे।झूरी इन्हें फूल की छड़ी से भी न छूता था। उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे।“दोनों उड़ने लगते थे मानो पंख लग गए हों”
संदेह/उलझनजब पात्र किसी निर्णय पर नहीं पहुँच पाता।सारा दिन बीत गया और खाने को एक तिनका भी न मिला। समझ ही में न आता था, यह कैसा स्वामी है?“अब क्या करें – भागें या सहें?”

Q.21:

प्रायः कहानी के प्रारंभ में ही कहानी के मुख्य चरित्र, कहानी का समय, कहानी की भाषा, घटनाओं आदि के कुछ संकेत मिलने लगते हैं। प्रेमचंद की इस कहानी में भी ऐसे संकेत हैं। आप कहानी के ऐसे संकेत/ बिंदुओं को ढूँढ़कर लिखिए।

Solution:

प्रारंभिक संकेत – गधे की तुलना, बैलों का भाईचारा, झूरी का स्नेह,
मूक-भाषा – ये सब मुख्य भाव (वफादारी + संघर्ष) पहले ही दिखाते हैं।


Q.22:

‘दो बैलों की कथा’ कहानी जिस समय लिखी गई थी, उस समय भारत पर अंग्रेजों का दमनकारी शासन चल रहा था। उस समय भारतवासी भी अपने-अपने ढंग से इस अंग्रेजी शासन का विरोध कर रहे थे। इस कार्य में लेखक भी किसी से पीछे नहीं थे। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने हेतु प्रेरित कर रहे थे।
इस कहानी में से कुछ वाक्य चुनकर नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों का मिलान स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उपयुक्त वाक्यों के साथ कीजिए-

कहानी में से वाक्यस्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विरोध धीरे-धीरे गहराता गया।
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।
4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विरोध भरा हुआ था।4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
5. इतना तो हो ही गया कि नो-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे।5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर टपके।6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।

Solution:

कहानी में से वाक्यस्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विरोध भरा हुआ था।2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विरोध धीरे-धीरे गहराता गया।
5. इतना तो हो ही गया कि नो-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे।1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर टपके।3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।

Q.23:

नीचे दिए गए संवाद पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
“मैं तो समझता हूँ, चुराए लिए आते हो। चुपके से चले जाओ। मेरे बैल हैं। मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे। किसी को मेरे बैल नीलाम करने का क्या अख्तियार है?”
“जाकर थाने में रपट कर दूँगा।”
“मेरे बैल हैं। इसका सबूत यह है कि मेरे द्वार पर खड़े हैं।”

  1. बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय दोनों को दर्शाता है। कैसे?
  2. यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
  3. मान लीजिए कि हीरा-मोती अपने साथ हुए अन्याय की शिकायत करना चाहते हैं। उनकी ओर से उनकी शिकायत थानाध्यक्ष को करते हुए एक पत्र लिखिए।

Solution:

  1. अन्याय – बिना चारा-पानी मारपीट; न्याय – दंड देकर छोड़ने का प्रावधान।
  2. पर्याप्त चारा-पानी, यातना न सहना, बिना कारण न बेचना, पशु क्रूरता निवारण कानून।
  3. उत्तर: सेवा में,
    थानाध्यक्ष महोदय,
    विषय: हमारे साथ हुए अन्याय के संबंध में शिकायत
    महोदय,
    हमारा नाम हीरा और मोती है। हम मेहनती और वफादार बैल हैं। हमारे साथ अत्यंत अन्याय हुआ है। हमें बिना किसी अपराध के काँजीहाउस में बंद कर दिया गया तथा हमारे साथ मारपीट की गई। हमें पर्याप्त भोजन और पानी भी नहीं दिया गया।
    हम अपने मालिक के प्रति निष्ठावान हैं और केवल अपना कर्तव्य निभाना चाहते हैं। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि हमारे साथ हो रहे इस अन्याय को रोका जाए तथा हमें मुक्त किया जाए।
    आपकी कृपा होगी।
    भवदीय,
    हीरा और मोती

Q.24:

“वह अपना धर्म छोड़ दे लेकिन हम अपना धर्म क्यों छोड़ें!”
कहानी के अनुसार हीरा और मोती सदैव ध्यान रखते थे कि कौन-से कार्य करने योग्य हैं और कौन-से नहीं। वे कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे?

