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  • 5 answers

Rupal ???? 6 years, 9 months ago

जिनको यह जग घर लगे वह ठहरा नादान | समझे इसे सराय जो वह है चतुर सुजान||

Mystery Girl 6 years, 9 months ago

Haad jre js lakdi Kes jre js ghaas Sone jaisi kaya jl gyi Koi n aaye paas

Gautam Prajapati 6 years, 9 months ago

जब मैं था तब हरि नाहिं अब हरि हैं मैं नाहिं, सब अंधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहि।

Yuvi Gill 6 years, 9 months ago

Rasshi kacha dagha ki kich rhi ma nav jana kab sona meri pukar ker da bhav sagar par

R.C.B..? Best? 6 years, 9 months ago

मेरो मैब अनत कहाँ सुख पावै जैसे उड़ी जहाज को पंछी फेर जहाज पे आवै
  • 4 answers

Rupal ???? 6 years, 9 months ago

दूब दुबाए झुण्ड में, लंबोदर गजमुंड| बुद्धि विनायक हे प्रभु, हरो विघ्न के झुंड ||

Gautam Prajapati 6 years, 9 months ago

उलट नाम जपत जग जाना...... वाल्मीकि भए ब्रह्म समाना......

Deepak Yadav 6 years, 9 months ago

Ram japu , ram japu , ram japu baavre... Ghor bhaav neer nidhi naam nij naav re

R.C.B..? Best? 6 years, 9 months ago

मेरे तो गिरिधर गोपाल दूजो न कोई जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोइ।। रघुपति राघव राजा राम.........
  • 2 answers

Ayushi Jain 6 years, 9 months ago

Veer and Raudra Ras

Gautam Prajapati 6 years, 9 months ago

Raudra and veer ras........
  • 2 answers

Honey ??? 6 years, 9 months ago

नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाना 1 सराहनीय प्रयास था क्योंकि नेताजी की मूर्ति पर चस्मा नही था और ये बात हर उस देशभक्त को ठेस पहुंचाती , इस वजह से मूर्ति पर चस्मा लगाना लोगो में देशभक्ति की भावना जगता हैं

Deepak Yadav 6 years, 9 months ago

Netaji subhash chandra bose ke murti par chashma lagaane ka prayaas
  • 2 answers

Vanshika Juneja 6 years, 9 months ago

रीतिवाचक

R.C.B..? Best? 6 years, 9 months ago

क्रियाविशेषण - कलवाचक विशेषण
  • 2 answers

Mystery Girl 6 years, 9 months ago

Sobhit kr navneet liye Ghuturuni chlt renu tnn mandit Mukkh dadhi lep kiye Sobhit kr navneet liye

Deepak Yadav 6 years, 9 months ago

Kilkat kaanh ghutruwan aawat , manimay kanak nand ke aangan bimb pakrive ghaavat
  • 1 answers

Sahil Sahil 6 years, 9 months ago

No
  • 3 answers

Mystery Girl 6 years, 9 months ago

No

Affu 😊 6 years, 9 months ago

No

Sneha Singh????? 6 years, 9 months ago

Vaise to noii aate bt board wale ka pta ni
  • 1 answers

Sneha Singh????? 6 years, 9 months ago

What is ur question?
  • 2 answers

Lokesh Gangwar 6 years, 9 months ago

Ylll mko aate ni h vigyapan plzz show me any exmple

Ishaan ...?????? 6 years, 9 months ago

Pencil, kiraye pr ghar, books sale, etc
  • 1 answers

Ishaan ...?????? 6 years, 9 months ago

Ve safal hote hain jo sahasi hote hain...book mai ye likha hai .....mai bhi confuse hu
  • 0 answers
  • 3 answers

