Ek Tokri Bhar Mitti – NCERT Solutions Class 8 Hindi (Malhar) includes all the questions with solutions given in the NCERT Class 8 Hindi (Malhar).
NCERT Solutions Class 8
English Poorvi Hindi Malhar Maths Ganita Prakash Science Curiosity Social Exploring SocietyEk Tokri Bhar Mitti – NCERT Solutions
Q.1: ज़मींदार को झोंपड़ी हटाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
Options:
(1) झोंपड़ी जर्जर हो चुकी थी
(2) झोंपड़ी रास्ते में बाधा थी
(3) वह अहाते का विस्तार करना चाहता था ✅
(4) वृद्धा से उसका कोई पुराना झगड़ा था
Explanation: ज़मींदार साहब अपने महल के आस-पास की जगह (अहाता) बढ़ाना चाहते थे। इसलिए झोंपड़ी हटानी थी, ताकि जगह मिले।
Q.2: वृद्धा ने मिट्टी ले जाने की अनुमति कैसे माँगी? ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Options:
(1) क्रोध और झगड़ा करके
(2) अदालत से अनुमति लेकर
(3) विनती और नम्रता से ✅
(4) चुपचाप उठाकर ले गई
Explanation: वृद्धा ने बड़ी नम्रता और विनती करके अनुमति मांगी, क्योंकि वह डरती थी और सम्मानपूर्वक बात करना चाहती थी।
Q.3: वृद्धा की पोती का व्यवहार किस भावना को दर्शाता है? ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Options:
(1) दया
(2) लगाव ✅
(3) गुस्सा
(4) डर
Explanation: पोती अपने घर से बहुत जुड़ी थी। उसने झोंपड़ी को अपना घर माना था, इसलिए उसका व्यवहार लगाव यानी प्यार और जुड़ाव दिखाता है।
Q.4: ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी का अंत कैसा है?
Options:
(1) दुखद
(2) सुखद ✅
(3) प्रेरणादायक
(4) सकारात्मक
Explanation: अंत में ज़मींदार साहब ने अपनी गलती मान ली और झोंपड़ी वापस दे दी। यह एक खुशहाल और प्रेरणादायक अंत है।
Q.5: हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
Solution: हमने अपने दोस्तों से चर्चा की और पाया कि हमने जो उत्तर चुने हैं, वे इन कारणों से सही हैं:
- झोंपड़ी हटाने की वजह अहाते का विस्तार था क्योंकि ज़मींदार अपने महल को बड़ा करना चाहता था।
- वृद्धा ने बड़ी नम्रता से अनुमति मांगी ताकि झोंपड़ी की मिट्टी ले जा सके।
- पोती का व्यवहार लगाव दिखाता है क्योंकि वह अपने घर और झोंपड़ी से जुड़ी है।
- कहानी का अंत सुखद और प्रेरणादायक है क्योंकि ज़मींदार ने अपनी गलती स्वीकार की और झोंपड़ी लौटाई।
Q.6: पाठ में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्षों से मिलाइए।
| क्रम | वाक्य | निष्कर्ष |
| 1. | अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | – वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। – वृद्धावस्था में पोती का सहारा वृद्धा थी। |
| 2. | बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | – ज़मींदार ने वकीलों से सलाह लेकर झोंपड़ी पर न्यायपूर्वक कब्जा किया। – ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया। |
| 3. | आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। | – वृद्धा ने ज़र्मींदार को कमजोर साबित करने के लिए टोकरी उठाने को कहा। – वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़र्मीदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया। |
| 4. | ज़र्मीदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | – धन और अहंकार ने ज़र्मीदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। – संपत्ति के घमंड को भूलकर ज़र्मीदार अपने कर्तव्यों को पूरा कर रहे थे। |
| 5. | कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी। | – वृद्धा ने अपने व्यवहार पर पछताकर ज़र्मींदार से क्षमा माँगी। – अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़र्मीदार ने क्षमा माँगी। |
| 6. | उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? | – वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। – वृद्धा ने ज़र्मींदार की उम्र और शक्ति पर व्यंग्य करते हुए यह बात कही। |
| 7. | कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ। | – वृद्धा ने चतुराई से ज़र्मीदार को शर्मिंदा करने की योजना बनाई। – वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़र्मीदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8. | उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। | – झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। – झोंपड़ी में जाकर वृद्धा डर गई कि ज़र्मीदार उसे फिर से बाहर निकाल देगा और रोने लगी। |
Solution:

Q.7: अपने मित्रों के उत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्षों का चुनाव किया है और क्यों?
