CBSE Class 12 Hindi Core Sample Paper 2027 में कई नए बदलाव शामिल किए गए हैं, जो बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए काफी उपयोगी हैं। इस पेपर का अभ्यास करने से छात्रों को नए परीक्षा पैटर्न और अलग-अलग प्रकार के प्रश्नों—जैसे अपठित गद्यांश, लेखन कार्य और पाठ्यपुस्तक से जुड़े सवाल—की अच्छी समझ मिलती है।
इस सैंपल पेपर को बार-बार हल करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और परीक्षा के समय को सही तरीके से संभालना आसान हो जाता है। साथ ही, इससे पाठों की समझ मजबूत होती है और लिखने व अपनी बात स्पष्ट रूप से व्यक्त करने की क्षमता भी बेहतर होती है।
इस वर्ष CBSE परीक्षा के ढांचे में और सुधार कर सकता है, जिसमें तर्कशक्ति और सीखे हुए ज्ञान के सही उपयोग पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। इसलिए सैंपल पेपर में ऐसे प्रश्न हो सकते हैं जो रटने के बजाय समझ को जांचें।
अच्छी तैयारी के लिए छात्रों को CBSE Class 12 Hindi Core Sample Paper 2027 का नियमित अभ्यास करना चाहिए और नए पैटर्न, अंक योजना और प्रश्नों के बदलते तरीके को ध्यान से समझना चाहिए।
Question Paper and Solution PDF
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कक्षा 12 हिंदी कोर सैंपल पेपर 2026–27 में कुछ नए बदलाव किए गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों की सोचने और समझने की क्षमता को परखना है। नीचे इन मुख्य बदलावों की आसान जानकारी दी गई है:
Class 12 – हिंदी कोर
Class 12 Hindi Core Sample Paper 2027 (Set-4)
निम्नलिखित निर्देशों को बहुत सावधानी से पढ़िए और उनका अनुपालन कीजिए:
- यह प्रश्न-पत्र तीन खण्डों में विभाजित है।
- खंड – क में अपठित बोध पर आधारित प्रश्न पूछे गए हैं । सभी प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
- खंड – ख में पाठ्यपुस्तक अभिव्यक्ति और माध्यम से प्रश्न पूछे गए हैं । प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
- खंड – ग में पाठ्यपुस्तक आरोह तथा वितान से प्रश्न पूछे गए हैं । प्रश्नों में आंतरिक विकल्प दिए गए हैं।
- तीनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
- यथासंभव तीनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर क्रमशः लिखिए।
खंड – क
- निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (10)
संवेदनशील व्यक्तियों में एक वर्ग उनका है जिनकी वृत्ति लेखन है। लेखन कोई मशीनी क्रिया नहीं है। इसमें विचारों से जूझना पड़ता है। ऐसे लोगों के लिए शब्दों के सीमित संसार में अपनी मंशा को शब्दों में उकेरना कष्टदायक भी हो जाता है। मगर जो अनुभूति, पीड़ा, हर्षोल्लास लेखक के हृदय में उपजता है, उनको अभिव्यक्त किया ही जाना है, भले ही पाठक कम हों या न हों। चेखब की एक कहानी में नायक लेखक है जिसकी कथाएँ कोई नहीं सुनता, मगर हर शाम वह घर लौटने पर घोड़े को अपनी कहानी सुनाता है। अनेक शीर्ष लेखकों को आरंभिक दौर में पाठक-प्रकाशक नहीं मिले, किंतु वे निराशा के गर्त में नहीं डूबे। जिनके पास कुछ ठोस कहने-लिखने को है, वे कभी थमेंगे नहीं।
सृजन इहलोक की अस्मिता नहीं है। यह कार्य पारलौकिक शक्तियों का है। लेखन कर्म नहीं धर्म है, जिसके निर्वहन के लिए अथक निष्ठा, निरंतरता और श्रम आवश्यक होते हैं। आज पुस्तकों के प्रसार में अपेक्षित वृद्धि दर्ज न होने से यह अर्थ नहीं लगाना चाहिए कि लेखन, विचार और लिखित शब्द की गरिमा क्षीण हो रही है, या लिखने वाले घट गए हैं, या लेखक अपना रास्ता बदल रहे हैं। बेशक, डिजिटल चकाचौंध के प्रभाव में जानने, सीखने, समझने के लिए अधिसंख्य जनों का रुझान पढ़ने-लिखने के बजाय बोलने-सुनने पर अधिक है। जब दुनिया अत्याधुनिक हो रही है, तो लेखन-कर्म पुरानी शैली में कैसे हो सकता है।
