Swadesh – NCERT Solutions Class 8 Hindi (Malhar) includes all the questions with solutions given in the NCERT Class 8 Hindi (Malhar).
NCERT Solutions Class 8
English Poorvi Hindi Malhar Maths Ganita Prakash Science Curiosity Social Exploring SocietySwadesh – NCERT Solutions
Q.1: “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस पंक्ति में हृदय के पत्थर होने से तात्पर्य है-
- सामाजिकता से
- संवेदनहीनता से
- कठोरता से
- नैतिकता से
Solution:
- संवेदनहीनता से
- कठोरता से
Q.2: निम्नलिखित में से कौन-सा विषय ‘स्वदेश’ कविता का मुख्य भाव है?
Options:
(1) देश की प्रगति
(2) देश के प्रति प्रेम
(3) देश की सुरक्षा ✅
(4) देश की स्वतंत्रता
Explanation:
कविता “स्वदेश” में कवि व्यक्ति के देशप्रेम, समर्पण, और कर्तव्यनिष्ठा को सबसे बड़ा मूल्य मानता है। वह कहता है कि जिस हृदय में स्वदेश के प्रति प्रेम नहीं है, वह पत्थर के समान है। कवि ऐसे जीवन को व्यर्थ बताता है जिसमें देश के लिए कोई भावना, जोश या बलिदान का जज्बा न हो। वह व्यक्ति जो अपने देश के उत्थान और उद्धार के लिए कुछ नहीं करता, उसकी कोई सार्थकता नहीं है।
Q.3: “हम हैं जिसके राजा-रानी”- इस पंक्ति में ‘हम’ शब्द किसके लिए आया है? ‘स्वदेश’ कविता के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Options:
(1) देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए
(2) देश की शासन व्यवस्था के लिए
(3) देश के समस्त नागरिकों के लिए ✅
(4) देश के सभी प्राणियों के लिए
Explanation: देश के समस्त नागरिकों के लिए
Q.4: ‘स्वदेश’ कविता के अनुसार कौन-सा हृदय पत्थर के समान है?
Options:
(1) जिसमें साहस की कमी है
(2) जिसमें स्नेह का भाव नहीं है
(3) जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है ✅
(4) जिसमें स्फूर्ति और उमंग नहीं है
Explanation: जिसमें देश-प्रेम का भाव नहीं है
Q.5: हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
Solution:
- संवेदनहीनता और कठोरता से तात्पर्य है कि ऐसा हृदय दूसरों की पीड़ा या देश की चिंता नहीं करता। इसीलिए उसे “पत्थर” कहा गया है।
- कविता में बार-बार “स्वदेश” के लिए प्रेम, भाव, त्याग और कर्तव्य की बात की गई है, इसलिए इसका मुख्य भाव देशभक्ति ही है।
- “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति देश की जनता की गरिमा दर्शाती है, अतः ‘हम’ शब्द देश के सभी नागरिकों के लिए प्रयुक्त हुआ है।
- कवि स्पष्ट कहते हैं- “वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं”, अतः ऐसा हृदय ही पत्थर समान है।
Q.6: कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं। उन पंक्तियों के भाव या संदर्भ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। पंक्तियों का उनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 |
|---|---|
| 1. जिसने साहस को छोड़ दिया, वह पहुँच सकेगा पार नहीं। | i. जिस देश की ज्ञान-संपदा से समूचा विश्व प्रभावित है। |
| 2. जो जीवित जोश जगा न सका, उस जीवन में कुछ सार नहीं। | ii. जिस प्रकार युद्ध में तोप और तलवार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार मनुष्य की प्रगति के लिए साहस और इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है। |
| 3. जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं, जिस पर है दुनिया दीवानी। | iii. जिसने किसी कार्य को करने का साहस छोड़ दिया हो वह किसी लक्ष्य को प्राप्त नर्हीं कर सकता। |
| 4. सब कुछ है अपने हाथों में, क्या तोप नहीं तलवार नहीं। | iv. जो स्वयं के साथ ही दसरों को भी प्रेरित और उत्साहित नहीं कर सकते उनका जीवन निष्फल और अर्थहीन है। |
