CBSE - Class 12 - अर्थशास्त्र - पुनरावृति नोट्स

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पुनरावृति नोट्स for Class 12 अर्थशास्त्र

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र परिचय (2018-19 only) व्यष्टि अर्थशास्त्र परिचय में शामिल है अर्थशास्त्र के अर्थ, अर्थशास्त्र की मूल क्रियाएं, आर्थिक समस्या, आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के कारण, अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्याएँ, बाजार अर्थव्यवस्था, केंद्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था, मिश्रित अर्थव्यवस्था, उत्पादन संभावना वक्र/उत्पादन संभावना सीमा, उत्पादन संभावना की विशेषताएँ/आकार, सकारात्मक तथा आदर्शात्मक आर्थिक विश्लेषण

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र उपभोक्ता व्यवहार तथा माँग (2018-19 only) उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत में जो शामिल है उपयोगिता की अवधारणा, उपयोगिता की विशेषताएँ, कुल उपयोगिता तथा सीमान्त उपयोगिता, कुल उपयोगिता और सीमान्त उपयोगिता में अंतर्संबंध, ह्रासमान सीमान्त उपयोगिता का नियम, उपभोक्ता संतुलन- एक वस्तु की स्थिति में, तटस्थता वक्र, तटस्थता वक्र की विशेषताएँ या लक्षण, तटस्थता मानचित्र, तटस्थ वक्र विश्लेषण की मान्यताएँ, बजट रेखा, बजट समूह, बजट रेखा का ढलान, बजट रेखा में सिखकाव, तटस्थता वक्र विश्लेषण का प्रयोग करके उपभोक्ता संतुलन, माँग, व्यक्तिगत माँग के निर्धारक तत्व, बाज़ार माँग के निर्धारक तत्व, माँग फलन, माँग का नियम, माँग वक्र का ढलान ऋणात्मक होने के कारण, माँग के नियम के अपवाद, माँग वक्र पर संचलन तथा माँग वक्र में खिसकाव, माँग की कीमत लोच, माँग की कीमत लोच के भाषा की विधियाँ,माँग की कीमत लोच के प्रकार, माँग की कीमत लोच को प्रभावित करने वाले कारक.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र उत्पादक व्यवहार तथा पूर्ति (2018-19 only) उत्पादन तथा लागत में जो शामिल है उत्पादन फलन, कुल उत्पाद, औसत उत्पाद और सीमांत उत्पाद, कुल उत्पाद और सीमान्त उत्पाद में संबंध, सीमान्त उत्पाद और औसत उत्पाद में संबंध, लागत, स्पष्ट तथा अस्पष्ट लागतें, अल्पकालीन लागत.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र बाज़ार के रूप तथा कीमत निर्धारण (2018-19 only) पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत में शामिल है पूर्ण प्रतिस्पर्धा-पारिभाषिक लक्षण, संप्राप्ति, पूर्ण प्रतियोगिता के अन्तर्गत संप्राप्ति की अवधारणाओं में अंतर्संबंध, एकाधिकार बाज़ार तथा एकाधिकारिक प्रतियोगी बाज़ार में TR, MR तथा AR में अंतर्संबंध, उत्पादक संतुलन, सीमांत संप्राप्ति तथा सीमांत लागत दृष्टिकोण, कुछ महत्त्वपूर्ण बिन्दु, पूर्ति का अर्थ, पूर्ति अनुसूची, पूर्ति वक्र, पूर्ति के निर्धारक तत्व, पूर्ति का नियम, पूर्ति वक्र पर संचलन तथा पूर्ति वक्र में खिसकाव, पूर्ति की कीमत लोच, पूर्ति की कीमत लोच के माप, पूर्ति की कीमत लोच के प्रकार, पूर्ति की लोच को प्रभावित करने वाले कारक.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र राष्ट्रीय आय तथा संबद्ध समाहार राष्ट्रीय आय का लेखांकन में शामिल है चालू कीमत पर राष्ट्रीय आय व स्थिर कीमत पर राष्ट्रीय आय, मध्यवर्ती वस्तुएँ व अंतिम वस्तुएँ, प्रवाह एवं स्टॉक अवधारणाएँ, आर्थिक (घरेलू) सीमा, देश के सामान्य निवासी, अचल पूँजी का उपभोग या मूल्यह्रास, साधन लागत और बाज़ार कीमत, विदेशों से शुद्ध साधन आय, उत्पादन का मूल्य और मूल्य वृद्धि, साधन भुगतान , आय के चक्रीय प्रवाह, उत्पाद विधि, दोहरी गणना की समस्या, आय विधि,व्यय विधि, निजी आय, वैयक्तिक आय, राष्ट्रीय प्रयोज्य आय, वैयक्तिक प्रयोज्य आय.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र मुद्रा और बैंकिंग मुद्रा और बैंकिंग में शामिल है वस्तु विनियम प्रणाली तथा इसकी सीमाएँ, मुद्रा का अर्थ एवं रूप, मुद्रा के रूप, मुद्रा के कार्य, मुद्रा की माँग, मुद्रा की पूर्ति, बैंक एव बैंकिंग की परिभाषा, बैंक के प्रकार, वाणिज्यिक बैंक का अर्थ व कार्य, साख निर्माण की प्रक्रिया, केन्द्रीय बैंक का अर्थ और कार्य, केन्द्रीय बैंक और वाणिज्यिक बैंक में अंतर.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र आय और रोज़गार का निर्धारण आय निर्धारण में शामिल है आय व रोजगार का परंपरावादी सिद्धांत, समग्रपूर्ति पर परंपरावादी व केन्स का मत, समग्र पूर्ति , उपभोग फलन, बचत फलन, औसत उपभोग प्रवृत्ति, सीमांत उपभोग प्रवृत्ति , औसत बचत प्रवृत्ति, सीमांत बचत प्रवृत्ति, MPC और MPS में संबंध, समता बिंदु, आय तथा रोजगार के संतुलन स्तर का निर्धारण, निवेश गुणक, निवेश गुणांक (K) का MPC और MPS से संबंध, अवस्फीतिक अंतराल और इसका माप, अधिमाँग, अधिमाँग को ठीक करने के उपाय, न्यून (अभावी) माँग को ठीक करने के उपाय.