पाठकों को भी कम्प्यूटरी साधन अनुकूल और सुविधाजनक लगते हैं। मगर इससे लेखन की भूमिका गौण नहीं हुई है। नए किरदारों की आवश्यकता तो बरकरार रहेगी ही। लोक-जीवन में मुद्रित शब्दों के प्रति समादर कमतर नहीं हुआ है, उनके कहे-लिखे की प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न नहीं लगे हैं और न लगेंगे।- लेखक का उद्देश्य होता है: (1)
- आर्थिक उपार्जन
- भावनाओं की अभिव्यक्ति
- मान-सम्मान की प्राप्ति
- पाठकों की संतुष्टि
- चेखब का उदाहरण यहाँ क्यों दिया गया है? (1)
- आरंभिक समय के संघर्ष से न घबराने के लिए
- लेखक के जीवन की कठिनाइयों को दर्शाने के लिए
- लेखन-कर्म की जटिलता को बताने के लिए
- कहानी के नायक की सहनशीलता दर्शाने के लिए
- निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए: (1)
कथन: अनेक शीर्ष लेखक प्रारंभ में पाठक-प्रकाशक नहीं मिलने से नैराश्य के गर्त में नहीं डूबे।
कारण: विचारों की सत्यता और आगामी उपयोगिता के प्रति उन्हें कोई शंका नहीं रहती।
विकल्प:- कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
- कारण सही है, किंतु कथन ग़लत है।
- कथन तथा कारण दोनों सही हैं, किंतु कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
- कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- लेखन कर्म का रूप क्यों बदल रहा है? (1)
- लेखन को ‘मशीनी-क्रिया’ क्यों नहीं कहा जा सकता? (2)
- डिजिटल क्रांति का लेखन-क्षेत्र में क्या प्रभाव दिखाई देता है? (2)
- ‘नए किरदारों की आवश्यकता तो बरकरार रहेगी’ – पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए। (2)
- लेखक का उद्देश्य होता है: (1)
- निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (8)
सिमटा पंख साँझ की लाली
जा बैठी अब तरु शिखरों पर
ताम्रपर्ण पीपल से, शतमुख
झरते चंचल स्वर्णिम निर्झर!
ज्योति स्तंभ-सा धँस सरिता में
सूर्य क्षितिज पर होता ओझल,
बृहद् जिह्वा विश्लथ केंचुल-सा
लगता चितकबरा गंगाजल!
धूपछाँह के रंग की रेती
अनिल उर्मियों से सर्पांकित
नील लहरियों में लोड़ित
पीला जल रजत जलद से बिंबित!
सिकता, सलिल, समीर सदा से
स्नेह पाश में बँधे समुज्ज्वल,
अनिल पिघलकर सलिल, सलिल
ज्यों गति द्रव खो बन गया लवोपल
शंख घंट बजते मंदिर में
लहरों में होता लय कंपन,
दीप शिखा-सा ज्वलित कलश
नभ में उठकर करता नीरांजन!- तरु शिखर पर जाकर कौन बैठ गया है? (1)
(A) सूर्य रूपी पक्षी
(B) संध्या रूपी पक्षी
(C) थका-हारा पक्षी
(D) समय रूपी पक्षी - कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प का चयन कीजिए:
(1)कॉलम-I कॉलम-II
1. ज्योति-स्तंभ(i) कलश
2. केंचुल-सा(ii) गंगाजल
3. दीपशिखा(iii) सूर्य
विकल्प:
(A) 1-(iii), 2-(ii), 3-(i)
(B) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
(C) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i)
(D) 1-(i), 2-(ii), 3-(iii) - स्नेह रूपी बंधन में कौन-कौन बँधे हैं? (1)
(A) लहर, जलधार, रेत
(B) लहर, रेत, अग्नि
(C) हवा, रेत, पानी
(D) हवा, लहर, अग्नि - संध्या के समय गंगा नदी कैसी प्रतीत हो रही है? (1)
- संध्याकालीन प्रकृति की सुंदरता का वर्णन कीजिए। (2)
- संध्या के नदी तट के दृश्य का वर्णन कीजिए। (2)
- तरु शिखर पर जाकर कौन बैठ गया है? (1)
खंड ख
- निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के लगभग 80 शब्दों में उत्तर दीजिए: (4×2=8)
- पत्रकारीय लेखन से क्या अभिप्राय है? क्या पत्रकारीय लेखन को जल्दी में लिखा गया साहित्यिक या सृजनात्मक लेखन माना जा सकता है?