Solution: (1) – (iii), (2) – (iv), (3) – (i), (4) – (ii)
Q.7: कविता से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “निश्चित है निस्संशय निश्चित,
है जान एक दिन जाने को।
है काल-दीप जलता हरदम,
जल जाना है परवानों को।”
(ख) “सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।
वह हृदय नहीं है, पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।। ”
(ग) “जो भरा नहीं है भावों से,
बहती जिसमें रस-धार नहीं।
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं॥”
Solution:
(क) यह पंक्तियाँ जीवन की नश्वरता को दर्शाती हैं। कवि कहते हैं कि मृत्यु निश्चित है, इसलिए जीवन को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। जैसे दीपक जलता है और परवाना उसकी लौ में जलकर अपनी आहुति देता है, वैसे ही हमें देश के लिए बलिदान देने को तैयार रहना चाहिए।
(ख) इन पंक्तियों में कवि कहता है कि मनुष्य के पास शक्ति, साधन और साहस सब कुछ है, लेकिन अगर उसमें देश-प्रेम नहीं है, तो उसका हृदय पत्थर के समान है। यानी शक्तिशाली होकर भी देश के लिए प्रेम और भावना नहीं है तो वह व्यर्थ है।
(ग) कवि यहाँ कहता है कि एक ऐसा हृदय जिसमें भावनाएँ नहीं हैं, जो दूसरों के लिए न बहता है, वह वास्तव में हृदय नहीं बल्कि पत्थर है। विशेष रूप से, यदि उसमें देश के प्रति प्रेम नहीं है, तो वह संवेदनहीन और निष्ठुर है।
Q.8: “हम हैं जिसके राजा-रानी” पंक्ति में राजा-रानी किसे और क्यों कहा गया है? ‘स्वदेश’ कविता के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution:
इस पंक्ति में ‘हम’ से तात्पर्य देश के नागरिकों से है। उन्हें ‘राजा-रानी’ इसलिए कहा गया है क्योंकि यह देश हमारा है, हम इसके स्वामी हैं और इसमें हमें गरिमा और अधिकार प्राप्त हैं। यह पंक्ति आत्मसम्मान और नागरिक गरिमा को दर्शाती है।
Q.9: ‘संसार-संग’ चलने से आप क्या समझते हैं? जो व्यक्ति “संसार-संग” नहीं चलता, संसार उसका क्यों नहीं हो पाता है? ‘स्वदेश’ कविता के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution:
समाज और समय के साथ आगे बढ़ना, बदलावों को अपनाना और जागरूक रहना। जो व्यक्ति “संसार-संग” नहीं चलता, वह पीछे छूट जाता है, उसकी सोच सीमित हो जाती है और वह दुनिया की प्रगति से कट जाता है।
Q.10: “उस पर है नहीं पसीजा जो/क्या है वह भू का भार नहीं!” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? बताइए। ‘स्वदेश’ कविता के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution:
जो व्यक्ति अपने देश के लिए नहीं पिघलता, उसमें देशभक्ति की भावना नहीं है, वह धरती पर बोझ समान है। कवि ऐसे लोगों को व्यर्थ और अर्थहीन बताते हैं।
Q.11: ‘स्वदेश’ कविता में देश-प्रेम के लिए बहुत-सी बातें आई हैं। आप ‘देश-प्रेम’ से क्या समझते हैं? बताइए।
Solution:
देश के लिए प्रेम, समर्पण, त्याग, ईमानदारी और कर्तव्य भावना।
देश-प्रेम का अर्थ केवल भावुकता नहीं, बल्कि अपने कर्तव्यों को निभाना, देश की सेवा करना, और हर संकट में देश के लिए खड़ा रहना है।
Q.12: यह रचना एक आह्वान गीत है जो हमें देश-प्रेम के लिए प्रेरित और उत्साहित करती है। इस रचना की अन्य विशेषताएँ ढूँढ़िए और लिखिए।
Solution:
इस रचना की अन्य विशेषताएँ:
– यह एक आह्वान गीत है जो प्रेरणा देता है।
– इसमें देशभक्ति, भावना, कर्तव्य-बोध, और बलिदान की भावना प्रमुख है।
– यह कविता सशक्त भाषा, लयबद्ध शैली और अनुप्रास जैसे अलंकारों से सजी है।
– कवि ने प्रतीकात्मक भाषा (जैसे दीपक, परवाना, तोप, तलवार आदि) का सुंदर प्रयोग किया है।
– यह रचना नैतिक बल, साहस, और जागरूक नागरिकता की प्रेरणा देती है।
Q.13: “जिसने कि खजाने खोले हैं” अनुमान करके बताइए कि इस पंक्ति में किस प्रकार के खजाने की बात की गई होगी?
