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Do Gauraiya – NCERT Solutions Class 8 Hindi (Malhar)

Do Gauraiya – NCERT Solutions Class 8 Hindi (Malhar) includes all the questions with solutions given in the NCERT Class 8 Hindi (Malhar).

NCERT Solutions Class 8

English Poorvi Hindi Malhar Maths Ganita Prakash Science Curiosity Social Exploring Society

Do Gauraiya – NCERT Solutions


Q.1: पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है क्योंकि-

  • घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
  • घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
  • पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
  • घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं

Solution:

  • घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
  • घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं

Q.2: ‘दो गौरेया’ कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?

Options:
(1) माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
(2) लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
(3) जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे ✅
(4) मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे

Explanation: जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे


Q.3: गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?

Options:
(1) दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
(2) पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया ✅
(3) दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
(4) माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया

Explanation: पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया


Q.4: माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थीं। इससे क्या पता चलता है?

  • माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
  • माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
  • माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
  • माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था

Solution:

  • माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
  • माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
  • माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी

Q.5: कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?

Options:
(1) दूसरों पर निर्भर रहना
(2) असफलताओं से हार मान लेना
(3) अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना ✅
(4) संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना

Explanation: अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना


Q.6: हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ विचार कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

Solution:

  1. कहानी में बार-बार यह दिखाया गया है कि घर में कई जीव-जंतु (जैसे चूहे, कबूतर, गौरैया) आते-जाते रहते हैं, इसलिए पिताजी ने उसे “सराय” कहा।
  2. गौरैया ने घर में घोंसला बना लिया और जैसे वह स्थायी निवासी बन गई, इसलिए असली मालिक के रूप में जीवजंतु की ओर संकेत किया गया है।
  3. माँ पक्षियों के प्रति सहानुभूति रखती थीं, जबकि पिताजी उन्हें भगाने की कोशिश करते रहे।
  4. माँ का व्यवहार व्यंग्यात्मक था, पर उनका उद्देश्य गौरेयों को बचाना था।
  5. गौरैयों का बार-बार लौट आना यह दर्शाता है कि जीवन में बार-बार प्रयास करते रहना चाहिए- यही संघर्षशीलता की पहचान है।

Q.7: पाठ (दो गौरैया) में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। प्रत्येक वाक्य के सामने दो-दो अर्थ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सबसे उपयुक्त अर्थ से मिलाइए।

क्रमवाक्यअर्थ
1वह शोर मचता है कि कानों के पर्दें फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं!पक्षियों का शोर बहुत तेज होता है, लेकिन लोग उसे संगीत की तरह सराहते हैं।
पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था।
2आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं।आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं।
पक्षी पेड़ पर तंबू लगाकर रहते हैं जैसे किसी मेले में डेरा डाला जाता है।
3वह धमा चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते।पिताजी की भागदीड़ और शोर इतना होता है कि घर के चूहे चैन से सो नहीं पाते।
चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते।
4वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं।पिताजी माँ का मजाक समझ जाते हैं।
पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं।
5पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सीं पर आ बैठे।पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए
पिताजी की छाती और साँस फूलने लगी और उन्होंने लाठी एक ओर रख दी।
6इतने में रात पड़ गई।रात किसी भारी चीज की तरह ऊपर से गिर पड़ी।
कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया।
7जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मीजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।गौरैयाँ फिर से लौट आई थीं और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हों।
गौरैयाँ शास्त्रीय संगीत का अभ्यास कर रही थीं और ‘राग मल्हार’ गा रही थीं

Solution:

क्रमवाक्यअर्थ
1वह शोर मचता है कि कानों के पदें फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं!पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को वह संगीत जैसा लगता था।
2आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं।आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं।
3वह धमा चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते।चूहों की भागदाड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते।
4वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं।पिताजी को ऐसा भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं।
5पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सीं पर आ बैठे।पिताजी की छाती और साँस फूलने लगी और उन्होंने लाठी एक ओर रख दी।
6इतने में रात पड़ गई।कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया।
7जब हम लोग नीचे उतरकर आए, तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।गौरैयाँ फिर से लौट आई थी और शांत व प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं जैसे कोई राग गा रही हो।

Q.8: अपने उत्तर को अपने मित्रों के उत्तर से मिलाइए और विचार कीजिए कि आपने कौन-से अर्थ का चुनाव किया है और क्यों?

Solution:

चयन का कारण:

  • ये वाक्य प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक शैली में लिखे गए हैं, अतः उनका अर्थ सीधा न होकर प्रसंग के अनुसार व्याख्यायित करना पड़ता है।
  • अधिकतर अर्थ प्राकृतिक और व्यवहारिक स्थितियों पर आधारित हैं, जैसे चूहों का शोर, पक्षियों का चहकना आदि।
  • ‘राग मल्हार’ का प्रयोग यहाँ गौरैयों की चहचहाहट को सुंदरता से प्रस्तुत करने के लिए किया गया है, न कि शास्त्रीय संगीत के अभ्यास को दर्शाने के लिए।

Q.9: पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
(ख) “एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”

Solution:

(क)यह कथन स्थायित्व और अपनत्व को दर्शाता है। पहले गौरैयाँ केवल मकान का निरीक्षण कर रही थीं, इसलिए उन्हें हटाना आसान होता, पर अब उन्होंने वहाँ घोंसला बना लिया है, यानी अब वे इस स्थान को अपना घर मान चुकी हैं। जब कोई व्यक्ति या जीव किसी स्थान, भावना या संबंध से जुड़ जाता है, तो उसे वहाँ से हटाना कठिन हो जाता है। यह बात केवल पक्षियों पर ही नहीं, बल्कि मनुष्यों पर भी लागू होती है।
(ख)यह पंक्ति पिताजी की सोच और उनकी रणनीति को दर्शाती है। उनका मानना था कि यदि गौरैयों को एक दिन घर में घुसने से रोक दिया जाए, तो वे खुद ही घर छोड़ देंगी। यह सोच मानव प्रवृत्ति को दिखाती है, जहाँ हम मानते हैं कि किसी समस्या को अनदेखा कर देने या थोड़ी देर के लिए रोक देने से वह अपने आप सुलझ जाएगी। लेकिन यह विचार गलत है, क्योंकि अपनापन और संघर्ष की भावना इतनी जल्दी नहीं टूटती। यह पंक्ति हमें यह सिखाती है कि अस्थायी रोकथाम से स्थायी बदलाव नहीं आता।
(ग) यह कथन क्रूर निर्णय और अंतिम उपाय को दर्शाता है। पिताजी यह मानते हैं कि केवल डराने या भगाने से गौरैयों को हटाया नहीं जा सकता, उन्हें हटाना है तो उनका घोंसला यानी उनका घर तोड़ना पड़ेगा। यह बात गहरी है- किसी का घर तोड़ना उसके अस्तित्व पर चोट करना होता है। यह पंक्ति दर्शाती है कि कई बार लोग समस्याओं को हल करने के लिए कठोर और असंवेदनशील उपाय अपनाते हैं।
यह बात इंसानों पर भी लागू होती है- जब किसी को हटाना हो, तो लोग उसका आधार, जैसे घर, नौकरी या सम्मान छीन लेते हैं।


Q.10: आपको ‘दो गौरेया’ कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा- घर पर रहने आई गौरैयाँ, माँ, पिताजी, लेखक या कोई अन्य प्राणी? आपको उसकी कौन-कौन सी बातें अच्छी लगीं और क्यों?

Solution:

मुझे इस कहानी में माँ का पात्र सबसे अच्छा लगा। वे संयमित, संवेदनशील और व्यावहारिक हैं। उन्हें पक्षियों और जीव-जंतुओं के प्रति गहरी करुणा है। वे पिताजी की चिड़चिड़ाहट और नाराज़गी का बड़े धैर्य से सामना करती हैं और व्यंग्य तथा हास्य के माध्यम से माहौल को हल्का बनाए रखती हैं। माँ की यह विशेषता मुझे बहुत अच्छी लगी कि वे संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में भी मानवीयता और सहानुभूति नहीं खोतीं। वे न केवल गौरैयों की सुरक्षा करती हैं, बल्कि परिवार में संतुलन भी बनाए रखती हैं।


Q.11: लेखक के घर में चिड़िया ने अपना घोंसला कहाँ बनाया? उसने घोंसला वहीं क्यों बनाया होगा? ‘दो गौरेया’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।

Solution:

लेखक के घर में चिड़िया ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में घोंसला बनाया। उसने वहीं इसलिए घोंसला बनाया होगा क्योंकि वह जगह ऊँचाई पर, सुरक्षित, गर्म और शांत थी। वहाँ इंसानों की सीधी पहुँच नहीं थी, इसलिए वह अंडे देने और बच्चों को पालने के लिए उपयुक्त लगी होगी।


Q.12: क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कहानी से उदाहरण दीजिए।

Solution:

हाँ, मुझे लगता है कि पशु-पक्षी भी मनुष्यों की तरह अपने घर और परिवार का महत्व समझते हैं। कहानी में गौरैयों ने पहले घर का निरीक्षण किया, फिर वहाँ घोंसला बनाकर अंडे दिए। जब अंडों से बच्चे निकले, तो माता-पिता खतरे के बावजूद बार-बार लौटकर उन्हें चुग्गा देने आते रहे। एक बार जब बच्चों ने “चीं-चीं” करके पुकारा, तो गौरैया और गौरैयाँ तुरंत लौट आए। यह व्यवहार उनके पारिवारिक जुड़ाव और ममता को दर्शाता है। इससे स्पष्ट होता है कि पशु-पक्षी भी अपने परिवार और घर के लिए उतने ही संवेदनशील होते हैं, जितने कि मनुष्य।


Q.13: “अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरकर आते हैं? ‘दो गौरेया’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।

Solution:

इस कथन से पिताजी के दृढ़ निश्चयी, आत्मविश्वासी और जुझारू स्वभाव का पता चलता है। वे आसानी से हार मानने वाले नहीं हैं और लगातार प्रयास करते रहते हैं। गौरैयों को हटाने के लिए उन्होंने कई उपाय किए, परंतु जब कोई उपाय सफल नहीं हुआ, तब भी उन्होंने शांति बनाए रखी और स्थिति को स्वीकार कर लिया। इससे उनकी धैर्यशीलता और व्यवहारिकता भी झलकती है।


Q.14: कहानी में गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?

Solution:

गौरैयों के व्यवहार में बदलाव तब आया जब उनके घोंसले को तोड़ने की कोशिश की गई और उनके अंडों से बच्चे निकल आए। पहले वे चहकती थीं और मल्हार गाती थीं, पर अंडों के फूटने के बाद वे गुमसुम हो गईं, दुबली और काली भी पड़ गईं। यह बदलाव उनकी चिंता, थकावट और बच्चों की सुरक्षा को लेकर आया।


Q.15: कहानी में गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया था? सूची बनाइए।

Solution:

गौरैयों ने निम्नलिखित स्थानों से घर में प्रवेश किया था:

  • दरवाजों के नीचे के खुले स्थानों से
  • टूटे हुए रोशनदान से
  • रसोईघर (किचन) के खुले दरवाजे से
  • अन्य खुले दरवाजों और खिड़कियों से

Q.16: ‘दो गौरेया’ इस कहानी को कौन सुना रहा है? आपको यह बात कैसे पता चली?

