मैं और मेरा देश – NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga includes all the questions with solution given in NCERT Class 9 हिंदी (गंगा) textbook.
NCERT Solutions Class 9
English Kaveri Hindi Ganga Sanskrit Sharada Maths Ganita Manjari Science Exploration Social Understanding Societyमैं और मेरा देश – NCERT Solutions
Q.1:
“एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?
Options:
(1) पूर्णता के भाव की तुष्टि
(2) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
(3) पूर्णता के भाव पर प्रहार ✅
(4) सुख-सुविधाओं का अभाव
Explanation:
इस पंक्ति में ‘दरार’ का अर्थ सामान्य दरार नहीं है, बल्कि एक भावनात्मक/विचारात्मक बदलाव को दर्शाता है।
यहाँ लेखक पहले अपने घर, पड़ोस और नगर में खुद को पूर्ण और संतुष्ट मानता था। लेकिन जब उसे देश की गुलामी और उससे जुड़े अपमान का एहसास होता है, तो उसकी इस “पूर्णता की भावना” टूट जाती है। यानी उसके मन में जो संतोष था, उस पर गंभीर चोट लगती है।
Q.2:
“मैं और मेरा देश” निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है?
Options:
(1) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का ✅
(2) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
(3) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
(4) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
Explanation:
लेखक ने स्पष्ट कहा है कि ऐसे प्रश्न “बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देते हैं”। यानी वे प्रश्न जो विचारों को विस्तार देने और आगे बढ़ाने में मदद करते हैं, उन्हें उत्तर देने में लेखक को आनंद मिलता है।
Q.3:
“अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में-
Options:
(1) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
(2) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। ✅
(3) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
(4) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
Explanation:
इस वाक्य में “दीन दिनों” का अर्थ केवल गरीबी या साधनों की कमी नहीं है, बल्कि मानसिक और राष्ट्रीय अपमान की स्थिति से है।
पराधीनता में सबसे बड़ा नुकसान बाहरी सुविधाओं का नहीं, बल्कि सम्मान और स्वाभिमान का ह्रास होता है। लेखक भी यही बताना चाहते हैं कि स्वतंत्रता के बिना व्यक्ति और राष्ट्र दोनों ही हीन स्थिति में होते हैं।
Q.4:
“मैैं और मेरा देश” निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि-
Options:
(1) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
(2) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। ✅
(3) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
(4) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
Explanation:
निबंध में लाला लाजपत राय के अनुभव के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि चाहे किसी व्यक्ति के पास कितनी भी सुविधाएँ और साधन क्यों न हों, यदि उसका देश गुलाम है तो वह सच्चा गौरव अनुभव नहीं कर सकता।
लेखक बताते हैं कि विदेशों में जाने पर भी उनके माथे पर “भारत की गुलामी का कलंक” लगा रहता था। इससे यह स्पष्ट होता है कि व्यक्तिगत साधन-संपन्नता के बावजूद राष्ट्रीय स्वतंत्रता के बिना सम्मान अधूरा है।
Q.5:
“मैैं और मेरा देश” पाठ के अनुसार ‘पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है’, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है?
Options:
(1) देश और नागरिक ✅
(2) देश और संविधान
(3) देश और विदेश
(4) व्यवसाय और आजीविका
Explanation:
इस वाक्य में “गाँठ” का अर्थ है ऐसा संबंध जो दो चीज़ों को मजबूती से जोड़ता है। निबंध में लेखक दो घटनाओं के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि हर नागरिक का व्यवहार सीधे उसके देश के सम्मान या अपमान से जुड़ा होता है। यानी नागरिक और देश अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।
Q.6:
प्रस्तुत निबंध “मैैं और मेरा देश” में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
Options:
(1) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
(2) पारिवारिक संबंधों का महत्व
(3) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध ✅
(4) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
Explanation:
निबंध “मैं और मेरा देश” का मूल विचार यही है कि व्यक्ति और उसका देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। लेखक बार-बार यह समझाते हैं कि नागरिक के आचरण से देश का सम्मान बढ़ता या घटता है और देश की स्थिति का प्रभाव व्यक्ति पर पड़ता है।
Q.7:
स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?
Solution:
स्वामी रामतीर्थ उस जापानी युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध हो गए क्योंकि उसके व्यवहार में अपने देश के प्रति गहरा प्रेम और जिम्मेदारी झलक रही थी। युवक ने फल बेचने के बजाय उन्हें सम्मानपूर्वक भेंट किया और बदले में केवल यही निवेदन किया कि स्वामी जी अपने देश जाकर यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। इससे स्पष्ट होता है कि वह अपने देश की छवि को लेकर अत्यंत सजग था। उसने व्यक्तिगत लाभ को महत्व नहीं दिया, बल्कि राष्ट्र के सम्मान को सर्वोपरि रखा। इतनी छोटी-सी घटना के माध्यम से उसने अपने देश का गौरव बढ़ाने का प्रयास किया। उसकी देशभक्ति, निःस्वार्थ भावना और जागरूकता ने स्वामी रामतीर्थ को प्रभावित किया, इसलिए वे उसके उत्तर से अत्यंत प्रसन्न और मुग्ध हो गए।
Q.8:
जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।
Solution:
जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ से फलों के मूल्य के रूप में कोई धन नहीं माँगा। उसने केवल यह निवेदन किया कि वे अपने देश लौटकर यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते। उसका उद्देश्य अपने देश की प्रतिष्ठा और सम्मान को बनाए रखना था, न कि व्यक्तिगत लाभ कमाना।
