रीढ़ की हड्डी – NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga includes all the questions with solution given in NCERT Class 9 हिंदी (गंगा) textbook.
NCERT Solutions Class 9
English Kaveri Hindi Ganga Sanskrit Sharada Maths Ganita Manjari Science Exploration Social Understanding Societyरीढ़ की हड्डी – NCERT Solutions
Q.1:
एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
Options:
(1) शरीर के एक आवश्यक अंग का
(2) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
(3) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का ✅
(4) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
Explanation:
एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ में “रीढ़ की हड्डी” केवल शरीर का अंग नहीं है, बल्कि यह हिम्मत, आत्म-सम्मान और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की शक्ति का प्रतीक है। उमा समाज की गलत परंपराओं के सामने झुकती नहीं है और साहस के साथ अपनी बात रखती है।
जब लड़के वाले उसे वस्तु की तरह परखते हैं, तब वह चुप रहने के बजाय विरोध करती है। अंत में वह शंकर से “बैकबोन” (रीढ़ की हड्डी) होने का सवाल उठाती है, जिससे स्पष्ट होता है कि यहाँ “रीढ़ की हड्डी” का अर्थ नैतिक साहस और व्यक्तित्व की दृढ़ता है, न कि केवल शारीरिक अंग।
Q.2:
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
Options:
(1) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
(2) पात्रों की भाषा और हास्य पर
(3) विवाह और अशिक्षा पर
(4) समाज की अनुचित मान्यताओं पर ✅
Explanation:
इस एकांकी में लेखक ने समाज की उन गलत परंपराओं और सोच पर व्यंग्य किया है, जहाँ लड़की को एक वस्तु की तरह देखा और परखा जाता है। लड़के वाले लड़की की शिक्षा, सुंदरता और व्यवहार को अपने अनुसार तय करना चाहते हैं, जबकि लड़के की कमियों को नजरअंदाज करते हैं।
उमा इस मानसिकता का विरोध करती है और यह दिखाती है कि लड़कियों का भी आत्म-सम्मान और अधिकार होते हैं। इस प्रकार यह नाटक दकियानूसी सोच, लड़का-लड़की में भेदभाव और विवाह से जुड़ी अनुचित सामाजिक मान्यताओं पर व्यंग्य करता है।
Q.3:
“घर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
Options:
(1) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता ✅
(2) अनुभव और विवेक की कमी
(3) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
(4) उदासीनता और एकाकीपन
Explanation:
उमा का यह कथन सीधे शंकर के चरित्र और साहस पर प्रश्न उठाता है। “रीढ़ की हड्डी” यहाँ प्रतीक है हिम्मत और नैतिक दृढ़ता का। शंकर पूरे प्रसंग में अपने पिता की गलत बातों का विरोध नहीं करता और चुपचाप उनकी बातों का समर्थन करता है।
इसके अलावा, उमा यह भी बताती है कि शंकर पहले गलत काम करते पकड़ा गया था और वहाँ से डरकर भाग गया, जिससे उसकी कायरता स्पष्ट होती है। इसलिए यह वाक्य शंकर की नैतिक कमजोरी, साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता को उजागर करता है।
Q.4:
“जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
Options:
(1) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
(2) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
(3) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
(4) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना ✅
Explanation:
उमा के कथन से स्पष्ट है कि वह शिक्षा को केवल डिग्री हासिल करने या दिखावे के रूप में नहीं देखती। उसके लिए शिक्षा का सही अर्थ है सोचने-समझने की क्षमता, आत्म-सम्मान और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का साहस। जब वह समाज की गलत परंपराओं का विरोध करती है और निडर होकर अपनी बात रखती है, तो यह उसके स्वतंत्र विचार और आत्मबल को दर्शाता है।
इसलिए उमा की दृष्टि में शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति को मजबूत, जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना है, न कि केवल डिग्री प्राप्त करना।
Q.5:
गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
Options:
(1) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