Solution:

इस कहानी को लेखक स्वयं सुना रहा है, अर्थात यह प्रथम पुरुष (first person) में लिखी गई है। इसका पता हमें बार-बार आने वाले “मैं” शब्द से चलता है। 
उदाहरण के लिए:

  • “मैंने भागकर दोनों दरवाजे बंद कर दिए।”
  • “मैंने सिर उठाकर ऊपर की ओर देखा।”
  • “मैंने देखा, पिताजी स्टूल से उतर आए हैं।”

इन वाक्यों से स्पष्ट है कि लेखक स्वयं इस कहानी का प्रेक्षक (देखने वाला) और कथावाचक (कहने वाला) दोनों है।


Q.17: माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?

Solution:

माँ बार-बार कह रही थीं कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी क्योंकि उन्होंने वहाँ घोंसला बनाया था और उसमें अंडे भी दे दिए थे। माँ जानती थीं कि जब कोई पक्षी अंडे देता है, तो वह अपने बच्चों को छोड़कर कहीं नहीं जाता, चाहे कोई भी खतरा हो। माँ को यह भी समझ थी कि जानवर और पक्षी अपने घर और बच्चों से कितना जुड़ाव महसूस करते हैं। इसलिए माँ को यकीन था कि गौरैयाँ नहीं जाएँगी।


Q.18: कल्पना कीजिए कि आप उस घर में रहते हैं जहाँ चिड़ियाँ अपना घर बना रही हैं। अपने घर में उन्हें देखकर आप क्या करते?

Solution:

मैं उन्हें देखकर बहुत खुश होता। मैं कभी उन्हें तंग न करता और उनके लिए दाना-पानी रखने की कोशिश करता। मैं यह भी ध्यान रखता कि उनके घोंसले के पास शांति बनी रहे, ताकि वे बिना डर के वहाँ रह सकें।


Q.19: मान लीजिए कि कहानी में चिड़िया नहीं, बल्कि नीचे दिए गए प्राणियों में से कोई एक प्राणी घर में घुस गया है। ऐसे में घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों?
(प्राणियों के नाम- चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी)

Solution:

घर में अलग-अलग प्राणियों के घुसने पर लोगों का व्यवहार उनके स्वभाव और प्रभाव पर निर्भर करेगा:

  • चूहा / मच्छर / कॉकरोच / मक्खी: इन्हें तुरंत भगाने या मारने की कोशिश की जाएगी, क्योंकि ये बीमारी फैलाते हैं और गंदगी करते हैं।
  • कुत्ता: यदि वह पालतू है, तो उसे अपनाया जाएगा; लेकिन अगर आवारा है, तो लोग उसे डराकर बाहर करने की कोशिश करेंगे।
  • तितली: इसे देखकर खुशी होगी; कोई उसे धीरे से बाहर छोड़ सकता है ताकि उसे नुकसान न पहुँचे।
  • बिल्ली: कुछ लोग डरकर उसे भगाने की कोशिश करेंगे, और कुछ उसे बाहर निकालने की शांति से कोशिश करेंगे, खासकर यदि वह बार-बार घर में आती हो।
  • कबूतर: आमतौर पर लोग उसे नुकसान नहीं पहुँचाते; दरवाजा/खिड़की खोलकर शांति से बाहर निकालने का प्रयास करेंगे।

Q.20: मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।” लेखक को विस्मय या हैरानी किसे देखकर हुई? उसे विस्मय क्यों हुआ होगा?

Solution:

लेखक को हैरानी तब हुई जब उसने देखा कि घोंसले में दो नन्हीं गौरैयाँ हैं, जो चीं-चीं करके अपने माता-पिता को बुला रही थीं।
कारण: लेखक को यह अनुमान नहीं था कि घोंसले में बच्चे होंगे। यह दृश्य नवजीवन, मासूमियत और पारिवारिक स्नेह से भरा हुआ था, जिससे लेखक चकित रह गया।


Q.21: “माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने गौरैयों को निकालने में पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?

Solution:

माँ को गौरैयों के प्रति दया और स्नेह था, इसलिए उन्होंने उन्हें घर से निकालने में पिताजी की सहायता नहीं की। वे नहीं चाहती थीं कि नन्ही गौरैयों को कोई नुकसान पहुँचे। माँ ने व्यंग्य और मज़ाक के ज़रिए पिताजी को रोकने की कोशिश की- यह उनकी समझदारी, करुणा और कोमल हृदय को दर्शाता है।


Q.22: “एक चूहा अँगीठी के पीछे बैठना पसंद करता है, शायद बूढ़ा है उसे सर्दी बहुत लगती है।” लेखक ने चूहे के विशेष व्यवहार से अनुमान लगाया कि उसे सर्दी लगती होगी। आप भी किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को ध्यान से देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा, क्या करता होगा या वह कैसा व्यक्ति होगा आदि। (संकेत- आपको उसके व्यवहार पर ध्यान देना है, उसके रंग-रूप या वेशभूषा पर नहीं)

Solution:

मैंने देखा कि एक कुत्ता हमेशा एक दुकान के बाहर बैठा रहता है। वह वहाँ से हिलता भी नहीं। मैंने अनुमान लगाया कि शायद वह उस दुकान के मालिक का पालतू है या उसे वहाँ से रोज़ाना खाना मिलता है। वह हर आने-जाने वाले को ध्यान से देखता है, लेकिन किसी पर भौंकता नहीं। इससे लगता है कि वह शांत और समझदार स्वभाव का है।


Q.23: “पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।” सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे? ‘दो गौरेया’ कहानी के संदर्भ में उत्तर दीजिए।

Solution:

घरसराय
निजी होता हैसार्वजनिक होता है
स्थायी निवासअस्थायी ठहराव
भावनात्मक जुड़ाव होता हैकेवल सुविधा के लिए उपयोग होता है
सीमित लोग रहते हैंअजनबी आते-जाते रहते हैं

Q.24: नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए-
“वे अभी भी झाँक जा रही थीं और चीं-चीं करके मानो अपना परिचय दे रही थीं, हम आ गई हैं। हमारे माँ-बाप कहाँ हैं”- नन्हीं-नन्हीं दो गौरैया क्या-क्या बोल रही होंगी?