- मुद्रित माध्यमों के लिए लिखते समय किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है?
- कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय दृश्य कैसे विभाजित किए जाते हैं?
- निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं चार प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए: (2×4=8)
- भावों और विचारों को लेख की शक्ल देना ज़्यादातर लोगों के लिए मुश्किल कार्य क्यों है?
- सिनेमा, रंगमंच और रेडियो नाटक में क्या अंतर है?
- कहानी का नाट्य रूपांतरण करते समय संवादों को किस प्रकार नाटकीय बनाया जा सकता है?
- समाचार-पत्र-पत्रिकाओं में ‘संपादक के नाम पत्र’ का क्या महत्त्व है?
- इंटरनेट पत्रकारिता से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
- निम्नलिखित दिए गए विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए:
- भीषण गर्मी में बादलों का बरसना विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।
- ऑनलाइन खेलों की बढ़ती लत विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।
- शहरों की तरफ भागता ग्रामीण विषय पर रचनात्मक लेख लिखिए।
खंड ग
- निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए: (2×2=4)
- आपकी दृष्टि में कविता क्या है- ‘चिड़िया की उड़ान’, ‘फूलों का महकना’ या ‘बच्चों की रचनात्मक ऊर्जा’? कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
- ‘खतरनाक परिस्थितियों का सामना कर मनुष्य और अधिक सक्षम बनता है।’ – ‘पतंग’ कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
- ‘बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से जैसे धुल गई हो’ ‘उषा’ कविता से उद्दृत इस पंक्ति में किस सिल के और कौन-से केसर से धुलने की बात कही गई है? स्पष्ट कीजिए।
- निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए: (2×3=6)
- कवितावली के छंदों के आधार पर तत्कालीन आर्थिक विषमताओं का वर्णन करते हुए लिखिए कि वर्तमान समय में क्या स्थिति है।
- ‘छोटा मेरा खेत’ कविता खेतों के रूपक में बँधी कवि-कर्म के रूपक को व्यक्त करने वाली कविता है।’ सिद्ध कीजिए।
- ‘जग-जीवन को भार’ की तरह लेकर फिरने वाला कवि उससे निरपेक्ष क्यों नहीं रह पाता? ‘आत्मपरिचय’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
- निम्नलिखित काव्यांश पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए:
कल्पना के रसायनों को पी
बीज गल गया निःशेष;
शब्द के अंकुर फूटे,
पल्लव-पुष्पों से नमित हुआ विशेष।
झूमने लगे फल,
रस अलौकिक,
अमृत धाराएँ फूटतीं
रोपाई क्षण की,
कटाई अनंतता की
लुटते रहने से ज़रा भी कम नहीं होती।
रस का अक्षय पात्र सदा का
छोटा मेरा खेत चौकोना।- कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए:
कॉलम-I कॉलम-II
1. छोटा मेरा खेत (i) कागज का पन्ना
2. अंकुर फूटना (ii) साहित्यिक कृति का रूप धारण करना
3. पल्लवित पुष्पित होना (iii) भावनाओं को शब्द मिलना
विकल्प:
(A) 1-(ii), 2-(i), 3-(iii)
(B) 1-(iii), 2-(i), 3-(ii)
(C) 1-(i), 2-(iii), 3-(ii)
(D) 1-(ii), 2-(iii), 3-(i) - कवि-कर्म की दृष्टि से बीज हो सकता है:
(A) विचार और अभिव्यक्ति का
(B) कवि के परिश्रम का
(C) कल्पना का
(D) शब्दों का - निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर उचित विकल्प का चयन कर लिखिए:
कथन: साहित्यिक कृति की अलौकिक रसधारा कालजयी होती है।
कारण: असंख्य पाठकों द्वारा अनंतकाल तक पढ़े जाने पर भी इसका आनंद समाप्त नहीं होता।
विकल्प:
(A) कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
(B) कारण सही है, लेकिन कथन ग़लत है।
(C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
(D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है। - ‘झूमने लगे फल’ का आशय है:
(A) बीज अंकुरित होने लगे
(B) फल हवा के संपर्क से झूमने लगे
(C) परिश्रम का प्रतिफल मिलने लगा
(D) बीज फूलों का रूप धारण करने लगे - ‘बीज गल गया नि:शेष’ – पंक्ति से क्या संकेत मिलता है?