Mystery Girl 6 years, 9 months ago

Soi h plng pe sir dard ke bhane Kiski mjal h jaye use uthane

Sneha Singh????? 6 years, 9 months ago

Sarkande se haath pav matke jaise Pet, Pichke pichke gol dou muh to India gate

R.C.B..? Best? 6 years, 9 months ago

हाथी जैसी देह गई गंडे जैसे खाल , तरबूजे सी खोपड़ी खरबूजे से गाल
  • 2 answers

Aman Thakur 6 years, 9 months ago

0.5 is greater than 0.25

Deepak Yadav 6 years, 9 months ago

0.5 bada hai
  • 1 answers

Gaurav Seth 6 years, 9 months ago

सार

अम्मीरुद्दीन उर्फ़ बिस्मिल्लाह खाँ का जन्म बिहार में डुमराँव के एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ। इनके बड़े भाई का नाम शम्सुद्दीन था जो उम्र में उनसे तीन वर्ष बड़े थे। इनके परदादा उस्ताद सलार हुसैन खाँ डुमराँव के निवासी थे। इनके पिता का नाम पैग़म्बरबख़्श खाँ तथा माँ मिट्ठन थीं। पांच-छह वर्ष होने पर वे डुमराँव छोड़कर अपने ननिहाल काशी आ गए। वहां उनके मामा सादिक हुसैन और अलीबक्श तथा नाना रहते थे जो की जाने माने शहनाईवादक थे।  वे लोग बाला जी के मंदिर की ड्योढ़ी पर शहनाई बजाकर अपनी दिनचर्या का आरम्भ करते थे। वे विभिन्न रियासतों के दरबार में बजाने का काम करते थे।

ननिहाल में 14 साल की उम्र से ही बिस्मिल्लाह खाँ ने बाला जी के मंदिर में रियाज़ करना शुरू कर दिया। उन्होंने वहां जाने का ऐसा रास्ता चुना जहाँ उन्हें रसूलन और बतूलन बाई की गीत सुनाई देती जिससे उन्हें ख़ुशी मिलती। अपने साक्षात्कारों में भी इन्होनें स्वीकार किया की बचपन में इनलोगों ने इनका संगीत के प्रति प्रेम पैदा करने में भूमिका निभायी। भले ही वैदिक इतिहास में शहनाई का जिक्र ना मिलता हो परन्तु मंगल कार्यों में इसका उपयोग प्रतिष्ठित करता है अर्थात यह मंगल ध्वनि का सम्पूरक है। बिस्मिल्लाह खाँ ने अस्सी वर्ष के हो जाने के वाबजूद हमेशा पाँचो वक्त वाली नमाज में शहनाई के सच्चे सुर को पाने की प्रार्थना में बिताया। मुहर्रम के दसों दिन बिस्मिल्लाह खाँ अपने पूरे खानदान के साथ ना तो शहनाई बजाते थे और ना ही किसी कार्यक्रम में भाग लेते। आठवीं तारीख को वे शहनाई बजाते और दालमंडी से फातमान की आठ किलोमीटर की दुरी तक भींगी आँखों से नोहा बजाकर निकलते हुए सबकी आँखों को भिंगो देते।

फुरसत के समय वे उस्ताद और अब्बाजान को काम याद कर अपनी पसंद की सुलोचना गीताबाली जैसी अभिनेत्रियों की देखी फिल्मों को याद करते थे। वे अपनी बचपन की घटनाओं को याद करते की कैसे वे छुपकर नाना को शहनाई बजाते हुए सुनाता तथा बाद में उनकी 'मीठी शहनाई' को ढूंढने के लिए एक-एक कर शहनाई को फेंकते और कभी मामा की शहनाई पर पत्थर पटककर दाद देते। बचपन के समय वे फिल्मों के बड़े शौक़ीन थे, उस समय थर्ड क्लास का टिकट छः पैसे का मिलता था जिसे पूरा करने के लिए वो दो पैसे मामा से, दो पैसे मौसी से और दो पैसे नाना से लेते थे फिर बाद में घंटों लाइन में लगकर टिकट खरीदते थे। बाद में वे अपनी पसंदीदा अभिनेत्री सुलोचना की फिल्मों को देखने के लिए वे बालाजी मंदिर पर शहनाई बजाकर कमाई करते। वे सुलोचना की कोई फिल्म ना छोड़ते तथा कुलसुम की देसी घी वाली दूकान पर कचौड़ी खाना ना भूलते।