Solution: मैं अपने मित्रों के साथ अपने उत्तर मिलाऊंगा और चर्चा करूंगा। मैंने निष्कर्ष इस तरह चुने हैं:
- “अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी” के लिए “वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी” चुना, क्योंकि कहानी में साफ है कि पोती वृद्धा का एकमात्र सहारा है।
- “बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया” के लिए “ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया” चुना, क्योंकि ज़मींदार ने पैसे से वकीलों की मदद ली थी।
- “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है” के लिए “वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया” चुना, क्योंकि वृद्धा ने मिट्टी से ज़मींदार को सबक सिखाया।
- “ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे” के लिए “धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था” चुना, क्योंकि ज़मींदार का घमंड उसे गलत राह पर ले गया।
- “कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी” के लिए “अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी” चुना, क्योंकि ज़मींदार को अपनी गलती का एहसास हुआ।
- “उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?” के लिए “वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है” चुना, क्योंकि यह ज़मींदार को सोचने पर मजबूर करता है।
- “कृपा करके इस टोकरी को जरा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ” के लिए “वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया” चुना, क्योंकि वृद्धा ने शांति से मदद मांगी।
- “उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी” के लिए “झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई” चुना, क्योंकि वृद्धा की यादें उसे रोने पर मजबूर कर देती हैं।
मैं अपने मित्रों से पूछूंगा कि उन्होंने क्या चुना और क्यों। अगर उनका जवाब अलग है, तो हम साथ में सोचेंगे कि कौन-सा निष्कर्ष कहानी से ज्यादा मेल खाता है।
Q.8: पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
- “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?”
- “ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़े। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।”
Solution:
- मेरा अर्थ: मुझे लगता है कि वृद्धा ने यह पंक्ति ज़मींदार को समझाने के लिए कही। वह कह रही है कि अगर एक टोकरी मिट्टी भी ज़मींदार नहीं उठा सकते, तो पूरी झोंपड़ी का भार, जो हजारों टोकरियों के बराबर है, वे जिंदगी भर कैसे संभाल पाएंगे। इसका मतलब है कि ज़मींदार ने गलती की है और उसे यह भार उठाने का हक नहीं है। यह वृद्धा का एक चतुर तरीका था ज़मींदार को अपनी गलती का एहसास कराने का।
समूह में साझा करने के विचार: मैं अपने समूह में कहूंगा कि यह पंक्ति दिखाती है कि वृद्धा ने ज़मींदार को सबक सिखाया। हम बात करेंगे कि क्या यह तरीका सही था और क्या ज़मींदार को सचमुच समझ आया। - मेरा अर्थ: मुझे लगता है कि पहले ज़मींदार को गुस्सा आया क्योंकि वह वृद्धा को पसंद नहीं करते थे। लेकिन जब वृद्धा ने हाथ जोड़कर और पैरों पर गिरकर मदद मांगी, तो ज़मींदार का दिल पिघल गया। उन्होंने खुद टोकरी उठाने की कोशिश की, लेकिन वह बहुत भारी थी और वे नहीं उठा सके। इसका मतलब है कि ज़मींदार को अपनी ताकत और गलती का अहसास हुआ।
समूह में साझा करने के विचार: मैं अपने समूह में कहूंगा कि यह पंक्ति दिखाती है कि ज़मींदार में थोड़ी अच्छाई थी, जो वृद्धा की विनती से जगी। हम चर्चा करेंगे कि क्या ज़मींदार का मन बदलना सही था और क्या उन्हें वृद्धा की मदद करनी चाहिए थी।
Q.9: आपके विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र कौन है और क्यों?
Solution: मेरे विचार से कहानी का सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है। वह इसलिए प्रभावशाली है क्योंकि उसने अपनी समझदारी और धैर्य से ज़मींदार को अपनी गलती का एहसास कराया। उसने मिट्टी की टोकरी का इस्तेमाल करके ज़मींदार को सिखाया कि अन्याय का बोझ उठाना आसान नहीं है।
Q.10: वृद्धा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था? ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution: वृद्धा की पोती ने खाना छोड़ दिया था क्योंकि उसे अपनी पुरानी झोंपड़ी की बहुत याद आती थी। जब झोंपड़ी छिन गई, तो वह उदास हो गई और कहा कि वह सिर्फ अपने घर की रोटी खाएगी। इसलिए उसने खाना-पीना बंद कर दिया।
Q.11: ज़मींदार ने झोंपड़ी पर कब्जा कैसे किया? ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution: ज़मींदार ने वकीलों की मदद से अदालत में केस लड़ा। उसने वकीलों को पैसे देकर उनकी थैली गरम की और कानूनी चाल चलकर वृद्धा की झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।
Q.12: “महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा…”। यहाँ ज़र्मींदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है? ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution: ज़मींदार का सिर हिलाना इसका मतलब है कि उन्होंने वृद्धा को बोलने की इजाजत दे दी। यह दिखाता है कि वह उसकी बात सुनने को तैयार था, हालांकि पहले वह नाराज था। यह एक छोटा सा संकेत था कि ज़मींदार का मन थोड़ा नरम हो रहा था।
Q.13: “किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़े।” यहाँ ज़मींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है। पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया? ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution: पहले ज़मींदार का व्यवहार अहंकारी और कठोर था। वह वृद्धा को जबरदस्ती झोंपड़ी से निकालना चाहता था और उसकी परवाह नहीं करता था। लेकिन जब उसने खुद टोकरी उठाने की कोशिश की और असफल रहा, तो उसका मन बदलने लगा। उसे दया आई और वह वृद्धा की मदद करने को तैयार हुआ, जो उसके व्यवहार में नरमी लाया।
Q.14: “उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।” ज़मींदार ने ऐसा क्यों किया? ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।
Solution: ज़मींदार ने यह किया क्योंकि उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। वृद्धा की बातों और टोकरी की घटना ने उसे समझाया कि उसका अन्याय सही नहीं था। पछतावा होने पर उसने वृद्धा से माफी मांगी और झोंपड़ी लौटा दी।
Q.15: यदि वृद्धा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?