(2) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं। ✅
(3) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
(4) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
Explanation:
गोपालप्रसाद और रामस्वरूप दोनों ही समाज की पुरानी, रूढ़िवादी मान्यताओं से प्रभावित हैं। गोपालप्रसाद लड़की को केवल उसकी सुंदरता और कम पढ़ाई के आधार पर परखते हैं, जबकि रामस्वरूप भी सच छिपाकर अपनी बेटी को “दिखाने” की कोशिश करते हैं। दोनों ही विवाह को एक लेन-देन या दिखावे की प्रक्रिया बना देते हैं, जहाँ लड़की की भावनाओं और व्यक्तित्व की अनदेखी होती है।
इसलिए स्पष्ट है कि दोनों पात्र दिखावे और परंपरागत सोच के दबाव में काम करते हैं, न कि सच्चे प्रगतिशील विचारों के आधार पर।
Q.6:
इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
Options:
(1) औपचारिक और शुष्क
(2) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण ✅
(3) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
(4) भावुक और संक्षिप्त
Explanation:
इस एकांकी के संवाद बिल्कुल सामान्य बोलचाल की भाषा में हैं, जिससे पात्र और परिस्थितियाँ वास्तविक लगती हैं। साथ ही, कई जगहों पर लेखक ने व्यंग्य का प्रयोग किया है-जैसे गोपालप्रसाद की बातों में, या उमा के तीखे जवाबों में-जो समाज की गलत सोच पर चोट करते हैं।
इसलिए इसकी संवाद शैली स्वाभाविक भी है और व्यंग्य से भरपूर भी, जो इस नाटक को प्रभावशाली बनाती है।
Q.7:
बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
Solution:
बाबू रामस्वरूप का चरित्र बाहरी रूप से आधुनिक दिखता है, लेकिन उनके भीतर गहरी रूढ़िवादी सोच छिपी हुई है। वे एक ओर अपनी बेटी उमा को पढ़ाते-लिखाते हैं, जो आधुनिकता का संकेत है, पर दूसरी ओर विवाह के समय उसकी पढ़ाई छिपाते हैं क्योंकि लड़के वालों को ज्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए। यह उनके अंतर्द्वंद्व को स्पष्ट करता है।
वे दिखावे के लिए घर सजाते हैं, नाश्ते की व्यवस्था करते हैं और उमा को गाना गाने व सजी-धजी होकर आने को कहते हैं, ताकि अच्छा प्रभाव पड़े। लेकिन भीतर से वे भी उसी समाज की सोच को मानते हैं, जहाँ लड़की को परखा जाता है। इस प्रकार रामस्वरूप का व्यवहार दिखावटी आधुनिकता और वास्तविक रूढ़िवादिता के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।
Q.8:
‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
Solution:
एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ में यह प्रतीक दो पात्रों के लिए अलग-अलग अर्थों में प्रयुक्त हुआ है- उमा और शंकर।
उमा के संदर्भ में “रीढ़ की हड्डी” का अर्थ है आत्म-सम्मान, साहस और नैतिक दृढ़ता। वह समाज की गलत परंपराओं के सामने झुकती नहीं, बल्कि निडर होकर उनका विरोध करती है। उसके भीतर अपनी गरिमा की रक्षा करने की शक्ति है, जो उसकी सशक्त व्यक्तित्व को दर्शाती है।
दूसरी ओर, शंकर के लिए “रीढ़ की हड्डी” का अर्थ उसकी कमी को दर्शाता है। वह अपने पिता की गलत बातों का विरोध नहीं करता और स्वयं भी कायरता दिखाता है।
इस प्रकार, उमा में जहाँ “रीढ़” मौजूद है, वहीं शंकर में उसकी कमी दिखाई गई है।
Q.9:
“मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
Solution:
प्रेमा के इस कथन से उस समय की स्त्री-शिक्षा की सीमित और उपेक्षित स्थिति स्पष्ट होती है। वह पढ़ाई-लिखाई को “जंजाल” मानती है, जिससे पता चलता है कि उस दौर में कई लोग, विशेषकर महिलाएँ, शिक्षा के महत्व को ठीक से नहीं समझती थीं। समाज में यह धारणा प्रचलित थी कि लड़कियों को अधिक पढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनका मुख्य कार्य घर-गृहस्थी संभालना माना जाता था।
प्रेमा स्वयं कम पढ़ी-लिखी है, इसलिए वह पुरानी सोच को ही सही मानती है और उमा की उच्च शिक्षा को अनावश्यक समझती है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उस समय स्त्रियाँ शिक्षा से वंचित थीं और उनकी सोच भी उसी अनुसार सीमित रह गई थी।
Q.10:
लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को एकांकी के शीर्षक के रूप में क्यों चुना होगा? यदि आप इस एकांकी का दूसरा शीर्षक रखना चाहें, जो इसकी मुख्य बात को दर्शाए, तो वह क्या होगा और क्यों?