Solution:
इस पंक्ति में ‘खजाने’ का तात्पर्य देश की संपदा और सांस्कृतिक विरासत से है। इसमें शामिल हो सकते हैं:
– प्राकृतिक संसाधन (खनिज, जल, वन आदि)
– ज्ञान और शिक्षा की परंपरा
– महान व्यक्तित्वों की उपलब्धियाँ
– कला, साहित्य, विज्ञान और इतिहास की धरोहरें
Q.14: “जिसकी मिट्टी में उगे-बढ़े” पंक्ति में ‘उगे-बढ़े’ किसके लिए और क्यों कहा गया होगा? ‘स्वदेश’ कविता के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution:
‘उगे-बढ़े’ शब्द का प्रयोग हम नागरिकों (या देशवासियों) के लिए किया गया है। क्योंकि हम सभी का जन्म, पालन-पोषण और विकास इस देश की भूमि पर ही हुआ है। यह पंक्ति देश से हमारे गहरे संबंध और ऋण को दर्शाती है।
Q.15: “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति में ‘हृदय’ के लिए ‘पत्थर’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया होगा? ‘स्वदेश’ कविता के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution:
यहाँ ‘पत्थर’ का प्रयोग संवेदनहीनता और कठोरता को व्यक्त करने के लिए किया गया है। जिस व्यक्ति में देश के लिए भावनाएँ नहीं हैं, जो देश के लिए न कुछ सोचता है, न करता है- उसका हृदय भावशून्य, निष्ठुर है, इसलिए उसे ‘पत्थर’ कहा गया है।
Q.16: कल्पना कीजिए कि पत्थर आपको अपनी कथा बता रहा हो तो आपसे क्या-क्या बातें करेगा और आप उसे क्या-क्या कहेंगे?
(संकेत- पत्थर- जब में नदी में था तो नदी की धारा मुझे बदलती भी थी…)
Solution:
पत्थर कहेगा:
“जब मैं नदी में था, तब पानी की धार ने मुझे गोल-मटोल बना दिया।
पहाड़ों से लुढ़कते हुए मैंने समय की चोटें सहीं।
किसी दिन मैं मंदिर की सीढ़ी बना, किसी दिन किसी इमारत की नींव।
लेकिन कुछ लोगों ने मुझे नफरत और हिंसा के लिए भी इस्तेमाल किया।”
मैं पत्थर से कहूँगा:
“तुम सहनशील हो, मजबूत हो- तुमने समय को झेला है।
पर अब मैं तुम्हें ऐसे काम में लगाऊँगा, जिससे शांति, कला और सेवा फैले।
तुम नफरत का हथियार नहीं, प्रेम और निर्माण का आधार बनो।”
Q.17: देश-प्रेम की भावना देश की सुरक्षा से ही नहीं, बल्कि संरक्षण से भी जुड़ी होती है। अनुमान करके बताइए कि देश के किन-किन संसाधनों या वस्तुओं आदि के संरक्षण की आवश्यकता है और क्यों?
Solution:
देश-प्रेम का संबंध केवल युद्ध से नहीं बल्कि देश के संसाधनों की रक्षा से भी है। इनमें शामिल हैं:
- जल स्रोत
- नदियाँ, झीलें, वर्षा जल
- वन और वन्य जीव
- जैव विविधता
- संस्कृति और विरासत – ऐतिहासिक स्मारक, भाषाएँ, परंपराएँ
- प्राकृतिक संसाधन – कोयला, लोहा, खनिज आदि
- पर्यावरण – वायु, मिट्टी, जलवायु
- शिक्षा और ज्ञान – विद्यालय, पुस्तकालय, विश्वविद्यालय
Q.18: “जिसकी मिट्टी में उगे बढ़े,
पाया जिसमें दाना-पानी।
हैं माता-पिता बंधु जिसमें,
हम हैं जिसके राजा-रानी।”
इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए।
‘दाना-पानी’ और ‘राजा-रानी’ इन शब्दों की अंतिम ध्वनि एक-सी है। इस विशेषता को ‘तुक मिलाना’कहते हैं। अब नीचे दिए गए प्रश्नों पर पाँच-पाँच के समूह में मिलकर चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए।
(क) शब्दों के तुक मिलाने से कविता में क्या विशेष प्रभाव पड़ा है?