Solution: अगर वृद्धा की पोती ज़मींदार से बात करती, तो शायद वह कहती, “महाराज, मेरी दादी की झोंपड़ी हमारा घर है। वहाँ मेरे माता-पिता की यादें हैं। कृपया हमें वहाँ रहने दें, वरना मैं और मेरी दादी दुखी रहेंगी।” वह अपनी उदासी और प्यार से ज़मींदार का मन बदलने की कोशिश करती।
Q.16: यदि आप ज़मींदार की जगह होते तो क्या करते?
Solution: अगर मैं ज़मींदार होता, तो मैं वृद्धा से प्यार से बात करता। मैं उसकी झोंपड़ी न लेता और उसे वहीं रहने देता। अगर मुझे जगह चाहिए होती, तो मैं कहीं और बनवाता, ताकि वृद्धा और उसकी पोती को दुख न हो।
Q.17: ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
Solution: ज़मींदार को टोकरी नहीं उठा पाया होगा क्योंकि वह बहुत भारी थी। शायद उसने पहले कभी इतना मेहनत का काम नहीं किया था, और उसका अहंकार उसे कमजोर बना रहा था। यह भी हो सकता है कि मिट्टी का वजन उसकी ताकत से ज्यादा था।
Q.18: “झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है…”। यहाँ केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
Solution: यहाँ केवल मिट्टी की बात नहीं है, बल्कि कुछ और भी छिपा है। मिट्टी वृद्धा की यादों, दुखों और झोंपड़ी के महत्व का प्रतीक बनती है। वृद्धा कहना चाहती है कि ज़मींदार ने उसका घर छीना, जो उसके लिए बहुत कीमती था, और इसका बोझ ज़मींदार कभी नहीं उठा सकता।
Q.19: यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी। इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्रियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?
Solution: उस समय भारत में स्त्रियों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था:
- विधवा होने पर सहारा न मिलना
- संपत्ति पर अधिकार न होना
- आर्थिक रूप से निर्भर रहना
- समाज में उनकी भावनाओं की अनदेखी होना
- अकेले बच्चों का पालन-पोषण करना कठिन होना
Q.20: कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती-
- यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता
- यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता
- यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता
- यदि ज़मींदार एक स्त्री होती
- यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोपड़ी वापस माँगती
अपने समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।
Solution:
- अगर ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता, तो वह गुस्से में वृद्धा को वहाँ से भगा देता। वृद्धा उदास होकर चली जाती और अपनी पोती को मिट्टी नहीं दे पाती। पोती और दुखी होकर बीमार पड़ जाती। शायद पड़ोस के लोग ज़मींदार की बुराई करते और उसे दबाव में झोंपड़ी वापस देनी पड़ती।
- अगर ज़मींदार टोकरी उठा लेता, तो वह अपनी ताकत दिखाने के लिए खुश होता। लेकिन वृद्धा कहती कि अगर एक टोकरी का बोझ इतना भारी है, तो झोंपड़ी का भार कैसे संभालेगा? ज़मींदार शर्मिंदा होता और सोचता कि उसने गलत किया। अंत में वह वृद्धा से माफी मांगकर झोंपड़ी लौटा देता।
- अगर ज़मींदार एक स्त्री होती, तो शायद वह वृद्धा की दुखभरी बात सुनकर जल्दी दया दिखाती। वह टोकरी उठाने की कोशिश करती और असफल होने पर वृद्धा की मदद करती। हो सकता है वह झोंपड़ी वापस दे देती, क्योंकि स्त्री होने के नाते उसे वृद्धा की भावनाएँ समझ आतीं।
- अगर पोती ज़मींदार से झोपड़ी माँगती, तो वह रोते हुए कहती, “महाराज, यह मेरा घर है, मेरे माता-पिता की यादें यहाँ हैं। कृपया इसे हमें लौटा दें।” ज़मींदार उसकी मासूमियत देखकर पिघल जाता और झोंपड़ी वापस दे देता।
हमने समूह में “यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोपड़ी वापस माँगती” स्थिति चुनी। हमने मिलकर इस बदली हुई कहानी को लिखा: - एक दिन वृद्धा की पोती ज़मींदार के पास गई। वह रोते हुए बोली, “महाराज, यह झोपड़ी हमारा घर है। मेरे माता-पिता यहाँ मरे, और मेरी दादी का सहारा यही है। कृपया इसे हमें लौटा दें, वरना मैं और दादी दुखी रहेंगी।” ज़मींदार ने उसकी आँखों में आँसू देखे और उसका छोटा चेहरा देखकर दया आ गई। वह बोला, “बच्ची, तुम सही कहती हो। मैंने गलती की।” फिर उसने वृद्धा को बुलाया और कहा, “मैं तुम्हारी झोपड़ी वापस देता हूँ। तुम यहाँ खुश रहो।” वृद्धा और पोती खुशी से झोपड़ी में लौट आईं और फिर से अपने घर में रोटी पकाने लगीं। ज़मींदार ने सीखा कि बच्चों और बूढ़ों का दुख देखकर मन बदलना चाहिए।
हमने सोचा कि पोती की मासूमियत ज़मींदार को जल्दी समझा सकती थी, और यह कहानी का सुखद अंत होता।
Q.21: इन वाक्यों में रेखांकित शब्दों के प्रयोग पर ध्यान दीजिए-
अब नीचे दिए गए वाक्यों में इन दोनों शब्दों का उपयुक्त प्रयोग कीजिए-
- वृद्धा ने कहा ________ वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
- वह अपनी पोती ________ चिंता में दुखी हो गई थी।