Solution:
लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’* शीर्षक इसलिए चुना है क्योंकि यह पूरे एकांकी की मुख्य भावना को दर्शाता है। यहाँ “रीढ़ की हड्डी” का अर्थ केवल शरीर का अंग नहीं, बल्कि साहस, आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता है। उमा समाज की गलत परंपराओं के सामने डटकर खड़ी होती है, जबकि शंकर में यह दृढ़ता नहीं है। इसलिए यह शीर्षक दोनों पात्रों के स्वभाव का अंतर स्पष्ट करता है।
यदि दूसरा शीर्षक रखना हो, तो वह “आत्म-सम्मान की आवाज़” हो सकता है। यह शीर्षक इसलिए उपयुक्त है क्योंकि पूरी कहानी में उमा अपने आत्म-सम्मान के लिए आवाज उठाती है और समाज की गलत सोच का विरोध करती है। यही इस एकांकी का मुख्य संदेश है।
Q.11:
आप जानते ही हैं कि ‘रीढ़ की हड्डी’ एक एकांकी है। एकांकी में भी एक कहानी ही होती है, लेकिन एकांकी की रूपरेखा कहानी से थोड़ी अलग होती है।
आगे ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी से संबंधित कुछ बिंदु दिए गए हैं। एकांकी में से इन बिंदुओं से संबंधित एक-एक उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
- एकांकी का नाम
- लेखक का नाम
- पात्र
- परिवेश/देश-काल
- रंग-निर्देश/मंच-निर्देश
- संवाद-निर्देश
- समस्या
- संवाद
- मुख्य विचार
- समाधान/परिणाम
Solution:
एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ के आधार पर इन तकनीकी बिंदुओं के उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- एकांकी का नाम: रीढ़ की हड्डी।
- लेखक का नाम: जगदीशचंद्र माथुर।
- पात्र: इस एकांकी में मुख्य पात्र उमा, रामस्वरूप (उमा के पिता), प्रेमा (उमा की माँ), शंकर, गोपालप्रसाद (शंकर के पिता) और रतन (घरेलू सहायक) हैं।
- परिवेश/देश-काल: यह एकांकी 1939 के आसपास के भारतीय समाज की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ मध्यमवर्गीय परिवार में विवाह के लिए लड़की देखने की रस्म चल रही है। दृश्य एक मामूली तरह से सजे हुए कमरे का है।
- रंग-निर्देश/मंच-निर्देश: “(तख्त के रखे जाने की आवाज़ आती है।)” या “(बाबू साहब इस बीच में मेजपोश ठीक करते हैं।)”। ये निर्देश मंच पर होने वाली क्रियाओं को दर्शाते हैं।
- संवाद-निर्देश: पात्र के बोलने के तरीके को बताने वाले निर्देश, जैसे: रामस्वरूप : (ज़रा तेज आवाज़ में) या गोपालप्रसाद : (खँखारकर)।
- समस्या: समाज में स्त्रियों की शिक्षा के प्रति रूढ़िवादी सोच और विवाह के बाज़ार में लड़कियों की स्थिति को वस्तु के समान समझना।
- संवाद: उमा : “क्या लड़कियों के दिल नहीं होता? क्या उन्हें चोट नहीं लगती? क्या वे बेबस भेड़-बकरियाँ हैं, जिन्हें कसाई अच्छी तरह देख-भालकर खरीदते हैं?”।
- मुख्य विचार: स्त्रियों को शिक्षित और सशक्त बनाना तथा समाज की दकियानूसी मान्यताओं और दोहरे मापदंडों पर चोट करना।
- समाधान/परिणाम: उमा द्वारा अपनी शिक्षा और आत्म-सम्मान का पक्ष निडरता से रखना, जिससे गोपालप्रसाद और शंकर अपमानित होकर वहाँ से चले जाते हैं। यह अंत पाठकों को स्त्री-अधिकारों के प्रति जागरूक करता है।
Q.12:
एकांकी की शुरुआत कुछ इस तरह से होती है-
(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा। अंदर के दरवाजे से आते हुए जिन महाशय की पीठ नजर आ रही है, वे अधेड़ उम्र के मालूम होते हैं। एक तख्त को पकड़े हुए पीछे की ओर चलते-चलते कमरे में आते हैं। तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।)
इस रंग-निर्देश द्वारा एकांकी की पृष्ठभूमि की रचना की गई है, जहाँ से एकांकी आगे बढ़ती है। एकांकी में स्थान, परिवेश, सामाजिक स्थिति आदि के विषय में पाठक और निर्देशक को सटीक जानकारी देने के लिए एकांकीकार/नाटककार प्रायः ऐसे रंग-निर्देशों का प्रयोग करता है। मंचन के समय निर्देशक के पास यह छूट होती है कि वह देश-काल और वातावरण के अनुसार मंच-सज्जा, प्रकाश, पात्रों के वस्त्र आदि में आवश्यक परिवर्तन कर सकता है।