Solution:

नन्हीं गौरैयाएँ शायद कह रही होंगी:

  • “देखो बहन, यह हमारा घर है!”
  • “माँ-बाबा कहाँ चले गए?”
  • “हम अकेले हैं, डर लग रहा है!”
  • “चीं-चीं! कोई हमें खाना दे दो!”
  • “क्या हमें यहीं रहना है अब?”

Q.25: नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए-
“चिड़ियाँ एक-दूसरे से पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” घोंसले से झाँकती गौरैयाएँ क्या-क्या बातें कर रही होंगी?

Solution:

 घोंसले से झाँकती गौरैयाएँ आपस में शायद कह रही होंगी:

  • “अरे! यह आदमी इतनी उछल-कूद क्यों कर रहा है?”
  • “लगता है यह हमें यहाँ से भगाना चाहता है!”
  • “मुझे तो हँसी आ रही है, यह तो खुद उड़ने की कोशिश कर रहा है!”
  • “हम कहीं नहीं जाएँगे, अब तो यही हमारा घर है!”

Q.26: नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए-
“एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आई और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगीं।” जब उन्होंने पहली बार घर में प्रवेश किया तो उन्होंने आपस में क्या बातें की होंगी?

Solution:

पहली बार घर में घुसने पर गौरैयाओं ने आपस में शायद यह बातें की होंगी:

  • “वाह! कितना खुला, शांत और सुरक्षित घर लगता है!”
  • “इस कोने में घोंसला बनाना ठीक रहेगा।”
  • “पहले अच्छे से देख लो, कहीं कोई खतरा तो नहीं?”
  • “सब ठीक है, चलो अब यहीं रहेंगे!”

Q.27: नीचे दी गई स्थितियों के लिए अपने समूह में मिलकर अपनी कल्पना से संवाद लिखिए और बातचीत को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए-
“उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्ही-नन्ही चोंचों में चुगा डालने लगे।” गौरैयाँ और उनके बच्चों ने क्या-क्या बातें की होंगी?

Solution:

 माँ-बाप गौरैयाओं और उनके बच्चों के बीच संवाद:
बच्चे:

  • “माँ, आप आ गए! हमें बहुत भूख लगी थी!”
  • “चीं-चीं! आपने हमें अकेला क्यों छोड़ दिया?”
  • “हमें डर लग रहा था!”

माँ-बाप:

  • “हम यहीं हैं, बच्चों। अब डरने की ज़रूरत नहीं!”
  • “लो, यह चुगा खाओ और आराम से बैठो!”
  • “हम फिर दाना लाने जा रहे हैं, जल्दी लौटेंगे।”

Q.28: मान लीजिए कि घोंसले में अंडों से बच्चे न निकले होते। ऐसे में कहानी आगे कैसे बढ़ती? यह बदली हुई कहानी लिखिए।

Solution:

अगर अंडों से बच्चे न निकले होते, तो पिताजी शायद बिना झिझक घोंसला तोड़ देते। गौरैयाँ कई बार लौटकर आतीं, लेकिन घोंसला न पाकर दुखी हो जातीं और अंततः किसी और सुरक्षित स्थान की खोज में उड़ जातीं। माँ यह सब चुपचाप देखतीं, मन में पीड़ा होती, पर कुछ कहतीं नहीं। लेखक के मन में यह घटना गहराई से बैठ जाती। घर एक बार फिर शांत हो जाता, लेकिन गौरैयों की चहचहाहट की कमी सबको खलने लगती। धीरे-धीरे पिताजी भी सोचने लगते कि उन्होंने कुछ बेहद सुंदर और जीवन्त खो दिया। कहानी एक ऐसे मोड़ पर पहुँचती, जहाँ पश्चाताप, खालीपन और प्रकृति से जुड़ाव की टूटन का गहरा एहसास छा जाता।


Q.29: “माँ खिलखिलाकर हँस दीं।”
इस वाक्य में ‘खिलखिलाकर’ शब्द बता रहा है कि माँ कैसे हँसी थीं। कोई कार्य कैसे किया गया है, इसे बताने वाले शब्द ‘क्रिया विशेषण’ कहलाते हैं। ‘खिलखिलाकर’ भी एक क्रिया विशेषण शब्द है।
अब नीचे दिए गए रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।(क) पिताजी ने झिड़ककर कहा, “तू खड़ा क्या देख रहा है?”
(ख) “देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो”, माँ ने अबकी बार गंभीरता से कहा।
(ग) “किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए”, उन्होंने गुस्से में कहा।

Solution:

(क) माँ ने बर्तन झिड़ककर रसोई से बाहर रख दिए।
(ख)शिक्षक ने छात्रों को गंभीरता से पढ़ाई करने की सलाह दी।
(ग) राहुल गुस्से में किताब पटककर चला गया।
अब आप इनसे मिलते-जुलते कुछ और क्रिया विशेषण शब्द सोचिए और उनका प्रयोग करते हुए कुछ वाक्य बनाइए।
(संकेत- धीरे से, जोर से, अटकते हुए, चिल्लाकर, शरमाकर, सहमकर, फुसफुसाते हुए आदि।)