(ख) कविता को प्रभावशाली बनाने के लिए और क्या-क्या प्रयोग किए गए हैं?
Solution:
(क) – कविता में लय और संगीतात्मकता आती है।
– पाठकों या श्रोताओं को याद रखने में आसानी होती है।
– कविता में मनोरंजन और आकर्षण बढ़ता है।
– तुकबंदी के कारण भाव और विचार अधिक प्रभावशाली ढंग से व्यक्त होते हैं। उदाहरण: दाना-पानी / राजा-रानी – यह जोड़ी कविता को सुंदर और गेय बनाती है।
(ख) – कविता को प्रभावशाली बनाने के अन्य प्रयोग:
– प्रतीकात्मक भाषा
– जैसे ‘पत्थर’, ‘परवाना’, ‘तोप-तलवार’
– भावनात्मक अपील
– देशभक्ति, त्याग, साहस को जगाना
– पुनरावृत्ति
– “वह हृदय नहीं है पत्थर है” पंक्ति बार-बार आती है जिससे विचार गहराता है।
– आह्वान शैली
– कविता पाठकों को प्रेरित करती है
– लय और गति
– कविता की भाषा सरल, प्रवाहमयी और तेज़ है जो संदेश को ताक़त देती है।
Q.19: देश-प्रेम से जुड़े अपने विचारों को आधार बनाते हुए कविता को आगे बढ़ाइए-
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
_____________________________
_____________________________
_____________________________
Solution:
वह हृदय नहीं है पत्थर है,
हर साँस में गौरव गूंजे,
हम सब एक हैं, भारत एक है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
मिटे हर भय, हर विकार।
यही हमारा अटल विचार।
जो माटी का ऋण भूल गया,
देशप्रेम की ज्वाला जागे,
मिलकर गढ़ें नया सवेरा,
उसको कोई अधिकार नहीं।
अंधेरे का हो संहार।
सृष्टि करे जय-जयकार।
Q.20: नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘स्वदेश’ से जुड़े शब्द अपने समूह में चर्चा करके लिखिए। फिर मित्रों से मिलाकर अपनी सूची बढ़ाइए –
Solution:

Q.21: विराम चिह्नों को समझें
“जो चल न सका संसार-संग”
“बहती जिसमें रस-धार नहीं”
“पाया जिसमें दाना-पानी”
“हैं माता-पिता बंधु जिसमें”
“हम हैं जिसके राजा-रानी”
“जिससे न जाति-उद्धार हुआ”
कविता में आई हुई उपर्युक्त पंक्तियों को ध्यानपूर्वक पढ़िए। इनमें कुछ शब्दों के बीच एक चिह्न (-) लगा है। इसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक चिह्न दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। कविता में संदर्भ के अनुसार योजक चिह्नों के स्थान पर का, की, के और में से कौन-से शब्द जोड़ेंगे जिससे अर्थ स्पष्ट हो सके। लिखिए। (संकेत ‘जो चल न सका संसार के संग’)
Solution:

Q.22: शब्द-मित्र
“है जान एक दिन जाने को”
“है काल-दीप जलता हरदम”
उपर्युक्त पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों में ‘है’ शब्द पहले आया है जिसके कारण कविता में लयात्मकता आ गई है। यदि है’ का प्रयोग पंक्ति के अंत में किया जाए तो यह गद्य जैसी लगने लगेगी, जैसे-
‘जान एक दिन जाने को है।’
‘काल-दीप हरदम जलता है।’
- अब आप कविता में से ऐसी पंक्तियों को चुनिए जिनमें ‘है’ शब्द का प्रयोग पहले हुआ है। चुनी हुई पंक्तियों में शब्दों के स्थान बदलकर पुनः लिखिए।