अब इस एकांकी को कक्षा में प्रस्तुत करने का समय है। अपने समूह के साथ मिलकर एकांकी के किसी एक दृश्य का चुनाव कीजिए। उसकी तैयारी कीजिए और कक्षा में उसे प्रस्तुत कीजिए।
Solution:
एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का मंचन करने के लिए उमा के प्रवेश और उसके द्वारा गोपालप्रसाद को दिए गए करारे जवाब वाले दृश्य का चुनाव सबसे प्रभावशाली रहेगा।
मंचन की योजना:
- पात्र चयन: समूह के सदस्य उमा, रामस्वरूप, गोपालप्रसाद और शंकर की भूमिकाएँ निभाएँगे।
- मंच सज्जा: मंच पर एक तख्त, दरी और मेजपोश बिछाकर एक मध्यमवर्गीय बैठक का दृश्य बनाया जाएगा। मेज पर चाय की ट्रे और नाश्ता रखा होगा।
- अभिनय: गोपालप्रसाद के पात्र को रोबीली और दकियानूसी आवाज़ में बोलना चाहिए। उमा का पात्र पहले शांत और गर्दन झुकाए हुए मंच पर आएगा, लेकिन अंत में आत्मविश्वास और ऊँचे स्वर में अपनी बात रखेगा।
- परिवर्तन: निर्देशक पात्रों की वेशभूषा में तत्कालीन समाज को दर्शाने के लिए खादी या साधारण सूती वस्त्रों का उपयोग कर सकता है।
यह दृश्य समाज में स्त्री-शिक्षा के महत्व और आत्म-सम्मान को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगा।
Q.13:
“जी हाँ, जाइए, जरूर चले जाइए। लेकिन घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं-यानी बैकबोन, बैकबोन!”
उपर्युक्त वाक्य को ध्यान से पढ़िए। यह वाक्य उमा द्वारा शंकर पर की गई एक टिप्पणी है जो एक व्यंग्य की तरह है।
| ‘टिप्पणी’ किसी व्यक्ति, विषय या घटना पर व्यक्त की गई एक संक्षिप्त राय, स्पष्टीकरण या विचार होता है। यह किसी के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी देने, किसी मुद्दे पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करने या किसी संदर्भ पर विचारों की अभिव्यक्ति होती है, जो पाठक को उस विषय पर एक नया दृष्टिकोण देती है। टिप्पणी की कुछ विशेषताएँ हैं- संक्षिप्तता – इसमें विषय के मुख्य बिंदुओं को कम शब्दों में प्रस्तुत किया जाता है। स्पष्टता – भाषा सरल, स्पष्ट और तर्कपूर्ण होनी चाहिए। व्यक्तिपरकता-इसमें व्यक्ति के विचारों और सुझावों को शामिल किया जाता है। |
अब आप उमा द्वारा शंकर के लिए कही गई उपर्युक्त बात पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए इस पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Solution:
उमा द्वारा शंकर पर की गई यह टिप्पणी केवल एक कटाक्ष नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और चरित्र की शून्यता पर किया गया करारा प्रहार है। इस टिप्पणी के माध्यम से उमा ने समाज को एक नया दृष्टिकोण दिया है कि एक पुरुष के लिए केवल ऊँची शिक्षा या डिग्रियाँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उसका नैतिक साहस और स्वतंत्र अस्तित्व होना भी अनिवार्य है।
टिप्पणी के मुख्य बिंदु:
- चरित्र की दुर्बलता: शंकर का अपना कोई स्वाभिमान नहीं है; वह अपने पिता की गलत और रूढ़िवादी बातों पर भी चुप रहता है।
- कायरता का प्रतीक: उमा उसकी उस कायरता को उजागर करती है जब वह लड़कियों के हॉस्टल के पास पकड़ा गया था और मुँह छिपाकर भागा था।
- व्यंग्यात्मक गहराई: ‘रीढ़ की हड्डी’ (बैकबोन) न होने का अर्थ उसकी शारीरिक बनावट के साथ-साथ उसके दृढ़ चरित्र के अभाव को दर्शाता है।
निष्कर्षतः, उमा की यह स्पष्ट और तर्कपूर्ण बात यह सिद्ध करती है कि शिक्षित होने का अर्थ केवल पढ़ना नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ गलत का विरोध करना है।
Q.14:
“गोपालप्रसाद: भला पूछिए इन अक्ल के ठेकेदारों से कि क्या लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात है।”
एकांकी में उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ एकांकी के पात्रों के व्यवहार में लड़कियों तथा लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि अभिव्यक्त हुई है। अब यह भी लिखिए कि आप इस भिन्नता को किस प्रकार समझते हैं?