Solution:

हीरा और मोती ने तीन कार्य कभी नहीं किए –

  • औरत जात पर सींग चलाना
  • गिरे हुए बैरी पर सींग चलाना
  • कायरता से भागना

Q.25:

“गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।”
“लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूले जाते हो।”
हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?

Solution:

हीरा के इन कथनों से निम्नलिखित भारतीय मूल्यों की ओर संकेत मिलता है –

  • अहिंसा: गिरे हुए दुश्मन पर हमला न करना (योद्धा-धर्म)
  • स्ली सम्मान: औरत जात पर सींग न चलाना
  • धर्म और नैतिकता: “हम अपना धर्म क्यों छोड़ें?”
  • दया और क्षमा: कमजोर या हारे हुए पर क्रूरता न करना
  • साहस और स्वाभिमान: अन्याय के सामने झुकना नहीं, लेकिन नैतिक सीमा का पालन करना

Q.26:

“दूसरे दिन गया ने बैलों को हल में जोता”

  1. खेतों में जुताई के लिए बैल और हल कृषि के पारंपरिक उपकरण हैं। कृषि के अन्य पारंपरिक और आधुनिक उपकरणों तथा उनके उपयोग के विषय में पता लगाइए और लिखिए।
  2. भारत में बैल केवल पशु नहीं बल्कि कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। लिखिए कि भारतीय गाँवों एवं शहरों में भी बैल किस-किस काम में सहायक होते हैं?

Solution:

  1. पारंपरिक कृषि उपकरण:
    • हल: बैलों की मदद से खेत जोतने के लिए
    • जुआ: बैलों की गरदन में बाँधा जाने वाला लकड़ी का यंत्र
    • बैलगाड़ी: अनाज, घास, सामान ढोने के लिए
    • कुदाल, फावड़ा, हँसिया: खेत तैयार करने, खरपतवार निकालने और फसल काटने के लिए
    • लकड़ी का लंगर: पारंपरिक हल का एक प्रकार
    आधुनिक कृषि उपकरण:
    • ट्रैक्टर: हल जोतना, खेत तैयार करना, गाड़ी खींचना (बहुत तेज और कम मेहनत)
    • हार्वेस्टर: फसल काटना और थ्रेशिंग (दाने अलग करना) एक साथ
    • पावर टिलर: छोटे खेतों में जुताई के लिए
    • सीड ड्रिल: बीज बोने के लिए
    • पंप सेट / स्प्रेयर: सिंचाई और दवा छिड़कने के लिए
  2. भारत में बैल कृषि संस्कृति का प्रतीक हैं। वे केवल पशु नहीं, बल्कि गाँव की जीवनशैली का हिस्सा हैं:
    गाँवों में बैल के काम:
    • खेत जोतना (हल चलाना)
    • बैलगाड़ी खींचना (अनाज, घास, लोग ले जाना)
    • पूजा-अर्चना में उपयोग (बैल-पूजा, गौ-पूजा, त्योहारों पर सजाना)
    • लोक-कथाओं, गीतों और कहानियों में प्रतीक (जैसे “दो बैलों की कथा”)
    शहरों / कस्बों में बैल के काम:
    • कुछ पुराने इलाकों में छोटी बैलगाड़ियाँ अभी भी सामान ढोने के काम आती हैं
    • मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर बैलों को पूजा जाता है
    • पर्यटन स्थलों पर बैलगाड़ी सवारी (कुछ गाँवों/कस्बों में)
    • कृषि-आधारित उद्योगों (दूध, गोबर) में बैल अप्रत्यक्ष रूप से सहायक

Q.27:

कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।

Solution:

हीरा की विशेषताएँ:

  • सहनशील – वह मोती से ज्यादा सहनशील था। जब मोती गाड़ी को खाई में गिराना चाहता था, हीरा ने संभाल लिया।
  • समझदार और शांत – वह हमेशा मोती को समझाता था। साँड़ से लड़ाई के समय उसने योजना बनाई – “मैं आगे से रगेदता हूँ, तुम पीछे से रगेदो।”
  • धर्मनिष्ठ – वह नैतिकता कभी नहीं छोड़ता था। गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना, औरत जात पर सींग न चलाना – ये उसके सिद्धांत थे।
  • मेहनती और वफादार – झूरी के प्रति पूरी निष्ठा रखता था।

