CBSE - Class 11 - व्यवसाय अध्ययन - पुनरावृति नोट्स

पुनरावृति नोट्स for Class 11 व्यवसाय अध्ययन

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन व्यवसाय की प्रकृति एवं उद्देश्य व्यवसाय शब्द की व्युत्पत्ति व्यस्त रहने से हुई है। अतः व्यवसाय का अर्थ व्यस्त रहना है, तथापि विशेष सदंर्भ में, व्यवसाय का अर्थ ऐसे किसी भी धंधे से है, जिसमें लाभार्जन हेतु व्यक्ति विभिन्न प्रकार की क्रियाओं में नियमित रूप से संलग्न रहते हैं। वे क्रियाएँ अन्य लोगों की आवश्यकताओं की संतुष्टि हेतु वस्तुओं वेफ उत्पादन, क्रय-विक्रय या विनिमय और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित हो सकती हंै।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन व्यवसायिक संगठन के प्रारूप पूर्ण स्वामित्व वाले प्रतिष्ठान, साझेदारी प्रतिष्ठान, सीमित देयता साझेदारी (एलएलपी), प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी. एक व्यापार संगठन व्यापार गतिविधियों, धर्मार्थ कार्य, या अन्य गतिविधियों में संलग्न होने के लिये गठन किया है। व्यापार संस्थाओं एक उत्पाद या सेवा को बेचने के लिए बनते हैं। वहाँ विभिन्न देशों की कानूनी व्यवस्था में परिभाषित व्यावसायिक संस्थाओं के कई प्रकार हैं। इन निगमों, सहकारी समितियों, भागीदारी, एकल व्यापारी, सीमित देयता कंपनी और अन्य शामिल हैं।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन निजी सार्वजनिक एवं भूमंडलीय उपक्रम निजी, सार्वजनिक एवं भूमंडलीय उपक्रम notes and papers for class 11 Business studies in Hindi. निजी क्षेत्र की स्थापना निजी स्वामित्व के रुप में होती हैं इस क्षेत्र के उपक्रमों को निजी कहने का अभिप्राय यह हैं की इन पर स्वामित्व पूर्णत निजी लोगो का होता हैं और किसी भी राज्य या केंद्रीय सरकार का स्वामित्व के दृष्टिकोण से कोई हस्तक्षेप नहीं होता |  सार्वजनिक अथवा राजकीय उपक्रमों का अभिप्राय ऐसे उपक्रमों से है जो सरकार द्वारा स्थापित किये जाते हैं और जिनका स्वामित्व व प्रबंध भी सरकार के हाथों में होता है अत : केवल उन सरकारी संस्थाओं को ही सार्वजनिक उपक्रम कहा जाता है जो आर्थिक अथवा व्यवसायिक क्रियाएँ करती है | सार्वजनिक एवंम निजी क्षेत्र के मध्य साझेदारी के रूप में चलाए जाने वाले व्यवसाय इस क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन व्यावसायिक सेवाएं व्यावसायिक सेवाएं 1. बैंकिंग सेवाएँ, ​​​​​​​3. बीमा, 4. संप्रेषण सेवाएँ, 5. भंडारण. Class 11 Business Studies question papers and notes in Hindi medium. व्यवसायिक सेवाएँ वो सेवाएँ होती है जिन्हें व्यवसायिक उद्यम या व्यवसायिक संगठन अपनें व्यवसायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयोग करती है |