(A) खेतों में फ़सल उगाने के लिए बीजों को मिट्टी में बोना पड़ता है।
(B) रचना और विकास के लिए स्वयं का त्याग करना पड़ता है।
(C) बीजों के गलने पर ही खेतों में फ़सल के अंकुर फूटते हैं।
(D) कल्पना के संसर्ग बिना साहित्यिक कृति की रचना असंभव है।
- कॉलम-I को कॉलम-II से सुमेलित कीजिए और सही विकल्प चुनकर लिखिए:
- निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 60 शब्दों में उत्तर दीजिए: (2×3=6)
- ‘भक्तिन’ पाठ परिस्थितिवश अक्खड़ बनी, पर महादेवी जी के आत्मीयता से परिपूर्ण स्त्री-अस्मिता के संघर्ष की कहानी है।’ इस कथन की पुष्टि कीजिए।
- ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में जीजी का कोई पूजा-विधान, त्योहार अनुष्ठान लेखक के बिना पूरा नहीं होता था, क्यों ? आपके घर में भी क्या यही स्थिति है और आप इस संदर्भ में क्या करते हैं? स्पष्ट कीजिए।
- शिरीष के फूल’ पाठ के आधार पर लिखिए कि ‘पुराने की अधिकार-लिप्सा का समय रहते सावधान होने’ का प्रसंग पाठ में किस संदर्भ में आया है। इसके माध्यम से लेखक क्या संदेश देना चाहता है?
- निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित पूछे गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए: (5×1=5)
बाजार को सार्थकता भी वही मनुष्य देता है जो जानता है कि वह क्या चाहता है। और जो नहीं जानते कि वे क्या चाहते हैं, अपनी ‘पर्चेजिंग पावर’ के गर्व में अपने पैसे से केवल एक विनाशक शक्ति – शैतानी शक्ति, व्यंग्य की शक्ति ही बाजार को देते हैं। न तो वे बाज़ार से लाभ उठा सकते हैं, न उस बाज़ार को सच्चा लाभ दे सकते हैं। वे लोग बाज़ार का बाजारूपन बढ़ाते हैं। जिसका मतलब है कि कपट बढ़ाते हैं। कपट की बढ़ती का अर्थ परस्पर में सद्भाव की घटी। इस सद्भाव के ह्रास पर आदमी आपस में भाई-भाई और सुहृद और पड़ोसी फिर रह ही नहीं जाते हैं और आपस में कोरे ग्राहक और बेचक (विक्रेता) की तरह व्यवहार करते हैं। मानो दोनों एक-दूसरे को ठगने की घात में हों। एक की हानि में दूसरे को अपना लाभ दीखता है और यह बाज़ार का, बल्कि इतिहास का; सत्य माना जाता है ऐसे बाजार को बीच में लेकर लोगों में आवश्यकताओं का आदान-प्रदान नहीं होता; बल्कि शोषण होने लगता है तब कपट सफल होता है, निष्कपट शिकार होता है। ऐसे बाज़ार मानवता के लिए विडंबना हैं और जो ऐसे बाज़ार का पोषण करता है, जो उसका शास्त्र बना हुआ है; वह अर्थशास्त्र सरासर औंधा है वह मायावी शास्त्र है, वह अर्थशास्त्र अनीति-शास्त्र है।- बाज़ार में सद्भाव का ह्रास कब दिखाई देता है?
