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CBSE - Class 11 - राजनीति विज्ञान

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विडियो संविधान क्यों और कैसे. संविधान, सरकार, समूह, न्यायालय व अन्य संगठनों के बीच सामंजस्य, विश्वास व तालमेल बिठाता है। सैद्धान्तिक रूप से निर्णय का माध्यम, शक्तियों पर प्रतिबन्ध व आकांक्षाओं तथा लक्ष्यों को पूरा करना इसका उद्देश्य है। अराजकता को रोकता है।

विडियो भारतीय संविधान में अधिकार.व्यक्ति के व्यक्तिगत विकास हेतअधिकारों की आवश्यकता होती है। ये भारतीय संविधान के भाग तीन में मौलिक अधिकारों के रूप में भारतीय नागरिकों को प्राप्त है। संविधान द्वारा प्रदत्त और संरक्षित अधिकारों की सूची को ‘अधिकारों का घोषणा पत्र’ कहते हैं जिसकी मांग 1928 में नेहरू जी ने उठाई थी।

विडियो चुनाव और प्रतिनिधित्व शासन में प्रत्यक्ष रूप से लोगों की भागीदारी सर्वोत्तम शासन व्यवस्था का आधार है। परन्तु जनसंख्या वृद्धि तथा राज्य का आकार विशाल होने की वजह से जनता प्रत्यक्ष रूप से सरकार के कार्यो में भाग नही ले सकती। इसीलिए प्रतिनिधी लोकतंत्र को शासन का आधार बनाया गया है। इसी के साथ प्राचीन यूनान के नगर राज्य प्रत्यक्ष लोकतंत्र के उदाहरण है।

विडियो कार्यपालिका अर्द्ध-अध्यक्षात्मक व्यवस्था में राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री दोनों होते हैं इस व्यवस्था में राष्ट्रपति को महत्वपूर्ण शक्तियाँ प्राप्त है। कभी-कभी ये दोनों एक दल के या विरोधी दल के भी हो सकते हैं जिनमें विरोध हो सकता है।

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विडियो विधायिका लोकतंत्रीय शासन में विधायिका का महत्व बहुत अधिक होता है। भारत में संसदीय शासन प्रणाली अपनायी गयी है जो कि बिट्रिश प्रणाली पर आधारित है। सरकार के तीन अंग होते है विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका। विधायिका का चुनाव जनता द्वारा होता है। इसलिए यह जनता का प्रतिनिधि बनकर कानून का निर्माण करती है। इसकी बहस, विरोध, प्रर्दशन, बहिर्गमन, सर्वसम्मति, सरोकार और सहयोग आदि अत्यंत जीवंत बनाय रखती है।

विडियो न्यायपालिका न्यायपालिका देश की लोकतांत्रिक राजनीतिक संरचना का एक हिस्सा है। न्यायपालिका देश के संविधान, लोकतांत्रिक परंपरा और जनता को प्रति जवाब देह है।

विडियो संघवाद ऐतिहासिक दृष्टिकोण:- भारत में संघवाद इसकी संवैधानिक विकास की प्रक्रिया की उपज है। जिसने एक केन्द्रीभूत राज्य व्यवस्था का धीरे-धीरे विकेन्द्रित व्यवस्था में परिवर्तन कर दिया। भारत में संघवाद का सूत्रपात सन् 1861 में होता है।

विडियो स्थानीय शासन लोकतंत्र के लिए न केवल केन्द्रीय और राज्य स्तर पर बल्कि स्थानीय स्तर पर भी सत्ता का विकेन्द्रीकरण आवश्यक है। सरकार का कार्यभार कम होता है उनके समय व शक्ति की बचत होती है।

विडियो संविधान का राजनीतिक दर्शन. संविधान के दर्शन से आशय संविधान में उल्लेखनीय देश के मूल्य व आदर्शो से है जैसे भारतीय संविधान स्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र, समाजिक न्याय आदि के लिए प्रतिबद्ध है। इस सबके साथ उसके दर्शन को शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक तरीके से अमल किया जाये। भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता, अल्प संख्यकों के अधिकारों का सम्मान, धार्मिक समूहों के अधिकार सार्वभौम मताधिकार, संघवाद आदि का भी समावेश हुआ है संविधान के दर्शन का सर्वोत्तम सार-संक्षेप संविधान की प्रस्तावना में वर्णित है।