- अब नीचे दी गई पंक्तियों में ‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करके पंक्तियों को पुनः लिखिए और देखिए कि इससे पंक्तियों के सौंदर्य में क्या परिवर्तन आया है। अपने साथियों से चर्चा कीजिए।
“जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।।”
Solution:
- है जान एक दिन जाने को। →→ बदली हुई पंक्तिः जान एक दिन जाने को है।
- है काल-दीप जलता हरदम →→ बदली हुई पंक्तिः काल-दीप हरदम जलता है।
अब कविता से और पंक्तियाँ चुनिएः
- है जान एक दिन जाने को। →→जान एक दिन जाने को है।
- है काल-दीप जलता हरदम। →→काल-दीप हरदम जलता है।
- हैं माता-पिता बंधु जिसमें →→माता-पिता बंधु जिसमें हैं।
- है सब कुछ अपने हाथों में →→सब कुछ अपने हाथों में है।
मूल पंक्तिः
- “जिस पर ज्ञानी भी मरते हैं,
जिस पर है दुनिया दीवानी।”
‘है, हैं’ शब्द का प्रयोग पहले करकेः
- “हैं ज्ञानी भी जो उस पर मरते,
है दीवानी दुनिया जो उस पर।”
परिवर्तन और सौंदर्य पर चर्चाः
- जब ‘है, हैं’ को पहले रखा गया, तो लयात्मकता बढ़ी, नाटकीयता आई और काव्य-शैली अधिक प्रभावशाली बनी।
- यह प्रयोग कविता को गीतात्मक और भावप्रधान बनाता है।
Q.23: कविता से चुनकर कुछ शब्द निम्न तालिका में दिए गए हैं। दिए गए शब्दों से इनके समानार्थी शब्द ढूँढ़कर तालिका में दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।
Solution:

Q.24: “वह हृदय नहीं है पत्थर है,
जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”
इस कविता का शीर्षक है ‘स्वदेश’। कई बार कवि कविता की किसी पंक्ति को ही कविता का शीर्षक बनाते हैं। यदि आपको भी इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो तो आप कौन-सी पंक्ति चुनेंगे और क्यों?
Solution:
कविता का शीर्षक- वैकल्पिक पंक्ति चयन और कारण
यदि मुझे इस कविता की किसी एक पंक्ति को चुनकर नया शीर्षक देना हो, तो मैं चुनूँगाः
“वह हृदय नहीं है पत्थर है”
कारणः
- प्रभावशाली और दोहराई गई पंक्ति: यह पंक्ति कविता में बार-बार आती है, जो इसे केंद्र बिंदु बनाती है। इससे कवि का मुख्य संदेश – देशभक्ति की अनुपस्थिति में मनुष्य का हृदय निष्ठुर हो जाता है – जोरदार ढंग से उभरता है।
- भावनात्मक गहराई: यह पंक्ति पाठक के मन में झकझोरने वाला प्रभाव छोड़ती है, जो कविता के भाव को मजबूत बनाता है।
- देश-प्रेम का केंद्रीय संदेश: पूरी कविता का मूल यही है कि स्वदेश-प्रेम ही जीवन को सार्थक बनाता है, और इस पंक्ति में यह बात सीधे, तीखे और मार्मिक तरीके से व्यक्त हुई है।
इसलिए “वह हृदय नहीं है पत्थर है” इस कविता के लिए एक उपयुक्त और अर्थपूर्ण वैकल्पिक शीर्षक हो सकता है।
Q.25: “सब कुछ है अपने हाथों में,
क्या तोप नहीं तलवार नहीं।”
देश की सीमा पर सैनिक सुरक्षा प्रहरी की भाँति खड़े रहते हैं। वे बुरी भावना से अतिक्रमण करने वाले का सामना तोप, तलवार, बंदूक आदि से करते हैं।
आप बताइए कि निम्नलिखित स्वदेश प्रेमियों के अस्त्र-शस्त्र क्या होंगे?