- वृद्धा ने प्रार्थना ________ टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।
- पोती हमेशा कहती थी ________ वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
- झोंपड़ी ________ मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
- उसे विश्वास था ________ मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
- वृद्धा ________ आँखों से आँसुओं ________ धारा बहने लगी।
- उसने यह सोचा ________ झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
- वृद्धा के मन ________ पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
- ज़मींदार इतने लज्जित हुए ________ टोकरी उठाने की बात मान ली।
- उस झोंपड़ी ________ हर दीवार वृद्धा ________ यादों से भरी थी।
Solution:

Q.22: “बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।”
इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उन्हें रेखांकित कीजिए।
Solution:
- बाल की खाल निकालने वाले का मतलब है कि वकील बहुत छोटी-छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते थे।
- थैली गरम कर का मतलब है कि ज़मींदार ने वकीलों को बहुत सारा पैसा दिया।
Q.23: ‘बाल’ शब्द से जुड़े निम्नलिखित मुहावरों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
- बाल बाँका न होना – कुछ भी कष्ट या हानि न पहुँचना। पूर्ण रूप से सुरक्षित रहना।
- बाल बराबर – बहुत सूक्ष्म। बहुत महीन या पतला।
- बाल बराबर फर्क होना – ज़रा-सा भी भेद होना। सूक्ष्मतम अंतर होना।
- बाल-बाल बचना- कोई विपत्ति आने या हानि पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना।
Solution:
- बाल की खाल निकालने वाले का मतलब है कि वकील बहुत छोटी-छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते थे।
- थैली गरम कर का मतलब है कि ज़मींदार ने वकीलों को बहुत सारा पैसा दिया।
- वृद्धा की झोंपड़ी में आग लगने वाली थी, लेकिन बारिश की वजह से
बाल बाँका न हुआ। - ज़मींदार की सोच में बाल बराबर दया थी, जो बाद में दिखाई दी।
- वृद्धा और ज़मींदार की सोच में बाल बराबर फर्क था, लेकिन दोनों का दुख एक जैसा था।
- ज़मींदार की गलती से वृद्धा को झोंपड़ी खोने से बाल-बाल बचा।
Q.24: नीचे दिए गए वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए-
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी।
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाई।
- इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पका रही हूँ।
यहाँ रेखांकित शब्दों से पता चल रहा है कि कार्य होने का समय या काल क्या है। क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कोई कार्य कब हुआ, हो रहा है या होने वाला है, उसे काल कहते हैं।
काल के तीन भेद होते हैं-
- भूतकाल – यह बताता है कि कार्य पहले ही हो चुका है।
- वर्तमान काल – यह बताता है कि कार्य अभी हो रहा है या सामान्य रूप से होता रहता है।
- भविष्य काल – यह बताता है कि कार्य आने वाले समय या भविष्य में होगा।
नीचे दिए गए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए-
(क) वह गिड़गिड़ाकर बोली।
(ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
(घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
Solution: (क) वह गिड़गिड़ाकर बोली।
उत्तर:
- वर्तमान काल: वह गिड़गिड़ाकर बोल रही है।
- भविष्य काल: वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी।
(ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी।
उत्तर:
- वर्तमान काल: श्रीमान् आज्ञा दे रहे हैं।
- भविष्य काल: श्रीमान् आज्ञा देंगे।
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
उत्तर:
- वर्तमान काल: उसकी आँखों से आँसू की धारा बह रही है।
- भविष्य काल: उसकी आँखों से आँसू की धारा बहेगी।
(घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
उत्तर:
- वर्तमान काल: ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हो रही है।
- भविष्य काल: ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा होगी।
(ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
उत्तर:
- वर्तमान काल: वे वृद्धा से क्षमा माँग रहे हैं और उसकी झोंपड़ी वापस दे रहे हैं।
- भविष्य काल: वे वृद्धा से क्षमा माँगेंगे और उसकी झोंपड़ी वापस देंगे।
Q.25: “उनके मन में कुछ दया आ गई।”
“उनकी आँखें खुल गईं।”
ऊपर दिए गए रेखांकित शब्दों में क्या अंतर है और क्यों? आपस में चर्चा करके पता लगाइए।
आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक अनुस्वार-भर के अंतर से उसके अर्थ में अंतर आ जाता है।
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में उपयुक्त शब्द भरिए-
(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर ________। (गई/गई)
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर ________। (बोली/बोर्ली)
