CBSE - Class 12 - राजनीति विज्ञान - पुनरावृति नोट्स

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पुनरावृति नोट्स for Class 12 राजनीति विज्ञान

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान शीतयुद्ध का दौर शीतयुद्ध का दौर समकालीन विश्व राजनीति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक की वैश्विक घटनाओं केअध्ययन का विषय है। द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस तथा सोवियत संघ जिन्हें मित्र राष्ट्रकहा गया ने विजय प्राप्त की तथा जर्मनी, इटली तथा जापान जिन्हें धुरी राष्ट्र कहा गया, इनकीयुद्ध में हार हुई।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान दो ध्रुवीयता का अंत दो ध्रुवीयता का अंत शीतयुद्ध के दौरान विश्व दो गुटों में बंट गया, एक गुट का नेता अमेरिका और दूसरे गुट का नेता सोवियत संघ था। दिसंबर 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ द्विध्रुवीयता का अंत हुआ और अमेरिका विश्व की एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व इतिहास हमें बताता है कि विश्व में किसी भी देश का वर्चस्व स्थाई नहीं रह सकता। विश्व राजनीति में विभिन्न देश या दशों के समूह ताकत पाने और कायम रखने की लगातार कोशिश करते हैं। यह ताकत सैन्य प्रभुत्व, आर्थिक शक्ति, राजनीतिक रुतबे और सांस्कृतिक विकास के रूप में होती है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान सत्ता के वैकल्पिक केंद्र सत्ता के वैकल्पिक केंद्र संसार से दो ध्रुव्रीय सत्ता की मुक्ति के साथ ही दो संघो की स्थापना हुई, पहली ‘यूरोपीय संघ’ व दूसरी दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रो के संगठन ‘आसियान की। इन दोनों की बढ़ती शक्ति को अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने वाले वैकल्पिक केन्द्रो के रूप में देखा जा रहा है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान समकालीन दक्षिण एशिया समकालीन दक्षिण एशिया बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका को मुख्यतः दक्षिण एशियाई क्षेत्र मानते हैं। इन क्षेत्रों की विशिष्ट भौगोलिक, सामाजिक भाषाई तथा सामाजिक, सांस्कृतिक एकता/समानता ने इनकी नजदीकियाँ बढ़ाई हैं।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान अंतर्राष्ट्रीय संगठन अंतर्राष्ट्रीय संगठन संसार को युद्धों के विनाश से बचाने तथा विकास के लिए अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों की आवश्यकता महसूस की गई थी। प्रथम विश्व युद्ध के पश्चात ‘लीग ऑफ नेशंस’ की स्थापना की गई परन्तु यह दूसरे विश्व युद्ध को (1939-45) रोक पाने में असफल रहा।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान समकालीन विश्व में सुरक्षा समकालीन विश्व में सुरक्षा युद्ध की स्थिति में सरकार के समक्ष तीन विकल्प होते हैं-आत्मसमर्पण, बिना युद्ध के दूसरे पक्ष की बात मान लेना, युद्ध की स्थिति में अपनी रक्षा करना और हमलावर कों पराजित कर देना।