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CBSE - Class 11 - भूगोल

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विडियो भूगोल का महत्व-भूगोल विविधता समझने तथा समय एवं स्थान के संदर्भ में ऐसी विभिन्नताओं को उत्पन्न करने वाले कारकों की खोज करने की क्षमता प्रदान करता है। इससे मानचित्र में परिवर्तित गोलक को समझने तथा धरातल, विश्व की मृदा, खनिज संपदा, मौसम, जलवायु, जनसंख्या, यातायात और संचार के साधन तथा स्थानीय परिदृश्यों के बारे में जानकारी मिलती है। इसके अतिरिक्त पर्वत, पठार, मैदान, रेगिस्तान, समुद्र, झील, पर्यावरण और सांस्कृतिक तथ्यों के बारे में भी जानकारी मिलती है।

विडियो फ्री में डाउनलोड करे और समझिये बेहतर तरीके से. की उत्पत्ति एवं विकास. जिस पृथ्वी पर हम सभी निवास करते है और जहाँ समस्त जीव-निर्जीव का निवास स्थान है उस पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई? यह प्रश्न वैज्ञानिकों के लिए सदा से चिन्तन का विषय रहा। यह अध्याय पृथ्वी ही नही वरन् ब्रह्मांड की एवं इसके सभी खगोलीय पिंडो की निर्माण प्रक्रिया का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत करता है।इस अध्याय को प्रश्नों के माध्यम से जानना एक नया अनुभव होगा।

विडियो फ्री डाउनलोड पृथ्वी की आंतरिक संरचना. पृथ्वी की आन्तरिक संरचना को समझने में जिन श्रोतों की भूमिका प्रमुख है उनको हम दो भागों में विभाजित कर सकते है।खनन क्रिया से हमें पता चलता है कि पृथ्वी के धरातल में गहराई बढ़ने के साथ-साथ तापमान एवं दबाव में वृद्धि होती है।

विडियो महासागरों और महाद्वीपों का वितरण. पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद आज से लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले महाद्वीपों एवं महासागरों का निर्माण हुआ। किन्तु ये महाद्वीप एवं महासागर जिस रूप में आज है उस रूप में पहले नही थे कई वैज्ञानिको ने समय-समय पर यह प्रमाणित करने का प्रयास किया कि निर्माण के आरम्भिक दौर में महाद्वीप इकट्ठे थे।

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विडियो खनिज एवं शैल. पृथ्वी की संपूर्ण पर्पटी का लगभग 98 प्रतिशत भाग आठ तत्वों, जैसे-ऑक्सीजन, सिलिकन, कैल्शियम, लोहा, सोडियम, पोटैशियम तथा मैग्नीशियम से बना है तथा शेष भाग टायटेनियम, हाइड्रोजन, फॉस्फोरस, मैंगनीज, सल्फर, कार्बन, निकिल एवं अन्य पदार्थों से बना है।

विडियो भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ. धरातल पर दिखायी देने वाली समस्त भू आकृतियाँ दो प्रकार के बलों से बनती है वहिर्जनित बल एवं अंतर्जनित बल से। अंतर्जनित शक्तियां धरातल को उठाती रहती है और बाहयशक्तियां लगातार उन्हें समतल करती रहती है।

विडियो भू-आकृतियाँ तथा उनका विकास. पृथ्वी के धरातल के निर्माण में अपरदन के कारको का बहुत बड़ा योगदान होता है। इन अपरदन के कारकों में नदियां पवने, हिमानी तथा लहरे आदि है। ये भूतल की चट्टानों को तोड़ते है। उनसे प्राप्त अवसादों को लेकर चलते है एवं अन्य कही निक्षेपित कर देते है। इन प्रक्रियाओं से धरातल पर कई प्रकार की भू आकृतियों का निर्माण होता है।

विडियो वायुमंडल का संघटन तथा संरचना. पृथ्वी के चारों और वायु के आवरण को वायुमण्डल कहते है। यह वायु का आवरण पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण पृथ्वी के चारों तरफ कम्बल के रूप में चिपका हुआ है तथा पृथ्वी का एक अभिन्न अंग है। पृथ्वी पर जीवन इसी वायुमण्डल के कारण ही सम्भव है। जीवित रहने के लिए वायु सभी जीवों के लिए आवश्यक है। वायुमण्डल का 99 प्रतिशत भाग भू पृष्ठ से 32 किलोमीटर की ऊचाई तक सीमित है।