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया ________। (है/हैं)
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी ________। (थी/थीं)
(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले ________। (आई/आई)
(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला ________। (गई/गई)
(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए ________। (है/हैं)
Solution:

Q.26: “यह सुनकर वृद्धा ने कहा, “महाराज, नाराज न हों तो…”
इस पंक्ति में लेखक ने जानबूझकर वृद्धा की कही हुई बात को अधूरा छोड़ दिया है। बात को अधूरा छोड़ने के लिए….’ का उपयोग किया गया है। इस प्रकार के वाक्यों और प्रयोगों से कहानी का प्रभाव और बढ़ जाता है। अनेक बार कहानी में नाटकीयता लाने के लिए भी इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं।
- आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
- इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए-
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी से उदाहरण |
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली- कहानी में ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। | |
| 2. वर्णनात्मकता- लेखक ने जगहों और भावनाओं का ऐसा चित्र खींचा है कि पाठक दूश्य को देख सकता है। | |
| 3. भावात्मकता- कहानी में करुणा, पछतावा और प्रेम जैसे गहरे भाव दिखते हैं। | |
| 4. संवादात्मकता- पात्रों के संवादों से कहानी आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। | |
| 5. नाटकीयता- कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली हैं कि वे नाटक जैसे लगते हैं। | |
| 6. चरित्र चित्रण- पात्रों के गुण, स्वभाव और मन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। |
Solution:
- आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
- प्रश्नोत्तरी शैली का प्रयोग
- वर्णनात्मकता से दृश्य सजीव बनाना
- गहरी भावनाओं का चित्रण (करुणा, ममता, पछतावा)
- संवादों के माध्यम से कहानी को आगे बढ़ाना
- नाटकीय मोड़ों का समावेश
- पात्रों का स्पष्ट और प्रभावी चित्रण
- अधूरे वाक्यों से रहस्य और जिज्ञासा उत्पन्न करना
- सामाजिक संदेश देना
- इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए- कहानी की विशेषताएँ कहानी से उदाहरण 1. प्रश्नोत्तरी शैली-कहानी में ऐसे प्रश्न हैं जो पाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। “उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?” – यह प्रश्न जमींदाट को सोचने पर मजबूट कटता है। 2. वर्णनात्मकता- लेखक ने जगहों और भावनाओं का ऐसा चित्र खींचा है कि पाठक दूश्य को देख सकता है। “उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी” – यह वृद्धा की भावनाओं को साफ दिखाता है। 3. भावात्मकता-कहानी में करणा, पछतावा और प्रेम जैसे गहरे भाव दिखते हैं। “कृतकर्म का पश्राताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा भाँगी” – यह जमींदाट का पछतावा दिखाता है। 4. संबादात्मकता-पात्रों के संवादों से कहानी आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। “महाटाज, कृपा करके आजा दीजिए तो इस टोकटी में मिट्टी ले जाऊँ!” – वृद्धा का संवाद प्रभावी है। 5. नाटकीयता-कुछ दुश्य इतने प्रभावशाली हैं कि वे नाटक जैसे लगते हैं। “ज्यों ही टोकटी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है” यह हृथ नाटकीय है। 6. चरित्र चित्रण- पात्रों के गुण, स्वभाव और मन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। “ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे” – जमींदाट का अहंकाटी स्वभाव दिखता है।
Q.27: आप जानते ही हैं कि हम शब्दकोश का प्रयोग करके शब्दों के विषय में अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर्थ शब्दकोश से चुनकर दिए गए हैं। इन शब्दों के जो अर्थ इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं, उन पर घेरा बनाइए-
| वाक्य | रेखांकित शब्द का अर्थ |
| 1. श्रीमान के सब प्रयत्न निष्फल हुए | धनी, शोभायुक्त, शोभावानू, संपत्तिशाली, संपन्न, पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द। |
| 2. पतोहू भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। | अविवाहित लड़की, एक राशि का नाम, लड़की, बड़ी इलायची। |
| 3. ज्रमींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई। | राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान, प्रासाद, अंतःपुर, पत्नी, उत्तरने की जगह। |
| 4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी। | काल, बहुत अधिक समय, सौभाम्य का समय, संसार, जगत, राज्यकाल, अवधि, युग, कार्यकाल, विलंब, देर, अतिकाल। |
| 5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | सहारा, आलंबन, पात्र (नाटक), नींव, बाँध, नहर, संबंध, बरतन, परिस्थितियाँ, अधिष्ठान, आश्रय देनेवाला, पालन करनेवाला। |