Solution:
एकांकी में गोपालप्रसाद के संवादों में लैंगिक भेदभाव स्पष्ट रूप से झलकता है। वे कहते हैं, “मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना,” और तर्क देते हैं कि “मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं”। इसके अलावा, जब वे कहते हैं कि “ऊँची तालीम भी ऐसी ही चीज़ों में से एक है” जो केवल मर्दों के लिए बनी है, तो उनकी संकीर्ण मानसिकता उजागर होती है।
मेरी समझ में यह भिन्नता समाज के दोहरे मापदंडों का प्रतीक है। गोपालप्रसाद जैसे लोग शिक्षा को केवल पुरुषों का विशेषाधिकार मानते हैं और स्त्रियों को केवल घरेलू काम और ‘नखरों’ तक सीमित रखना चाहते हैं। वे विवाह को एक ‘बिज़नेस’ की तरह देखते हैं जहाँ लड़की की शिक्षा को एक दोष की तरह छिपाया जाता है। यह भेदभाव न केवल स्त्रियों के आत्म-सम्मान को चोट पहुँचाता है, बल्कि समाज की प्रगति में भी बाधक है। उमा का विरोध इसी रूढ़िवादी सोच के खिलाफ एक सशक्त आवाज़ है।
Q.15:
“मुझे अपनी इज्जत, अपने मान का खयाल तो है। लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
एकांकी में उमा अपने अधिकार और विचार खुलकर व्यक्त करती है। इससे उमा के व्यक्तित्व के विषय में क्या-क्या पता चलता है? आपके विचार से उसके व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?
Solution:
उमा के इस कथन से उसके साहसी, स्वाभिमानी और मुखर व्यक्तित्व का पता चलता है। वह केवल एक शिक्षित पात्र नहीं, बल्कि आत्म-सम्मान से ओत-प्रोत एक सशक्त महिला है जो स्वयं को ‘भेड़-बकरी’ या ‘फर्नीचर’ समझने वालों को करारा जवाब देना जानती है। वह समाज के दोहरे चरित्र को बेनकाब करने वाली एक निर्भीक युवती है।
मेरे विचार से उमा के व्यक्तित्व में ये विशेषताएँ निम्नलिखित कारणों से आई होंगी:
- उच्च शिक्षा: उमा ने बी.ए. तक शिक्षा प्राप्त की है। शिक्षा ने उसे तर्क करने की शक्ति और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता प्रदान की है।
- पारिवारिक परिवेश: रामस्वरूप ने उसे पढ़ने-लिखने की आज़ादी दी, जिससे उसमें आत्मविश्वास विकसित हुआ। भले ही विवाह के समय वे उसकी शिक्षा छिपाते हैं, लेकिन उसकी परवरिश ने उसे स्वतंत्र विचार रखना सिखाया है।
- नैतिक सुदृढ़ता: उमा का चरित्र नैतिक रूप से मजबूत है, इसलिए वह शंकर जैसे चरित्रहीन व्यक्ति के सामने झुकने के बजाय उसका सच सामने रखने का साहस करती है।
Q.16:
“रतन : बाबूजी, मक्खन!
(सब रतन की तरफ देखते हैं और परदा गिरता है।)”
- एकांकी के अंत में रतन कहता है- “बाबूजी, मक्खन…” और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से एकांकी का अंत क्यों किया होगा?