  • धीरे से:वह धीरे से कमरे में दाखिल हुआ ताकि कोई जाग न जाए।
  • जोर से: बच्चा खेलते-खेलते जोर से हँस पड़ा।
  • अटकते हुए: परीक्षा में उसने उत्तर अटकते हुए दिया।
  • चिल्लाकर: वह चिल्लाकर बोला, “यह मेरी चीज़ है!”
  • शरमाकर: लड़की शरमाकर नीचे देखने लगी।
  • सहमकर:वह तेज आवाज सुनकर सहमकर पीछे हट गया।
  • फुसफुसाते हुए: बच्चे आपस में फुसफुसाते हुए बातें कर रहे थे।

Q.30: कहानी में आपने पढ़ा कि लेखक के घर में अनेक प्राणी रहते थे। लेखक ने उनका वर्णन ऐसे किया है जैसे वे भी मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हैं। कहानी में से चुनकर उन प्राणियों की सूची बनाइए और बताइए कि वे मनुष्यों जैसे कौन-कौन से काम करते थे?
(क) बिल्ली – फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है।
(ख) ________
(ग) ________
(घ) ________
(ङ) ________

Solution:

(क) बिल्ली- “फिर आऊँगी” कहकर चली जाती है- जैसे कोई व्यक्ति वादा कर के जाता है।
(ख) चूहे- भागदौड़ करते हैं, धमाचौकड़ी मचाते हैं- जैसे बच्चे खेलते समय शोर मचाते हैं।
(ग) चमगादड़- उल्टे लटके रहते हैं, छुपने की जगह ढूंढते हैं- जैसे कोई डरपोक व्यक्ति कोना पकड़ ले।
(घ) कबूतर- कोठी के कोने में कब्जा करके बैठते हैं- जैसे किरायेदार बिना पूछे रहने लग जाए।
(ङ) गौरैया- निरीक्षण करती हैं, घोंसला बनाती हैं, बच्चों की देखभाल करती हैं- जैसे कोई परिवार नया घर देखकर उसमें रहने का निर्णय लेता है।


Q.31: “माँ और पिताजी दोनों सोफे पर बैठे उनकी ओर देखे जा रहे थे।”
“पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक मात्रा-भर के अंतर से उसके अर्थ में परिवर्तन हो जाता है।
अब नीचे दिए गए शब्दों की मात्राओं और अर्थों के अंतर पर ध्यान दीजिए। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए अपने मन से वाक्य बनाइए।

  • नाच – नाचा – नचा
  • हार – हरा – हारा
  • पिता – पीता
  • चूक – चुक
  • नीचा – नीचे
  • सहसा – साहस

Solution:

  • नाच-नाचा-नाच
    नाच (संज्ञा):
     मुझे नाच देखना बहुत पसंद है।
    नाचा (क्रिया-भूतकाल): वह खुशी में पूरे गाँव में नाचा।
  • हार-हारा
  • हार (संज्ञा): उसने माँ को फूलों की हार भेंट की।
    हारा (क्रिया): वह चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी से हारा।
  • पिता-पीता
    पिता (संज्ञा): 
    मेरे पिता बहुत अनुशासनप्रिय हैं।
    पीता (क्रिया): वह रोज़ दूध पीता है।
  • चुक-चूक
  • चुक (क्रिया- भूतकाल): मैं समय पर टिकट लेना चुक गया।
    चूक (संज्ञा): यह तुम्हारी बड़ी चूक थी कि तुम समय पर नहीं पहुँचे।
  • नीचा-नीचे
    नीचा (विशेषण): उसने अपनी गलती मानकर सिर नीचा कर लिया।
    नीचे (क्रिया/क्रिया विशेषण): किताब मेज़ के नीचे रखी है।
  • सहसा-साहस
    सहसा (क्रिया विशेषण):
     सहसा जोर की आवाज़ आई और सब चौंक गए।
    साहस (संज्ञा): कठिन समय में साहस नहीं खोना चाहिए।

Q.32: कहानी में माँ द्वारा कही गई कुछ बातें नीचे दी गई हैं-
“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं।”
“एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।”
“देखो जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब यहाँ से नहीं जाएँगी।”
कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। वाद-विवाद का विषय है-
“माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं।”
कक्षा में आधे समूह इस कथन के पक्ष में और आधे समूह इसके विपक्ष में तर्क देंगे।

Solution:

पक्ष में तर्क (निकालना चाहिए था):

  • स्वच्छता का प्रश्न: पक्षियों से गंदगी फैलती है, जिससे बीमारियाँ हो सकती हैं।
  • घरेलू नुकसान: उनके घोंसले से सीलन, बदबू या दीवार की खराबी हो सकती है।
  • मानव प्राथमिकता: यह मनुष्यों का घर है, अन्य प्राणी अपने प्राकृतिक स्थानों पर रहें।
  • नियंत्रण आवश्यक: यदि एक बार घोंसला बना, तो हर साल आते रहेंगे।

विपक्ष में तर्क (नहीं निकालना चाहिए था):

  • सह-अस्तित्व की भावना: मनुष्य और पक्षी दोनों एक ही पारिस्थितिकी तंत्र के अंग हैं।
  • ममता और जीवन का सम्मान: अंडों के साथ घोंसला तोड़ना अमानवीयता है।
  • प्रजातियों का संरक्षण: गौरैया जैसी पक्षियों की संख्या घट रही है, उनका संरक्षण जरूरी है।
  • माँ का दृष्टिकोण: ये जीव घर को जीवंत और आनंदमय बनाते हैं।

कक्षा में आधे समूह इस कथन के पक्ष में और आधे समूह इसके विपक्ष में तर्क देंगे।
छात्रों के संवाद (उदाहरण):

  • पक्ष: “अगर हर कोई अपने घर में पक्षियों को घोंसला बनाने देगा, तो घर, घर नहीं रहेगा- जंगल बन जाएगा।”
  • विपक्ष: “लेकिन अगर हर कोई उन्हें भगाएगा, तो ये मासूम पक्षी जाएँगे कहाँ?”
  • पक्ष: “गौरैया गंदगी फैलाती हैं, बच्चों की सेहत के लिए यह ठीक नहीं।”
  • विपक्ष: “तो क्या हम केवल अपने आराम के लिए किसी के जीवन को उजाड़ दें?”