Solution:

Q.28: “कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी…”
कहानी की इस पंक्ति से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्ति से पश्चाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे हैं। अब नीचे दी गई पंक्तियों में प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए-
| क्रम पंक्तियाँ | भाववाचक संज्ञा |
| 1. वह लज्जित होकर कहने लगे- ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’ | ममता/स्नेह |
| 2. वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गई। | दुख/पीड़ा |
| 3. उनके मन में कुछ दया आ गई। | विनम्रता/विनय |
| 4. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | अहंकार/घमंड |
| 5. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | बोध/आत्मज्ञान |
| 6. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | आस्था/विश्वास |
| 7. ज्ञर्मीदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | जुड़ाव/मोह |
| 8. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना ही नहीं चाहती थी। | करुणा/दया |
| 9. जब उसे अपनी पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | क्रूरता / अन्याय |
| 10. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। | लज्जा/पछतावा |
Solution:

Q.29: ‘वृद्धा पहुँची।’
यह केवल दो शब्दों से बना एक वाक्य है लेकिन हम इस वाक्य को बड़ा भी बना सकते हैं-
‘वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची।’
अब बात कुछ अच्छी तरह समझ में आ रही है। किंतु इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं, जैसे-
‘थकी हुई आँखों और काँपते हाथों में टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे दरवाजे पर पहुँची।’
अब यह वाक्य अनेक अर्थ और भाव व्यक्त कर रहा है। अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15-20 शब्द हो सकते हैं।
- एक झोंपड़ी थी।
- श्रीमान् टहल रहे थे।
- वह खाने लगेगी।
- वृद्धा भीतर गई।
- आगे बढ़े।
Solution:
- गाँव के किनारे पीपल के पेड़ के नीचे सूखी घास और मिट्टी से बनी एक छोटी-सी झोंपड़ी थी।
- श्रीमान् हाथ में छड़ी लिए आँगन में इधर-उधर टहलते हुए गहरी सोच में डूबे हुए थे।
- अब जब उसे विश्वास हो गया कि कोई उसका साथ देगा, वह धीरे-धीरे रोटी खाने लगेगी।
- वृद्धा काँपते कदमों से झोंपड़ी के अँधेरे हिस्से में भीतर गई और टोकरी एक कोने में रख दी।
- ज़मींदार साहब थोड़ा रुककर वृद्धा की ओर देखे और फिर धीमे-धीमे उसकी ओर आगे बढ़े।
Q.30: कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। ज़मींदार वृद्धा की पोती को समझाना चाहता है कि वह जिद छोड़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए।
Solution:
ज़मींदार: हेलो बेटा, मैं ज़मींदार साहब बोल रहा हूँ।
पोती: जी, कहिए।
ज़मींदार: देखो, तुम्हें इतने दिन से भूखा रहना ठीक नहीं है।
पोती: लेकिन दादी के साथ जो हुआ, उससे मेरा मन नहीं है खाने का।
ज़मींदार: मैं समझता हूँ, मुझसे गलती हुई है, पर अब सब ठीक हो जाएगा।
पोती: सच में?
ज़मींदार: हाँ, मैं वादा करता हूँ, दादी की झोंपड़ी पर कोई हक़ नहीं करूँगा।
पोती: अगर ऐसा है, तो मैं खाना खा लूँगी।
ज़मींदार: यही समझदारी है बेटा, अब दादी को चिंता नहीं होगी।
Q.31: कल्पना कीजिए कि ज़मींदार और उसका कोई मित्र वृद्धा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशों द्वारा चर्चा कर रहे हैं। मित्र उसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न हड़पे। उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मुद्रा (इमोजी) के साथ लिखिए।
Solution: उदाहरण-
- मित्र – इस विचार को छोड़ दो, तुम्हें आखिर किस बात की कमी है?
- ज़मींदार – मुझे तुमसे उपदेश नहीं सुनना है।
उत्तर: मित्र: यार, वो वृद्धा की झोंपड़ी मत हड़पना, गलत बात है।
ज़मींदार: लेकिन उसकी ज़मीन बहुत काम की है।
मित्र: इंसानियत ज़्यादा काम की होती है, पैसा तो आता-जाता है।
ज़मींदार: मुझे लगता है तुम सही कह रहे हो…
मित्र: हाँ, दादी को उनकी जगह रहने दो, दुआ मिलेगी।
ज़मींदार: ठीक है, मैं झोंपड़ी नहीं लूँगा।
Q.32: “मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।”
कहानी में वृद्धा की पोती एक महत्वपूर्ण पात्र है, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियों में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
Solution:
जिलाधिकारी को पत्र
सेवा में,
जिलाधिकारी महोदय,
[शहर का नाम]
विषय: मेरे घर को बचाने हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं [अपना नाम] आपकी क्षेत्र की निवासी हूँ। मेरा घर एक छोटी-सी झोंपड़ी है जिसमें मैं अपनी दादी के साथ रहती हूँ। यह घर मेरे जीवन की सबसे कीमती पूँजी है। हाल ही में हमारे गाँव के ज़मींदार साहब ने हमारी झोंपड़ी पर अपना हक़ जताना शुरू कर दिया है।