(संकेत- हास्य, व्यंग्य, टिप्पणी आदि) - एकांकी में यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
Solution:
- लेखक ने रतन के इस संवाद से अंत कर गहरा व्यंग्य किया है। जहाँ घर की बेटी के सम्मान और शिक्षा पर गंभीर बहस चल रही थी, वहाँ रतन का ‘मक्खन’ मांगना समाज की उस संवेदनहीनता को दर्शाता है जो बड़ी समस्याओं को छोड़कर तुच्छ बातों में उलझा रहता है। यह अंत पाठकों को गंभीर सोच में छोड़ देता है।
- यदि परदा दोबारा उठे, तो गोपालप्रसाद और शंकर गुस्से में पैर पटकते हुए बाहर जाते दिखेंगे। रामस्वरूप शर्मिंदगी और हताशा में कुर्सी पर बैठ जाएंगे, जबकि प्रेमा रोती हुई उमा को चुप कराने का प्रयास करेगी। उमा की सिसकियाँ उसकी जीत और समाज की हार का प्रतीक होंगी।
Q.17:
एकांकी में पाँच ऐसे शब्द चुनकर रेखांकित कर लीजिए जो आपके लिए बिल्कुल नए थे। उन शब्दों वाले वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। अब उन शब्दों के अर्थ अपने अनुमान से लिखिए। इसके बाद उनके अर्थ शब्दकोश में से देखकर लिखिए।
Solution:
एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ से चुने गए पाँच नए शब्द और उनके अर्थ निम्नलिखित हैं:
- दकियानूसी: “मुझे बहुत आता है इनके दकियानूसी खयालों पर।”
- अनुमानित अर्थ: पुराने विचार।
- शब्दकोश अर्थ: पुराने ढंग का, संकीर्ण या दबे हुए विचारों वाला।
- तशरीफ़: “इधर तशरीफ़ लाइए- इधर।”
- अनुमानित अर्थ: बैठना।
- शब्दकोश अर्थ: आदर, सम्मान या श्रेष्ठता (सम्मानपूर्वक आगमन)।
- फितरती: “काफी अनुभवी और फितरती महाशय हैं।”
- अनुमानित अर्थ: चालाक।
- शब्दकोश अर्थ: स्वभावगत, प्रकृतिगत या चालबाज।
- ठिठोली: “तुम्हें ठिठोली ही सूझती रहती है।”
- अनुमानित अर्थ: मज़ाक।
- शब्दकोश अर्थ: हँसी-मज़ाक या परिहास।
- गंदुमी: “गंदुमी रंग, छोटा कद।”
- अनुमानित अर्थ: साँवला रंग।
- शब्दकोश अर्थ: गेहुए रंग का।
ये शब्द एकांकी की भाषा को समृद्ध और पात्रों के संवादों को अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।
Q.18:
एकांकी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन वाक्यों में जहाँ-जहाँ मुहावरे आए हैं, उन्हें पहचानकर रेखांकित कीजिए। इन मुहावरों का प्रयोग करते हुए नए वाक्य बनाकर लिखिए-
- “उनके पीछे-पीछे भीगी बिल्ली की तरह रतन आ रहा है-खाली हाथ”
- “लेकिन वह तुम्हारी लाडली बेटी तो मुँह फुलाए पड़ी है।”
- “और तुम उसकी माँ, किस मर्ज की दवा हो?”
- “तुम्हीं ने उसे पढ़ा-लिखाकर इतना सिर चढ़ा रखा है।”
- “मगर तुम तो अभी से सब-कुछ उगले देती हो।”
- “यह लीजिए, आप तो मुझे काँटों में घसीटने लगे।”
- “बाबू रामस्वरूप, आपने मेरी इज्जत उतारने के लिए मुझे यहाँ बुलाया था?”
- “लेकिन इनसे पूछिए कि ये किस तरह अपना मुँह छिपाकर भागे थे।”
Solution:
एकांकी के वाक्यों में प्रयुक्त मुहावरे और उनके नए वाक्य प्रयोग निम्नलिखित हैं:
- भीगी बिल्ली की तरह (डर जाना): शिक्षक को सामने देख शरारती छात्र भीगी बिल्ली बन गया।
- मुँह फुलाए (नाराज़ होना): छोटी बहन खिलौना न मिलने पर मुँह फुलाकर बैठ गई।
- किस मर्ज की दवा होना (अनुपयोगी होना): यदि तुम समय पर काम न आ सके, तो तुम किस मर्ज की दवा हो?