उस युवक के व्यक्तित्व की छवि एक सच्चे देशभक्त, जागरूक और निःस्वार्थ नागरिक की उभरती है। वह अपने देश की छवि के प्रति अत्यंत संवेदनशील था और छोटी-सी बात को भी राष्ट्र के सम्मान से जोड़कर देखता था। उसमें विनम्रता, जिम्मेदारी और आत्मसम्मान की भावना थी। उसका आचरण बताता है कि वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव के लिए सोचने वाला आदर्श नागरिक था।
Q.9:
“बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Solution:
“मैं और मेरा देश दो अलग चीजें नहीं हैं”- इस कथन का तर्क यह है कि हर नागरिक के व्यवहार, सोच और कर्म का सीधा प्रभाव देश की छवि और स्थिति पर पड़ता है। देश कोई अलग वस्तु नहीं, बल्कि उसके नागरिकों से ही बनता है। यदि नागरिक अच्छे कार्य करेंगे तो देश का सम्मान बढ़ेगा, और गलत कार्य करेंगे तो देश की छवि खराब होगी।
उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर गंदगी फैलाता है, तो इससे पूरे देश की छवि खराब होती है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति ईमानदारी से काम करता है या किसी विदेशी के सामने अपने देश का अच्छा परिचय देता है, तो देश का सम्मान बढ़ता है। जैसे जापान के युवक ने अपने व्यवहार से अपने देश का गौरव बढ़ाया। इसलिए व्यक्ति और देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं।
Q.10:
“देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
Solution:
इस पंक्ति का भाव है कि नागरिक और देश एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं; व्यक्ति के कार्यों का प्रभाव देश पर पड़ता है और देश की स्थिति का प्रभाव व्यक्ति पर।
उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र विद्यालय में अनुशासनहीनता करता है, तो उससे उसके परिवार और स्कूल की छवि खराब होती है। इसी तरह, यदि कोई नागरिक सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाता है या नियमों का पालन नहीं करता, तो देश की छवि गिरती है। दूसरी ओर, जब कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीतता है या कोई वैज्ञानिक नई खोज करता है, तो पूरे देश का गौरव बढ़ता है।
इसी प्रकार, यदि देश विकसित और सम्मानित है, तो उसके नागरिकों को विदेशों में सम्मान मिलता है। इसलिए व्यक्ति और देश दोनों एक-दूसरे के गौरव और हीनता के भागीदार होते हैं।
Q.11:
“मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।”
- प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए।
- रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए।
Solution:
- प्रातःकाल उठने से लेकर रात्रि तक मेरे अनेक कार्य दूसरों के सहयोग से पूरे होते हैं। सुबह दूधवाला दूध देता है, बिजली-पानी की व्यवस्था से दिन की शुरुआत होती है। स्कूल जाने में बस चालक और कंडक्टर सहायता करते हैं। विद्यालय में शिक्षक हमें ज्ञान देते हैं और सहपाठी पढ़ाई में सहयोग करते हैं। घर लौटकर माँ-पिता का मार्गदर्शन मिलता है। दुकानदारों से आवश्यक वस्तुएँ मिलती हैं, सफाईकर्मी वातावरण स्वच्छ रखते हैं। इसी प्रकार मैं भी दूसरों की सहायता करता हूँ। घर में छोटे-मोटे कामों में माता-पिता का हाथ बँटाता हूँ, छोटे भाई-बहन की पढ़ाई में मदद करता हूँ। स्कूल में मित्रों को पढ़ाई समझाता हूँ और जरूरत पड़ने पर उनकी सहायता करता हूँ। आसपास स्वच्छता बनाए रखने और नियमों का पालन करने की कोशिश करता हूँ। इस तरह हम सब एक-दूसरे के सहयोग से जीवन जीते हैं।
- उपर्युक्त वाक्य में ‘बहुतों’ से आशय उन सभी लोगों से है जिनसे हमारा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संबंध होता है और जिनके सहयोग से हमारा जीवन चलता है। इसमें परिवार के सदस्य जैसे माता-पिता, भाई-बहन शामिल हैं। इसके अलावा शिक्षक, सहपाठी, मित्र, पड़ोसी भी इसमें आते हैं। दैनिक जीवन में सहायता करने वाले लोग जैसे दूधवाला, सब्ज़ीवाला, दुकानदार, बस चालक, कंडक्टर, सफाईकर्मी, डॉक्टर, पुलिसकर्मी आदि भी ‘बहुतों’ में सम्मिलित होते हैं। ये सभी लोग अपने-अपने कार्यों के माध्यम से हमारी आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। इस प्रकार ‘बहुतों’ शब्द में समाज के वे सभी व्यक्ति आते हैं, जिनके सहयोग से हमारा जीवन सुचारु रूप से चलता है और हम भी अपने कार्यों से उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
- रचनाकार को स्वयं के लिए अनेक प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी। बचपन में उसे परिवार से प्रेम, पालन-पोषण और संस्कार मिले होंगे। शिक्षा के लिए उसे शिक्षकों और समाज से ज्ञान, मार्गदर्शन और अनुभव प्राप्त हुआ होगा। अपने विचारों को विकसित करने के लिए उसे समाज, पाठकों, मित्रों और विभिन्न व्यक्तियों से प्रेरणा और सहयोग मिलता होगा। साथ ही जीवन की सामान्य आवश्यकताओं-जैसे भोजन, वस्तुएँ, आवास-के लिए भी वह समाज पर निर्भर रहता होगा। दूसरी ओर, रचनाकार अपने लेखन के माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण सहयोग देता है। वह अपने विचारों, अनुभवों और ज्ञान से लोगों को जागरूक करता है, सही दिशा दिखाता है और उनमें देशभक्ति, नैतिकता तथा सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जगाता है। इस प्रकार वह समाज के मानसिक और नैतिक विकास में योगदान देता है।
Q.12:
“सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।”
- उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए अपने घर या पास-पड़ोस के बड़ों और अध्यापक से चर्चा करके लिखिए।
- अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं?
(संकेत-आप अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी ‘दो बैलों की कथा’ के मुख्य पात्रों के अनुभवों को भी आधार बना सकते हैं।) - इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए।
- देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं?