महोदय, इस घर में मेरे माता-पिता की यादें बसी हैं। यहीं मेरा बचपन बीता है और यहीं मेरी दादी ने मुझे पाला-पोसा है। यदि यह घर हमसे छिन गया, तो हम बेसहारा हो जाएँगे।
आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया हमारी झोंपड़ी को ज़मींदार से बचाने की कृपा करें। हमें न्याय और अपने घर में रहने का अधिकार दिलाएँ।
सधन्यवाद,
भवदीया
[नाम]
[गाँव का नाम]
तिथि: [तारीख]
Q.33: मान लीजिए कि वृद्धा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी। कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए-
Solution: मेरी दैनंदिनी
- 2 मई – आज दादी घर लौटीं तो बहुत परेशान थीं। चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ दिख रही थीं। मैंने कई बार पूछा, तब उन्होंने बताया कि ज़मींदार साहब हमारी झोंपड़ी लेने की सोच रहे हैं। यह सुनकर मेरा दिल धक से रह गया।
- 3 मई – आज मैं सुबह से चुप हूँ। खाना-पीना अच्छा नहीं लग रहा। यह घर मेरी दुनिया है। अगर यह चला गया तो हम कहाँ जाएँगे? दादी मुझे समझाती रहीं, पर मैं जानती हूँ, उनके दिल में भी डर है।
- 4 मई – मैंने निश्चय कर लिया है कि अपनी झोंपड़ी को बचाने के लिए जो भी करना पड़े, करूँगी। मैंने जिलाधिकारी को पत्र लिखने का सोचा है। उम्मीद है कोई तो हमारी आवाज़ सुनेगा।
- 5 मई – आज मन में थोड़ी आशा जगी है। सुना है कि गाँव के लोग भी हमारे साथ हैं। शायद मिलकर हम अपना घर बचा लें।
Q.34: कहानी में वृद्धा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी। आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।
Solution: मेरा घर मेरे लिए सिर्फ़ ईंट और दीवारों का बना ढाँचा नहीं, बल्कि मेरी यादों और खुशियों का खज़ाना है। यहाँ मेरी हर हँसी, हर आँसू, और हर त्योहार की महक बसी हुई है। बचपन में दीवारों पर बनाई गई मेरी रंग-बिरंगी चित्रकारी, आँगन में खेली गई गिल्ली-डंडा, और बरामदे में बैठकर दादी की कहानियाँ सुनना — यह सब मेरे घर को मेरे जीवन का सबसे प्रिय स्थान बनाता है।
Q.35: क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्ति से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो? अपना अनुभव साझा कीजिए।
Solution: एक बार हमारे स्कूल की लाइब्रेरी में एक पुरानी किताब थी, जिसमें मेरी पसंदीदा कहानियाँ थीं। मैं हर दिन उसे पढ़ने जाती थी। बाद में वह किताब नवीनीकरण के कारण लाइब्रेरी से हटा दी गई। उस दिन मुझे सचमुच बहुत दुख हुआ, जैसे अपना कोई दोस्त खो दिया हो।
Q.36: कहानी में ज़मींदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए। यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला?
Solution: एक बार हमारे पड़ोस में एक अंकल ने गुस्से में आकर अपने दोस्त से बहुत बुरी तरह बातें कर दीं। बाद में जब गुस्सा शांत हुआ, तो उन्हें अपने शब्दों पर पछतावा हुआ। वे तुरंत दोस्त के घर गए, माफ़ी माँगी और फिर से दोस्ती कायम हो गई। इस पश्चाताप का परिणाम यह निकला कि दोनों के रिश्ते पहले से भी मजबूत हो गए।
Q.37: क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?
Solution: एक बार मैंने अपनी छोटी बहन से गुस्से में उसका खिलौना छीन लिया और तोड़ दिया। बाद में जब वह रोने लगी तो मुझे बहुत पछतावा हुआ। मैंने अपनी बचत से उसे नया खिलौना खरीदा और उससे माफ़ी माँगी। उस दिन मैंने सीखा कि गुस्से में किया गया काम अक्सर हमें ही दुखी कर देता है, इसलिए किसी भी परिस्थिति में धैर्य रखना ज़रूरी है।
Q.38: कहानी में आपने पढ़ा कि एक ज़मींदार ने लालच के कारण एक स्त्री का घर छीन लिया।
- क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बारे में बताइए।
- ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
- “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
Solution:
- मैंने समाचार पत्र में पढ़ा था कि एक किसान की ज़मीन पर दबंगों ने अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया। किसान ने पुलिस और प्रशासन से मदद माँगी, लेकिन लंबी कानूनी प्रक्रिया और दबाव के कारण उसे अपनी ज़मीन वापस पाने में कई साल लग गए। यह देखकर लगा कि लालच और शक्ति का गलत इस्तेमाल किसी की मेहनत और अधिकार छीन सकता है।
- ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए मैं और मेरे आस-पास के लोग यह कर सकते हैं:
- पीड़ित व्यक्ति का साथ देकर उसे कानूनी सलाह और मदद दिलाना।
- इस मामले को मीडिया और सोशल मीडिया पर उठाकर लोगों का ध्यान दिलाना।
- सामूहिक रूप से प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मिलकर न्याय की माँग करना।
- अपने अधिकारों और कानून की जानकारी रखना ताकि किसी के साथ अन्याय न हो सके