- सिर चढ़ा रखा है (बहुत ढील देना): लाड़-प्यार ने ही आज बच्चों को सिर चढ़ा रखा है।
- उगले देना (सच बता देना): पुलिस की सख्ती के आगे चोर ने सारा राज उगल दिया।
- काँटों में घसीटना (मुसीबत में डालना/शर्मिंदा करना): मेरी प्रशंसा करके आप मुझे काँटों में घसीट रहे हैं।
- इज्जत उतारना (अपमानित करना): किसी निर्दोष की सरेआम इज्जत उतारना अपराध है।
- मुँह छिपाकर भागना (शर्मिंदा होकर भागना): परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने पर छात्र मुँह छिपाकर भाग गया।
Q.19:
“बाप सेर है तो लड़का सवा सेरा”
एकांकी में इस कहावत का प्रयोग रामस्वरूप द्वारा गोपालप्रसाद और शंकर की नकारात्मक प्रवृत्ति का उल्लेख करने के लिए किया गया है। लेकिन इस कहावत का प्रयोग सकारात्मक अर्थ में भी किया जा सकता है। अब आप इस नए प्रयोग से वाक्य बनाकर लिखिए।
Solution:
एकांकी में इस कहावत का प्रयोग गोपालप्रसाद और शंकर की चालाकी और दकियानूसी सोच को दर्शाने के लिए किया गया है। जहाँ पिता (गोपालप्रसाद) चतुर और पुराने खयालों वाला है, वहीं बेटा (शंकर) उनसे भी दो कदम आगे यानी ‘सवा सेर’ है।
सकारात्मक अर्थ में इस कहावत का तात्पर्य यह है कि पुत्र अपने पिता के गुणों, कौशल या उपलब्धियों में उनसे भी बेहतर सिद्ध हो।
सकारात्मक प्रयोग के उदाहरण:
- खेल के क्षेत्र में: “सुनील गावस्कर महान बल्लेबाज थे, लेकिन उनके बेटे ने अपने पहले ही मैच में शतक लगाकर सिद्ध कर दिया कि बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।“
- व्यापार के क्षेत्र में: “सेठ जी ने शून्य से व्यापार शुरू किया था, पर उनके पुत्र ने अपनी बुद्धिमत्ता से उसे वैश्विक स्तर पर पहुँचा दिया; सच है कि बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।“
इस प्रकार, यह कहावत अगली पीढ़ी की श्रेष्ठता और प्रगति का प्रतीक बन जाती है।
Q.20:
मान लीजिए कि आप एक संवाददाता हैं और आपको उमा की कहानी का पता चलता है। अब आप उमा तथा अन्य पात्रों का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष दर्शकों के सामने प्रस्तुत कीजिए।
Solution:
संवाददाता रिपोर्ट:
नमस्कार! मैं आज एक ऐसी साहसी युवती की कहानी लेकर आया हूँ, जिसने समाज के दोहरे मापदंडों को आईना दिखाया है। आइए, मिलते हैं उमा और इस घटना से जुड़े अन्य पात्रों से।
उमा: “मेरा मानना है कि शिक्षा कोई चोरी नहीं है। क्या हम लड़कियाँ केवल नुमाइश की वस्तु हैं? मैंने बी.ए. करके अपने मान और आत्मबल को पहचाना है।”
बाबू गोपालप्रसाद: “साहब, हमें तो मैट्रिक पास बहू चाहिए थी। पढ़ाई-लिखाई मर्दों का काम है, औरतों को तो बस गृहस्थी संभालनी चाहिए।”
रामस्वरूप: “मैं अपनी बेटी की शिक्षा को लेकर दुविधा में था। समाज के डर से मैंने सच छिपाया, पर आज उमा के साहस ने मेरी आँखें खोल दी हैं।”
निष्कर्ष: यह घटना हमें सिखाती है कि रीढ़ की हड्डी केवल शरीर का अंग नहीं, बल्कि स्वाभिमान का प्रतीक है। उमा ने सिद्ध कर दिया कि एक शिक्षित नारी ही समाज की असली ‘बैकबोन’ है।
Q.21:
मान लीजिए कि आप उमा के घर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं जब उसके घर में शंकर आया था। इस पूरे घटनाक्रम को जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) की तरह प्रस्तुत कीजिए।
Solution:
लाइव रिपोर्टिंग:
नमस्कार! मैं इस वक्त रामस्वरूप जी के बैठक से सीधा प्रसारण कर रहा हूँ। यहाँ का माहौल काफी तनावपूर्ण है। कुछ ही देर पहले गोपालप्रसाद जी और उनके सुपुत्र शंकर यहाँ अपनी होने वाली बहू को देखने आए थे।
दृश्य अभी बदला है- पढ़ी-लिखी उमा ने अपनी चुप्पी तोड़कर शंकर की पोल खोल दी है। उमा ने स्पष्ट शब्दों में शंकर के चरित्र और उनकी ‘बैकबोन’ (रीढ़ की हड्डी) के अभाव पर सवाल उठाए हैं। वह निडरता से बता रही है कि उसने बी.ए. पास किया है और वह कोई ‘भेड़-बकरी’ नहीं है।