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन उत्तरी गोलार्द्ध के विकसित देशों का तर्क - पर्यावरण रक्षा सबकी जिम्मेदारी, इसके लिए विकास कार्यों पर प्रतिबन्ध लगाना सबका समान दायित्व है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान वैश्वीकरण वैश्वीकरण बीसवीं शताब्दी के अन्तिम 10 वर्षों में एक परिवार, एक राज्य, एक विश्व की भावना का विकास हुआ। यह भावना वैश्वीकरण कहलाती है अर्थात विश्व एकीकरण की भावना वैश्वीकरण है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ विभाजन की सबसे कठिन व भयानक समस्या अल्पसंख्यकों की थी। पाकिस्तान में हिंदू व सिखों की बड़ी तादाद थी जबकि भारत में मुसलमान अल्पसंख्यको की संख्या कुल आबादी का 12 प्रतिशत थी। शरणार्थियों का पुनर्वास भी सरकार के लिए एक समस्या थी।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान एक दल के प्रभुत्व का दौर एक दल के प्रभुत्व का दौर किसी एक पार्टी का लम्बे समय तक राजसत्ता पर कब्जा रखना एक दलीय प्रणाली की शुरूआत 1952-67 तक हालांकि भारत में बहुदलीय प्रणाली को अपनाया गया था फिर भी लगातार तीन आम चुनावों में कांग्रेस का सत्ता पर कब्जा बरकरार रहा।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान नियोजित विकास की राजनीतिक नियोजित विकास की राजनीतिक. स्वतंत्रता से पहले १९३० में आंकड़ों को इकठ्ठा करने व् उदेश्यों का प्रारूप तयार करने और पंचवर्शीय योजनाओं व् वार्षिक बजट का प्रारूप तैयार करने के लिए राष्ट्रीय नियोजन समिति की आवश्यकता महसूस की गयी थी.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान भारत के विदेश सम्बन्ध भारत के विदेश सम्बन्ध सर्वप्रथम 1974 में राजस्थान के जैसलमेर जिले मे पोखरण नामक स्थान पर भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण किया। मई 1998 में पोखरण में ही दूसरा परमाणु परीक्षण किया। मई 1998 में पोखरण में ही दूसरा परमाणु परीक्षण किया।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान कांग्रेस प्रणाली चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना पण्डित नेहरू की मृत्यु (मई 1964) से लेकर 11 जनवरी 1966 तक लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री रहे। शास्त्री जी के बाद कांग्रेस सिंडीकेट के मोरारजी के बजाय इन्दिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाया कि वे अनुभवहीन है और दिशा निर्देश हेतु सिंडिकेट पर निर्भर रहेगी।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट सन् 1973 में सन् 1975 के बीच आये बदलावों और घटनाओं की परिणति देश में आपातकालीन लागू करने के रूप में हुई इन घटनाओं को हम आर्थिक, राजनीतिक, प्रशासनिक व न्यायायिक संदर्भो में समझ सकते है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान जन-आंदोलनों का उदय जन-आंदोलनों का उदय. 1970 के दशक में विभिन्न सामाजिक वर्गो, जैसे-महिला, छात्रा, दलित और किसानों को लग रहा था कि लोकतांत्रिक राजनीति उनकी जरूरत और माँगों पर ध्यान नहीं दे रही है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान क्षेत्रीय आकांक्षाएँ क्षेत्रीय आकांक्षाएँ 1980 के दशक को स्वायत्तता की मांग के दशक के रूप में भी देखा जा सकता है। इस दौर में देश के कई हिस्सों से स्वायतत्ता की मांग उठी।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान भारतीय राजनीति नए बदलाव भारतीय राजनीति : नए बदलाव 1980 के दशक के आखिर के सालों में देश में पाँच ऐसे बड़े बदलाव आए, जिनका हमारी आगे की राजनीति पर गहरा असर पड़ा-1989 के चुनावों में कांग्रेस की हार, 1990 में मंडल मुद्दे का उदय, 1991 में नए आर्थिक सुधार, 1992 में अयोध्या और 1991 में राजीव गांधी की हत्या।