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन ई-बिजनेस एवं सेवाओं का ब्राह्मकरण ई-बिजनेस एवं सेवाओं का ब्राह्मकरण notes and papers for class 11 Business studies in Hindi Medium. किसी विशिष्ट व्यावसायिक कार्य, जैसे वेतन चिट् को किसी अन्य सेवा प्रदाता को सौंपने के लिए अनुबंध करना, व्यवसाय प्रक्रिया बाह्यस्रोतीकरण कहलाता है। सामान्यतया एक कंपनी किसी कार्य पर अपनी लागतें बचाने के लिए को कार्यान्वित करती है, परन्तु यह कंपनी की बाजार स्थिति बनाए रखने पर निर्भर नहीं करता। ठच्व् के लाभ हैं: लागत में कमी, मुख्य व्यवसाय पर ध्यान केन्द्रण, बाह्य विशेषज्ञता आदि।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन सामजिक उत्तदायित्व एवं व्यावसायिक नैतिकता सामजिक उत्तदायित्व एवं व्यावसायिक नैतिकता class 11 Business studies notes and papers in Hindi. व्यापारिक नैतिकता व्यावहारिक नीतिशास्त्र की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत किसी व्यापार प्रतिष्ठान या कॉर्पोरेट प्रतिष्ठान के व्यापारिक कार्यकलापों, प्रक्रियाओं, निर्णयों तथा अपने कर्मचारियों एवं उपभोक्ताओं से संबंधों का नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों के धरातल पर मूल्यांकन तथा उनसे जुड़े विभिन्न नैतिक मुद्दों का अध्ययन किया जाता है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन व्यावसायिक वित्त के स्त्रोत व्यावसायिक वित्त के स्त्रोत वित्त के स्त्रोत अर्थात धन प्राप्ति के स्त्रोत व्यवसाय में 2 बतलाये गये हैं- व्यापारी की खुद की पूंजी जिससे वह व्यापार करता है। एवं लाभ-हानि स्वयं पाता हैं उस लाभ हानि एक एक भाग अपने पास रखकर एक भाग व्यापार मे पूर्व: लगा देता है आन्तरिक स्त्रोत के अन्तर्गत आता है। बाह्य स्त्रोत के अन्तर्गत साहूकार बैंक, ग्राहक, विक्रेता, वित्तीय संस्थाएँ आदि से ऋर्ण लेकर व्यापार करना बाह्य स्त्रोत के अन्तर्गत आता है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन लघु व्यवसाय लघु उद्योग (छोटे पैमाने की औद्योगिक इकाइयाँ/small scale industry) वे होती है जो मध्यम स्तर के विनियोग की सहायता से उत्पादन प्रारम्भ करती हैं। इन इकाइयों मे श्रम शक्ति की मात्रा भी कम होती है और सापेक्षिक रूप से वस्तुओं एवं सेवाओं का कम मात्रा में उत्पादान किया जाता है। ये बड़े पैमाने के उद्योगो से पूंजी की मात्रा, रोजगार, उत्पादन एवं प्रबन्ध, आगतों एवं निर्गतो के प्रवाह इत्यादि की दृष्टि से भिन्न प्रकार की होती है। ये कुटीर उद्योगों से भी इन आधारों पर भिन्न होती हैं- उत्पादन में यंत्रीकरण की मात्रा, मजदूरी पर लगाये गये श्रमिकों एवं परिवारिक श्रमिकों के अनुपात, बाजार का भौगोलिक आकार, विनियोजित पूंजी इत्यादि।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन आंतरिक व्यापार आंतरिक व्यापार से तात्पर्य उस व्यापार से है, जिसमें एक देश की सीमा के भीतर रहकर क्रेता एवं विक्रेता वस्तुओं का क्रय-विक्रय करते हैं अर्थात् एक देश के निवासी अपन ही देश में वस्तु का क्रय-विक्रय करते है इसे देशी व्यापार भी कहा जाता है। वस्तुओं का क्रय एवं विक्रय व्यापारिक क्रिया का एक मुख्य अंग है व्यापार की सफलता वस्तुओं की क्रय विक्रय प्रणाली पर निर्भर है प्रत्येक व्यापारी को कच्चा माल या तैयार माल क्रय करने तथा बेचने के सौदे प्रतिदिन करना पड़ते है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 11 व्यवसाय अध्ययन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रों के आर-पार पूंजी, माल और सेवाओं का आदान-प्रदान है।. अधिकांश देशों में, यह सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के महत्त्वपूर्ण अंश का प्रतिनिधित्व करता है। जबकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, इतिहास के अधिकांश भाग में मौजूद रहा है (देखें सिल्क रोड, एम्बर रोड) इसका आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक महत्व हाल की सदियों में बढ़ने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था पर औद्योगीकरण, उन्नत परिवहन, वैश्वीकरण, बहुराष्ट्रीय निगम और बाह्यस्रोत से कार्यनिष्पादन, इन सभी का व्यापक प्रभाव पड़ता है। वैश्वीकरण की निरंतरता के लिए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बढ़ोतरी महत्त्वपूर्ण है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के बिना, देश सिर्फ़ अपनी खुद की सीमा के भीतर उत्पादित माल और सेवाओं तक सीमित रह जाएंगे.



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