Ask questions which are clear, concise and easy to understand.
Ask QuestionPosted by Naveen Nirmalkar 7 years ago
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Ayushi Jain 7 years ago
Posted by Pushpender Singh 7 years ago
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Posted by R.C.B..? Best? 7 years ago
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Ayushi Jain 7 years ago
Aastha Dangi 7 years ago
Posted by Prince Mavi 7 years ago
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Posted by Tulsi Vasu 7 years ago
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Chetna? ×_×?❤️ 7 years ago
Posted by ? Ishit×_×Taneja ? 7 years ago
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Posted by Prince Mavi 7 years ago
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Posted by Supriya Singh 7 years ago
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Posted by Sunita Java Panwar 7 years ago
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Posted by Prince Mavi 7 years ago
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Posted by Yash (Yashu Boy) 7 years ago
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? Ishit×_×Taneja ? 7 years ago
Posted by Zaqi Beg 7 years ago
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Prince Mavi 7 years ago
Posted by Sagar Gupta 7 years ago
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Yasir Khan 7 years ago
Posted by Lucky Bagariya 7 years ago
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Posted by Mohd Fahed 7 years ago
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Siddharth Sihag 7 years ago
Siddharth Sihag 7 years ago
Gaurav Seth 7 years ago
पत्र लेखन नमूना
अनौपचारिक पत्र - पत्र लेखन नमूना
पत्र लेखन प्रारूप (फॉरमैट) पर ध्यान देना आवश्यक है जो आपके पत्र लेखन को बिल्कुल आसान बना देता है ! एक पुत्र अपने पिता जी को कैसे पत्र लिखता है, उदाहरण से समझाता हूं ! पत्र के तीन भागों को अलग-अलग रंगों से रेखांकित किया गया है, इस पर ध्यान दें ताकि दूसरा अनौपचारिक पत्र आप आसानी से लिख सकें !
अनौपचारिक पत्र लेखन में
- शीर्ष भाग में पता, दिनांक, संबोधन और प्रशस्ति आते हैं !
- मध्य भाग में संदेश व कथा का विवरण होता है!
- अंतिम भाग आभार सूचक वाक्य जैसे आप का, प्रणाम, धन्यवाद आदि का प्रयोग किया जाता है !
पिताजी को पत्र - अनौपचारिक पत्र Format
स्थान का नाम ………
तिथि …………
पूजनीय पिता जी,
सादर प्रणाम
कल ही संध्याकालीन भारतीय डाक से आपका पत्र मिला ! आप सभी का कुशल-क्षेम जानकर अत्यधिक प्रसन्नता हुई ! यहां पर गौरव एवं मीनाक्षी ठीक हैं !
आपने अपने पत्र में परीक्षा की तैयारी के विषय में पूछा था ! आपको बता दूं कि हमारी तैयारी पूरी हो चुकी है जो भी बचा है मैं समय रहते पूरा कर लूंगा ! हमें कुछ और पुस्तक खरीदने की आवश्यकता है जो हमारी प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए उत्तम सिद्ध हो सकता है !
मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि ₹10,000 हमें भेज दें ! मैं उससे पुस्तक खरीद लूंगा !
शेष सब कुशल है ! माता-जी, बुआ आदि को मैं और मेरे मित्र उनको प्रणाम कहते हैं !
आपका सदैव आज्ञाकारी पुत्र
नाम………
औपचारिक पत्र - पत्र लेखन नमूना
औपचारिक पत्र लेखन में आवेदन / प्रार्थना पत्र, नौकरी के लिए आवेदन पत्र, सरकारी / अर्ध सरकारी संस्थाओं के लिए आवेदन पत्र और संपादक के नाम आवेदन पत्र शामिल है ! इन सभी प्रकार के पत्र को कैसे लिखा जाए आपको उदाहरण देकर समझाता हूं !
पत्र लेखन प्रारूप पर ध्यान देना आवश्यक है जो आपके पत्र लेखन को आसान बना देता है !
औपचारिक पत्र लेखन में
- शीर्ष भाग में पत्र-प्रेक्षक का पता बायीं ओर लिखा जाता है तथा पत्र-प्रेषक अपना नाम के नीचे स्वनिर्देशि के बाद लिखते हैं !