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था में शामिल है सरकारी बजट का अर्थ, बजट के उद्देश्य व महत्त्व, बजट के अवयव या घटक, राजस्व प्राप्तियों और पूँजीगत प्राप्तियों में अंतर, सरकारी व्यय का अर्थ व वर्गीकरण, राजस्व व्यय और पूँजीगत व्यय में अंतर, योजना व्यय और गैर-योजना व्यय में अंतर, विकासात्मक व्यय और गैर-विकासात्मक व्यय में अंतर, बजट घाटा, राजस्व घाटा, राजकोषीय घाटा, प्राथमिक घाटा.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र भुगतान संतुलन खुली अर्थव्यवस्था भुगतान संतुलन में शामिल है अदायगी-संतुलन, भुगतान शेष/अदायगी संतुलन में संतुलन तथा असंतुलन, भुगतान शेष की स्वायत्त और समायोजक मदें, व्यापार शेष तथा भुगतान शेष, विदेशी विनिमय दर का अर्थ, विनिमय दर की प्रणाली, स्थिर विनिमय दर प्रणाली, नम्य विनिमय दर प्रणाली, विदेशी करेंसी की माँग, विदेशी करेंसी की पूर्ति, विनिमय की संतुलन दर का निर्धारण, विदेशी विनिमय बाज़ार, हाजिर बाज़ार और वायदा बाज़ार, प्रबंधित तरणशीलता.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थशास्त्र (2019-20 के लिए) स्वतंत्रता की पूर्व संध्या पर भारतीय अर्थशास्त्र. भारत की वर्तमान अर्थव्यवस्था की जड़ें ब्रिटिश शासन में है. भारत में ब्रिटिश शासन का आरंभ 1757 में प्लासी को लडाई में विजय के साथ हुआ और लगभग २०० वर्ष तक चला.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990 (2019-20 के लिए) भारतीय अर्थव्यवस्था 1950-1990 स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद भारतीय नेताओं के समक्ष पहली समस्या आर्थिक प्रणाली के बारे में निर्णय लेने की थी. पूंजीवाद और समाजवाद दोनों चरम विकल्प थे. इसलिए उन्होंने मिश्रित अर्थव्यवस्था प्रणाली का पालन करने का फैसला किया.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र उदारीकरण निजीकरण और वैश्वीकरण (2019-20 के लिए) उदारीकरण निजीकरण और वैश्वीकरण आर्थिक सुधार 1991 में शुरू हुए थे. स्वतंत्रता के समय से औद्योगिक विकास विनियमन अधिनियम के अंतर्गत सार्वजानिक क्षेत्र की प्रमुख भूमिका दी गयी.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र निर्धनता (2019-20 के लिए) निर्धनता एक सामाजिक-आर्थिक घटना है जिसमे समाज का एक वर्ग अपने जीवन की मूलभूत आवश्यकताएँ, जैसे-भोजन,वस्त्र, आवास शिक्षा और स्वास्थ्य भी पूरी करने में असमर्थ होता है.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र भारत में मानव पूँजी का निर्माण (2019-20 के लिए) भारत में मानव पूँजी का निर्माण शिक्षा और स्वास्थ्य दो प्रमुख कारकअ है जो एक काम का कौशल, दक्षता और उत्पादकता में वृद्धि करते हैं. मानव पूंजी निर्माण में योगदान करने वाले अन्य कारक है- जानकारी, प्रवास और कार्यस्थल पर प्रशिक्षण.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र ग्रामीण विकास (2019-20 के लिए) ग्रामीण विकास क्षेत्रों में कृषि मुख्य व्यवसाय है. स्वतंत्रता के समय से हमारी योजनायें ग्रामीण विकास को महत्व दे रही हैं और यह आज भी महत्वपूर्ण है. भारत को दो तिहाई जनसँख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रह रही है.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र रोजगार-संवृद्धि अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे (2019-20 के लिए) रोजगार-संवृद्धि अनौपचारीकरण एवं अन्य मुद्दे. हर परिवार को कम से कम एक कमाऊ सदस्य चाहिए जो जीविका कमाए. लोग तरह-तरह के काम करते हैं. लोग केवल धन के लिए काम नहीं करते बल्कि किसी भी काम से जुड़े रहना जीवन की सार्थकता की अनुभूति प्रदान करता है.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र आधारिक संरचना (2019-20 के लिए) आधारिक संरचना भारत में यह देखा गया है कि जिन राज्यों में बेहतर आधारिक संरचना है उन्होंने उन राज्यों से बेहतर प्रदर्शन किया है जहाँ आधारिक संरचना की स्थिति ख़राब है.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र पर्यावरण और धारणीय विकास (2019-20 के लिए) पर्यावरण और धारणीय विकास. पर्यावरण हमे वेह संसाधन उपलब्ध कराता है जिनके बिना हम एक अर्थव्यवस्था की कल्पना नहीं कर सकते. उपलब्ध संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं है.

