No products in the cart.

Ask questions which are clear, concise and easy to understand.

Ask Question
  • 3 answers

Rajiv Ranjan 7 years ago

गिद्ध और चिल रहा रही थी और कौवे को तड़पा रही थी

Ayushi Jain 7 years ago

घर में लाशें बाहर लाशें , जनपद पर Sadathi है लाशें दुर्गंध ghot ti है यह सांसे |इंसान हुआ लाशें ही लाशें ||

R.C.B..? Best? 7 years ago

सिर पर बैठयो काग आँख दोउ खात निकारत
  • 3 answers

Ayushi Jain 7 years ago

प्रिय वियोग का यह सूनापन, स्मृतियों से भर भर जाता मन पूर्ण समर्पण सा पागलपन ||

R.C.B..? Best? 7 years ago

Thanks ☺️

Aastha Dangi 7 years ago

Nis din barsat naen hamare , Sada reht pavas ritu hum pe Jabte syaam sidhaare .
  • 3 answers
Mannu Bhandari

Ayushi Jain 7 years ago

Mannu Bhandari

Ronak Sharma 7 years ago

मन्नू भंडारी
  • 4 answers
रस , पद परिचय , वाच्य , रचना के आधार पर वाक्य भेद , निबंध ,पत्र , विज्ञापन ।।।।।

Ronak Sharma 7 years ago

रस , पद

Riya ?? 7 years ago

Letter, viyapan, niband,

Riya ?? 7 years ago

Alankar, ras, pad parichye
  • 1 answers

R.C.B..? Best? 7 years ago

एक अच्छा गाइड था ।
  • 2 answers
क्योकि विरहणी आत्मा अपने परमात्मा से जा मिली थी
Kyoki vo khe rhe the ki unke bete ki aatma parmaatma se jud gyi h aur ye utsav manane ka vakt h
  • 1 answers

Prince Mavi 7 years ago

Because utsaah ek aahvaan geet h jo baadlo ko sambodhit karta h aur kavi isse logo ko svatantra rehne k liye utsaahit karta h
  • 2 answers

Yasir Khan 7 years ago

Wo ek shahnai wadak the jinke baare me class 10 ki chittij book me bataya gya hai... Born 21 March 1916 Died 21 August 2006 ◇Un ki shahnai bajane ki kala bahut anokhi thi.unhone ye apne dada aur mama se seekha tha. Jo mathure ke mandiro me bhi shehnai wad karte the... ◇Wo bahut saadgi se rhte the yaha tk ki itne bade sahnaiwaadak jinhe bharat ratna se sammanit kia gya wo fate kapde(lungi) pahna krte the.

Gauri ? 7 years ago

शहनाई वादक
  • 5 answers

Siddharth Sihag 7 years ago

I think that it will help you

Siddharth Sihag 7 years ago

Priksha bhawan K kh g Hisar Dinak Sampadak mahadya Dainik jagran Hisar Vishay Mahodya, ---------------------------------------- ---------------------------------------- ---------------------------------------- Bhavdiy/prarthi

Siddharth Sihag 7 years ago

Priksha bhawan K kh g vidyalya Hisar Dinak Pradhanachrya mahodya K kh g vidyalya Hisar Vishay Mhodya, ------------------------------------------------- ------------------------------------------------- ------------------------------------------------- Dhanyavaad Aapka agyakatishishay A b c

Gaurav Seth 7 years ago

पत्र लेखन नमूना

अनौपचारिक पत्र - पत्र लेखन नमूना

पत्र लेखन प्रारूप (फॉरमैट) पर ध्यान देना आवश्यक है जो आपके पत्र लेखन को बिल्कुल आसान बना देता है ! एक पुत्र अपने पिता जी को कैसे पत्र लिखता है, उदाहरण से समझाता हूं ! पत्र के तीन भागों को अलग-अलग रंगों से रेखांकित किया गया है, इस पर ध्यान दें ताकि दूसरा अनौपचारिक पत्र आप आसानी से लिख सकें !

अनौपचारिक पत्र लेखन में

  • शीर्ष भाग में पता, दिनांक, संबोधन और प्रशस्ति आते हैं !
  • मध्य भाग में संदेश व कथा का विवरण होता है! 
  • अंतिम भाग आभार सूचक वाक्य जैसे आप का, प्रणाम, धन्यवाद आदि का प्रयोग किया जाता है !