विडियो सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन एवं तापमान. पृथ्वी सतह पर ऊर्जा का प्रमुख स्त्रेत सूर्य है। सूर्य अत्याधिक गर्म गैस का पिण्ड है जिसके पृष्ठ का तापमान 6000०C है। यह गैसीय पिण्ड निरन्तर अन्तरिक्ष में चारों और ऊष्मा का विकिरण करता है जिसे और विकिरण कहते है। सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली विकिरण को सूर्यातप कहते है। यह ऊर्जा लघु तरंगो के रूप में सूर्य से पृथ्वी पर पहुँचती है। पृथ्वी औसत रूप से वायुमण्डल की ऊपरी सतह पर 1.94 कैलोरी/प्रति वर्ग सेंटीमीटर प्रति मिनट ऊर्जा प्राप्त करती है। इसे सौर सिथरांक कहते है।

विडियो कक्षा ११ भूगोल वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ. वायु गर्म होने पर फैलती है और ठंडी होने पर सिकुड़ती है। इससे वायुमंडलीय दाब में भिन्नता आती है। इसके परिणामस्वरूप वायु गतिमान होकर अधिक दाब वाले क्षेत्रों से न्यून दाब वाले क्षेत्रों में प्रवाहित होती है।

विडियो वायुमंडल में जल. आर्द्रता जलवायु तथा मौसम का एक महत्वपूर्ण तत्व है। वायुमण्डल में विद्यमान अदृश्य जलवाष्प की मात्र को आर्द्रता कहते है। आर्द्रता को प्रकट करने की तीन विधियां है:-निरपेक्ष आर्द्रता, विशिष्ट आर्द्रता और सापेक्ष आर्द्रता। शत प्रतिशत सापेक्ष आर्द्रता वाली वायु संतृप्त होती है। वायु जिस तापमान पर संतृप्त हो जाती है, उसे ओसांक कहते है। जब कुल ऊष्मा के घटे बिना ही केवल ऊपर उठने और पफ़ैलने से वायु के तापमान में परिवर्तन हो जाता है तो उसे रूदोष्म ताप परिवर्तन कहते है।

विडियो फ्री डाउनलोड विश्व की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन. जलवायु वर्गीकरण के तीन आधार है। आनुभाविक जननिक तथा व्यावहारिक या क्रियात्मक। कोपेन का जलवायु वर्गीकरण जननिक और आनुभाविक है। थार्नथ्वर्ट ने वर्षण प्रभाविता, तापीय दक्षता और संभाव्य वाष्पोत्सर्जन को अपने जलवायु वर्गीकरण का आधार बनाया।

विडियो महासागरीय जल. जल के बिना जीवन सम्भव नही है। पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीवों के लिए जल एक आवश्यक घटक है। पृथ्वी पर जल का सबसे बड़ा रूप महासागर के रूप में है। इस अध्याय में हम महासागरीय तापमान व लवणता के क्षैतिज व लम्बवत् वितरण, इनके कारक व इनके प्रभावों के विषय में अध्ययन करेगे।

विडियो महासागरीय जल संचलन. महासागर का जल कभी शान्त नही रहता यह सदैव गतिमान है जिससे जल में हलचल होती रहती है। हलचल से जल का परिसंचरण होता है जिनसे तंरगो, धाराओ, ज्वार भाटाओं का निर्माण होता है जिनके द्वारा मानवीय जीवन विभिन्न रूपों से प्रभावित होता है इस अध्याय में हम इन्ही तथ्यों का अध्ययन करेंगे।

विडियो पृथ्वी पर जीवन. सभी पौधों, जंतुओ, प्राणियों (जिसमें पृथ्वी पर रहने वाले सूक्ष्म जीव भी हैं) और उनके चारों तरफ के पर्यावरण के पारस्परिक अंतर्संबंधन से जैवमंडल बना है। जैवमंडल और इसके घटक पर्यावरण के बहुत महत्त्वपूर्ण तत्व हैं।

विडियो जैव-विविधता एवं संरक्षण. आज जो जैव-विविधता हम देखते है, वह 2.5 से 3.5 अरब वर्ष के विकास का परिणाम है। मानव के आने से जैव-विविधता में तेजी से कमी आने लगी, क्योंकि किसी एक या अन्य प्रजाति का आवश्यकता से अधिक उपयोग होने के कारण, वह लुप्त होने लगती है।

