No products in the cart.

Ask questions which are clear, concise and easy to understand.

Ask Question
  • 0 answers
  • 0 answers
  • 1 answers

Sudhanshu Shivam 8 years, 4 months ago

Developed India, integrated India, cleaned India,rich India,
  • 0 answers
  • 0 answers
  • 0 answers
  • 0 answers
  • 1 answers

Swati Kumari 8 years, 4 months ago

Akbar ki sena ke saath yudh ladne ki vajah se chand bibi ki mauth hui.
  • 0 answers
  • 0 answers
  • 0 answers
  • 1 answers

Common Id 4 years, 11 months ago

Diary writing on friendship in hindi
  • 1 answers

🅿🅰🆆🅰🅽 . 7 years, 11 months ago

'व्याख्या' किसी भाव या विचार के विस्तार और विवेचन को कहते हैं।

व्याख्या न भावार्थ है, न आशय। यह इन दोनों से भित्र है। नियम भी भित्र है। 'व्याख्या' किसी भाव या विचार के विस्तार और विवेचन को कहते हैं। इसमें परीक्षार्थी को अपने अध्ययन, मनन और चिन्तन के पदर्शन की पूरी स्वतन्त्रा रहती है।



व्याख्या के प्रकार





  • प्रसंगनिर्देश व्याख्या का अनिवार्य अंग है। इसलिए, व्याख्या लिखने के पूर्व प्रसंग का उल्लेख कर देना चाहिए, पर प्रसंगनिर्देश संक्षिप्त होना चाहिए। परीक्षाभवन में व्याख्या लिखते समय परीक्षार्थी प्रायः दो-दो, तीन-तीन पृष्ठों में प्रसंगनिर्देशकरते है और कभी-कभी मूलभाव से दूर जाकर लम्बी-चौड़ी भूमिका बांधने लगते हैं। यह ठीक नहीं। उत्तम कोटि की व्याख्या में प्रसंगनिर्देश संक्षिप्त होता है। ऐसी कोई भी बात न लिखी जाय, जो अप्रासंगिक हो। अप्रासंगिक बातों को ठूँस देने से अव्यवस्था उत्पत्र हो जाती है। अतः परीक्षार्थी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि व्याख्या में कोई बात फिजूल और बेकार न हो। प्रसंगनिर्देशविषय के अनुकूल होना चाहिए।





व्याख्या के लिए आवश्यक निर्देश

मूल अवतरण से व्याख्या बड़ी होती है। इसकी लम्बाई-चौड़ाई के सम्बन्ध में कोई निश्र्चित सलाह नहीं दी जा सकती। छात्रों को सिर्फ यह देखना है कि मूल भावों अथवा विचारों का समुचित और सन्तोषजनक विवेचन हुआ या नहीं। इन बातों को ध्यान में रखकर अच्छी और उत्तम व्याख्या लिखी जा सकती है। इसके बजाय इसमें निम्नलिखित बातें होनी चाहिए-





  1. व्याख्या में प्रसंग-निर्देश अत्यावश्यक है।




  2. प्रसंग-निर्देश संक्षिप्त, आकर्षक और संगत होना चाहिए।




  3. व्याख्या में मूल विचार या भाव का संतोषपूर्ण विस्तार हो।




  4. अंत में शब्दार्थ लिखे जायँ।




  5. मूल के विचारों का खण्डन या मण्डन किया जा सकता है।




  6. मूल के विचारों के गुण-दोषों पर समानरूप से प्रकाश डालना चाहिए।




  7. यदि कोई महत्त्वपूर्ण बात हो, तो उसपर अन्त में टिप्पणी दे देनी चाहिए।




  • 1 answers

Payal Singh 8 years, 5 months ago

वे कहते हैं कि हमारे तो अरमान थे कि में नीले आकाश में तब तक उड़ते रहें, जब तक की उसकी सीमा को खोज नहीं पाते। साथ ही हम सूरज की लाल किरण के जैसे अपनी चोंच में तारों रूपी अनार के लाल-लाल दोनों को चुगने का स्वपन देखते थे। परन्तु गुलामी के कारण यह संभव नहीं है।

तारक का अर्थ है तारों !

  • 1 answers

Divya Dominic 8 years, 9 months ago

7's BIRTHDAY in Account to turn 8!!

  • 1 answers

Monika Yadav 8 years, 11 months ago

1. Mote mote bacho ke liye prayog hua hai

myCBSEguide App

myCBSEguide

Trusted by 1 Crore+ Students

Test Generator

Test Generator

Create papers online. It's FREE.

CUET Mock Tests

CUET Mock Tests

75,000+ questions to practice only on myCBSEguide app

Download myCBSEguide App