Solution:
- “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” का अर्थ है कि किसी भी बड़े उद्देश्य की सफलता में केवल आगे लड़ने वाले ही नहीं, बल्कि पीछे से सहयोग देने वाले सभी लोगों का योगदान आवश्यक होता है। इसी प्रकार देश की प्रगति, विकास और सुरक्षा के लिए हर नागरिक का अपना दायित्व है। हमें अपने-अपने कार्य ईमानदारी और लगन से करने चाहिए-छात्रों को मन लगाकर पढ़ना चाहिए, ताकि वे भविष्य में देश के योग्य नागरिक बन सकें। नागरिकों को कानूनों का पालन करना, कर (टैक्स) देना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना और स्वच्छता बनाए रखना चाहिए। हमें आपसी सद्भाव बनाए रखना, जरूरतमंदों की सहायता करना और देश की एकता को मजबूत करना भी जरूरी है। साथ ही, सही प्रतिनिधि का चुनाव करना, देश के प्रति सकारात्मक सोच रखना और गलत कार्यों का विरोध करना भी हमारा कर्तव्य है। इस प्रकार हर व्यक्ति अपने छोटेछोटे कार्यों से देश के विकास में योगदान दे सकता है।
- मेरे पास-पड़ोस में गाय, कुत्ते, बिल्ली, कबूतर और गौरैया जैसे कई पशु-पक्षी दिखाई देते हैं। इनके जीवन को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि उनका जीवन भी निरंतर संघर्ष से भरा होता है। उन्हें रोज़ भोजन और पानी की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ता है। कई बार कुत्तों को आपस में भोजन के लिए लड़ते देखा है। गर्मी, सर्दी और बरसात जैसे मौसमों की मार भी उन्हें झेलनी पड़ती है, क्योंकि उनके पास सुरक्षित आश्रय नहीं होता। पक्षियों को भी घोंसले बनाने, अपने बच्चों की रक्षा करने और भोजन जुटाने में कठिनाइयाँ आती हैं। पेड़ों की कमी के कारण उनका जीवन और कठिन हो जाता है।
‘दो बैलों की कथा’ के हीरा और मोती की तरह ये पशु भी मेहनत, सहनशीलता और संघर्ष का उदाहरण हैं। वे बिना शिकायत अपने जीवन की कठिनाइयों का सामना करते हैं, जिससे हमें धैर्य और परिश्रम की सीख मिलती है। - इस निबंध में जीवन को युद्ध इसलिए कहा गया है क्योंकि इसमें निरंतर संघर्ष, प्रयास और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जैसे युद्ध में केवल लड़ना ही नहीं, बल्कि योजना बनाना, सहयोग करना और धैर्य रखना भी जरूरी होता है, वैसे ही जीवन में भी सफलता के लिए कई प्रकार के प्रयास करने पड़ते हैं। घर के बड़ों से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि जीवन में हमें शिक्षा, रोजगार, परिवार और समाज से जुड़ी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों में धैर्य, परिश्रम और सही निर्णय बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति का संघर्ष अलग-अलग होता है, लेकिन बिना संघर्ष के प्रगति संभव नहीं है। मेरे विचार से जीवन को युद्ध कहना उचित है क्योंकि इसमें हर व्यक्ति को अपने लक्ष्य प्राप्त करने के लिए मेहनत, साहस और संयम के साथ आगे बढ़ना पड़ता है। साथ ही, दूसरों के सहयोग और सकारात्मक सोच से ही हम इस “युद्ध” में सफल हो सकते हैं।
- देश की सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं, उसी प्रकार हमारे दैनिक जीवन को सुचारु और बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्य करते हैं। इनमें सफाईकर्मी, डॉक्टर, नर्स, शिक्षक, पुलिसकर्मी, डाकिया, दूधवाला, सब्ज़ीवाला, बस चालक, बिजली और पानी विभाग के कर्मचारी आदि शामिल हैं। ये सभी अपने-अपने कार्यों से समाज को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाते हैं। इन लोगों के लिए हम कई छोटे-छोटे कार्य कर सकते हैं। जैसे – उनका सम्मान करना, उनके कार्य में बाधा न डालना, समय पर भुगतान करना, स्वच्छता बनाए रखना ताकि सफाईकर्मियों का काम कम हो, नियमों का पालन करना जिससे पुलिस और प्रशासन पर बोझ न बढ़े। इसके अलावा, उनके प्रति आभार व्यक्त करना और जरूरत पड़ने पर सहयोग करना भी हमारा कर्तव्य है। इस प्रकार हम उनके कार्यों का सम्मान कर समाज को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं।
Q.13:
“अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
- उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे?
- वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए।
Solution:
- इस पंक्ति से स्पष्ट होता है कि पास-पड़ोस के लोगों के बीच घनिष्ठ, आत्मीय और पारिवारिक संबंध रहे होंगे। पड़ोसी केवल आसपास रहने वाले लोग नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी थे। बच्चों को पड़ोसियों से भी वही स्नेह और दुलार मिलता था जो परिवार से मिलता है। ऐसे संबंधों में अपनापन, सहयोग और विश्वास की भावना होती है। लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं, जरूरत पड़ने पर साथ खड़े रहते हैं और खुशियों को मिल-जुलकर मनाते हैं। बच्चों का पालन-पोषण भी पूरे मोहल्ले के स्नेह में होता है। इस प्रकार, उस समय पड़ोसियों के बीच संबंध बहुत मजबूत, प्रेमपूर्ण और सहयोगात्मक थे, जिनमें सभी एक बड़े परिवार की तरह रहते थे।
- वर्तमान समय में पड़ोसियों के बीच पहले जैसे घनिष्ठ और आत्मीय संबंध कम होते जा रहे हैं। अब लोग अधिक व्यस्त और निजी जीवन में सीमित हो गए हैं, जिससे आपसी मेल-जोल घटा है। पहले जहाँ पड़ोसी एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे, वहीं अब औपचारिकता और दूरी बढ़ गई है। इन परिवर्तनों के कई कारण हैं। आधुनिक जीवन की भाग-दौड़, काम का दबाव, तकनीक (मोबाइल, इंटरनेट) का अधिक उपयोग और व्यक्तिगतता की बढ़ती प्रवृत्ति इसके प्रमुख कारण हैं। लोग अब सामाजिक संपर्क की बजाय डिजिटल माध्यमों में अधिक समय बिताते हैं। इसके अलावा, बड़े शहरों में स्थान परिवर्तन और सुरक्षा की चिंताओं के कारण भी लोग पड़ोसियों से कम जुड़ पाते हैं। इस प्रकार, जीवनशैली में बदलाव के कारण पड़ोस के पारस्परिक संबंध पहले की तुलना में कमजोर हो गए हैं।
Q.14:
“क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं?
Solution:
हम अपने घर, विद्यालय और आसपास के वातावरण की स्वच्छता एवं सौंदर्य बनाए रखने के लिए कई छोटे-छोटे प्रयास करते हैं। घर में हम कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालते हैं और प्लास्टिक का कम उपयोग करने की कोशिश करते हैं। विद्यालय में हम कक्षा को साफ रखते हैं, डस्टबिन का उपयोग करते हैं और दीवारों या फर्नीचर को गंदा नहीं करते।
सार्वजनिक स्थानों पर हम इधर-उधर कूड़ा नहीं फैलाते, पेड़ों की देखभाल करते हैं और दूसरों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं। ऐतिहासिक महत्व के स्थानों पर हम वहाँ की साफ-सफाई का ध्यान रखते हैं, दीवारों पर कुछ नहीं लिखते और नियमों का पालन करते हैं।
इसके अलावा, हम स्वच्छता अभियानों में भाग लेते हैं और लोगों को समझाते हैं कि साफ-सुथरा वातावरण ही सुंदर और स्वस्थ जीवन का आधार है। इस प्रकार हम सभी मिलकर अपने आसपास की सुंदरता और स्वच्छता को बनाए रखने में योगदान देते हैं।
Q.15:
“मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे|” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें? अपने-अपने समूह में इसकी चर्चा कीजिए और चर्चा से उभरे बिंदुओं को प्रातःकालीन सभा में पढ़कर सुनाइए।
Solution:
आप इसे प्रातःकालीन सभा में पढ़ने के लिए इस तरह प्रस्तुत कर सकते हैंदेश के सम्मान की रक्षा के लिए हमें क्या करना चाहिए-
- अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना।
- कानूनों और नियमों का पालन करना।
- सार्वजनिक संपत्ति (स्कूल, सड़क, पार्क आदि) की रक्षा करना।
- स्वच्छता बनाए रखना और दूसरों को भी प्रेरित करना।
- देश के प्रति सकारात्मक सोच रखना और उसकी उपलब्धियों पर गर्व करना।
- सही प्रतिनिधियों का चुनाव करना और जागरूक नागरिक बनना।
- सभी धर्मों और लोगों का सम्मान करना, एकता बनाए रखना। हमें क्या नहीं करना चाहिए-
- गंदगी फैलाना या सार्वजनिक स्थानों को नुकसान पहुँचाना।
- देश की नकारात्मक छवि फैलाना या गलत अफवाहें फैलाना।
- नियमों का उल्लंघन करना या भ्रष्टाचार में शामिल होना।
- आपसी झगड़े, भेदभाव और नफरत फैलाना।
इस प्रकार, छोटे-छोटे अच्छे कार्यों और सही व्यवहार से हम अपने देश के सम्मान को बनाए रख सकते हैं।
Q.16:
“ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है”
निबंध के उपर्युक्त संदर्भ से आपके लिए दो प्रश्न बनाए गए हैं-
- रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?
- आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?
अब इस निबंध के आलोक में नीचे दी गई सामग्री को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए और लिखिए।
| यह सोचना एकदम निराधार है कि केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं। देश की सुरक्षा का विषय हो अथवा ऐश्वर्य व संपन्नता का, सभी नागरिकों का अपनी ही तरह से योगदान होता है। हम सब नागरिक अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम यदि कुछ भी गलत करते हैं तो उससे अपनी छवि ही धूमिल नहीं होती अपितु अपने देश की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। |
Solution:
- रचनाकार को उन प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो विचारों को आगे बढ़ाते हैं, बात को विस्तार देते हैं और किसी विषय को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
- मुझे ऐसे प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है जो सोचने पर मजबूर करें, नए दृष्टिकोण दें और जिनसे किसी विषय की गहराई को समझने का अवसर मिले।
दिए गए अनुच्छेद के आधार पर तीन उपयुक्त प्रश्न इस प्रकार बनाए जा सकते हैं-- क्या केवल संपन्न व्यक्ति ही देश की प्रगति और विकास में योगदान दे सकते हैं? स्पष्ट कीजिए।
- सभी नागरिक अपने-अपने स्तर पर देश के विकास और सुरक्षा में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं?
- किसी नागरिक के गलत कार्यों का देश की छवि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Q.17:
‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है- ‘बाँधना’ (नि+बंध)। अर्थात भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण और भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करते हैं। एक विधा के रूप में निबंध की कुछ विशेषताओं को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है-
उपर्युक्त बिंदुओं से संबंधित संदर्भ ‘मैं और मेरा देश’ निबंध से खोजकर लिखिए।
Solution:
आपकी छवि के अनुसार, ‘निबंध’ की विशेषताओं को ‘मैं और मेरा देश’ के संदर्भ में नीचे स्पष्ट किया गया है:
‘मैं और मेरा देश’ निबंध के आधार पर विशेषताएँ
- विषय-केंद्रीयता: पूरा निबंध व्यक्ति और राष्ट्र के बीच के अटूट संबंध पर केंद्रित है। लेखक ने शुरू से अंत तक इसी बात को पुष्ट किया है कि नागरिक का हर कार्य देश की प्रतिष्ठा से जुड़ा होता है।
- वैयक्तिकता: लेखक ने अपने निजी अनुभवों (जैसे लाला लाजपत राय के साथ हुई बातचीत) और भावनाओं को साझा किया है, जिससे निबंध में निजी स्पर्श आता है।
- विचार प्रधानता एवं भावनात्मकता: इसमें जहाँ एक ओर यह विचार है कि देश का गौरव नागरिक के हाथ में है, वहीं दूसरी ओर देश के प्रति गहरा प्रेम और संवेदनशीलता (भावनात्मकता) भी झलकती है।
- सजीवता/चित्रात्मकता: स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक के प्रसंग को लेखक ने इतनी जीवंतता से प्रस्तुत किया है कि पाठक के सामने उस दृश्य का चित्र खिंच जाता है।
- तार्किकता: लेखक ने तर्क दिया है कि यदि हम सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाते हैं या शिष्टाचार का पालन नहीं करते, तो हम अपने देश की प्रतिष्ठा को चोट पहुँचाते हैं।
- प्रेरणात्मकता: यह निबंध पाठकों को एक आदर्श और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है, ताकि वे अपने देश के ‘शक्ति-बोध’ और ‘सौंदर्य-बोध’ को बढ़ा सकें।
- संक्षिप्तता और स्पष्टता: लेखक ने बहुत ही सरल और स्पष्ट भाषा में अपनी बात कही है, जिससे गंभीर विषय भी आसानी से समझ आ जाता है।
- साहित्यिक सौंदर्य: निबंध की भाषा प्रभावपूर्ण है और इसमें गंभीर दार्शनिक बातों को भी साहित्यिक सरलता के साथ पिरोया गया है।
Q.18:
“क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई?
