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CBSE - Class 09 - Hindi A

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विडियो व्याकरण उपसर्ग. उपसर्ग वे शब्दांश हैं जो किसी शब्द के पूर्व लगकर उस शब्द का अर्थ बदल देते हैं या उसमें नई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं।जैसे:- कु + पुत्र = कुपुत्र।यहाँ ‘कु’ शब्दांश ‘पुत्र’ के साथ बैठकर नया शब्द गढ़ देता हैं। ध्यान रहे कि ‘कु’ शब्दांश है, शब्द नहीं। शब्द वाक्य में स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त हो सकता है, शब्दांश नहीं। शब्दांश तो किसी शब्द के साथ जुड़कर ही नए अर्थ की रचना में सहायक होता है।

विडियो व्याकरण समास समास का तात्पर्य है ‘संक्षिप्तीकरण’। दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर बने हुए एक नवीन एवं सार्थक शब्द को समास कहते हैं। जैसे - ‘रसोई के लिए घर’ इसे हम ‘रसोईघर’ भी कह सकते हैं। संस्कृत एवं अन्य भारतीय भाषाओं में समास का बहुतायत में प्रयोग होता है। जर्मन आदि भाषाओं में भी समास का बहुत अधिक प्रयोग होता है।

विडियो व्याकरण वाक्य भेद दो या दो से अधिक पदों के सार्थक समूह को, जिसका पूरा पूरा अर्थ निकलता है, वाक्य कहते हैं। उदाहरण के लिए 'सत्य की विजय होती है।' एक वाक्य है क्योंकि इसका पूरा पूरा अर्थ निकलता है किन्तु 'सत्य विजय होती।' वाक्य नहीं है क्योंकि इसका अर्थ नहीं निकलता है ।

विडियो व्याकरण अलंकार अलंकार अलंकृति ; अलंकार : अलम् अर्थात् भूषण। जो भूषित करे वह अलंकार है। अलंकार, कविता-कामिनी के सौन्दर्य को बढ़ाने वाले तत्व होते हैं। जिस प्रकार आभूषण से नारी का लावण्य बढ़ जाता है, उसी प्रकार अलंकार से कविता की शोभा बढ़ जाती है।

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विडियो पत्र लेखन पत्र अपनी बात दूसरों तक लिखकर पहुंचाने का एक बहुत अच्छा तरीका है। जैसे-जैसे भाषा का विकास हुआ, उसी के साथ पत्र लेखन का भी विकास होता गया।

विडियो संवाद लेखन अपने जीवन में मनुष्य एक दुसरे के साथ किसी न किसी विषय अथवा समस्या पर बातचीत करते है. इस बातचीत को ही संवाद कहते है.उपन्यास व कहानी के पात्र भी परस्पर वार्तालाप करते है.

विडियो दो बैलों की कथा. कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर है, लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है किंतु गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना, न देखा। जितना चाहो गरीब को मारो, चाहे जैसी खराब, सड़ी हुई घास सामने डाल दो, उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया भी न दिखाई देगी। वैशाख में चाहे एकाध बार कुलेल कर लेता हो पर हमने तो उसे कभी खुश होते नहीं देखा। उसके चेहरे पर एक विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है। सुख-दुख, हानि-लाभ, किसी भी दशा में उसे बदलते नहीं देखा। ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं वे सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुच गए हैं पर आदमी उसे बेवकूफ कहता है। सद्गुणों का इतना अनादर कहीं नहीं देखा।

विडियो ल्हासा की ओर. डाडे़ तिब्बत में सबसे खतरे की जगहें हैं। सोलह-सत्ररह हज़ार फीट की। ऊँचाई होने के कारण उनके दोनों तरफ़ मीलों तक कोई गाँव-गिराव नहीं होते। नदियों के मोड़ और पहाड़ों के कोनों के कारण बहुत दूर तक आदमी को देखा नहीं जा सकता।

विडियो डाउनलोड साँवले सपनों की याद. इस हुजूम में आगे-आगे चल रहे हैं, सालिम अली। अपने कंधें पर सैलानियो की तरह अपने अंतहीन सफर को बोझ उठाए। लेकिन यह सफर पिछले तमाम सफरों से भिन्न है। भीड़-भाड़ की जिंदगी और तनाव के माहौल से सालिम अली का यह आखिरी पलायन है। अब तो वेा उस वन-पक्षी की तरह प्रकृति में विलीन हो रहे हैं, जो जिंदगी को आखिरी गीत गाने के बाद मौत की गोद में जा बसा हो। कोई अपने जिस्म की हरारत और दिल की धड़कन देकर भी उसे लौटाना चाहे तो वह पक्षी अपने सपनों के गीत दोबारा कैसे गा सकेगा।