- मेरे अनुसार, असली ताकत वह है जो किसी को दबाने में नहीं, बल्कि उसे सहारा देने में काम आए। दया से हम लोगों का विश्वास जीतते हैं और न्याय से उनका सम्मान। जो व्यक्ति या समाज दूसरों के साथ निष्पक्षता और करुणा से व्यवहार करता है, वही लंबे समय तक मजबूत और सम्मानित बना रहता है। शक्ति का अर्थ सिर्फ बल या धन नहीं, बल्कि इंसानियत और न्यायप्रियता है।
Q.39: क्या आपको अपने घर की कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लिए कैसे-कैसे प्रयास किए गए? चलिए, अपने घर की कहानी की खोजबीन करते हैं।
अपने घर के बड़े-बूढ़ों से उनके बचपन के घरों के बारे में साक्षात्कार लीजिए। आज आप जिस घर में रह रहे हैं, उसमें वे कब से रह रहे हैं? इसमें आने के पीछे क्या कहानी है, इसके बारे में भी बातचीत कीजिए। कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए।
Solution:
मेरे घर की कहानी
मैंने अपनी दादी से बात की। उनका बचपन का घर गाँव में था। वह घर लकड़ी और ईंट से बना था, जो 1945 में बनाया गया था। दादाजी और दादी ने मिलकर घर बनाने में बहुत मेहनत की थी। उन्होंने अपने दोस्तों और परिवार वालों की मदद ली थी।
हमारा आज का घर शहर में है। दादी यहाँ 1990 से रह रही हैं। दादाजी नौकरी के कारण शहर आए और घर बनाया। पहले वे किराए पर रहते थे। अब हम सब इस घर में खुश रहते हैं।
कक्षा में मैंने अपनी यह कहानी सुनाई। सबकी कहानियाँ भी बहुत अच्छी थीं।
Q.40: “बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया।”
कहानी के इस प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए। इसके बारे में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए।
उदाहरण:
सार्वजनिक शिकायत सुविधा – भारत सरकार की इस वेबसाइट पर सभी भारतीय, केंद्र या राज्य सरकारों के किसी भी विभाग से जुड़ी शिकायतें कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर भारत की 22 भाषाओं में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
https://pgportal.gov.in
जनसुनवाई – प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ने जनसुनवाई जैसी सुविधाओं को प्रारंभकिया हुआ है। इंटरनेट सुविधाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
https://jansunwai.up.nic.in/
सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँ- भारत सरकार की सामाजिक कल्याण की योजनाओं के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है-
https://eshram.gov.in/hi/social-security-welfare-schemes
Solution: छात्र इसे स्वयं करें
Q.41: नीचे दिए गए अक्षरों से सार्थक शब्द बनाइए-
Solution:

Q.42: हमारे देश में हजारों सालों से कहानियाँ सुनी-सुनाई जाती रही हैं। सैकड़ों साल पहले लिखी गई कहानियों की पुस्तकें आज भी उपलब्ध हैं। ऐसी ही एक अद्भुत पुस्तक हितोपदेश है जो आज भी विश्व में मनोरंजन और ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से पढ़ी-पढ़ाई जाती है। अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और इसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए।
Solution: मैंने अपने स्कूल के पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों वाली किताब ढूंढी। हितोपदेश विष्णु शर्मा ने लिखी है, और इसमें पशु-पक्षियों की कहानियां हैं जो हमें जीवन का सबक सिखाती हैं। मैंने इसमें से “धूर्त गीदड़ और हाथी की कहानी” पढ़ी। यह बहुत मजेदार और सीख देने वाली है। अब मैं कक्षा में इसे सुना रहा हूं:
एक जंगल में ब्रह्मवन नाम की जगह पर कर्पूरतिलक नाम का एक बड़ा हाथी रहता था। कुछ गीदड़ों ने उसे देखा और सोचा, “अगर यह हाथी मर जाए तो हम चार महीने तक इसका मांस खाकर जी सकते हैं।” उनमें से एक बूढ़ा और चालाक गीदड़ बोला, “मैं इसे अपनी बुद्धि से मार दूंगा।”
वह गीदड़ हाथी के पास गया और झुककर प्रणाम किया। हाथी ने पूछा, “तुम कौन हो?” गीदड़ ने कहा, “महाराज, जंगल के सभी जानवरों ने पंचायत की है। वे आपको राजा बनाना चाहते हैं क्योंकि आपमें राजा के सब गुण हैं। आप मजबूत, धर्मी और नीति जानने वाले हैं। राजा के बिना जंगल नहीं चल सकता। कृपा करके हमारे साथ चलिए, हम आपको राजतिलक करेंगे।”
हाथी राज्य का लालच में फंस गया और गीदड़ के पीछे-पीछे चल पड़ा। गीदड़ उसे एक गहरी कीचड़ वाली जगह पर ले गया, जहां हाथी फंस गया। हाथी चिल्लाया, “मित्र, अब क्या करूं? मैं मर रहा हूं।” गीदड़ हंसा और बोला, “महाराज, मेरी पूंछ पकड़कर निकलो। तुमने मेरी बात पर विश्वास किया, अब दुष्टों की संगत का फल भोगो।”
फिर सभी गीदड़ों ने मिलकर फंसे हाथी को मार डाला और खा लिया।
इस कहानी से सीख मिलती है कि कभी दुष्टों की बातों में नहीं आना चाहिए, वरना नुकसान होता है। जैसे श्लोक में कहा गया है: “यदासत्संगरहितो भविष्यसि भविष्यसि। तदासज्जनगोष्ठिषु पतिष्यसि पतिष्यसि।” मतलब, अच्छे लोगों की संगत करो तो जीओगे, बुरों की संगत में पड़ोगे तो मरोगे।
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