Class 10 Hindi – A Mannu Bhandari Extra Questions

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Class 10 Hindi – A Mannu Bhandari Extra Questions. myCBSEguide has just released Chapter Wise Question Answers for class 10 Hindi – A. There chapter wise Test papers with complete solutions are available for download in myCBSEguide website and mobile app. These Important Questions with solution are prepared by our team of expert teachers who are teaching grade in CBSE schools for years. There are around 4-5 set of solved Hindi Extra questions from each and every chapter. The students will not miss any concept in these Chapter wise question that are specially designed to tackle Board Exam. We have taken care of every single concept given in CBSE Class 10 Hindi – A syllabus and questions are framed as per the latest marking scheme and blue print issued by CBSE for class 10.

CBSE Class 10 Hindi Ch – 8 Practice Tests

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CBSE Tentative Questions for Class 10 Hindi

मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी)

  1. निम्नलिखित गद्यांशों को पढ़िए और नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
    उस समय तक हमारे परिवार में लड़की के विवाह के लिए अनिवार्य योग्यता थी-उम्र में सोलह वर्ष और शिक्षा में मैट्रिक। सन् 44 में सुशीला ने यह योग्यता प्राप्त की और शादी करके कोलकाता चली गई। दोनों बड़े भाई भी आगे पढ़ाई के लिए बाहर चले गए। इन लोगों की छत्र-छया के हटते ही पहली बार मुझे नए सिरे से अपने वजूद का एहसास हुआ। पिताजी का ध्यान भी पहली बार मुझ पर केन्द्रित हुआ। लड़कियों को जिस उम्र में स्कूली शिक्षा के साथ-साथ सुघड़ गृहिणी और कुशल पाक-शास्त्री बनने के नुस्खे जुटाए जाते थे, पिताजी को आग्रह रहता था कि मैं रसोई से दूर ही रहूँ। रसोई को वे भटियारखाना कहते थे और उनके हिसाब से वहाँ रहना अपनी क्षमता और प्रतिभा को भट्टी में झोंकना था।

    1. “इन लोगों की छत्रछाया हटते ही ‘कथन में इन लोगों” से तात्पर्य है।
    2. लेखिका की बहन की शादी कब हुई थी ?
    3. लेखिका के अनुसार लड़की की वैवाहिक योग्यता थी ?
  2. मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व में उनके पिताजी का क्या प्रभाव दिखाई पड़ता है?

  3. ‘एक कहानी यह भी’ पाठ के आधार पर मन्नू भंडारी के कॉलेज से शिकायती पत्र आने पर भी उनके पिता उनसे नाराज़ क्यों नहीं हुए?

  4. लेखिका मन्नू भंडारी का अपने पिता से वैचारिक टकराहट का सिलसिला कब से और क्यों चला?

  5. ‘एक कहानी यह भी’ पाठ में पिताजी के शक्की स्वभाव की लेखिका पर क्या प्रतिक्रिया हुई? बताइए।

  6. ‘पड़ोस कल्चर’ छूट जाने से आज की पीढ़ी को क्या हानि हुई है-‘एक कहानी यह भी’ पाठ में लिखित इस कथन को स्पष्ट करें।

मन्नू भंडारी (एक कहानी यह भी)

Answer

    1. इन लोगों की छत्रछाया हटते ही कथन में ‘इन लोगों’ से तात्पर्य ‘बड़े भाई-बहनों’ से है | बड़ी बहिन की शादी हो जाने पर और दोनों बड़े भाइयों के बाहर चले जाने पर लेखिका को परिवार में अपने अस्तित्व का भान हुआ |
    2. लेखिका की बहन की शादी सन् 1944 में हुई थी ।
    3. लेखिका के अनुसार उनके परिवार में उस समय लड़की की वैवाहिक योग्यता उम्र में सोलह वर्ष और पढाई में मैट्रिक पास थी ।
  1. मन्नू भंडारी के व्यक्तित्व में पिताजी की अनेक अच्छाइयों और बुराइयों ने प्रवेश पा लिया था। पिताजी द्वारा बड़ी और गोरी बहन सुशीला की प्रशंसा करने के कारण उनके भीतर गहराई में हीन ग्रंथि ने जन्म ले लिया था | इस हीन भावना और कुंठा ने उनके आत्मविश्वास को हिला कर रख दिया था | पिताजी ने ही उनके मन में देशप्रेम की भावना जगाई थी |
  2. कॉलेज में लेखिका ने कॉलेज प्रबंधन समिति के विरुद्ध जाकर जो भी कार्य किए वे देश की स्वतंत्रता के लिए थे | उनके पिता भी यही चाहते थे कि लेखिका देश की आज़ादी के लिए कार्य करें इसलिए कॉलेज से शिकायती पत्र आने पर भी उनके पिता उनसे नाराज़ नहीं हुए |
  3. पिताजी से लेखिका की वैचारिक टकराहट तो उनके होश सँभालने से ही शुरू हो गई थी | उनके पिताजी उन्हें देश और समाज के प्रति जागरूक तो बनाना चाहते थे पर घर की चारदीवारी में सीमित रहकर | लेखिका के लिए किसी की दी हुई आज़ादी के दायरे में चलना कठिन था | वे नहीं चाहते थे कि लेखिका लड़कों के साथ सड़कों पर हड़तालें करवाए और नारे लगाए | अतः लेखिका ने अपने पिता के विरुद्ध जाकर ये सब किया | वे नहीं चाहती थीं कि उनकी स्वतंत्रता को पिता के द्वारा इतना संकुचित कर दिया जाए कि उनका दम घुटने लगे |राजेन्द्र यादव से अपनी मर्ज़ी से विवाह करना भी पिता के साथ वैचारिक टकराहट का ही परिणाम था |
  4. पिता के शक्की स्वभाव का लेखिका पर ये प्रभाव पड़ा कि वे भी शक्की स्वभाव की हो गईं थी इस कारण अपनी उपलब्धियों पर वे विश्वास ही नहीं कर पाती थीं,उन्हें लगता था कि उपलब्धि मिलना तो तुक्का लगना है | इस स्वभाव के कारण उनका विश्वास टूट कर उनके दुःख को बढ़ाता रहता था |
  5. पड़ोस कल्चर मनुष्य के जीवन में अहम् भूमिका निभाता है | सहानुभूति और सहयोग की भावना का उदय पड़ोस से ही होता है | ‘पड़ोस कल्चर’ छूट जाने से आज की पीढ़ी को ये हानि हुई है कि वह संस्कारहीन होती जा रही है | इसके साथ ही आपसी संबंधों में भी आत्मीयता का अभाव हो गया है |



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