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Myasha Raway 1 day, 23 hours ago

Harappa ke log murti pujja karte the
Harappa ke log Matradevi ki puja krte the...
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Abhishek Gaur 4 days, 3 hours ago

Ncert book ka topic 2nd nirvha ke tarike
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Abhishek Gaur 4 days, 3 hours ago

Apna prabutav bnay rkhane ke liye
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Deepak Meena Meena 5 days, 20 hours ago

1. अंग्रेज़ विद्रोइयो को अहसानफरामोश ओर बर्बर कहकर पुकारते थे,
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Nikil Jatav 1 week, 2 days ago

Only point in answer

Nikil Jatav 1 week, 2 days ago

उत्तरः- 1. केन्द्रीय शासन -राजा का नियंत्रण विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, सेना तथा वित्त पर था । 2. प्रांतीय शासन -प्रांतीय शासन कई प्रांतों में बांट दिया गया था। 3. स्थानीय शासन -पाटलीपुत्र नगर का शासन 30 सदस्यों के एक आयोग द्वारा किया जाता था। 4. राजा साम्राज्य को उच्च अधिकारियों की सहायता से चलाता था । 5. मौर्य साम्राज्य के पाँच प्रमुख राजनैतिक केंद्र 6. कानून और व्यवस्था 7. संगठित सेना -मेगस्थनीज ने सैनिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक समिति और छः उपसमितियों का उल्लेख किया है । 8. धम्म प्रचार के लिए धम्म महामात्त की नियुक्ति । 9. भूमिकर, सिंचाई और सड़कों के प्रबंध के लिए विभिन्न् अधिकारी होते थे। 10. गुप्तचर विभाग -गुप्तचर विभाग बहुत सुदृढ़ था।

Santosh Mishra 1 week, 1 day ago

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Deepak Meena Meena 5 days, 20 hours ago

क्युकी युद्ध के समय अनाज, ओर खाद्य सामग्री की रक्षा की जा सके अन्नागार भी इसलिए बनाए गए थे ताकि लंबे समय तक अनाज को सुरक्षित रखा जा सके। लाभ 1. खाद्य सामग्री को शत्रुओं से बचाना। 2.शत्रु पक्ष को खाद्य सामग्री से वचित करके, युद्ध जीतना। नुकसान 1. किलेबंदी के भीतर रखने से maal की आवाजाही में रुकावट। विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने कृषि भूभाग को बचाने के लिए अधिक व्यापक नीति अपनाई थी। 🌍🌍🌍🌍🌍🌍🌍🌍
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Nitin Kumar 1 week, 3 days ago

Shityudh se abhipraye aisi sthatiti se h jisme yudh hone ki puri sambhavna hoti h parantu yudh nhi hota....
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Deepak Meena Meena 5 days, 20 hours ago

वाजिद अली शाह के पुत्र विजरिस कद्र, ओर उनकी माता जीनत महल
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Abhishek Gaur 4 days, 3 hours ago

?????
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Abhishek Gaur 4 days, 3 hours ago

सुदर्शन झील का निर्माण मौर्य काल में एक स्थानीय राज्यपाल के द्वारा किया गया इसका ज्ञान हमें शक शासक रुद्रदमन के पाषाण अभिलेख से हुआ

Upasana Tiwari 5 days, 21 hours ago

Sudhershan jhil Gujraaat me hai. Eska nirman sak ke Raja ne kiya tha.
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Gaurav Seth 3 weeks ago

हड़प्पा सभ्यता की खोज जॉन मार्शल के नेतृत्व में दयाराम साहनी द्वारा सन् 1921 में की गई 
जॉन मार्शल 1902 से 1928 तक ASI के महानिदेशक थे। वास्तव में, ASI के महानिदेशक के रूप में जॉन मार्शल के कार्यकाल ने भारतीय पुरातत्व में एक बड़ा बदलाव चिह्नित किया। वह भारत में काम करने वाले पहले पेशेवर पुरातत्वविद थे, और ग्रीस और क्रेते में काम करने के अपने अनुभव को क्षेत्र में लाए। अधिक महत्वपूर्ण बात, हालांकि कनिंघम की तरह वह भी शानदार खोज में रुचि रखते थे, वे रोजमर्रा की जिंदगी के पैटर्न के लिए समान रूप से उत्सुक थे।

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Deepak Meena Meena 5 days, 20 hours ago

क्युकी अंग्रेज़ो ने उनकी सत्ता छीन ली थी,वह अपने खोई हुई सत्ता वापिस प्राप्त करना चाहते थे। 2. उनके पास विद्रोह को आशीर्वाद देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था। 3. अंग्रेजो ने उन्हें दिल्ली के लाल किले से गिरफ्तार करके बर्मा के रंगून में उनकी पत्नी जीनत महल के साथ भेज दिया था, वहां उनकी मृत्यु हो गई थी।

Jayesh Yadav 2 weeks, 4 days ago

Kyoki unko sipahiyo ne gheer liya tha ....unke pass orr koi option nhi bcha tha
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Yogita Ingle 3 weeks, 5 days ago

अबुल फजल अपने छोटे भाई फैजी की तरह सम्राट अकबर के दरबार में नवरत्नों की सूची में से एक था. अबुल फजल की प्रमुख साहित्यिक कृतियां निम्नलिखित हैं:

1) अकबरनामा: यह तीन खंडों में लिखा गया अकबर के समय का आधिकारिक इतिहास है. इसमें अकबर के पूर्वजो तैमुर, बाबर हुमायूँ और अकबर का वर्णन किया गया. इसका तीसरा खंड आईने अकबरी के नाम से जाना जाता है. इसमें अकबर के समय के प्रशासनिक घटनाओं का वर्णन मिलता है.