मोती की विशेषताएँ:

  • गुस्सैल- गया द्वारा डंडे मारने पर उसका गुस्सा काबू के बाहर हो गया और वह हल लेकर भागा।
  • साहसी और विद्रोही- काँजीहाउस में सबसे पहले दीवार तोड़ने का साहस उसने दिखाया।
  • भावुक- हीरा को बंधा देखकर उसकी आँखों में आँसू आ गए।
  • मेहनती- दोनों बैल मेहनती थे, लेकिन मोती में विद्रोह की चिंगारी ज्यादा थी।

Q.28:

हीरा और मोती की विशेषताएँ कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ अलग हैं, किंतु उनकी भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को पूरा करती हैं। कैसे?

Solution:

समान विशेषताएँ:

  • दोनों बहुत मेहनती थे।
  • दोनों में भाईचारा और वफादारी थी।
  • दोनों ने मिलकर साँड़ से लड़ा, दीवार तोड़ी और घर लौटने का फैसला लिया।

भिन्न विशेषताएँ:

  • हीरा → शांत, समझदार, सहनशील, धर्मनिष्ठ
  • मोती → गुस्सैल, साहसी, भावुक, विद्रोही

एक-दूसरे को कैसे पूरा करते थे?

  • जब मोती गुस्से में आकर सींग चलाने या भागने को तैयार होता, हीरा उसे रोककर सही रास्ता दिखाता था।
  • जब हीरा ज्यादा सहनशील होकर चुप रह जाता, मोती उसे साहस देता और दीवार तोड़ने में मदद करता था।
  • साँड़ से लड़ाई में हीरा ने योजना बनाई और मोती ने पीछे से हमला किया।
  • काँजीहाउस में हीरा ने दीवार पर पहला हमला किया, मोती ने उसे पूरा किया।

Q.29:

आपकी कक्षा में भी कुछ-कुछ समान और कुछ-कुछ भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी हैं। सबकी आवश्यकताएँ भी थोड़ी समान और थोड़ी भिन्न हैं। बताइए कि आप भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं? उनसे पता कीजिए कि वे आपसे अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते हैं?

Solution:

मैं भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से क्या चाहता हूँ:

  • करें – मेरी राय सुनें, मदद करें (पढ़ाई, खेल, प्रोजेक्ट में, मेरी कमजोरी पर हँसें नहीं, मेरी ताकत को सराहें।
  • न करें – मुझ पर हँसें नहीं, मेरी बात बीच में न काटें, मुझे अकेला न छोड़ें।

वे मुझसे क्या चाहते हैं (उनसे पूछकर):

  • करें – उनकी मदद करें जब वे अटक जाएँ, उनकी अच्छी बातों की तारीफ करें, टीम में शामिल करें।
  • न करें – उनकी कमजोरी का मजाक न उड़ाएँ, उन्हें डाँटें नहीं।

पढ़ाई और खेल में सहायता:

  • पढ़ाई में – एक-दूसरे को नोट्स शेयर करें, मुश्किल सवाल मिलकर सुलझाएँ।
  • खेल में – एक-दूसरे को प्रोत्साहित करें, हारने पर सांत्वना दें।
  • साथ दें – अलग-अलग होने पर भी एक टीम की तरह काम करें।

Q.30:

“दोनों आमने-सामने या आस-पास बैठे हुए एक-दूसरे से मूक-भाषा में विचार-विनिमय करते थे।”
कहानी में अनेक स्थानों पर ‘मूक-भाषा’ का उल्लेख किया गया है। आपके विचार से हीरा और मोती किस प्रकार आपस में बातें किया करते होंगे? अनुमान और कल्पना से बताइए।

Solution:

हीरा और मोती मनुष्यों की तरह सोचते थे, इसलिए उनकी मूक-भाषा बहुत स्पष्ट थी। वे कैसे बात करते होंगे?