विडियो स्वतंत्रता का अर्थ व्यक्ति की आत्म अभिव्यक्ति की योग्यता का विस्तार करना तथा ऐसी परिस्थितियों का होना है जिसमे लोग अपनी प्रतिभा का विकास कर सके। बीसवीं शताब्दी में महात्मा गांधी, नेल्सन मण्डेला तथा आँग सान सू की आदि व्यक्तियों ने शासन की भेदभाव (अलगाव) वाली नीतियों का विरोध कर स्वतंत्रता को अपने जीवन का आदर्श बनाया।

विडियो समानता 18 वीं शताब्दी में फ्रांस में जनता ने भू-सामन्तों, विशेष वर्ग (अभिजात्य वर्ग) और राजशाही से विद्रोह करके स्वतंत्रता, समानता व भाईचारे का नारा दिया।समानता - विशेषाधिकारों का अभाव + सबको विकास के समान अवसर व्यक्तियों को जाति, धर्म, रंग, वंश, लिंग तथा जन्मस्थान आदि के आधार पर भेदभाव के बिना विकास के समान अवसरों की प्राप्ति।

विडियो सामाजिक न्याय प्राचीन काल से भारत तथा चीन के विद्वानों ने न्याय की व्याख्या अपनी व्यवस्था के अनुसार की। यूनान के दार्शनिक प्लैटो ने अपनी पुस्तक रिपब्लिक में न्याय के सिद्धान्त पर अपने विचार दिये।

विडियो अधिकार मध्यकाल में यूरोप में मनुष्य को अपने बारे में सोचने व निर्णय लेने की छूट नही थी। वह चर्च और सामन्तों आदेशानुसार ही काम करने के लिए बाध्य था। आधुनिक काल में मानवतावादी तथा उदारवादी विचारधारा के विकास के साथ अधिकारों की अवधारणा विकसित हुई और मनुष्य के साथ गरिमामय बर्ताव (नैतिकता से पेश आना) की बात कहीं जाने लगी और 10 दिसम्बर 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को लागू किया जो अधिकार मानव होने के नाते मिलने चाहिए।

विडियो नागरिकता जो व्यक्ति राज्य का सदस्य हों और जिसे राज्य की और से कुछ अधिकार मिले हो तथा राज्य के प्रति कुछ उत्तरदायित्च भी रखता हो। किसी राज्य अथवा देश की पूर्ण सदस्यता ही नागरिकता कहलाती है।

विडियो राष्ट्रवाद एक ऐसी भावना है जो मन में देश या राष्ट्र के प्रति भक्ति और निष्ठा का उफान लाती है। राष्ट्र किसी सीमा तक एक काल्पनिक समुदाय होता है, जो अपने नागरिकों के सामूहिक विश्वास, आकांक्षाओं, कल्पनाओं की सहायता से एक सूत्र से जुड़ा होता है।

विडियो धर्मनिरपेक्षता. आज के दौर में धर्मनिरपेक्षता का सिद्धान्त सभी समाजों में स्वीकार्य है। इसके अनुसार धर्म को व्यक्तिगत मामला माना गया है। राज्य इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करता। राज्य द्वारा सभी धर्मो को आदर देना तथा धर्म प्रभावी समूहों को राजनीति व सत्ता से स्वतंत्र व अलग रखना पंथनिरपेक्षता कहलाता है।

विडियो शांति. पारस्परिक सहयोग की स्थिति का होना तथा युद्ध की अनुपस्थिति को शांति के रूप में लिया जाता है। प्रथम तथा द्वितीय विश्व युद्ध की त्रासदी झेल चुके विश्व के देशों ने आपसी संबंधो में मैत्रीपूर्ण प्रयास को स्थान दिया।

विडियो उन्नति, प्रगति, कल्याण और बेहतर जीवन की अभिलाषा - विकास है. विकास की दृष्टि से विश्व को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। विकसित देश, विकाशसील देश अल्पविकसित देश। वर्तमान भौतिकवादी युग में व्यक्ति था समाज के विकास का अर्थ आर्थिक विकास से लिया जाता है।



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