बड़े महत्व का प्रश्न है। इस अर्थ में भी कि यह बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देता है और इस अर्थ में भी कि ठीक समय पर पूछा गया है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है, तो उत्तर यह है आपके प्रश्न का…”
निबंध के उपर्युक्त अंश को ध्यान से देखिए। इसकी पहली पंक्ति में एक प्रश्न है और बाद के अंश में उसका उत्तर दिया गया है। आपने ध्यान दिया होगा कि यह पूरा निबंध इसी तरह की प्रश्नोत्तर शैली में लिखा गया है। यह प्रश्नोत्तर या संवादात्मक शैली इस निबंध की संरचना को विशेष बनाती है। इसी तरह की और भी अन्य विशेषताएँ इस निबंध में से छाँटकर लिखिए।
Solution:
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ द्वारा रचित निबंध ‘मैं और मेरा देश’ अपनी विशिष्ट संवादात्मक शैली के कारण अत्यंत प्रभावशाली है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- संवादात्मक एवं प्रश्नोत्तर शैली: लेखक स्वयं से या पाठक से प्रश्न पूछकर विषय की गहराई में उतरता है, जिससे पाठक निबंध से जुड़ाव महसूस करता है।
- उदाहरणों एवं संस्मरणों का प्रयोग: अपनी बात को पुष्ट करने के लिए लेखक ने स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक जैसे जीवंत उदाहरणों का सहारा लिया है, जो नीरस उपदेश के बजाय कहानी जैसा प्रभाव पैदा करते हैं।
- सरल एवं मर्मस्पर्शी भाषा: जटिल दार्शनिक विचारों (जैसे व्यक्ति और राष्ट्र का संबंध) को बहुत ही सरल और स्पष्ट भाषा में समझाया गया है।
- प्रेरणात्मक उद्देश्य: यह निबंध केवल सूचनात्मक न होकर पाठकों में उत्तरदायित्व और आत्मसम्मान की भावना जगाने वाला है।
- तार्किक संरचना: लेखक ने ‘शक्ति-बोध’ और ‘सौंदर्य-बोध’ जैसे तर्कसंगत बिंदुओं के माध्यम से नागरिक कर्तव्यों की व्याख्या की है।
संक्षेप में, यह शैली पाठक को केवल एक श्रोता नहीं, बल्कि विमर्श का एक हिस्सा बना देती है।
Q.19:
नीचे कुछ विषय दिए गए हैं, आप इनमें से किन विषयों पर निबंध लिखना चाहेंगे, कारण सहित लिखिए-
- मेरा भारत मेरा गौरव
- चाँद के साथ गपशप
- जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि
- गागर में सागर
- यथा नाम तथा गुण
- दूध का दूध और पानी का पानी
Solution:
दिए गए विषयों में से मैं ‘मेरा भारत मेरा गौरव’ पर निबंध लिखना चाहूँगा। इसका मुख्य कारण यह है कि कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ के निबंध ‘मैं और मेरा देश’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एक नागरिक का अस्तित्व उसके देश के सम्मान से अभिन्न रूप से जुड़ा होता है।
इस विषय पर लिखने के अन्य कारण निम्नलिखित हैं:
- राष्ट्रीय जुड़ाव: यह विषय हमें अपनी जड़ों, संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का अवसर देता है।
- नागरिक कर्तव्य: इसके माध्यम से मैं समाज को बता सकूँगा कि हमारी छोटी-छोटी अच्छी आदतें कैसे देश का ‘सौंदर्य-बोध’ बढ़ा सकती हैं।
- शक्ति-बोध का संचार: इस निबंध के द्वारा मैं देश की उपलब्धियों का वर्णन कर पाठकों में हीनभावना को दूर करने और सामूहिक आत्मविश्वास जगाने का प्रयास करूँगा।
यह विषय न केवल विचारात्मक है, बल्कि यह हमारे भीतर देशभक्ति और उत्तरदायित्व की भावना को भी पुष्ट करता है।
Q.20:
“क्या कोई ऐसी कसौटी भी बनाई जा सकती है, जिससे देश के नागरिकों को आधार बनाकर देश की उच्चता और हीनता को हम तोल सकें?”
रचनाकार के अनुसार इस प्रश्न का उत्तर है- निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया।
- जब कोई चुनाव प्रक्रिया आपके क्षेत्र में शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?
- “जब भी कोई चुनाव हो, ठीक मनुष्य को अपना मत दें”, आपके विचार से एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?
- चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए। (संकेत-विद्यालय में कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)
- यदि आप किसी सभा, क्लब आदि के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या-क्या मुद्दे होंगे?
Solution:
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ के निबंध ‘मैं और मेरा देश’ के आलोक में आपके प्रश्नों के उत्तर निम्नलिखित हैं:
- चुनाव प्रक्रिया की गतिविधियाँ: जब चुनाव शुरू होते हैं, तो क्षेत्र में उत्साह और हलचल बढ़ जाती है। उम्मीदवार घर-घर जाकर जनसंपर्क करते हैं, सभाएँ आयोजित होती हैं, और लाउडस्पीकर व पोस्टरों के माध्यम से प्रचार किया जाता है। लोग सार्वजनिक स्थानों पर उम्मीदवारों के कार्यों और वादों पर चर्चा करते नजर आते हैं।
- अच्छे उम्मीदवार के गुण: लेखक के अनुसार, हमें ‘ठीक मनुष्य’ को मत देना चाहिए। एक अच्छे उम्मीदवार में निम्नलिखित गुण होने चाहिए:
- वह ईमानदार, चरित्रवान और समाज के प्रति सेवाभावी हो।
- वह जाति या धर्म से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता दे।
- उसमें समस्याओं को समझने और उन्हें हल करने की तार्किक क्षमता हो।
- विद्यालय चुनाव का अनुभव: कक्षा प्रतिनिधि (Class Monitor) के चुनाव में मैंने देखा कि कैसे निष्पक्षता जरूरी है। मैंने अपने मित्र के बजाय उस सहपाठी को वोट दिया जो अनुशासन बनाए रखने में सबसे कुशल था, क्योंकि मेरा एक सही वोट पूरी कक्षा के वातावरण को प्रभावित कर सकता था।
- iv. मेरे चुनावी मुद्दे:
यदि मैं किसी सभा या क्लब का उम्मीदवार बनूँ, तो मेरे मुख्य मुद्दे होंगे:- पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना।
- संसाधनों का समान वितरण और स्वच्छता बनाए रखना।
- सभी सदस्यों की समस्याओं को सुनने के लिए एक नियमित मंच तैयार करना।
Q.21:
इस निबंध में किसी भी स्वतंत्र देश में नागरिक के अधिकार और उसके कर्तव्य की बात की गई है। आपकी पाठ्यपुस्तक के प्रारंभिक पृष्ठ पर भारतीय संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकार और कर्तव्य दिए गए हैं। उसे पढ़कर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए।
Solution:
भारतीय संविधान के प्रारंभिक पृष्ठों पर दिए गए मौलिक अधिकार और कर्तव्य किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र की नींव होते हैं। ‘मैं और मेरा देश’ निबंध हमें सिखाता है कि नागरिक का आचरण ही देश की प्रतिष्ठा का पैमाना है।
जब हम कक्षा में इस पर चर्चा करते हैं, तो निम्नलिखित बिंदु उभर कर आते हैं:
- अधिकार और कर्तव्य का संतुलन: संविधान हमें समानता, स्वतंत्रता और गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है, लेकिन ये अधिकार तभी सुरक्षित हैं जब हम अपने कर्तव्यों का पालन करें।
- राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा: निबंध में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाने की जो बात कही गई है, वह हमारे मौलिक कर्तव्यों का ही एक हिस्सा है।
- विविधता में एकता: वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना और देश की संस्कृति का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है, जो देश के ‘सौंदर्य-बोध’ को बढ़ाता है।
निष्कर्षतः, अधिकार हमें शक्ति देते हैं, तो कर्तव्य हमें जिम्मेदार बनाते हैं। जब हम ‘ठीक’ व्यक्ति को वोट देते हैं या सार्वजनिक स्वच्छता रखते हैं, तब हम वास्तव में अपने संवैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे होते हैं।
Q.22:
हमारा पुस्तकालय
आप अपने विद्यालय एवं सार्वजनिक पुस्तकालय में जाते हैं। हो सकता है, आपको कभी कोई पुस्तक फटी हुई मिली हो या उसमें से कुछ पृष्ठ गायब हों अथवा उसमें पेन से निशान लगे हों-
- ऐसा होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
- ऐसा न हो, इसके लिए क्या किया जा सकता है?