  • आँखों से इशारा – एक-दूसरे को कनखियों में देखकर सलाह लेना (जैसे घर भागने की योजना बनाते समय)।
  • सींग मिलाना – प्यार या खेल-खेल में (विनोद के भाव से)।
  • पूँछ हिलाना या खड़ी करना – खुशी या उत्साह दिखाना।
  • सिर झुकाना या चाटना – सांत्वना देना या प्रेम व्यक्त करना।
  • एक साथ मुँह हटाना – एक-दूसरे की भावना समझकर साथ खाना या साथ रुकना।
  • गरदन हिलाना – हाँ या नहीं बताना।

कल्पना: जब मोती गुस्सा करता, हीरा आँखों से “शांत रहो” कहता। जब हीरा थक जाता, मोती पूँछ हिलाकर “हिम्मत रखो” कहता।


Q.31:

आप भी अनेक अवसरों पर बिना शब्दों का उच्चारण किए संवाद करते हैं। कब-कब? कहाँ-कहाँ? कुछ उदाहरण लिखिए।

Solution:

मुस्कुराकर – दोस्त से मिलते समय खुशी दिखाना।
आँखों से – क्लास में टीचर देख रही हो तो “चुप रहो” का इशारा।
हाथ के इशारे से – “आओ”, “रुको”, “ठीक है” बताना।
सिर हिलाकर – हाँ/नहीं जवाब देना।
कंधे पर हाथ रखकर – दुखी दोस्त को सांत्वना देना।
खेल के मैदान पर – बिना बोले पास देना या इशारा करना।


Q.32:

हीरा-मोती अपने घर के मार्ग से भटक गए थे। क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि आप रास्ता भूल गए या भटक गए? तब आपने अपने मार्ग का पता कैसे लगाया था?

Solution:

हाँ, एक बार स्कूल से पार्क जाते समय मैं रास्ता भूल गया था। चारों ओर नए-नए गाँव जैसे लग रहे थे। पहले थोड़ा डर लगा, फिर मैंने पास की एक दुकान पर पूछा, “भैया, यह कौन-सा रास्ता है?” उन्होंने बताया। उसके बाद मैंने फोन में गूगल मैप्स खोलकर लोकेशन देखी और सही रास्ता पा लिया। हीरा-मोती की तरह मैं भी घबराया नहीं था, बस थोड़ा सोचकर रास्ता ढूँढ़ा।


Q.33:

यदि कोई व्यक्ति भटक जाए तो उसे क्या करना चाहिए कि वह सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच जाए। कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।

Solution:

शांत रहें – घबराएँ नहीं।
पास के लोगों से पूछें – पुलिस, दुकानदार, स्कूल के टीचर, सरकारी भवन में काम करने वाले लोग।
ऑनलाइन मानचित्र – गूगल मैप्स या ऑफलाइन मैप्स देखें।
सूचना-पट और बोर्ड – सड़क पर लगे नाम-पते, दुकानों के बोर्ड, डाकघर देखें।
परिजनों को फोन करें – अगर फोन है तो घरवालों को बताएँ।
सुरक्षित जगह चुनें – अकेले अंधेरे में न घूमें, भीड़ वाली जगह पर रहें।


Q.34:

आपके विद्यालय में आपदा की स्थिति में निकासी का मार्ग दर्शाने वाला मानचित्र अवश्य होगा। उसे ध्यानपूर्वक देखिए और पता लगाइए कि आपदा की स्थिति में आपकी कक्षा के सबसे निकट और सुरक्षित कौन-सा मार्ग है।

Solution:

विद्यालय के आपदा निकासी मानचित्र (फायर एक्जिट प्लान) पर कक्षा के सबसे निकट फायर एक्जिट गेट या मुख्य गेट का मार्ग सबसे सुरक्षित है।

  • आमतौर पर कक्षा के पीछे या साइड वाला एक्जिट गेट सबसे नजदीक होता है।
  • सीढ़ियाँ या मुख्य गलियारा इस्तेमाल करें।
  • आपदा (आग, भूकंप) में इस मार्ग से बाहर निकलना चाहिए।

Q.35:

हीरा और मोती की दैनंदिनी

कहानी में हीरा और मोती आपस में मनुष्यों की तरह बातें करते दिखते हैं। कल्पना कीजिए कि वे लिख-पढ़ भी सकते हैं। हीरा या मोती की नजर से उस दिन की डायरी लिखिए जब उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
कैसे लिखें-