Q.33: “कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।”
इस पंक्ति में बताया गया है कि पिताजी का दृष्टिकोण कैसे बदल गया। इस प्रकार यह विशेष वाक्य है। इस तरह के वाक्यों से कहानी और अधिक प्रभावशाली बन जाती है।
(क) आपको इस कहानी में ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। उन्हें अपने समूह के साथ मिलकर ढूंढ़िए और उनकी सूची बनाइए।
(ख) इस कहानी की कुछ विशेषताओं को नीचे दिया गया है। इनके उदाहरण कहानी में से चुनकर लिखिए।

Solution:

(क) कहानी की प्रमुख विशेषताएँ (बिंदुवार सूची):

  • प्रकृति और जीवों के साथ सह-अस्तित्व का संदेश
    – कहानी हमें यह सिखाती है कि मनुष्य को अन्य जीवों के साथ मिल-जुलकर रहना चाहिए।
  • मानव स्वभाव में बदलाव की झलक
    – पिताजी की सोच में जो परिवर्तन आया, वह एक मानवीय भावनात्मक विकास दर्शाता है।
  • सहज और सरल भाषा, बाल दृष्टिकोण के अनुकूल
    -भाषा शैली बच्चों के दृष्टिकोण से बहुत प्रभावी है।
  • प्रत्येक पात्र का अलग व्यवहार और शैली
    – माँ का स्नेह, पिताजी का कठोरता से बदलाव, और लेखक की निरीक्षण क्षमता साफ झलकती है।
  • पक्षियों के व्यवहार को मानवीय रूप देना
    – जैसे गौरैया बच्चों से बातें कर रही हों, ऐसा चित्रण कहानी को रोचक बनाता है।
  • व्यंग्य और हल्के हास्य का प्रयोग
    – माँ द्वारा पिताजी की हरकतों पर हँसना कहानी को हल्का-फुल्का बनाता है।
  • भावनात्मकता और करुणा का सुंदर चित्रण
    – माँ का घोंसले को न तोड़ने का आग्रह और लेखक का अंत में भावुक होना।
  • रचनात्मक कल्पना और भावनात्मक प्रतीक
    – जैसे गौरैया मल्हार गा रही हो – यह कल्पना कहानी को काव्यात्मक बनाती है।
  • घरेलू वातावरण और दिनचर्या का यथार्थ चित्रण
    – कहानी में एक सामान्य घर की सजीव झलक मिलती है।
  • छोटे विवरणों में गहराई
    – छोटे संवाद और घटनाएँ भी बड़ा प्रभाव छोड़ती हैं, जैसे बच्चे चीं-चीं करते हैं और माँ मुस्कराती हैं।

(ख) विशेषताओं के उदाहरण सहित वर्णन

  • जीव-जंतुओं का मानवीकरण
    उदाहरण: “अब एक दिन दो गौरैया सीधी अंदर घुस आईं और बिना पूछे उड़-उड़कर मकान देखने लगी। पिताजी कहने लगे कि मकान का निरीक्षण कर रही हैं कि उनके रहने योग्य है या नहीं।”
    विश्लेषण: गौरैयों को मानवीय गुण दिया गया है, जैसे कि वे मकान का निरीक्षण कर रही हों, जो मानव व्यवहार को दर्शाता है।
  • हास्य का समावेश
    उदाहरण: “माँ फिर हँस दी। ‘तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो। एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी दरवाजे बंद कर दो।'”
    विश्लेषण: माँ का पिताजी के असफल प्रयासों पर व्यंग्य और हँसी कहानी में हास्य उत्पन्न करता है।
  • मानवीय भावनाओं का चित्रण
    उदाहरण: “पिताजी के हाथ ठिठक गए। … पिताजी स्टूल पर से नीचे उतर आए हैं। और घोंसले के तिनकों में से लाठी निकालकर उन्होंने लाठी को एक ओर रख दिया है और चुपचाप कुर्सी पर आकर बैठ गए हैं।”
    विश्लेषण: नन्हीं गौरैयों को देखकर पिताजी का गुस्सा सहानुभूति में बदल जाता है, जो उनकी मानवीय संवेदनशीलता को दर्शाता है।
  • प्रकृति और मानव के बीच संबंध
    उदाहरण: “उनके माँ-बाप झट से उड़कर अंदर आ गए और चीं-चीं करते उनसे जा मिले और उनकी नन्हीं-नन्हीं चाँचों में चुग्गा डालने लगे।”
    विश्लेषण: गौरैयों का अपने बच्चों की देखभाल करना और मानव परिवार का इसे देखना प्रकृति और मानव के बीच स्नेहपूर्ण संबंध को दर्शाता है।
  • सामाजिक व्यंग्य
    उदाहरण: “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
    विश्लेषण: माँ का यह व्यंग्य पिताजी की असफल कोशिशों पर हल्का-सा सामाजिक कटाक्ष है, जो उनकी सीमाओं को उजागर करता है।

नोट: प्रत्येक विशेषता के लिए कहानी से प्रासंगिक उदाहरण चुने गए हैं, जो संक्षिप्त और स्पष्ट रूप से विशेषता को दर्शाते हैं।


Q.34:

कहानी की विशेषताएँकह्नानी में से उदाहरण
1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहनाजो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वही सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो।
2. हास्य यानी हँसी-मज़ाक का उपयोग किया जाना 
3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और 
4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना 
5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना 
6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना 
7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना 

Solution:

कहानी की विशेषताएँकहानी में से उदाहरण
1. किसी बात को कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहनाजो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है, पिताजी कहते हैं वही सीधा हमारे घर पहुँच जाता है, जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो।
2. हास्य यानी हँसी-मज़ाक का उपयोग किया जाना“पिताजी अब हार मानने वाले आदमी नहीं थे। उन्होंने लाठी दीवाट के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सीं पर आ बेठे।”
3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और“हम लोग नीचे उतरकट आए, तो वे फिट से मौजूद थीं औट मजे से बैठी मल्हाट गा टही थीं।”
4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान लगाना“मुझे लगता था कि वे सब समझते हैं कि माँ उनका मज़ाक उड़ा टही हैं।”
5. किसी की कही बात को उसी के शब्दों में लिखना“किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घट तोड़ देना चाहिए।”
6. किसी प्राणी या उसके कार्य को कोई अन्य नाम देना“वे मज़े से बैठी मल्हाट गा टही थीं।” (गौटैयों के चहकने को ‘मल्हाट’ टाग गाना कहा गया है।)
7. किसने किससे कोई बात कही, यह सीधे-सीधे बताए बिना उस संवाद को लिखना“अब ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहीं घोंसला बना लिया है!” (यह संवाद माँ का है, पर नाम नहीं बताया गया है।)

Q.35: “गौरैयों ने घोंसले में से सिर निकालकर नीचे की ओर झाँककर देखा और दोनों एक साथ ‘चीं-चीं’ करने लगीं।” आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में आपको कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?

Solution:

मेरे घर के पास कई तरह के पक्षी आते हैं- कबूतर, मैना, कोयल और कभी-कभी तोते भी। मैंने उन्हें कई बार सुबह-सुबह चहचहाते, पेड़ों की डालियों पर फुदकते और अपने बच्चों को दाना खिलाते देखा है।
उनके व्यवहार में कई भाव दिखाई देते हैं:

  • प्रेम और ममता: जब वे अपने बच्चों को चोंच से खाना खिलाते हैं।
  • सावधानी और सतर्कता: जब कोई पास जाता है, तो वे फुर्र से उड़ जाते हैं।
  • खुशी: सुबह के समय वे चहचहाकर जैसे खुशियाँ बाँटते हैं।
  • मिल-जुलकर रहना: कई बार वे एक साथ दाना चुगते हैं, लेकिन आपस में लड़ते नहीं।

Q.36: “कमरे में फिर से शोर होने लगा था, पर अबकी बार पिताजी उनकी ओर देख-देखकर केवल मुसकराते रहे।” कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का अपने घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? उनके बारे में बताइए। साझेदारी में यदि कोई समस्या आती है तो उसे कैसे हल करते हैं?

Solution:

हाँ, मैं अपनी छोटी बहन के साथ अपना कमरा और खिलौने साझा करता हूँ। कभी-कभी मैं अपनी किताबें दोस्तों को पढ़ने के लिए भी देता हूँ।
साझेदारी में कभी-कभी समस्याएँ आती हैं, जैसे:

  • कोई मेरी चीज़ बिना पूछे ले लेता है।
  • दोनों को एक ही चीज़ एक साथ चाहिए होती है।

इन समस्याओं का समाधान मैं इस तरह करता हूँ:

  • मैं उनसे शांतिपूर्वक बात करता हूँ।
  • हम समय बाँट लेते हैं, जैसे एक चीज़ को आधा-आधा समय उपयोग करना।
  • अगर बात नहीं बनती, तो माँ-पापा से मदद लेता हूँ।

साझा करने से हम दूसरों की ज़रूरत को समझते हैं और हमारे आपसी रिश्ते मजबूत होते हैं।


Q.37: परिवार के लोग गौरैयों को घर से बाहर भगाने की कोशिश करते हैं, किंतु गौरैयों के बच्चों के कारण उनका दृष्टिकोण बदल जाता है। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?

Solution:

हाँ, एक बार स्कूल में एक नया लड़का आया था। वह बहुत चुपचाप और अकेला रहता था। पहले मुझे लगा कि वह घमंडी है, इसलिए मैं उससे बात नहीं करता था।
फिर एक दिन वह मुझसे पेंसिल माँगने आया। जब मैंने उससे बात की, तो पता चला कि वह बहुत शर्मीला है, लेकिन बहुत दयालु और मददगार भी है। उसके बाद हम अच्छे दोस्त बन गए।
इस घटना से मुझे यह सीख मिली कि किसी को अच्छी तरह जाने बिना उसके बारे में राय नहीं बनानी चाहिए।


Q.38: घोंसला बनाना चिड़ियों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। विभिन्न पक्षी अलग-अलग तरह के घोंसले बनाते हैं। इन घोंसलों में वे अपने अंडे देते हैं और अपने चूजों को पालते हैं।
अपने आस-पास विभिन्न प्रकार के घोंसले ढूंढ़िए और उन्हें ध्यान से देखिए और नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। (सावधानी- उन्हें हाथ न लगाएँ अन्यथा पक्षियों, उनके अंडों और आपको भी खतरा हो सकता है)

क्रम संख्याघोंसले को कहाँ देखाघोंसला किन चीजों से बनाया गया थाघोंसला खाली था या नहींघोंसला किस पक्षी का था
     
     
     
     
     

Solution:

क्रम संख्याघोंसले को कहाँ देखाघोंसला किन चीजों से बनाया गया थाघोंसला खाली था या नहींघोंसला किस पक्षी का था
1नीम के पेड़ की ऊपरी थाखा पटसूखी घास, पत्तियाँ, टेथे, धागेनहीं (उसमें चूजे थे)गौटैया
2स्कूल की इमारत के टोथनदाज मेंसूखी पत्तियाँ और बाटीक तिनकेहाँकबूतर
3छत की बालकनी के कोने मेंधागे, काग़ज़ के टुकड़े, रूईनहीं (अंडे टखे थे)बुलबुल
4पुराने छायादाट छप्पट के नीचेमिट्टी और घास मिश्रित गोल घोंसलाहाँअबाबील
5बग़ीचे के एक पुटाने आम के पेड़ के तने के खोखल मेंलकड़ी के टुकड़े, सूखे पत्ते, बालहाँमैना