विडियो प्रेमचंद के फटे जूते. मैं चेहरे की तरफ देखता हूँ। क्या तुम्हें मालूम है, मेरे साहित्यिक पुरखे कि तुम्हारा जूता फट गया है और अँगुली बाहर दिख रही है? क्या तुम्हें इसका जरा भी अहसास नहीं है? जरा लज्जा, संकोच या झेंप नहीं है? क्या तुम इतना भी नहीं जानते कि धोती को थोड़ा नीचे खींच लेने से अँगुली ढक सकती है? मगर फिर भी तुम्हारे चेहरे पर बड़ी बेपरवाही, बड़ा विश्वास है!

विडियो मेरे बचपन के दिन. बचपन की स्मृतियों में एक विचित्र-सा आकर्षण होता है। कभी-कभी लगता है, जैसे सपने में सब देखा होगा। परिस्थितियाँ बहुत बदल जाती हैं। अपने परिवार में मैं कई पीढि़यों के बाद उत्पन्न हुई। मेरे परिवार में प्रायः दो सौ वर्ष तक कोई लड़की थी ही नहीं। सुना है, उसके पहले लड़कियों को पैदा होते ही परमधाम भेज देते थे। फिर मेरे बाबा ने बहुत दुर्गा-पूजा की। हमारी कुल-देवी दुर्गा थीं। मैं उत्पन्न हुई तो मेरी बड़ी खातिर हुई और मुझे वह सब नहीं सहना पड़ा जो अन्य लड़कियों को सहना पड़ता है। परिवार में बाबा फारसी और उर्दू जानते थे। पिता ने अंग्रेजी पढ़ी थी। हिंदी का कोई वातावरण नहीं था।

विडियो साखियाँ एवं सबद. जैसे हाथी को चलते देखकर कुत्ता अवष्य भौंकता है, वैसे ही किसी को ऊँची साधना में लगे देखकर लोग उसकी निंदा करते हैं। इसलिए संसार को स्वान रूप कहा गया है।

विडियो वाख. वह जीवन की कच्चे धागे रूपी रस्सी से प्रभु भक्ति की नाव खींचना चाहती है. मनुष्य की नश्वरता, सांसारिक भोग, अहंकार, हठयोग, सांप्रदायिक भेदभाव एवं अज्ञानता।

विडियो फ्री डाउनलोड सवैये. रसखान अगले जन्मों में बार-बार ब्रजभूमि पर ही जन्म लेना चाहते हैं। वे मनुष्य के रूप में ग्वालों के संग रहना, पशु के रूप में नंद बाबा के गायों के साथ, पत्थर के रूप में गोवर्धन पर्वत में रहना, पक्षी के रूप में यमुना किनारे कदम के वृक्ष में बसेरा करना चाहती हैं।

विडियो फ्री डाउनलोड कैदी और कोकिला. प्रस्तुत कविता में अंग्रेज सरकार दुआरा भारतियों के शोषण सेनानियों के साथ जेल में किये गए अमानवीय व्यव्हार तथा यातनाओं का मार्मिक चित्रण है.

विडियो मेघ आए कविता में कवी ने बादलों के तुलना सज-धजकर आने वाले शेहरी मेहमान से की है. ग्रामीण संस्कृति में दामाद के आने पर उल्लास का जो वातावरण बनता है उसी उल्लास को मेघरूपी शेहरी मेहमान के आने पर दिखाया गया है.

विडियो बच्चे काम पर जा रहे हैं कविता के माध्यम से कवी ने बच्चों से बचपन चीन लिए जाने को बहोत ही प्रभावी ढंग से व्यक्त किया है. कवी ने सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए कहता है की ऐसी व्यवस्था किस काम की जिसमें बच्चे खेल, शिक्षा और जीवन के उमंग से वंचित है.

विडियो मेरे संग की औरतें में लेखिका अपनी नानी के बारे मई कहती है की वेह अपनी नानी को नहीं देख सकी थी क्योंकि उनकी मृत्यु लेखिका की माँ की शादी से पहले ही हो गयी थी.

विडियो रीढ़ की हड्डी नामक पाठ एक एकांकी है, जिसमें नारी को सम्मानजनक स्थान न दिए, जाने की समस्या का प्रभावी चित्रण है. रामस्वरूप की पुत्री उमा को देखने लड़के वाले आने वाले हैं.



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