CBSE Revision Notes for class 12 राजनीति विज्ञान

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CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान Chapter-wise Revision Notes

  • Ch-1 शीतयुद्ध का दौर
  • Ch-2 दो ध्रुवीयता का अंत
  • Ch-3 समकालीन विश्व में अमरीकी वर्चस्व
  • Ch-4 सत्ता के वैकल्पिक केंद्र
  • Ch-5 समकालीन दक्षिण एशिया
  • Ch-6 अंतर्राष्ट्रीय संगठन
  • Ch-7 समकालीन विश्व में सुरक्षा
  • Ch-8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन
  • Ch-9 वैश्वीकरण
  • Ch-10 राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ
  • Ch-11 एक दल के प्रभुत्व का दौर
  • Ch-12 नियोजित विकास की राजनीति
  • Ch-13 भारत के विदेश संबंध
  • Ch-14 कांग्रेस प्रणाली : चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना
  • Ch-15 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
  • Ch-16 जन-आंदोलनों का उदय
  • Ch-17 क्षेत्रीय आकांक्षाएँ

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CBSE Class 12 राजनीति विज्ञान
पुनरावृति नोटस
पाठ-1 शीतयुद्ध का दौर

  • समकालीन विश्व राजनीति द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से अब तक की वैश्विक घटनाओं केअध्ययन का विषय है।
  • द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, फ्रांस तथा सोवियत संघ जिन्हें मित्र राष्ट्र कहा गया ने विजय प्राप्त की तथा जर्मनी, इटली तथा जापान जिन्हें धुरी राष्ट्र कहा गया, इनकीयुद्ध में हार हुई।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 से 1990 तक की वह तनावपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय राजनीतिक स्थितिजो संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच रही, को शीत युद्ध कहा गया।
  • किसी भी शक्ति गुट में बिना शामिल हुए अपनी नीतियों का अनुसरण करना गुटनिरपेक्षता तथाकिसी भी पक्ष में युद्ध में भाग न लेना तटस्थता की नीति कहलाई।

स्मरणीय बिंदु:

  1. प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला था, जिसने सम्पूर्ण विश्व को दहला दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध 1939 से 1945 तक मित्र राष्ट्रों और धुरी राष्ट्रों के बीच हुआ, जिसमें केवल यूरोपीय देश ही नहीं, अपितु दक्षिण-पूर्व एशिया, चीन, बर्मा तथा भारत के पूर्वोत्तर भाग भी शामिल थे।
  2. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दो महाशक्तियाँ अमरीका और सोवियत संघ उभरकर सामने आए, जिन्होंने एशिया, अफ्रीका व लैटिन अमरीका के नव स्वतंत्र देशों को अपने खेमे में लेने की कोशिश की।
  3. शीतयुद्ध, युद्ध न होते हुए युद्ध की परिस्थितियाँ थीं; जिसमें वैचारिक घृणा, राजनीतिक अविश्वास, कूटनीतिक जोड़-तोड़, सैनिक प्रतिस्पर्धा, जासूसी, प्रचार, राजनीतिक हस्तक्षेप, शस्त्रों की दौड़ जैसे साधनों का प्रयोग किया गया था।
  4. शीतयुद्ध काल में अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति दो विरोधी गुटों या विचारधारा (अमरीकी गुट तथा सोवियत गुट-पूँजीवादी तथा साम्यवादी) में विभाजित हो गई थी।
  5. शीतयुद्ध काल में नाटो, सिएटो तथा वारसा पैक्ट जैसे सैनिक गुटों का निर्माण किया गया।
  6. विकासशील या नव स्वतंत्र राष्ट्रों ने शीतयुद्ध से अलग रहने के लिए गुटनिरपेक्षता की नीति अपनाई।
  7. 1961 में यूगोस्लाविया की राजधानी बेलग्रेड में भारत की अगुवाई पर गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की शुरुआत अन्य देशों जैसे-घाना, मिस्र के साथ मिलकर की गई।
  8. विकासशील देशों ने विकासशील देशों की विकसित देशों पर निर्भरता को कम करने के लिए 1970 में नई अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की स्थापना की।
  9. गुटनिरपेक्ष आन्दोलन और नई अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था, द्विध्रुवीय विश्व के सामने एक चुनौती बन कर आए थे।
  10. आपसी सहयोग और विकास के लिए उत्तर-दक्षिण संवाद तथा दक्षिण-दक्षिण सहयोग जैसे संवाद को आरम्भ किया गया।
  11. शीतयुद्ध के दौरान भारत ने विकासशील देशों को गुटनिरपेक्षता जैसा एक मंच प्रदान करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  12. शीतयुद्ध के दौरान परमाणु युद्ध की संभावना बनी हुई थी, लेकिन दोनों शक्तियों में शक्ति-संतुलन ने युद्ध को वास्तविक रूप लेने से रोका।
  13. शीतयुद्ध की कुछ घटनाएँ, जिन्होंने तृतीय विश्व युद्ध की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया था- क्यूबा मिसाइल संकट, कोरिया युद्ध, अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप, सोवियत संघ द्वारा परमाणु परीक्षण आदि।
  14. शीतयुद्ध के दौरान नि:शस्त्रीकरण के प्रयत्न स्वरूप विभिन्न सन्धियाँ व समझौते किए गए।
  15. शीतयुद्ध के दौरान संयुक्त राष्ट्रसंघ भी शीतयुद्ध की राजनीति से काफी प्रभावित था। कोई भी निर्णय लेना आसान नहीं था, क्योंकि दोनों गुट एक-दूसरे के विरोधी थे।