  • “आज का दिन…” से आरंभ करें।
  • भावनाएँ लिखें (भय, गुस्सा, दर्द)।
  • अंत में आशा या संकल्प लिखें।

Solution:

आज का दिन…
आज का दिन सबसे काला और दुखद रहा। सुबह से शाम तक हमें काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। मोती और मैं दोनों भूख से व्याकुल हो रहे थे। सारा दिन बीत गया, एक तिनका चारा भी नहीं मिला। हम दोनों दीवार की नमकीन मिट्टी चाटते रहे, फिर भी पेट नहीं भरा।
हीरा ने नुकीले सींग दीवार में गड़ा दिए और जोर मारा। मिट्टी का एक चिप्पड़ निकल आया। मैं भी उसके साथ लगा। चौकीदार लालटेन लेकर आया और मुझे डंडे मारने लगा, पर मैंने हिम्मत नहीं हारी। मोती ने कहा, “अब तो नहीं रहा जाता, हीरा!” मैंने जवाब दिया, “जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।”
रात को हम दोनों ने मिलकर दीवार तोड़ दी। कई घोड़े, बकरियाँ और भैंसें भाग निकलीं। हमने नौ-दस जानवरों की जान बचा ली। अब बहुत थकान है, बहुत भूख है, पर विश्वास है कि झूरी हमें ढूँढ लेगा। हम कभी हार नहीं मानेंगे। घर वापस पहुँचकर पुराने थान पर खड़े होंगे।

  • हीरा

Q.36:

आज के समाचार

मान लीजिए आप एक स्थानीय समाचार पत्र के संवाददाता हैं। अपने समाचार पत्र के लिए बैलों के काँजीहाउस से भागने का समाचार लिखिए।
कैसे लिखें-

  • शीर्षक दें।
  • घटना का विवरण (कहाँ, कब, क्या हुआ)।
  • परिणाम और लोगों की प्रतिक्रिया।

Solution:

शीर्षक: दो बहादुर बैलों ने तोड़ी बेड़ियाँ! काँजीहाउस से भाग निकले हीरा-मोती
समाचार: कानपुर जिले के काँजीहाउस में कल रात एक अद्भुत घटना घटी। झूरी नामक किसान के दो बैल – हीरा और मोती – जो कई दिनों से बिना चारे-पानी के बंद थे, उन्होंने अपनी मूक-भाषा में सलाह की और कच्ची दीवार में सींग गड़ाकर लगातार दो घंटे तक जोर आजमाया। आखिरकार दीवार ऊपर से लगभग एक हाथ गिर गई।
इसके बाद हीरा-मोती बाहर निकल आए। उनके साथ कई घोड़े, बकरियाँ और भैंसें भी भाग निकलीं। गाँव में खुशी का माहौल है। लोग बैलों की बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं। झूरी ने दावा किया, “ये मेरे बैल हैं। मैं उन्हें कभी बेचता ही नहीं।” गया और दढ़ियल अब भी उन्हें ढूँढ रहे हैं, पर बैल अब अपने थान पर सुरक्षित पहुँच चुके हैं।
परिणाम: बैलों की इस घटना ने पूरे गाँव में पशु-वफादारी और संघर्ष की मिसाल पेश की है।


Q.37:

चित्रकथा लेखन

नीचे ‘दो बैलों की कथा’ की एक घटना को चित्रकथा के रूप में दिया गया है। इन घटनाओं को पहचानिए। प्रत्येक घटना के लिए उपयुक्त संवाद और घटनाक्रम बताने वाले वाक्य लिखिए।


कैसे लिखें-

  • हर चित्र के लिए एक छोटा संवाद बनाकर लिखिए।
  • दृश्य का क्रम-बंद करना, भागने की योजना, दीवार तोड़ना, आजादी।

Solution:

चित्र 1: बैल खेत में अन्य जानवरों के साथ खड़े हैं।
संवाद: हीरा – “मोती, यहाँ तो बहुत जानवर हैं, पर कोई चारा नहीं।”
मोती – “हाँ भाई, हमारी तरह सब भूखे हैं।”
घटनाक्रम: काँजीहाउस में बंदी की शुरुआत।
चित्र 2: दो बैल सोचते हुए, सिर झुकाए।
संवाद: हीरा – “अब तो नहीं रहा जाता मोती!”
मोती – “दीवार तोड़कर भाग चलें?”
घटनाक्रम: योजना बनाना।
चित्र 3: बैल दीवार तोड़ते हुए (सींग गड़ाकर मिट्टी गिर रही है)।
संवाद: हीरा – “जोर लगाओ भाई!”
मोती – “दीवार गिर रही है!”
घटनाक्रम: दीवार तोड़ना।
चित्र 4: बैल भागते हुए, हिरण पास में।
संवाद: मोती – “अब हम आजाद हैं!”
हीरा – “हाँ, अब घर चलते हैं।”
घटनाक्रम: भागना और आजादी।


Q.38:

कहानी में से पाँच ऐसे शब्द चुनकर लिखिए जो आपके लिए बिल्कुल नए हैं। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।

Solution:

निरापद → अनुमान: सुरक्षित → शब्दकोश: आपत्ति से रहित, निर्विघ्न
सहिष्णुता → अनुमान: सहनशीलता → शब्दकोश: सहनशीलता, क्षमा
पराकाष्ठा → अनुमान: अंतिम सीमा → शब्दकोश: चरम कोटि, अंतिम सीमा
उजड्डपन → अनुमान: बदतमीजी → शब्दकोश: अशिष्टता, उद्दंडता
बेतहाशा → अनुमान: तेजी से → शब्दकोश: बदहवास होकर, बिना सोचे-विचारे


Q.39:

“लोग आ-आकर उनकी सूरत देखते और मन फीका करके चले जाते।”
‘मन फीका करना’ एक मुहावरा है जिसका अर्थ आपको वाक्य पढ़कर समझ में आ ही गया होगा। इसी से मिलते-जुलते मुहावरे हैं- जी फीका होना, जी खट्टा होना आदि ‘दो बैलों की कथा’ कहानी में कई मुहावरे हैं जिनसे यह कहानी जीवंत हो गई है। ऐसी भाषा को ही मुहावरेदार भाषा कहा जाता है।

कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में मुहावरों को पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-

  1. “झूरी के साले गया को घर तक गोई ले जाने में दाँतों पसीना आ गया।”
  2. “उसका चेहरा देखकर अंतर्ज्ञान से दोनों मित्रों के दिल काँप उठे।”
  3. “झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा, तो जल उठी।”
  4. “मोती दिल में ऐंठकर रह गया।”
  5. “आएगा तो दूर ही से खबर लूँगा। देखूँ कैसे ले जाता है।”
  6. “जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं।”
  7. “अगर वे भी ईंट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते, तो शायद सभ्य कहलाने लगते।”
  8. “तो फिर वहीं मरो। बंदा तो नौ-दो ग्यारह होता है।”

Solution:

  1. दाँतों पसीना आ गया – बहुत मेहनत करना नया वाक्य: बोर्ड परीक्षा की तैयारी में दाँतों पसीना आ गया।
  2. दिल काँप उठे – डर जाना नया वाक्य: साँप देखकर दिल काँप उठा।
  3. जल उठी – क्रोध करना नया वाक्य: बात सुनकर वह जल उठी।
  4. दिल में ऐंठकर रह गया – गुस्सा रोकना नया वाक्य: टीचर की डाँट सुनकर दिल में ऐंठकर रह गया।
  5. दूर ही से खबर लूँगा – सावधानी से देखना नया वाक्य: आने वाले को दूर से खबर लूँगा।
  6. गम खा जाते – चुप रहकर सहना नया वाक्य: गाली सुनकर गम खा गया।
  7. ईंट का जवाब पत्थर – बदला लेना नया वाक्य: गलती पर ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
  8. नौ-दो-ग्यारह – भाग जाना नया वाक्य: डाँट सुनकर नौ-दो-ग्यारह हो गया।

Q.40:

कविता (गीत) और अभिनंदन-पत्र
“बाल-सभा ने निश्चय किया, दोनों पशुवीरों को अभिनंदन-पत्र देना चाहिए।”