पिताजी को पत्र - अनौपचारिक पत्र Format

स्थान का नाम ………

तिथि …………

पूजनीय पिता जी,

सादर प्रणाम

कल ही संध्याकालीन भारतीय डाक से आपका पत्र मिला ! आप सभी का कुशल-क्षेम जानकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई ! यहां पर गौरव एवं मीनाक्षी ठीक हैं !

आपने अपने पत्र में परीक्षा की तैयारी के विषय में पूछा था ! आपको बता दूं कि हमारी तैयारी पूरी हो चुकी है जो भी बचा है मैं समय रहते पूरा कर लूंगा ! हमें कुछ और पुस्तक खरीदने की आवश्यकता है जो हमारी प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए उत्तम सिद्ध हो सकता है !

मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि ₹10,000 हमें भेज दें ! मैं उससे पुस्तक खरीद लूंगा !

शेष सब कुशल है ! माता-जी, बुआ आदि को मैं और मेरे मित्र उनको प्रणाम कहते हैं !

आपका सदैव आज्ञाकारी पुत्र

नाम………

औपचारिक पत्र - पत्र लेखन नमूना

औपचारिक पत्र लेखन में आवेदन / प्रार्थना पत्र, नौकरी के लिए आवेदन पत्र, सरकारी / अर्ध सरकारी संस्थाओं के लिए आवेदन पत्र  और संपादक के नाम आवेदन पत्र शामिल है ! इन सभी प्रकार के पत्र को कैसे लिखा जाए आपको उदाहरण देकर समझाता हूं !

पत्र लेखन प्रारूप पर ध्यान देना आवश्यक है जो आपके पत्र लेखन को आसान बना देता है ! 

औपचारिक पत्र लेखन में

  • शीर्ष भाग में पत्र-प्रेक्षक का पता बायीं ओर लिखा जाता है तथा पत्र-प्रेषक अपना नाम के नीचे स्वनिर्देशि के बाद लिखते हैं !
  • मध्य भाग में संदेश का विवरण होता है !
  • अंतिम भाग आभार सूचक वाक्य जैसे धन्यवाद आदि का प्रयोग किया जाता है ! 

पोस्ट मास्टर के नाम औपचारिक पत्र 

परीक्षा भवन

नई दिल्ली

दिनांक - 20 जनवरी 2019

डाकपाल महोदय

संसद मार्ग

नई दिल्ली

प्रिय महोदय,

विषय - रजिस्ट्री पत्र प्राप्त ना होने की शिकायत

डाकपाल महोदय का निवेदन के साथ ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि, मैंने 20 दिसंबर 2018 को अपने पिता के नाम एक पत्र रजिस्ट्री के द्वारा भेजा था ! किंतु उसे एक महीने के बाद भी प्राप्त नहीं हो पाया है !

मैंने अपने गांव स्थित डाकघर से भी संपर्क स्थापित करने का प्रयत्न किया था ! वहां के डाक मास्टर ने बताया कि इस तरह का हमें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है ! रजिस्ट्री पत्र का रसीद नंबर 234 है जो 20 दिसंबर 2018 को भेजा गया था ! रशीद का फोटो स्टेट कॉपी पत्र के साथ संलग्न है !

आपसे प्रार्थना है कि इस संबंध में आवश्यक जांच पड़ताल कर के मुझे मामले की वास्तविक स्थिति से अवगत किया जाए !

धन्यवाद

भवदीय

कुलदीप कुमार झा

Siddharth Sihag 7 years ago

Priksha bhawan K.kh.g Hisar Dinak Pujya pita ji Sadar pranam ---------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------- ---------------------------------------------------------- Aapka putra --------------------
  • 4 answers

Devil ? 7 years ago

Thanku n Sahastrbahu ka sabdik arth kya hota ha???