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 अर्थशास्त्र भारत और पड़ोसी देशों के विकास अनुभव (2019-20 के लिए) भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव 1990 के दशक के बाद से ही भारत सहित विश्व के प्रत्येक देश में आर्थिक बदलाव आ रहे हैं जिसमे अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन निहितार्थ समाहित हैं.

CBSE Revision Notes for class 12 अर्थशास्त्र

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CBSE Class 12 अर्थशास्त्र Chapter-wise Revision Notes

व्यष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय

  • पाठ - 1 परिचय
  • पाठ - 2 उपभोक्ता के व्यवहार का सिद्धांत
  • पाठ - 3 उत्पादन तथा लागत
  • पाठ - 4 पूर्ण प्रतिस्पर्धा की स्थिति में फर्म का सिद्धांत
  • पाठ - 5 बाज़ार संतुलन
  • पाठ - 6 प्रतिस्पर्धारहित बाज़ार

समष्टि अर्थशास्त्र एक परिचय

  • पाठ - 1 परिचय
  • पाठ - 2 राष्ट्रीय आय का लेखांकन
  • पाठ - 3 मुद्रा और बैंकिंग
  • पाठ - 4 आय निर्धारण
  • पाठ - 5 सरकारी बजट एवं अर्थव्यवस्था
  • पाठ - 6 खुली अर्थव्यवस्था भुगतान संतुलन

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CBSE कक्षा 12 अर्थशास्त्र
पाठ - 1 परिचय

पुनरावृत्ति नोट्स


स्मरणीय बिन्दु-

  • मनुष्य की आवश्यकताएं उपलब्ध साधनों की तुलना में कहीं अधिक होती हैं।
  • यह संसाधनों की दुर्लभता को जन्म देता हैं। संसाधनों की दुर्लभता जीवन का एक ऐसा सत्य है जिसने अर्थशास्त्र को जन्म दिया है।
  • संसाधन केवल दुर्लभ नहीं होते, उनके वैकल्पिक प्रयोग भी होते हैं।
  • इससे चयन की समस्या उत्पन्न होती हैं। चयन की समस्या (Problem of choice) दुर्लभ संसाधनों के वैकल्पिक प्रयोगों के आबंटन से संबंधित हैं।