Q.39: घोंसला बनाना चिड़ियों के जीवन का एक सामान्य हिस्सा है। विभिन्न पक्षी अलग-अलग तरह के घोंसले बनाते हैं। इन घोंसलों में वे अपने अंडे देते हैं और अपने चूजों को पालते हैं।
विभिन्न पक्षियों के घोंसलों के संबंध में एक प्रस्तुति तैयार कीजिए। उसमें आप चाहें तो उनके चित्र और थोड़ी रोचक जानकारी सम्मिलित कर सकते हैं।

Solution:

गौरैया (House Sparrow)

  • घोंसले का आकार: छोटा और गोल
  • घोंसले की सामग्री: सूखी घास, रुई, पंख और धागे
  • स्थान: छत, रोशनदान या पुरानी अलमारियों में
  • विशेषता: घरों के पास रहना पसंद करती है

कबूतर (Pigeon)

  • घोंसले का आकार: बड़ा, खुला और साधारण
  • घोंसले की सामग्री: सूखी टहनियाँ और डंडियाँ
  • स्थान: खिड़कियों, मुंडेरों या रोशनदानों में
  • विशेषता: इंसानों के आस-पास रहना पसंद करते हैं

बुलबुल (Red-vented Bulbul)

  • घोंसले का आकार: प्याले जैसा सुंदर
  • घोंसले की सामग्री: नाजुक तिनके, धागे, पत्तियाँ
  • स्थान: झाड़ियों या छोटे पेड़ों में
  • विशेषता: बहुत सुरिली आवाज में चहकती है

अबाबील (Swallow)

  • घोंसले का आकार: गोल और चिपका हुआ
  • घोंसले की सामग्री: मिट्टी और लार
  • स्थान: दीवार या छत के कोनों में
  • विशेषता: समूह में घोंसले बनाते हैं

मैना (Common Myna)

  • घोंसले का आकार: बड़ा और आरामदायक
  • घोंसले की सामग्री: सूखी लकड़ियाँ, पत्ते, कागज़
  • स्थान: पेड़ों के खोखलों या दीवार की दरारों में
  • विशेषता: मनुष्यों के आसपास रहना पसंद करती है

Q.40: “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे! माँ ने व्यंग्य से कहा।”
आप समझ गए होंगे कि इस वाक्य में माँ ने पिताजी से कहा है कि वे चिड़ियों को नहीं निकाल सकते। इस प्रकार से कही गई बात को ‘व्यंग्य करना’ कहते हैं।
व्यंग्य का अर्थ होता है- हँसी-मज़ाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी, बुराई या विडंबना को उजागर करना।
व्यंग्य में बात को सीधे न कहकर उलटा या संकेतात्मक ढंग से कहा जाता है ताकि उसमें चुटकीलापन भी हो और गंभीर सोच की संभावना भी बनी रहे। अनेक बार व्यंग्य में हास्य भी छिपा होता है।
(क) आपको इस कहानी में कौन-कौन से वाक्य पढ़कर हँसी आई? उन वाक्यों को चुनकर लिखिए।
(ख) अब चुने हुए वाक्यों में से कौन-कौन से वाक्य ‘व्यंग्य’ कहे जा सकते हैं? उन पर सही का चिह्न लगाइए।

Solution:

(क)

  • “छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
  • “अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहीं घोंसला बना लिया है!”
  • “चूहे धमाचौकड़ी मचाते हैं, जैसे पूरी कोठी उन्हीं की हो!”
  • “पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे।”
  • “हम नीचे उतरकर आए, तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।”
  • “माँ मुस्कराकर बोलीं – अब तो ये कहीं नहीं जाएँगी!”

(ख) 

क्रम संख्यावाक्यक्या यह व्यंग्य है?
1“छोड़ो जी, चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”{tex}\checkmark{/tex} हाँ
2“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जाती। अब तो इन्होंने यहीं घोंसला बना लिया है!”{tex}\checkmark{/tex} हाँ
3“पिताजी अब हार मानने वाले आदमी नहीं थे।”{tex}\checkmark{/tex} हाँ
4“पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बेठे।”{tex}\times{/tex} नहीं
5“हम नीचे उतरकर आए, तो वे फिर से मौजूद थी और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।”{tex}\times{/tex} नहीं
6“चूहे धमाचौकड़ी मचाते हैं, जैसे पूरी कोठी उन्हीं की हो!”{tex}\checkmark{/tex} हाँ
7“माँ मुस्कराकर बोली – अब तो ये कहीं नहीं जाएँगी!!”{tex}\times{/tex} नहीं (प्रेम भाव)

Q.41: नीचे दी गई चित्र-पहेली में बिल्ली को चूहे तक पहुँचाइए।

Solution:


Q.42: ‘दो गौरैया’ कहानी में आपने पढ़ा कि ‘दो गौरैया’ लेखक के घर में बिन बुलाए अतिथि की तरह आ जाती हैं। पिछले कई वर्षों से गाँव-नगरों में इन नन्हीं चिड़ियों की संख्या निरंतर कम होती जा रही है। इसलिए भारत सरकार ने इनके संरक्षण के लिए 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ घोषित किया है। आइए, पढ़ते हैं ‘विश्व गौरैया दिवस’ पर प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा प्रकाशित लेख का एक अंश-

Solution: विद्यार्थी स्वयं पढ़ने का प्रयास करें।

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