Affu 😊 7 years ago

Parshuram ji ka shatru tha sahstrabahu jiska vad parshuram ji ne kiya tha ......... ......... Aur jisne bhi Dhanush toda wo parshuram ji ke shatru (sahstrabahu) ke samaan h

Sujal Gupta 7 years ago

Parshuram ko

Shivam Tripathi 5 years, 11 months ago

Jisne shiv kA dhanus toda hoga o meta sahstrabahu k saman satru hoga ,,,,,,, means jisne dhanus toda hoga use sahstrabahu ki upma d gai hai
  • 2 answers

Gaurav Seth 7 years ago

कन्यादान

कितना प्रामाणिक था उसका दुख
लड़की को दान में देते वक्त
जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो

इस कविता में उस दृश्य का वर्णन है जब एक माँ अपनी बेटी का कन्यादान कर रही है। बेटियाँ ब्याह के बाद पराई हो जाती हैं। जिस बेटी को कोई भी माता पिता बड़े जतन से पाल पोसकर बड़ी करते हैं, वह शादी के बाद दूसरे घर की सदस्य हो जाती है। इसके बाद बेटी अपने माँ बाप के लिए एक मेहमान बन जाती है। इसलिए लड़की के लिए कन्यादान शब्द का प्रयोग किया जाता है। जाहिर है कि जिस संतान को किसी माँ ने इतने जतन से पाल पोस कर बड़ा किया हो, उसे किसी अन्य को सौंपने में गहरी पीड़ा होती है। बच्चे को पालने में माँ को कहीं अधिक दर्द का सामना करना पड़ता है, इसलिए उसे दान करते वक्त लगता है कि वह अपनी आखिरी जमा पूँजी किसी और को सौंप रही हो।

<hr />

लड़की अभी सयानी नहीं थी
अभी इतनी भोली सरल थी
कि उसे सुख का आभास तो होता था
लेकिन दुख बाँचना नहीं आता था
पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की
कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की

लड़की अभी सयानी नहीं हुई थी; इसका मतलब है कि हालाँकि वह बड़ी हो गई थी लेकिन उसमें अभी भी दुनियादारी की पूरी समझ नहीं थी। वह इतनी भोली थी कि खुशियाँ मनाने तो उसे आता था लेकिन यह नहीं पता था कि दुख का सामना कैसे किया जाए। उसके लिए बाहरी दुनिया किसी धुँधले तसवीर की तरह थी या फिर किसी गीत के टुकड़े की तरह थी। ऐसा अक्सर होता है कि जब तक कोई अपने माता पिता के घर को छोड़कर कहीं और नहीं रहना शुरु कर देता है तब तक उसका समुचित विकास नहीं हो पाता है।

<hr />

माँ ने कहा पानी में झाँककर
अपने चेहरे पर मत रीझना
आग रोटियाँ सेंकने के लिए है
जलने के लिए नहीं
वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह
बंधन हैं स्त्री जीवन के
माँ ने कहा लड़की होना
पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।

<hr />

जाते-जाते माँ अपनी बेटी को कई नसीहतें दे रही है। माँ कहती हैं कि कभी भी अपनी सुंदरता पर इतराना नहीं चाहिए क्योंकि असली सुंदरता तो मन की सुंदरता होती है। वह कहती हैं कि आग का काम तो चूल्हा जलाकर घरों को जोड़ने का है ना कि अपने आप को और अन्य लोगों को दुख में जलाने का। माँ कहती है कि अच्छे वस्त्र और महँगे आभूषण बंधन की तरह होते हैं इसलिए उनके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। आखिर में माँ कहती है कि लड़की जैसी दिखाई मत देना। इसके कई मतलब हो सकते हैं। एक मतलब हो सकता है कि माँ उसे अब एक जिम्मेदार औरत की भूमिका में देखना चाहती है और चाहती है कि वह अपना लड़कपन छोड़ दे। दूसरा मतलब हो सकता है कि उसे हर संभव यह कोशिश करनी होगी कि लोगों की बुरी नजर से बचे। हमारे समाज में लड़कियों की कमजोर स्थिति के कारण उनपर यौन अत्याचार का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में कई माँएं अपनी लड़कियों को ये नसीहत देती हैं कि वे अपने यौवन को जितना हो सके दूसरों से छुपाकर रखें।

 