- मध्य भाग में संदेश का विवरण होता है !
- अंतिम भाग आभार सूचक वाक्य जैसे धन्यवाद आदि का प्रयोग किया जाता है !
पोस्ट मास्टर के नाम औपचारिक पत्र
परीक्षा भवन
नई दिल्ली
दिनांक - 20 जनवरी 2019
डाकपाल महोदय
संसद मार्ग
नई दिल्ली
प्रिय महोदय,
विषय - रजिस्ट्री पत्र प्राप्त ना होने की शिकायत
डाकपाल महोदय का निवेदन के साथ ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि, मैंने 20 दिसंबर 2018 को अपने पिता के नाम एक पत्र रजिस्ट्री के द्वारा भेजा था ! किंतु उसे एक महीने के बाद भी प्राप्त नहीं हो पाया है !
मैंने अपने गांव स्थित डाकघर से भी संपर्क स्थापित करने का प्रयत्न किया था ! वहां के डाक मास्टर ने बताया कि इस तरह का हमें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है ! रजिस्ट्री पत्र का रसीद नंबर 234 है जो 20 दिसंबर 2018 को भेजा गया था ! रशीद का फोटो स्टेट कॉपी पत्र के साथ संलग्न है !
आपसे प्रार्थना है कि इस संबंध में आवश्यक जांच पड़ताल कर के मुझे मामले की वास्तविक स्थिति से अवगत किया जाए !
धन्यवाद
भवदीय
कुलदीप कुमार झा
Siddharth Sihag 7 years ago
Posted by Devil ? 7 years ago
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Affu 😊 7 years ago
Shivam Tripathi 5 years, 11 months ago
Posted by Rajiv Kumar 7 years ago
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Gaurav Seth 7 years ago
कन्यादान
कितना प्रामाणिक था उसका दुख
लड़की को दान में देते वक्त
जैसे वही उसकी अंतिम पूँजी हो
इस कविता में उस दृश्य का वर्णन है जब एक माँ अपनी बेटी का कन्यादान कर रही है। बेटियाँ ब्याह के बाद पराई हो जाती हैं। जिस बेटी को कोई भी माता पिता बड़े जतन से पाल पोसकर बड़ी करते हैं, वह शादी के बाद दूसरे घर की सदस्य हो जाती है। इसके बाद बेटी अपने माँ बाप के लिए एक मेहमान बन जाती है। इसलिए लड़की के लिए कन्यादान शब्द का प्रयोग किया जाता है। जाहिर है कि जिस संतान को किसी माँ ने इतने जतन से पाल पोस कर बड़ा किया हो, उसे किसी अन्य को सौंपने में गहरी पीड़ा होती है। बच्चे को पालने में माँ को कहीं अधिक दर्द का सामना करना पड़ता है, इसलिए उसे दान करते वक्त लगता है कि वह अपनी आखिरी जमा पूँजी किसी और को सौंप रही हो।
<hr />लड़की अभी सयानी नहीं थी
अभी इतनी भोली सरल थी
कि उसे सुख का आभास तो होता था
लेकिन दुख बाँचना नहीं आता था
पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की
कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की
लड़की अभी सयानी नहीं हुई थी; इसका मतलब है कि हालाँकि वह बड़ी हो गई थी लेकिन उसमें अभी भी दुनियादारी की पूरी समझ नहीं थी। वह इतनी भोली थी कि खुशियाँ मनाने तो उसे आता था लेकिन यह नहीं पता था कि दुख का सामना कैसे किया जाए। उसके लिए बाहरी दुनिया किसी धुँधले तसवीर की तरह थी या फिर किसी गीत के टुकड़े की तरह थी। ऐसा अक्सर होता है कि जब तक कोई अपने माता पिता के घर को छोड़कर कहीं और नहीं रहना शुरु कर देता है तब तक उसका समुचित विकास नहीं हो पाता है।
<hr />माँ ने कहा पानी में झाँककर
अपने चेहरे पर मत रीझना
आग रोटियाँ सेंकने के लिए है
जलने के लिए नहीं
वस्त्र और आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह
बंधन हैं स्त्री जीवन के
माँ ने कहा लड़की होना
पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।