गोपालप्रसाद जी इस अपमान से आगबबूला होकर अपनी छड़ी लेकर बाहर की ओर भाग रहे हैं। शंकर का चेहरा उतरा हुआ है और वह मुँह छिपाने की कोशिश कर रहा है। आज इस घर में दकियानूसी सोच की करारी हार और स्त्री-शिक्षा के आत्म-सम्मान की बड़ी जीत हुई है।
Q.22:
“मक्खन वाले की दुकान दूर है”
नीचे ‘मक्खन’ शब्द के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित कुछ भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्दों की सूची दी गई है।
मक्खन (हिंदी); नवनीतम् (संस्कृत); मक्खण (पंजाबी); मक्खन (उर्दू); ठॅन्य (कश्मीरी); मखणु (सिंधी); लोणी (मराठी); माखण, नवनीत (गुजराती); लोणी (कोंकणी); नौनी, माखन (नेपाली); माखन, ननी (बांग्ला); माखन (असमिया); माखोन (मणिपुरी); लहुणी, मक्खन (ओड़िआ); वेन्नै (तेलुगु); वेर्ण्णय् (तमिल); वेण्ण (मलयालम); वेण्णे (कन्नड़)।
- इनके अतिरिक्त यदि आप ‘मक्खन’ शब्द को किसी और भाषा में भी जानते हैं तो उस भाषा में भी लिखिए।
- उपर्युक्त वाक्य को अपनी मातृभाषा में भी लिखिए।
Solution:
भारत की भाषाई विविधता वास्तव में अद्भुत है। दिए गए शब्दों के अतिरिक्त, ‘मक्खन’ को कुछ अन्य भाषाओं और बोलियों में इस प्रकार कहा जाता है:
- मैथिली: माखन
- ब्रजभाषा: माखन या नैनू
- भोजपुरी: नेनुआ या मक्खन
- अंग्रेजी (English): बटर (Butter)
एकांकी में प्रयुक्त वाक्य “मक्खन वाले की दुकान दूर है” को कुछ क्षेत्रीय भाषाओं (मातृभाषाओं) में इस प्रकार लिखा जा सकता है:
- तेलुगु: వెన్న అమ్మేవాడి షాపు చాలా దూరంలో ఉంది (Venna ammevadi shopu chala dooramlo undi)。
- हिंदी (खड़ी बोली): मक्खन वाले की दुकान दूर है।
- मराठी: लोणीवाल्याचे दुकान लांब आहे (Loniwalyache dukan laamb aahe)।
यह भाषाई संगम हमें भारत की ‘अनेकता में एकता’ का अनुभव कराता है, जहाँ एक ही वस्तु को अलग-अलग ध्वनियों और लिपियों में बड़े प्यार से पुकारा जाता है।
Q.23:
नीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करके आप एकांकी विधा और रीढ़ की हड्डी एकांकी के विषय में और अधिक जान-समझ सकते हैं-
एकांकी
https://www.youtube.com/watch?v=JKHLpQ4p534
रीढ़ की हड्डी
https://www.youtube.com/watch?v=6T6Tnn3Eg1w
Solution:
दिए गए लिंक एकांकी विधा और ‘रीढ़ की हड्डी’ को गहराई से समझने के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।एकांकी विधा (Link 1):
यह लिंक आपको ‘एकांकी’ के तकनीकी पक्षों से परिचित कराता है। एकांकी का अर्थ है ‘एक अंक वाला नाटक’। इसमें कम पात्र, एक ही मुख्य घटना और संक्षिप्त संवादों के माध्यम से किसी गंभीर समस्या को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
रीढ़ की हड्डी (Link 2):
यह लिंक जगदीशचंद्र माथुर की इस कालजयी रचना का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करता है। इसके माध्यम से आप उमा के साहस, गोपालप्रसाद की दकियानूसी सोच और शंकर की चारित्रिक दुर्बलता को बेहतर ढंग से देख और सुन सकते हैं। दृश्य रूप में देखने से एकांकी के ‘रंग-निर्देश’ और पात्रों के ‘हाव-भाव’ अधिक स्पष्ट हो जाते हैं। इन कड़ियों की सहायता से आप समझ पाएंगे कि किस प्रकार एक छोटा सा नाटक समाज के ‘रीढ़ की हड्डी’ यानी आत्म-सम्मान को जागृत करने की क्षमता रखता है।
NCERT Solutions Class 9 Hindi Ganga
- दो बैलों की कथा
- क्या लिखूँ
- संवादहीन
- ऐसी भी बातें होती हैं
- आखिरी चट्टान तक
- रीढ़ की हड्डी
- मैं और मेरा देश
- रैदास के पद
- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
- भारति, जय, विजयकरे
- झाँसी की रानी
- घर की याद
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