सैन्य-सन्धि संगठन-

  • दोनों महाशक्तियों ने अपनी शक्ति वृद्धि हेतु सैन्य संगठन बनाये। अप्रैल 1949 में (उत्तर अटलांटिक सन्धि संगठन) नाटो, अमेरिका द्वारा लोकतंत्र को बचाना, 1954 में दक्षिण पूर्वएशियाई सन्धि संगठन (सीटों) अमेरिका नेतृत्व-साम्यवाद प्रसार रोकना, 1955 में बगदाद पैक्टया केन्द्रीय सन्धि संगठन अमेरिकी नेतृत्व-साम्यवाद रोकना, 1955 वारसा सन्धि सोवियत संघनेतृत्व।
  • अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाते हुए तथा उनसे प्राप्त अन्य लाभों को देखते ही महाशक्तियाँ छोटे देशों को साथ रखना चाहती थी।
  • छोटे देश भी सुरक्षा, हथियार और आर्थिक मदद की दृष्टि से महाशक्तियों से जुड़े रहना चाहते थे।
  • परमाणु सम्पन्न होने के कारण दोनों ही महाशक्तियों में रक्त रंजित युद्ध के स्थान पर प्रतिद्धन्द्धिता तथा तनाव की स्थिति बनी रही। जिसे शीत युद्ध कहा गया।

महाशक्तियों को छोटे देशों से लाभ-

  1. छोटे देशों के प्राकृतिक संसाधन प्राप्त करना।
  2. सैन्य ठिकाने स्थापित करना।
  3. आर्थिक सहायता प्राप्त करना।
  4. भू-क्षेत्र (ताकि महाशक्तियाँ अपने हथियारों और सेना का संचालन कर सके।)

शीतयुद्ध के दायरे (विवाद क्षेत्र)-

  • 1948 - बर्लिन की नाके बन्दी
  • 1950 - कोरिया संकट
  • 1954 - में वियतनाम में अमेरिका हस्तक्षेप
  • 1962 - क्यूबा मिसाइल संकट
  • 1971 - भारत-पाक युद्ध
  • 1979 - अपफगानिस्तान में सोवियत संघ का हस्तक्षेप

दो ध्रुवीयता को चुनौती:-

  • गुटनिरेपेक्षता- भारत के जवाहर लाल नेहरू, मिस्र के अब्दुल गमाल नासिर, युगोस्लाविया के टीटो, इण्डोनेशिया के सुकर्णों, घाना के वामें एनक्रुमा ने 1961 में युगोस्लाविया के बेलग्रेड में 25 सदस्यों के साथ इस संगठन की स्थापना की। जुलाई 2009 में गुट निरपेक्ष देशों का 15वां सम्मेलन मिस्र में हुआ जिसमें इसकी सदस्य संख्या 118 तथा 15 देश पर्यवेक्षक है | पर्यवेक्षक संगठनों की संख्या 9 है।
  • नव अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था- गुट निरपेक्ष देशों ने 1972 में संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास से सम्बंधित सम्मेलन (UNCT AD) में विकास के लिए ‘एक नई व्यापार नीति की ओर’ एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया ताकि विकसित देशों तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा गरीब देशों का आर्थिक शोषण समाप्त हो सकें।
  • भारत व शीत युद्ध- भारत ने नव स्वतंत्र देशों की अगुवाई की। भारत ने USA तथा USSR से अच्छे संबंध रखने की कोशिश राष्ट्रीय हितों की प्राथमिकता के साथ की।
  • 17 वें गुटनिरपेक्ष शिखर सम्मेलन का आयोजन वेनेजुएला के 'भार्गारिता द्वीप में सितम्बर, 2016 की किया गया। वर्तमान में इस आंदोलन के सदस्यों की संख्या 120 है। साथ ही साथ वर्तमान से इसके 17 देश तथा 10 अंतर्राष्ट्रीय संगठन पर्यवेक्षक है इस शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुधार, पश्चिम एशिया की स्थिति, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों, जलवायु परिर्वतन, सतत विकास शारणार्थी समस्या और परमाणु निशस्त्रीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

  • नव अन्तर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (N.I.E.O) 1972 में U.N.O के व्यापार एवम् विकास आंदोलन (UNCTAD) में विकास के लिए एक नई व्यापार नीति का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया ताकि धनी देशों द्वारा नव स्वतन्त्र गरीब देशों का शोषण न हो सके।
    टुवार्ड्स अ न्यू ट्रेड पॉलिसी फॉर डेवलेपमेंट (विकास के लिए नई व्यापारिक नीति की ओर) एक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