भावार्थ

इस कविता में कवि ने माँ के उस पीड़ा को व्यक्त किया है जब वह अपने बेटी को विदा करती है। उस समय मान को लगता है जैसे उसने अपने जीवन भर की पूंजी गँवा दी। माँ के हृदय में आशंका बनी रहती है कि कहीं ससुराल में उसे कष्ट तो नही होगा, अभी वो भोली है। विवाह के बाद वह केवल सुखी जीवन की कल्पना कर सकती है किन्तु जिसने कभी दुःख देखा नही वह भला दुःख का सामना कैसे करेगी। कवि कहते हैं कि सुख सौभाग्य को वह अबोध बेटी पढ़ सकती है परन्तु अनचाहे दुखों को वह पढ़ और समझ नही सकती।

माँ अपनी बेटी को सीख देते हुए कहतीं हैं कि प्रतिबिम्ब देखकर अपने रूप-सौंदर्य पर मत रीझना। यह स्थायी नही है। माँ दूसरी सीख देते हुए कहती हैं कि आग का उपयोग खाना बनाने के लिए होता इसका उपयोग जलने जलाने के लिए मत करना। यह सीख उन मानसिकता वाले लोगों पर कटाक्ष है जो दहेज़ के लालच में अपनी दुल्हन को जला देते हैं। तीसरी सीख देते हुए माँ कहतीं हैं कि वस्त्र आभूषणों को ज्यादा महत्व मत देना, ये स्त्री जीवन के बंधन हैं। इनसे ज्यादा लगाव अच्छा नही है। माँ कहतीं हैं लड़की होना कोई बुराई नही है परन्तु लड़की जैसी कमजोर असहाय मत दिखना। जरुरत पड़ने पर कोमलता, लज्जा आदि को परे हटाकर अत्याचार के प्रति आवाज़ उठाना।

Shaadi me pita ke dwara ladki ko dusre ghar bhejna
  • 1 answers
U can write about the lyf of a lady.. Like how they handle both their jobs ns their family.. U can also mention about their sacrifices..
  • 1 answers

Nancy Nancy 7 years ago

Aaj dai lakh takk koi jivit nhi bacha ekk din nayukaar me koi jivit bach payega
  • 2 answers

Harsh Sahu 7 years ago

वीभत्स का अर्थ होता है जुगुप्सा (घृणा) तो इसका उदाहरण होगा "घर में लाशें बाहर लाशें जनपथ पर सड़ती है लाशें
Example
  • 2 answers

Roshan Pathak 7 years ago

This que. Is not point of view of examination
Book kholo bhai
  • 1 answers

Usha Yadav 5 years, 11 months ago

Usme ek baar lekhak second class dibbe me chad lete h...vaha ek nawab sahab baithe hote h jo khira kha rahe hote h lekin lekhak ko dekh kar vo dikhava karne ke liye khira ko katkar uspe namak mirch laga kar khidki se bhar phek dete h.............yahi h iski summary I hope it would help you
  • 3 answers

Shreya Dadhich 7 years ago

I think on terrorism ,increasingly population ,environment

Shivam Jaiswal 7 years ago

I wait for your reply.

Shivam Jaiswal 7 years ago

Sir please now
  • 2 answers

Sarthak Gupta 7 years ago

First sender's address Date Receiver address Subject Respected sir /madam Then you start your letter

Sarthak Gupta 7 years ago

We know very well
  • 1 answers
लेखिका के पिता घोर अंतर्विरोधों के बीच जीते थे। एक तरफ उनमें विशिष्ट होने की लालसा थी तो दूसरी ओर वे सामाजिक ढ़ाँचे के अनुकूल ही रहना चाहते थे। लेखिका के मत के अनुसार ये दोनों बातें विरोधाभाषी हैं और इनमें हमेशा टकराव होता है। लेखिका कुछ मामलों में अपने पिता के विपरीत थीं। उन्हें सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने में मजा आता था। उस जमाने में जब लड़कियों का घर से निकलना भी मना था, लेखिका बाहर जाकर स्वाधीनता संग्राम में बढ़चढ़कर हिस्सा लेती थीं।

myCBSEguide App

myCBSEguide

Trusted by 1 Crore+ Students

Test Generator

Test Generator

Create papers online. It's FREE.

CUET Mock Tests

CUET Mock Tests

75,000+ questions to practice only on myCBSEguide app

Download myCBSEguide App