- विद्यार्थी ________
- अध्यापक ________
- कृषक ________
- चिकित्सक ________
- वैज्ञानिक ________
- श्रमिक ________
- पत्रकार ________
Solution:

Q.26: कक्षा में सभी विद्यार्थी अपनी-अपनी भाषा में देश-प्रेम से संबंधित कविताओं और गीतों का संकलन करें।
Solution:
हिंदी:
- “सारे जहाँ से अच्छा” – मोहम्मद इक़बाल
- “जन गण मन” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
- “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा” – श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’
गुजराती:
- “जय हिंद! जय हिंद!” – झवेरचंद मेघाणी
- “હું છું ભારતીય” (मैं भारतीय हूँ) – आधुनिक देशभक्ति रचना
मराठी:
- “झेंडा उंचा राहिला पाहिजे” – वि. स. खांडेकर
- “माझा देश महान” – देशभक्ति गीत
बंगाली:
- “आमार सोनार बांगला” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
- “एकला चलो रे” – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
तमिल:
- “தமிழா தமிழா” (तमिऴा तमिऴा) – लोकप्रिय तमिल देशभक्ति गीत
- “விடுதலை விடுதலை” (विदुथलै विदुथलै) – स्वतंत्रता गीत
Q.27: किसी एक गीत की कक्षा में संगीतात्मक प्रस्तुति भी करें।
Solution:
कक्षा में विद्यार्थी निम्न में से किसी एक गीत को वाद्य यंत्रों या तालियों के साथ गा सकते हैं:
- “सारे जहाँ से अच्छा”: यह गीत सरल, लोकप्रिय और भावपूर्ण है।
- “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा”: समूह गायन के लिए उपयुक्त है।
- क्षेत्रीय गीत: कोई विद्यार्थी अपनी मातृभाषा का देशभक्ति गीत गाकर प्रस्तुति दे सकता है।
Q.28: राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा झंडा) देश का सम्मान है। किसी एक दिन सोने से पहले अपने पूरे दिन के कार्यों को याद कीजिए और विचार कीजिए कि आपके किन कार्यों से तिरंगा झंडा उदास हुआ होगा और किन कार्यों से तिरंगा झंडा प्रसन्न हुआ होगा।
Solution:
तिरंगा झंडा तब प्रसन्न हुआ होगा, जब मैंनेः
- सुबह राष्ट्रगान के समय सावधान मुद्रा में खड़े होकर पूरे सम्मान से गान किया।
- स्कूल में सफाई अभियान में भाग लिया और अपने आस-पास कचरा नहीं फैलाया।
- अपने मित्र की पढ़ाई में मदद की और किसी से झगड़ा नहीं किया।
- समय पर गृहकार्य पूरा किया और अध्यापकों का सम्मान किया।
- पानी और बिजली की बचत की, जिससे पर्यावरण की रक्षा हो सके।
तिरंगा झंडा तब उदास हुआ होगा, जब मैंनेः
- स्कूल की प्रार्थना के समय ध्यान नहीं दिया और हँसी-मज़ाक किया।
- प्लास्टिक की थैली का उपयोग किया और उसे ज़मीन पर फेंक दिया।
- किसी साथी से रूखा व्यवहार किया।
- मोबाइल या टीवी में ज़्यादा समय बर्बाद किया और पढ़ाई से ध्यान हटाया।
Q.29: आपने देश-प्रेम से संबंधित ‘स्वदेश’ कविता पढ़ी। अब आप स्वदेशी कपड़े ‘खादी’ से संबंधित सोहनलाल द्विवेदी की कविता ‘खादी गीत’ का एक अंश पढ़िए।
Solution:
विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।
Q.30: आपने स्वदेश’ कविता और खादी गीत’ का उपर्युक्त अंश पढ़ा। स्वतंत्रता आंदोलन के समय लिखी गई दोनों कविताओं में देश-प्रेम किस प्रकार अभिव्यक्त हुआ है? साथियों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए। साथ ही ‘खादी गीत’ पूरी कविता को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
Solution:
स्वदेश’ कविता और ‘खादी गीत’ – दोनों में देश-प्रेम बहुत अच्छे तरीके से दिखाया गया है।
- ‘स्वदेश’ कविता में कवि कहता है कि अगर किसी के दिल में अपने देश के लिए प्यार नहीं है, तो वह पत्थर के जैसा है। यह कविता हमें सिखाती है कि अपने देश से प्यार करना बहुत जरूरी है।
- ‘खादी गीत’ में बताया गया है कि खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि देश की आज़ादी की पहचान है। जब लोग विदेशी कपड़ों की जगह खादी पहनते थे, तो वे आज़ादी की लड़ाई में साथ देते थे।
दोनों कविताओं में यह बात साफ़ है कि देश के लिए कुछ भी करना, चाहे वह कविता लिखना हो, खादी पहनना हो, या देश की सेवा करना हो- यह सब देश-प्रेम के तरीके हैं।
आप सभी मिलकर ‘खादी गीत’ को पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़ सकते हैं, और समझ सकते हैं कि लोग आज़ादी के समय अपने देश के लिए कितनी मेहनत और प्यार दिखाते थे।
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