- आप पुस्तकालय में किन नियमों का पालन करते हैं, उन नियमों का पालन करना क्यों अनिवार्य है? इस पर अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और लिखिए।
Solution:
पुस्तकालय में पुस्तकों की दुर्दशा नागरिक बोध की कमी को दर्शाती है।
- फटी पुस्तकों के कारण: इसका मुख्य कारण कुछ पाठकों की गैर-जिम्मेदाराना आदतें और ‘सौंदर्य-बोध’ का अभाव है। लोग अक्सर जानकारी चुराने के लिए पृष्ठ फाड़ देते हैं या पढ़ते समय लापरवाही से उन्हें गंदा कर देते हैं।
- रोकथाम के उपाय: पुस्तकों की सुरक्षा के लिए पुस्तकालय में सख्त निगरानी और डिजिटल रिकॉर्ड (CCTV) का उपयोग होना चाहिए। साथ ही, छात्रों में यह जागरूकता लानी चाहिए कि सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान देश का नुकसान है।
- पुस्तकालय के नियम: मैं शांत रहने, पुस्तकों पर निशान न लगाने और उन्हें समय पर लौटाने के नियमों का पालन करता हूँ।
इन नियमों का पालन अनिवार्य है क्योंकि ‘मैं और मेरा देश’ के अनुसार, हमारा निजी व्यवहार ही वैश्विक स्तर पर हमारे राष्ट्र की छवि बनाता है। यदि हम शिष्ट नागरिक बनेंगे, तभी हमारे संस्थान और देश उन्नत कहलाएंगे।
Q.23:
ब्रेल लिपि में पुस्तकें
आपके विद्यालय में रोचक पुस्तकों का भंडार है परंतु आपके ‘दृष्टिबाधित’ सहपाठी स्वयं पढ़कर इनका आनंद नहीं उठा पाते हैं। प्रधानाध्यापक को ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में पत्र लिखिए।
Solution:
सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
[आपके विद्यालय का नाम], [शहर का नाम]विषय: पुस्तकालय हेतु ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने के संदर्भ में।
सप्रेम नमस्ते।
मैं आपका ध्यान विद्यालय के उन ‘दृष्टिबाधित’ सहपाठियों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ, जो आँखों से न देख पाने के कारण पुस्तकालय की रोचक पुस्तकों का आनंद नहीं ले पाते हैं। ‘मैं और मेरा देश’ निबंध हमें सिखाता है कि एक श्रेष्ठ राष्ट्र वह है जहाँ प्रत्येक नागरिक को विकास के समान अवसर प्राप्त हों।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि पुस्तकालय में ब्रेल लिपि वाली पुस्तकें और ऑडियो-बुक्स उपलब्ध कराने की कृपा करें। इससे हमारे ये साथी भी ज्ञान के प्रकाश से जुड़ सकेंगे और स्वयं को हीन महसूस नहीं करेंगे। यह कदम हमारे विद्यालय के ‘सौंदर्य-बोध’ और संवेदनशीलता को और भी बढ़ाएगा।
आशा है कि आप इस महत्वपूर्ण अनुरोध पर शीघ्र विचार करेंगे।
धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी छात्र,
[आपका नाम]कक्षा – [आपकी कक्षा]
दिनांक: 30 अप्रैल, 20XX
Q.24:
कृतज्ञता ज्ञापन
“अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीप जलाए…”
देश के विकास में सभी का सहयोग होता है जो सीमा पर तैनात हैं और जो देश के भीतर हैं, जैसे अध्यापक, किसान, श्रमिक, कलाकार, वैज्ञानिक, अभियंता आदि इन सभी के अमूल्य योगदान के लिए कृतज्ञता ज्ञापन तैयार करके लिखिए।
Solution:
कृतज्ञता ज्ञापन
“अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीप जलाए…” – यह पंक्ति हमें उन सभी देशभक्तों और कर्मयोगियों की याद दिलाती है, जिनके त्याग, परिश्रम और समर्पण से हमारा राष्ट्र आज सशक्त और प्रगतिशील बना है।
हम अपने देश के उन वीर सैनिकों के प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं, जो सीमा पर दिन-रात तैनात रहकर हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उनके साहस और बलिदान के कारण ही हम अपने घरों में सुरक्षित जीवन जी पाते हैं।
इसी प्रकार देश के भीतर कार्य करने वाले अध्यापक, किसान, श्रमिक, कलाकार, वैज्ञानिक और अभियंता भी राष्ट्र-निर्माण में समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्यापक ज्ञान का प्रकाश फैलाकर भविष्य का निर्माण करते हैं। किसान अपनी मेहनत से अन्न उपजाकर देश की जीवनरेखा को बनाए रखते हैं। श्रमिक अपने श्रम से विकास की नींव रखते हैं। कलाकार हमारी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखते हैं। वैज्ञानिक और अभियंता अपने नवाचार और तकनीकी कौशल से देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करते हैं।
इन सभी का योगदान भले ही अलग-अलग क्षेत्रों में हो, परंतु इनका उद्देश्य एक ही है- राष्ट्र की उन्नति और समृद्धि। वास्तव में, राष्ट्र की शक्ति इन सभी के सामूहिक प्रयासों में निहित है।
अतः हम सभी नागरिकों का कर्तव्य है कि हम इनके प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव रखें तथा अपने-अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करके देश के विकास में अपना योगदान दें।
जय हिंद!