काशी के संगीत आयोजन में वे अवश्य भाग लेते। यह आयोजन कई वर्षों से संकटमोचन मंदिर में हनुमान जयंती के अवसर हो रहा था जिसमे शास्त्रीय और उपशास्त्रीय गायन-वादन की सभा होती है। बिस्मिल्लाह खाँ जब काशी के बाहर भी रहते तब भी वो विश्वनाथ और बालाजी मंदिर की तरफ मुँह करके बैठते और अपनी शहनाई भी उस तरफ घुमा दिया करते। गंगा, काशी और शहनाई उनका जीवन थे। काशी का स्थान सदा से ही विशिष्ट रहा है, यह संस्कृति की पाठशाला है। बिस्मिल्लाह खाँ के शहनाई के धुनों की दुनिया दीवानी हो जाती थी।

सन 2000 के बाद पक्का महाल से मलाई-बर्फ वालों के जाने से, देसी घी तथा कचौड़ी-जलेबी में पहले जैसा स्वाद ना होने के कारण उन्हें इनकी कमी खलती। वे नए गायकों और वादकों में घटती आस्था और रियाज़ों का महत्व के प्रति चिंतित थे। बिस्मिल्लाह खाँ हमेशा से दो कौमों की एकता और भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देते रहे। नब्बे वर्ष की उम्र में 21 अगस्त 2006 को उन्हने दुनिया से विदा ली । वे भारतरत्न, अनेकों विश्वविद्यालय की मानद उपाधियाँ व संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा पद्मविभूषण जैसे पुरस्कारों से जाने नहीं जाएँगे बल्कि अपने अजेय संगीतयात्रा के नायक के रूप में पहचाने जाएँगे।

  • 2 answers

Abhishek Singh?? Shaab??? 6 years, 9 months ago

Rao bhiari

Abhishek Singh?? Shaab??? 6 years, 9 months ago

????????
  • 2 answers

Sneha Singh????? 6 years, 9 months ago

Kon sa gadhyansh???

Priyesh Tiwari 6 years, 9 months ago

bhai गद्यश है कहाँ
  • 4 answers

❣❣ Ayush Shukla ❣❣ 6 years, 9 months ago

G board change karke

Sneha Singh????? 6 years, 9 months ago

Yarr aap log hindi me kaise likhte ho

Sanjana . 6 years, 9 months ago

Gidh aur Chil mandra rahe the, chuhe ko tadpa rahe the ||

R.C.B..? Best? 6 years, 9 months ago

सिर पर बैठ्यो काग आँख दोउ खात निकरत .
  • 1 answers

❣❣ Ayush Shukla ❣❣ 6 years, 9 months ago

Mst good better best
  • 2 answers

Mystery Girl 6 years, 9 months ago

Hindi vyakrad k antrgt ras vh vidha hoti h jiske dvara hindi sahitya ka aasvadn kiya jata h athva jiska aasvadn kiya jaye vhi ras h Mukhya rup se ras k 10 bhed hote h 1.sringaar ras 2.hasya ras 3.krud ras 4.raundr ras 5.veer ras 6.bhyank ras 7.adbhut ras 8.saant ras 9.vaatsalya ras 10.bhakti ras

Abhishek Singh?? Shaab??? 6 years, 9 months ago

Bhai hindhi ka paper hai English ka nahi jo English me likh rha hai
  • 0 answers
  • 1 answers

Ishaan ...?????? 6 years, 9 months ago

Natraj pencil
  • 2 answers

Aman Prabhakar 6 years, 9 months ago

Bai 1.Dev 2.jai sankar prasad 3.mahabir prasad 4.Bhadant Anand They are the poets of deleted chapter

@ Aashu 6 years, 9 months ago

3,4,15,& 17

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