अर्थशास्त्र की परिभाषा

  • अर्थशास्त्र दुर्लभता की स्थिति में चयन से संबंधित व्यवहार का अध्ययन हैं।
  • दूसरे शब्दों में, अर्थशास्त्र एक विषय है, वस्तु है जो दुर्लभ संसाधन जिनके वैकल्पिक उपयोग हैं के विवेकशील प्रयोग पर केन्द्रित हैं जिससे आर्थिक कल्याण अधिकतम हों।

व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र

  • व्यष्टि अर्थशास्त्र- यह आर्थिक सिद्धान्त की वह शाखा हैं जिसके अन्तर्गत अर्थव्यवस्था की व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन किया जाता हैं। उदाहरण-व्यक्तिगत उपभोक्ता का संतुलन, उद्योग का संतुलन, व्यक्तिगत वस्तु या साधन का कीमत निर्धारण व्यक्तिगत माँग, एक फर्म का उत्पादन आदि।
  • प्रो. बोल्डिंग (Prof. Boulding) के अनुसार, "व्यष्टि अर्थशास्त्र व्यक्तिगत फर्म, व्यक्तिगत गृहस्थ, व्यक्तिगत कीमत, व्यक्तिगत आय, व्यक्तिगत उद्योगों व व्यक्तिगत वस्तुओं का अध्ययन करता है।" केन्द्रीय समस्याएँ-क्या उत्पादन किया जाए, कैसे उत्पादन किया जाये, किसके लिए उत्पादन किया जाए, की आर्थिक समस्या का समाधान व्यष्टि अर्थशास्त्र के अन्तर्गत किया जाता है।
    • व्यष्टि अर्थशास्त्र का क्षेत्र
      1. राष्ट्रीय आय
      2. उत्पादक व्यवहार
      3. कीमत निर्धारण
      4. कल्याण अर्थशास्त्र
      5. वितरण के सिद्धांत
  • समष्टि अर्थशास्त्र- यह आर्थिक सिद्धान्त की वह शाखा है जो संपूर्ण अर्थव्यवस्था का एक इकाई के रूप में अध्ययन करता है। उदाहरण-सामान्य कीमत का स्तर, रोजगार का स्तर, विभिन्न आर्थिक चरों का अंर्तसंबंध समग्र माँग, राष्ट्रीय आय आदि।
  • यदि व्यष्टि अर्थशास्त्र को वृक्ष कहा जाए तो समष्टि अर्थशास्त्र को वन कहा जा सकता है।
    • समष्टि अर्थशास्त्र का क्षेत्र
      • राष्ट्रीय आय
      • रोजगार मुद्रा
      • सामान्य कीमत स्तर
      • निर्धनता, मुद्रास्फीति, सरकारी बजट, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आदि

अर्थव्यवस्था के अर्थ-

  • अर्थव्यवस्था से आशय एक क्षेत्र की उन सब उत्पादन इकाइयों के समूह से है जिनमें लोग रोजी कमाते हैं।
  • प्रो. ब्राउन (Prof. Brown) के अनुसार, "अर्थव्यवस्था एक ऐसी प्रणाली है जो लोगों को जीविका प्रदान करती है।"
  • जब हम भारतीय अर्थव्यवस्था को संदर्भित करते हैं तो इससे अभिप्राय भारत की घरेलू सीमा में स्थित सभी उत्पादन इकाइयों के समूह से होता है जिनके द्वारा उत्पादन, उपभोग, निवेश, विनिमय, आदि की आर्थिक क्रियाएँ दिखती रहती हैं।

अर्थव्यवस्था की मूल क्रियाएँ-

  • उत्पादन
  • उपभोग
  • निवेश

आर्थिक समस्या-

  1. आर्थिक समस्या मूल रूप से चयन की समस्या है जो संसाधनों की दुर्लभता के कारण उत्पन्न होती है।
  2. चूंकि मानव आवश्यकताएँ असीमित होती हैं और उन्हें पूरा करने के साधन सीमित होते हैं इससे चुनाव की समस्या उत्पन्न होती है।
  3. प्रो. एरिक रोल (Prof. Erick Roll) के अनुसार, "आर्थिक समस्या निश्चित रूप से चयन की आवश्यकता से के दोहन की समस्या है।"

आर्थिक समस्या उत्पन्न होने के कारण-

  • मानव आवश्यकताएँ असंख्य हैं।
  • इन आवश्यकताओं की पूर्ति के साधन सीमित हैं।
  • संसाधनों के वैकल्पिक उपयोग हैं।

अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्याएँ-

  • क्या उत्पादन किया जाए? (वस्तुओं का चयन)
  • कैसे उत्पादन किया जाए? (तकनीक का चयन)
  • किसके लिए उत्पादन किया जाए? (वस्तुओं अथवा आय के वितरण की समस्या)
  • विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में केन्द्रीय समस्याओं का समाधान

बाज़ार अर्थव्यवस्था

  • बाज़ार अर्थव्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था होती है, जिसमें उत्पादन कारकों (Factors of production) पर निजी स्वामित्व होता है तथा उत्पादन लाभार्जन के उद्देश्य से किया जाता है।
  • ऐसी अर्थव्यवस्था में क्या उत्पादन किया जाए, कैसे उत्पादन किया जाए तथा किसके लिए उत्पादन किया जाए इन आर्थिक समस्याओं का समाधान मांग और पूर्ति की शक्तियों पर निर्भर करता है।

केन्द्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था

  • केन्द्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था एक ऐसी अर्थव्यवस्था होती हैं, जिसमें उत्पादन कारकों पर सरकार का स्वामित्व होता है तथा उत्पादन सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से किया जाता है।
  • ऐसी अर्थव्यवस्था में क्या उत्पादन किया जाए, कैसे उत्पादन किया जाए तथा किसके लिए उत्पादन किया जाए का निर्णय केन्द्रीय सत्ता द्वारा लिया जाता है।

मिश्रित अर्थव्यवस्था

  • मिश्रित अर्थव्यवस्था में, बाज़ार तथा केन्द्रीय योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था दोनों के गुण शामिल होते हैं। इसमें सरकारी व निजी क्षेत्र दोनों सहअस्तित्व रखते हैं। माँग एवं पूर्ति के बलों द्वारा लिये जाते हैं।
  • इसमें सरकारी क्षेत्र के निर्णय सरकारी/केन्द्रीय सत्ता द्वारा लिये जाते हैं, जबकि निजी क्षेत्र के निर्णय कीमत तंत्र अर्थात् माँग एवं पूर्ति के बलों द्वारा लिए जाते हैं।

उत्पादन संभावना वक्र/उत्पादन संभावना सीमा-

  • उत्पादन संभावना वक्र वह वक्र है जो दिए हुए संसाधनों तथा उत्पादन की तकनीक के आधार पर दो वस्तुओं के उत्पादन की वैकल्पिक संभावनाओं को प्रकट करता है।
  • इस उत्पादन सभावना सीमा भी कहा जाता हैं।
  • इसे रूपांतरण रेखा या रूपांतरण वक्र भी कहते हैं।
    उदाहरणः
    उत्पादन संभावना गेहूं (टन में) मशीनें (हज़ारों में) सीमान्त अवसर लागत
    A
    B
    C
    D
    E
    F
    150
    140
    120
    90
    50
    0
    0
    10
    20
    30
    40
    50
    -
    10:10
    20:10
    3:10
    4:10
    50:10
  • तालिका दर्शाती है कि यदि सभी संसाधनों को गेहूँ के उत्पादन में लगाया जाये तो 150 टन गेहूँ का उत्पादन हो सकता है।
  • यदि सभी संसाधनों की मशीनों के उत्पादन में लगाया जाये तो 50 हज़ार मशीनों का उत्पादन हो सकता हैं।
  • इनके मध्य में कई संभावनाएँ और भी हैं। इसे नीचे दिये गये वक्र द्वारा दर्शाया गया हैं।