शस्त्र नियन्त्रण संन्धि-

  • L.T.B.T. – Limited Test Ban Treaty 05-10-1963, जल, वायुमण्डल, बाह्य अंतरिक्ष में परमाणु परीक्षण प्रतिबन्ध्।
  • N.P.T – Nuclear Non – Proliferation Treaty 01-7-1968, इसमें जनवरी 1967 से पूर्ण परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र के अलावा कोई अन्य देश परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा।
  • SALT – Strategic Arms Limitation Talk-I-मई 1972 व SALT-II-जून 1972, घातक प्रतिरक्षा हथियार परिसीमन।
  • START – Strategic Arms Reeducation Treaty I-July 1991 and STAR-II-January 1993 - सामरिक अस्त्र परिसीमन न्यूनीकरण सन्धि |

नए स्वतंत्र देश (तीसरी दुनिया) ने गुट निरपेक्षता की नीति का अनुसरण किया क्योंकि-

  • नव-स्वाधीन राष्ट्र जानते थे कि सैनिक गुट उनकी स्वाधीनता व शांति के लिए गंभीर खतरा पैदा कर देंगे।
  • नव-स्वाधीन राष्ट्र जानते थे कि सैनिक संगठनों को बढ़ावा देने से अस्त्र-शस्त्र के निर्माणों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे विश्व शांति को खतरा पैदा होगा।
  • इन देशों के सामने सामाजिक और आर्थिक पुनर्निर्माण की एक भारी जिम्मेदारी थी और इस कार्य को युद्ध एवं तनावों से मुक्त वातावरण में ही पूरा किया जा सकता था।
  • शक्ति संगठन का सदस्य बनने से उन्हें संगठनों के बनाए गए नियमों पर चलना पड़ता, इसलिए तटस्थ रहे।

शीतयुद्ध का घटनाक्रम-

  1. 1947- साम्यवाद को रोकने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति ट्रूमैन का सिद्धान्त।
  2. 1947-52- मार्शल प्लान-पश्चिमी यूरोप के पुनर्निर्माण में अमरीका की सहायता।
  3. 1948-49- सोवियत संघ द्वारा बर्लिन की घेराबंदी। अमरीका और उसके साथी देशों ने पश्चिमी बर्लिन के नागरिकों को जो आपूर्ति भेजी थी, उसे सोवियत संघ ने अपने विमानों से उठा लिया
  4. 1950-53- कोरियाई युद्ध
  5. 1954- वियतनामियों के हाथों दायन बीयन फू में फ्रांस की हार; जेनेवा पर हस्ताक्षर: 17वीं समानांतर रेखा द्वारा वियतनाम का विभाजन और सिएटी (SEATO) का गठन।
  6. 1954-75- वियतमान में अमरीकी हस्तक्षेप।
  7. 1955- बगदाद समझौते पर हस्ताक्षर (बाद में इसका नाम सेन्टो (CENTO) रख दिया।
  8. 1956- हंगरी में सोवियत संघ का हस्तक्षेप।
  9. 1961- क्यूबा में अमरीका द्वारा प्रायोजित 'बे ऑफ़ पिग्स' आक्रमण।
  10. 1961- बर्लिन दीवार खड़ी की गई।
  11. 1962- क्यूबा का मिसाइल संकट।
  12. 1965- डोमिनिकन रिपब्लिक में अमरीकी हस्तक्षेप।
  13. 1968- चेकोस्लोवाकिया में सोवियत हस्तक्षेप।
  14. 1972- अमरीकी राष्ट्रपति निक्सन का चीन दौरा।
  15. 1978-89- कंबोडिया में वियतनाम का हस्तक्षेप।
  16. 1985- गोर्बाचेव सोवियत संघ के राष्ट्रपति बने; सुधार की प्रक्रिया आरंभ की।
  17. 1989- बर्लिन की दीवार गिरी; पूर्वी यूरोप की सरकारों के विरुद्ध लोगों का प्रदर्शन।
  18. 1990- जर्मनी का एकीकरण।
  19. 1991- सोवियत संघ का विघटन; शीत युद्ध की समाप्ति

 



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