Q.25:
विज्ञापन
“ठीक मनुष्य को अपना मत दें।”
उपर्युक्त पंक्ति में चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने का संदेश दिया गया है। आप भी चुनाव में योग्य उम्मीदवार को चुनने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।
Solution:
| आकर्षक विज्ञापन: “ठोस समझ को अपना मत दें” जागरूक मतदाता – सशक्त राष्ट्र क्या आप चाहते हैं एक मजबूत, ईमानदार और विकसित भारत? तो इस बार वोट देने से पहले सोचिए, समझिए और सही उम्मीदवार चुनिए। उम्मीदवार का चरित्र देखें उसके कार्य और उपलब्धियाँ जानें लालच, जाति या भावनाओं में आकर निर्णय न लें याद रखें: आपका एक वोट देश का भविष्य बदल सकता है! “ठोस समझ को अपना मत दें” सही व्यक्ति को चुनें, देश को आगे बढ़ाएँ मतदान दिवस: अवश्य मतदान करें कोई मतदाता न छूटे आपका वोट – आपकी ताकत! |
Q.26:
स्वच्छता और आचरण
“क्या आप कभी केला खाकर छिलका रास्ते में फेंकते हैं…”
निबंध के इस अंश को पुनः पढ़िए। इस प्रकार के और कौन-कौन से आचरण हो सकते हैं जिनसे देश के सौंदर्य को आघात लगता है? इस विषय पर अपने अभिभावकों, सहपाठियों और शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए।
Solution:
इस अंश में लेखक ने बताया है कि हमारे छोटे-छोटे गलत आचरण भी देश के सौंदर्य-बोध को चोट पहुँचाते हैं। ऐसे कई और व्यवहार हैं जिनसे देश की छवि खराब होती है। चर्चा के लिए आप निम्न उदाहरण ले सकते हैं-
ऐसे आचरण जो देश के सौंदर्य को आघात पहुँचाते हैं:
- ऐतिहासिक स्मारकों, दीवारों या सार्वजनिक स्थानों पर अपना नाम लिखना या गंदगी फैलाना
- सड़कों, पार्कों, बस-स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि पर कूड़ा फेंकना
- कहीं भी थूकना या पान-गुटखा की पीक करना
- सार्वजनिक शौचालयों का सही उपयोग न करना
- यातायात नियमों का पालन न करना और सड़क पर अव्यवस्था फैलाना
- तेज आवाज में शोर करना, लाउडस्पीकर का अनुचित उपयोग करना
- पेड़-पौधों को नुकसान पहुँचाना या हरियाली नष्ट करना
- पानी और बिजली जैसी सार्वजनिक संसाधनों की बर्बादी करना
- कतार (लाइन) का पालन न करना और धक्का-मुक्की करना
- सार्वजनिक संपत्ति (बेंच, बस, ट्रेन आदि) को तोड़ना या नुकसान पहुँचाना
चर्चा का निष्कर्ष:
इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट है कि स्वच्छता और अच्छा आचरण केवल व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। यदि हर नागरिक अपने व्यवहार में सुधार करे, तो देश की सुंदरता और संस्कृति दोनों सुरक्षित रह सकती हैं।
Q.27:
संदर्भ में शब्द
नीचे लिखे वाक्यों पर ध्यान दीजिए-
- एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई।
- क्या कोई भूकंप आया था, जिससे दीवार में दरार पड़ गई।
दीवार में पैदा हुई चटक/तरेड़/फाँक/टूटन के लिए
‘दरार’ शब्द का प्रयोग करते हैं। भूकंप आने पर अथवा किसी भी प्रकार के तोड़-फोड़ का कार्य होने पर भवनों की छतों और दीवारों में दरार पड़ जाती है। इस शब्द का प्रयोग ऐसे भी किया जाता है-
- वे बहुत अच्छे मित्र थे। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उनके संबंधों में दरार पड़ गई।
- भेदभाव की भावना सामाजिक एकता में दरार डालती है।
अब इसी प्रकार ‘गाँठ’ शब्द के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-
- “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है, जो नागरिक और देश को एक साथ बाँधती है”
- माला गूँथते समय धागे के एक सिरे पर गाँठ बाँध दीजिए।
इसी प्रकार ‘पानी’ शब्द का प्रयोग देखिए-
- बहुत प्यास लगी है, पानी दीजिए।
- जब उस लड़के की पुस्तक से पन्ने फाड़ने की बात सामने आई तो वह पानी-पानी हो गया।
- इतनी अधिक वर्षा हुई कि चारों ओर पानी-पानी हो गया।
- अब इनके कामों के बारे में और क्या कहा जाए, इनका तो पानी ही उतर चुका है।
अब अपनी पाठ्यपुस्तक में से ऐसे अन्य शब्द छाँटकर लिखिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।
Solution:
इस प्रश्न का उद्देश्य यह समझना है कि एक ही शब्द अलग-अलग संदर्भों में अलग अर्थ देता है। पाठ के आधार पर कुछ और ऐसे शब्द उदाहरण सहित नीचे दिए गए हैं—
1. सिर
- उसके सिर में दर्द है। (शरीर का अंग)
- वह इस काम का सिर है। (मुख्य व्यक्ति/नेता)
2. हाथ
- उसके हाथ में किताब है। (अंग)
- मेरे हाथ बहुत काम हैं। (काम/जिम्मेदारी)
- उसने मेरी मदद का हाथ बढ़ाया। (सहायता)
3. आँख
- उसकी आँखें बहुत सुंदर हैं। (अंग)
- पुलिस की आँखों में धूल झोंक दी। (धोखा देना)
4. मुँह
- बच्चे का मुँह धो दो। (अंग)
- उसने मेरा मुँह काला कर दिया। (अपमानित करना)
5. दिल
- उसका दिल बहुत कमजोर है। (अंग)
- उसका दिल बहुत बड़ा है। (दयालु स्वभाव)
6. रंग
- इस कपड़े का रंग लाल है। (रंग)
- होली में सब रंग में रंग गए। (उत्साह/माहौल)
7. पैर
- उसके पैर में चोट लगी है। (अंग)
- इस काम के पैर नहीं हैं। (आधार/सत्यता नहीं)
निष्कर्ष:
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि शब्द का अर्थ उसके प्रयोग (संदर्भ) पर निर्भर करता है। यही भाषा की विशेषता है, जो उसे अधिक प्रभावशाली और अभिव्यक्तिपूर्ण बनाती है।
Q.28:
मिलते-जुलते भाव वाले ‘शब्द-युग्म’
- “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।”
- “इस तरह एक मनुष्य से भरा-पूरा नगर बनकर में खड़ा हुआ था।”
पहले वाक्य में ‘ममता-दुलार’ और दूसरे वाक्य में ‘भरा-पूरा’ शब्द मिलता-जुलता भाव दे रहे हैं। ये शब्द-युग्म हैं। शब्द-युग्म प्रायः दो शब्दों के समूह होते हैं। ये कई प्रकार से बनते और बनाए जाते हैं। कभी अर्थ की दृष्टि से समान होते हैं, कभी उच्चारण की दृष्टि से समान होते हैं परंतु अर्थ में अंतर होता है, कभी विपरीत भाव भी देते हैं। इस प्रकार के शब्दों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आती है।