उत्पादन संभावना की विशेषताएँ/आकार-

  • यह वक्र नीचे की ओर ढालू होता है।
    नीचे की ओर ढालू बायें से दायें होता है। इसका कारण यह है कि साधन सीमित होने के कारण यदि एक वस्तु का अधिक मात्रा में उत्पादन किया जाता है तो दूसरी वस्तु के उत्पादन की मात्रा में कमी करनी होती है।
  • यह वक्र नतोदर (Concave) होता हैं।
    मूल बिन्दु की ओर नतोदर होता है। इसका कारण बढ़ती हुई सीमांत अवसर लागत (MOC) है। अर्थात एक वस्तु का उत्पादन बढ़ाने के लिए दूसरी वस्तु की इकाइयों का त्याग बढ़ती दर पर करना पड़ता है।
  • उत्पादन सम्भावना वक्र का दायीं ओर खिसकाव संसाधनों में वृद्धि तथा तकनीकी प्रगति को दर्शाता है।
  • उत्पादन संभावना वक्र का बायीं ओर खिसकाव संसाधनों में कमी तथा तकनीकी अवनति को दर्शाता है।
  • उत्पादन सम्भावना वक्र उन सभी कारणों से दाई ओर खिसकेगा जिनसे अर्थव्यवस्था की उत्पादन क्षमता व संसाधनों की मात्रा तथा कुशलता में सुधार होता है।
  • सीमांत विस्थापन दर एक वस्तु की त्यागी जाने वाली इकाइयों तथा अन्य वस्तु की बढ़ाई गई एक अतिरिक्त इकाई का अनुपात है।
    MRT=ΔYΔXMRT=ΔYΔX
    सीमांत विस्थापन दर को सीमांत अवसर लागत भी कहते हैं क्योंकि वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई बढ़ाने के लिए दूसरी वस्तु की त्यागी गई इकाईयाँ ही अतिरिक्त लागत होती है।
  • जब MOC बढ़ती है तो PPF मूल बिन्दु के नतोदर होता है। जब MOC घटती है तो PPF मूल बिन्दु के उन्नतोदर होता है। जब MOC स्थिर होती है तो PPF ऋणात्मक ढ़ाल वाली एक सरल रेखा होती है।
  • एक अवसर का चयन करने पर दूसरे सर्वश्रेष्ठ अवसर का किया गया त्याग अवसर लागत कहलाता है। इसे सर्वश्रेष्ठ विकल्प की लागत भी कहा जाता है।
  • उत्पादन संभावना सीमा (PPF) दो वस्तुओं के उन सभी संयोगों को दर्शाता है जिनका उत्पादन एक अर्थव्यवस्था अपने दिए हुए संसाधनों तथा तकनीकी स्तर का प्रयोग करके कर सकती है, यह मानते हुए कि सभी संसाधनों का पूर्ण एवं कुशलतम उपयोग हो रहा है।
  • संसाधनों के मितव्ययी प्रयोग से अभिप्राय संसाधनों के सर्वश्रेष्ठ व कुशलतम प्रयोग से है।

उत्पादन संभावना वक्र में खिसकाव (Shift in PPC) तथा इसके बिन्दु-

  • दाई ओर खिसकाव के कारण-
    1. संसाधन में वृद्धि
    2. तकनीकी प्रगति
    3. कौशल भारत अभियान (प्रशिक्षण)
    4. सर्व शिक्षा अभियान (शिक्षा)
    5. स्वच्छ भारत अभियान (स्वास्थ्य)
    6. योगा प्रसार योजनाएँ (स्वास्थ्य)
    7. बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं (शिक्षा)
    8. भारत में बनाइए (निवेश)
    9. विदेशी पूँजी में वृद्धि (विदेशी निवेश)
  • बाई ओर खिसकाव के कारण-
    1. संसाधनों में कमी
    2. तकनीकी अवनीति
    3. प्राकृतिक आपदा (बाढ़, भूकंप, सुनामी, सुखा आदि)
    4. सामाजिक कुरीतियाँ
    5. प्रवास
    6. युद्ध
    7. आतंकवाद
  • PPC में कोई परिवर्तन नहीं-
    1. संसाधनों का स्थनांतरण
    2. बेरोजगारी उन्मूलन कार्यक्रम

सकारात्मक तथा आदर्शात्मक आर्थिक विश्लेष्ण

  • सकारात्मक (वास्तविक) आर्थिक विश्लेषण: इसको अन्तर्गत यथार्थ (वास्तविकता) का अध्ययन किया जाता है। इसमें क्या था? क्या है? जैसे वास्तविक कथनों का विश्लेषण सत्यता के आधार पर किया जाता है। उदाहरण के लिए भारत की जनसंख्या 1951 में कितनी थी? वर्तमान में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या कितनी है। इन कथनों की जाँच संभव होती है।
  • आदर्शात्मक आर्थिक विश्लेषण: इसमें 'क्या होना चाहिए' से सम्बन्धित विश्लेषण किया जाता है। इसमें आदर्शात्मक परिस्थितियों का अध्ययन किया जाता है। इसकी प्रकृति सुझाव देने की है। उदाहरण के लिए भारत में आय व धन की असमानताओं को कम करने के लिए सरकार को अमीर लोगों पर अधिक कर लगाने चाहिए, गरीबों को आर्थिक सहायता देनी चाहिए। इन कथनों की जाँच संभव नहीं होती।



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