(A) जब लोग अपनी पर्चेजिंग पावर का प्रदर्शन करते हैं।
(B) जब लोग आपस में ग्राहक और बेचक का व्यवहार करते हैं।
(C) जब बाज़ार में धनी और निर्धन के बीच अंतर किया जाता है।
(D) जब बाज़ार में अपनों को अधिक महत्त्व दिया जाता है। - बाज़ार में सद्धाव के ह्रास का क्या दुष्परिणाम निकलता है?
(A) लोगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
(B) आपसी प्रेम-भाव कम होने लगता है।
(C) ग्राहक का शोषण होने लगता है।
(D) पैसों का अभाव खलने लगता है। - ‘ऐसे बाजार मानवता के लिए विडंबना हैं’ – पंक्ति में किस बाज़ार की ओर संकेत किया गया है?
(A) जिस बाज़ार में लोगों की आवश्यकताओं का लाभ उठाकर शोषण किया जाए।
(B) जिस बाजार में वस्तुओं को आकर्षक रूप से सजाकर रखा जाए।
(C) जिस बाज़ार में सामाजिक समता की अवहेलना की जाए।
(D) जिस बाज़ार में आर्थिक विषमता का बोलबाला दिखाई दे। - आत्मीयजन और पड़ोसी भी ग्राहक के रूप में दिखाई देना, किस प्रवृत्ति का सूचक है?
(A) समतावादी
(B) उपभोक्तावादी
(C) अनैतिकतावादी
(D) रूढ़िवादी - गद्यांश में प्रयुक्त ‘मायावी शास्त्र’ का अभिप्राय है:
(A) कल्पना से परिपूर्ण शास्त्र
(B) चकाचौंध से परिपूर्ण शास्त्र
(C) अर्थशास्त्र की व्याख्या करने वाला शास्त्र
(D) छल-कपट को बढ़ावा देने वाला शास्त्र
- बाज़ार में सद्भाव का ह्रास कब दिखाई देता है?
- निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए: (2×2=4)
- ‘जीवन में प्रायः सभी को अपने-अपने नाम का विरोधाभास लेकर जीना पड़ता है।’ कथन का आशय स्पष्ट करते हुए लिखिए कि महादेवी जी ने ऐसा किस संदर्भ में कहा है?
- ‘काले मेघा पानी दे’ पाठ में पानी के लिए गुहार लगाते बच्चों की टोली में ‘गगरी फूटी बैल पियासा’ की बात क्यों की जा रही है? स्पष्ट कीजिए।
- ‘श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ पाठ के आधार पर लिखिए कि जाति आधारित श्रम विभाजन का देश के आर्थिक पहलू पर क्या प्रभाव पड़ता है।
- निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़कर किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 100 शब्दों में उत्तर दीजिए: (2×5=10)
- ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी में भूषण द्वारा ‘बब्बा, आप तो हद करते हैं, जो बात आप जानते ही नहीं, आपसे क्यों पूछें, कथन किस संदर्भ में कहा गया और क्यों ? इस कथन के संदर्भ में भूषण के चरित्र की समीक्षा कीजिए।
- ‘जूझ’ कहानी में छात्रों को अनुशासन में रखने के लिए अध्यापकों द्वारा किए जाने वाले कठोर व्यवहार का उल्लेख किया गया है। आपकी दृष्टि में क्या छात्रों के साथ इस प्रकार का व्यवहार उचित है? वर्तमान समय में इसमें क्या परिवर्तन आया है? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
- ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ में बौद्ध स्तूप को नागर भारत का सबसे पुराना लैंडस्केप कहा गया है, इसके सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
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