आप इस निबंध में से मिलते-जुलते अर्थ वाले और पुनरुक्त (एक ही शब्द को फिर से कहना) शब्द-युग्म छाँटकर लिखिए।
Solution:
निबंध “मैं और मेरा देश” में कई ऐसे शब्द-युग्म (मिलते-जुलते अर्थ वाले तथा पुनरुक्त) प्रयोग हुए हैं, जो भाषा को प्रभावशाली बनाते हैं। उनमें से कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं-
(क) मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द-युग्म:
- ममता–सहारा
- ज्ञान–आनंद
- लाभ–सम्मान
- हीनता–अपमान
- शक्ति–सम्मान
- संस्कृति–सौंदर्य
(ख) पुनरुक्त (एक ही शब्द की पुनरावृत्ति) शब्द-युग्म:
- घर–घर
- जगह–जगह
- छोटी–छोटी
- बड़े–बड़े
- इधर–उधर
- जहाँ–जहाँ
निष्कर्ष:
ऐसे शब्द-युग्मों के प्रयोग से भाषा अधिक सजीव, प्रभावपूर्ण और आकर्षक बन जाती है।
Q.29:
शब्दों की कड़ियाँ/शृंखला
“मैं सोचा करता था कि मेरी मनुष्यता में अब कोई अपूर्णता नहीं रही।”
उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित शब्द ‘अपूर्णता’ में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों का ही प्रयोग चिह्नित किया गया है। इस प्रयोग को समझकर नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग और प्रत्यय शब्द पहचानकर लिखिए-
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
| अपूर्णता | अ | पूर्ण | ता |
(आपकी पाठ्यपुस्तक के ‘क्या लिखूँ?’ पाठ में भी उपसर्ग और प्रत्यय के प्रयोग के विषय में जानकारी दी गई है।)
Solution:
नीचे दिए गए शब्दों में उपसर्ग, मूल शब्द और प्रत्यय को इस प्रकार पहचाना जा सकता है-
| शब्द | उपसर्ग | मूल शब्द | प्रत्यय |
| अलौकिक | अ | लौकिक | – |
| निरक्षरता | निर | अक्षर | ता |
| सम्मानित | सम् | मान | इत |
| अनावश्यक | अन | आवश्यक | – |
| अपमानित | अप | मान | इत |
| अभिमानी | अभि | मान | ई |
नोट:
- जिन शब्दों में प्रत्यय नहीं है, वहाँ (-) दर्शाया गया है।
- उपसर्ग शब्द के प्रारंभ में जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन लाता है, जबकि प्रत्यय शब्द के अंत में जुड़कर नया शब्द बनाता है।
Q.30:
‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’
इस विषय पर परिचर्चा का आयोजन कीजिए और परिचर्चा में उभरकर आए बिंदुओं की रिपोर्ट तैयार कीजिए। रिपोर्ट को पावरप्वांइट प्रस्तुतीकरण या चार्ट के माध्यम से कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
Solution:
नीचे इस विषय पर एक परिचर्चा रिपोर्ट और साथ ही PPT/चार्ट के लिए सामग्री दी जा रही है, जिसे आप सीधे कक्षा में प्रस्तुत कर सकते हैं।
परिचर्चा रिपोर्ट
विषय: ‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है’
परिचय:
इस विषय पर कक्षा में एक परिचर्चा आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने भाग लिया। चर्चा का उद्देश्य देश की वास्तविक अवधारणा को समझना था।
परिचर्चा में उभरकर आए मुख्य बिंदु:
- देश केवल भूमि नहीं है
देश केवल नक्शे पर बनी सीमाओं का नाम नहीं, बल्कि यह लोगों, उनकी भावनाओं और उनकी पहचान का समुच्चय है। - संस्कृति और परंपरा का महत्व
भाषा, वेशभूषा, त्योहार, कला और परंपराएँ मिलकर देश की आत्मा बनाती हैं। - इतिहास और विरासत
देश का गौरव उसके इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और महान व्यक्तियों के योगदान से जुड़ा होता है। - नागरिकों की भूमिका
हर नागरिक अपने व्यवहार, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से देश की छवि बनाता है। - भावनात्मक जुड़ाव
देश के प्रति प्रेम, सम्मान और अपनापन उसे केवल भूमि से बढ़कर एक ‘माँ’ का स्वरूप देता है। - स्वच्छता और अनुशासन
सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता, नियमों का पालन और अच्छे आचरण से देश का सौंदर्य बढ़ता है।
निष्कर्ष:
परिचर्चा से यह निष्कर्ष निकला कि देश एक जीवंत इकाई है, जो अपने नागरिकों के विचारों, संस्कारों और कर्मों से बनती है। इसलिए हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह अपने आचरण से देश का सम्मान बढ़ाए।
Q.31:
“मैं अपने देश का नागरिक हूँ”
नीचे ‘देश’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
देश (हिंदी); देशः, क्षेत्रम् (संस्कृत); देस, देश (पंजाबी); ख़ित्ता, इलाक़ा (उर्दू); दीश, मुलुॅख (कश्मीरी); देशु, देसु (सिंधी); देश (मराठी); देश, प्रदेश (गुजराती); देश (कोंकणी); देश, मुलुक, राष्ट्र (नेपाली); प्रदेश, अञ्चल, राज्य (बांग्ला); देश, राज्य, प्रदेश (असमिया); लैबाक, मफम, लम (मणिपुरी); देश, राज्य, प्रदेश, अंचल (ओड़िआ); प्रदेशमु (तेलुगु); इडम्, पिरदेशम् (तमिल); देशम् (मलयालम); देश (कन्नड़)।
- इनके अतिरिक्त यदि आप ‘देश’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
Solution:
यह प्रश्न भाषा-विविधता को समझने और अपनी मातृभाषा से जुड़ने के लिए है। इसका उत्तर आप इस प्रकार लिख सकते हैं-
(1) ‘देश’ शब्द अन्य भाषाओं में:
- English (अंग्रेज़ी): Country / Nation
- Arabic (अरबी): वतन (Watan)
- Persian (फ़ारसी): मुल्क (Mulk)
- Tamil (यदि अलग रूप): நாடு (Naadu)
- Kannada: ನಾಡು (Naadu)
(आप अपनी जानकारी के अनुसार और भाषाएँ भी जोड़ सकते हैं।)
(2) वाक्य का मातृभाषा में रूप:
मूल वाक्य: “मैं अपने देश का नागरिक हूँ।”
कुछ उदाहरण-
- English: I am a citizen of my country.
- Punjabi: ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਨਾਗਰਿਕ ਹਾਂ।
- Bengali: আমি আমার দেশের একজন নাগরিক।
- Marathi: मी माझ्या देशाचा नागरिक आहे.
- Tamil: நான் என் நாட்டின் குடிமகன்.
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