जाते-जाते माँ अपनी बेटी को कई नसीहतें दे रही है। माँ कहती हैं कि कभी भी अपनी सुंदरता पर इतराना नहीं चाहिए क्योंकि असली सुंदरता तो मन की सुंदरता होती है। वह कहती हैं कि आग का काम तो चूल्हा जलाकर घरों को जोड़ने का है ना कि अपने आप को और अन्य लोगों को दुख में जलाने का। माँ कहती है कि अच्छे वस्त्र और महँगे आभूषण बंधन की तरह होते हैं इसलिए उनके चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। आखिर में माँ कहती है कि लड़की जैसी दिखाई मत देना। इसके कई मतलब हो सकते हैं। एक मतलब हो सकता है कि माँ उसे अब एक जिम्मेदार औरत की भूमिका में देखना चाहती है और चाहती है कि वह अपना लड़कपन छोड़ दे। दूसरा मतलब हो सकता है कि उसे हर संभव यह कोशिश करनी होगी कि लोगों की बुरी नजर से बचे। हमारे समाज में लड़कियों की कमजोर स्थिति के कारण उनपर यौन अत्याचार का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में कई माँएं अपनी लड़कियों को ये नसीहत देती हैं कि वे अपने यौवन को जितना हो सके दूसरों से छुपाकर रखें।
भावार्थ
इस कविता में कवि ने माँ के उस पीड़ा को व्यक्त किया है जब वह अपने बेटी को विदा करती है। उस समय मान को लगता है जैसे उसने अपने जीवन भर की पूंजी गँवा दी। माँ के हृदय में आशंका बनी रहती है कि कहीं ससुराल में उसे कष्ट तो नही होगा, अभी वो भोली है। विवाह के बाद वह केवल सुखी जीवन की कल्पना कर सकती है किन्तु जिसने कभी दुःख देखा नही वह भला दुःख का सामना कैसे करेगी। कवि कहते हैं कि सुख सौभाग्य को वह अबोध बेटी पढ़ सकती है परन्तु अनचाहे दुखों को वह पढ़ और समझ नही सकती।
माँ अपनी बेटी को सीख देते हुए कहतीं हैं कि प्रतिबिम्ब देखकर अपने रूप-सौंदर्य पर मत रीझना। यह स्थायी नही है। माँ दूसरी सीख देते हुए कहती हैं कि आग का उपयोग खाना बनाने के लिए होता इसका उपयोग जलने जलाने के लिए मत करना। यह सीख उन मानसिकता वाले लोगों पर कटाक्ष है जो दहेज़ के लालच में अपनी दुल्हन को जला देते हैं। तीसरी सीख देते हुए माँ कहतीं हैं कि वस्त्र आभूषणों को ज्यादा महत्व मत देना, ये स्त्री जीवन के बंधन हैं। इनसे ज्यादा लगाव अच्छा नही है। माँ कहतीं हैं लड़की होना कोई बुराई नही है परन्तु लड़की जैसी कमजोर असहाय मत दिखना। जरुरत पड़ने पर कोमलता, लज्जा आदि को परे हटाकर अत्याचार के प्रति आवाज़ उठाना।
Posted by Aman Prabhakar 7 years ago
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Posted by Rishi Dangi 7 years ago
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Posted by Aayu... Sad Girl....??? 7 years ago
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Posted by Aayu... Sad Girl....??? 7 years ago
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Anushka Jugran ✌️ 7 years ago
Posted by Ishaan ...✌ 7 years ago
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Posted by Laya Mourya 7 years ago
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Posted by Kajal Shukla 7 years ago
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Nancy Nancy 7 years ago
Posted by Ayushi Shukla 7 years ago
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Harsh Sahu 7 years ago
Posted by Aman Thakur 7 years ago
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Posted by Aayu... Sad Girl....??? 7 years ago
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Usha Yadav 5 years, 11 months ago
Posted by Shivam Jaiswal 7 years ago
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Posted by Lalit Singh Tomar 7 years ago
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Sarthak Gupta 7 years ago
Posted by Sarika Popli 7 years ago
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Aayu... Sad Girl....??? 7 years ago

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Rajiv Ranjan 7 years ago
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