  1. मान लीजिए कि बाल-सभा ने हीरा और मोती की प्रशंसा में एक गीत लिखा और गाया। अपनी कल्पना से वह गीत लिखिए।
  2. हीरा और मोती के लिए अभिनंदन-पत्र लिखिए।

Solution:

  1. कविता (गीत)
    हीरा-मोती दो भाई
    हीरा-मोती दो भाई, वफादारी की मिसाल।
    रस्सी तोड़ी, दीवार फोड़ी, साँड़ से लड़े डटकर।
    झूरी के थान पर लौट आए, पूँछ हिलाई खुशी से।
    पशु भी सिखाते इंसान को – संघर्ष और अपनापन।
  2. अभिनंदन-पत्र
    प्रिय हीरा और मोती,
    तुम दोनों पशु-वीर हो! रस्सी तोड़कर, साँड़ से लड़कर, काँजीहाउस की दीवार फोड़कर तुमने साहस और भाईचारे का उदाहरण पेश किया। हम बाल-सभा तुम्हें अभिनंदन देते हैं।
    गाँव के बच्चे

Q.41:

बाल सभा में भाषण
मान लीजिए कि आपको बाल-सभा ने हीरा-मोती के लौटने के बाद भाषण देने के लिए बुलाया है। भाषण का विषय है- ‘पशुओं के अधिकार’। अपना भाषण लिखिए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

Solution:

विषय: पशुओं के अधिकार
प्रिय साथियों, कहानी “दो बैलों की कथा” सिखाती है कि पशु भी भावनाएँ रखते हैं। हीरा-मोती ने भूख, मार और कैद सहकर विद्रोह किया। हमें पशु क्रूरता रोकनी चाहिए, उन्हें चारा-पानी देना चाहिए और सम्मान देना चाहिए। पशु हमारे भाई हैं। जय हिंद!


Q.42:

शीर्षक- इस कहानी के पाँच भाग हैं। कहानी के प्रत्येक भाग को अपने मन से उपयुक्त शीर्षक दीजिए।

Solution:

भाग 1: घर से बिकना
भाग 2: विद्रोह की शुरुआत
भाग 3: साँड़ से संघर्ष
भाग 4: काँजीहाउस में कैद
भाग 5: विजय और घर वापसी


Q.43:

अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी पहेलियाँ बनाइए जिनके उत्तर निम्नलिखित हों-
हीरा, झूरी, मोती, गया, बैल, मटर, रस्सी, रोटी

Solution:

  • हम दोनों भाई, रस्सी तोड़कर घर आए – हीरा-मोती
  • मुझे चारा नहीं मिला, फिर भी दीवार तोड़ी – मोती
  • मैं बैलों को गले लगाता हूँ – झूरी

Q.44:

“कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।”

नीचे ‘बैल’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।

बैल (हिंदी); वृषभः (संस्कृत); बओलद, बल्द (पंजाबी); बैल (उर्दू); दोंद (कश्मीरी); द़गो (सिंधी); बैल (मराठी); बळद (गुजराती); बैल (कोंकणी); गोरु (नेपाली); बलद (बांग्ला); षाँड़, बलध (असमिया); शन लाबा (मणिपुरी); बलद (ओड़िआ); एंददु (तेलुगु); एरिदु/काळैमाहु (तमिल); काळ (मलयालम); एत्तु (कन्नड़)।

  • इनके अतिरिक्त यदि आप ‘बैल’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
  • उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।

Solution:

(मैं हिंदी-भाषी क्षेत्र से हूँ, इसलिए अतिरिक्त भाषा के रूप में अवधी में लिख रहा हूँ, जो उत्तर प्रदेश में बोली जाती है)
अवधी → बैल (या लोक-बोली में बइल / सांड)
उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
मातृभाषा (हिंदी): “कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।”
अवधी (स्थानीय बोली): “कभ-कभ अड़ियल बैल भी देखे में आवे है।”
नोट:

  • यह वाक्य कहानी की शुरुआत से लिया गया है, जहाँ लेखक बैल की अड़ियल प्रकृति की बात करते हैं।
  • भाषा संगम का उद्देश्य यह दिखाना है कि भारत बहुभाषी देश है और एक ही शब्द के कई रूप हैं, जो हमारी सांस्कृतिक एकता को दर्शाती हैं।

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