विडियो भारत - स्थिति. भारत 8 अंश 4’ उत्तरी अंक्षाश से 37 अंश 6’ उत्तरी अंक्षाश तथा 68 अंश 7’ पूर्वी देशान्तर से 97 अंश 25’ पूर्वी देशान्तर तक फैला हुआ है। भारत का अंक्षाशीय तथा देशान्तरीय विस्तार लगभग 30 अंश है। 6 अंश 45’ उत्तरी अक्षांश पर स्थित इन्दिरा पाइंट भारत का दक्षिणतम बिन्दु है। 82 अंश 30’ पूर्व याम्योत्तर को भारत का मानक याम्योत्तर चुना गया है।

विडियो संरचना तथा भूआकृति विज्ञान. प्रायद्वीपीय मुख्यतः प्राचीन नाइस व ग्रेनाईन से बना है जो कैम्ब्रियन कल्प से एक कठोर खंड के रूप में खड़ा है। हिमालय और अन्य अतिरिक्त - प्रायद्वीपीय पर्वत मालाओं की भूवैज्ञानिक संरचना तरूण दुर्बल और लचीली है।

विडियो अपवाह तंत्र. निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह को अपवाह कहते है।इन वाहिकाओं के जाल को अपवाह तंत्र कहते है। किसी क्षेत्र का अपवाह तंत्र वहां के भूवैज्ञानिक समयावधि, चट्टानों की प्रकृति एवं संरचना, स्थलाकृति, ढाल बहते जलकी मात्र और बहाव की अवधि का परिणाम है

विडियो फ्री डाउनलोड जलवायुजलवायु. भारत एक उष्ण मानसूनी जलवायु वाला देश है भारत की अन्य विशेषताओं की तरह इस देश की जलवायु में भी एक रूपता एवं विविधता पायी जाती है। भारत के उत्तर से लेकर दक्षिण तक के सभी राज्यों में मानसूनी प्रकार की है जो इसके एकरूप जलवायु को दर्शाते है वही दूसरी तरफ तापमान, वर्षा एवं पवनों में प्रादेशिक विविधता भी चरम पर पायी जाती है उदाहरण के लिये भारत में एक तरफ विश्व को सर्वाधिक वर्षा का क्षेत्र मासिनरम है। तो दूसरी तरफ जैसलमेर है जहां वर्षा बहुत ही कम होती है। इसी तरह कारगिल जैसा ठंडा प्रदेश है तो राजस्थान का चुरू जैसा गर्म प्रदेश है।

विडियो फ्री डाउनलोड प्राकृतिक वनस्पति में वह पौधे सम्मिलित किए जाते है, जो मानव की प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष सहायता के बिना उगते है और अपने आकार संरचना तथा अपनी आवश्यकताओं को प्राकृतिक पर्यावरण के अनुसार ढाल लेते है।

विडियो फ्री डाउनलोड मृदा में भिन्नता पैदा करने वाले कारक जनक सामग्री, उच्चावच, जलवायु और प्राकृतिक वनस्पति, मिट्टी के उपजाऊपन व मोटाई पर जनसंख्या का आकार एवं उसकी समृद्धि निर्भर करती है। मिट्टी के निर्माणकारी घटकों की विभिन्नता के कारण भारत में भिन्न-भिन्न प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। भारत में मुख्यतः जलोढ़ काली, लाल, लेटराइट पर्वतीय और मरूस्थली मिट्टिया पायी जाती हैं।

विडियो कक्षा ११ भूगोल प्राकृतिक संकट तथा आपदाएँ. प्रकृति और मानव का आपस में गहरा सम्बन्ध है। प्रकृति ने मानव जीवन को बहुत अधिक प्रभावित किया है। जो प्रकृति हमें सब कुछ प्रदान करके खुशियां देती है कभी-कभी उसी का विकराल रूप हमें दुखी कर देता है। धरती का धसंना, पहाड़ों का खिसकना, सूखा, बाढ, बादलफटना, चक्रवात, ज्वालामुखी विस्फोट, भूकम्प, समुद्री तूफान, सूनामी, आकाल आदि अनेक प्राकृतिक आपदाओं से मनुष्य को समय-समय पर हानि उठानी पड़ी है।



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