2) रुकात: यह अकबर के अन्य राजकुमारों का पत्र संग्रह है.

3) इंशा-ए-अबुल फज़ल: यह अकबर के समय के समकालीन शासकों और अमीरों को अकबर द्वारा लिखे गए पत्रों का संग्रह है.

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Dheeraj Kumar Yadav 3 weeks, 5 days ago

प्रारम्भ में सूफी लोग (आठवीं व नवीं सदी में) अरब में दिखाई पड़े और लम्बे समय तक उनकी पहचान उनके पहनावे ऊनी वस्त्रों से की जाने लगी. साधारणतः सफ का अर्थ ऊन या भेड़-बेकरी के ऊनी कपड़े से होता है जो साफ से बने वस्त्र पहनता था, वह सूफी कहलाता था.इब्नुलअरबी प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने सूफी मत में महत्त्वपूर्ण सिद्धांत वहदत्त-उल-वुजूद (wahdat ul wajood) दिया. जिसका अर्थ है, ईश्वर सर्वव्याप्त है व सभी में उसकी झलक है, उससे कुछ भी अलग नहीं है, सभी मनुष्य समान हैं. सूफियों के निवास स्थान खानकाह कहलाते थे जबकि उनकी वाणी महफूजात (ग्रन्थ) में थी. सैयद मुहम्मद हाफिज के मतानुसार ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (1192 ई. में मोहम्मद गौरी के साथ आये) ने भारत में सूफी मत का प्रारम्भ किया.
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Gaurav Seth 3 weeks, 5 days ago

चंद्रगुप्त मौर्य मौर्य वंश के संस्थापक थे। उनके माता-पिता, उनके जन्म और बचपन के बारे में बहुत कम जानकारी है, झूठ का जन्म राजधानी पाटलिपुत्र में हुआ था। कौटिल्य, जिसे चाणक्य के रूप में बेहतर जाना जाता है, तक्षशिला के एक ब्राह्मण ने अनाथ को अपनी देखरेख में लिया, उन्हें सभी राजसी आवश्यकताओं में शिक्षित किया और उन्हें एक योग्य सेनापति और शासक बनने के लिए प्रशिक्षित किया। चंद्रगुप्त इस महान विचारक, राजनीतिज्ञ और राजनेता के प्रभाव में आने के लिए भाग्यशाली थे।

सैन्य उपलब्धियां:

1. पंजाब की विजय: चंद्रगुप्त ने चाणक्य के मार्गदर्शन में एक मजबूत सेना का निर्माण किया और पंजाब के क्षुद्र शासकों को पराजित किया और अपने क्षेत्रों का विनाश किया। फिर उन्होंने मगध के खिलाफ मार्च किया।

2. नंदा शासक का दोष: चंद्रगुप्त ने नंदों को हराने के लिए कई प्रयास किए। चाणक्य ने धनानंद को पद से हटाने की कसम खाई थी क्योंकि उन्होंने चाणक्य का अपमान किया था। अंत में धनानंद की हार हुई और मारे गए और चंद्रगुप्त मौर्य मगध के राजा बने और मौर्य वंश की स्थापना की।

धनानंद के दमनकारी शासन को उखाड़ फेंकने और समाप्त करने के बाद, चंद्रगुप्त ने अपनी शक्ति को मजबूत किया और देश को विदेशी कब्जे से मुक्त कर दिया। सिकंदर द्वारा सिंध और पंजाब प्रांतों में नियुक्त यूनानी गवर्नरों को पराजित किया गया और चंद्रगुप्त द्वारा प्रदेशों को हटा दिया गया।

3. सेल्यूकस के साथ युद्ध: सिकंदर की मृत्यु के बाद, उसके साम्राज्य का पूर्वी भाग सेल्यूकस पर चला गया। सेल्यूकस और चंद्रगुप्त मौर्य के बीच एक युद्ध हुआ। सेल्यूकस पराजित हो गया, और उसे चंद्रगुप्त के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर करना पड़ा और उसे काबुल, अफगानिस्तान, कंधार, और बलूचिस्तान के प्रांतों में आत्मसमर्पण करना पड़ा।

चंद्रगुप्त की इस जीत ने उसका साम्राज्य उत्तर-पश्चिम में हिंदुकुश (अफगानिस्तान) की सीमा तक फैला दिया। सेल्यूकस ने मौर्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखा और मेगस्थनीज को पाटलिपुत्र में अपने राजदूत के रूप में भेजा।

बी आकलन: चंद्रगुप्त निस्संदेह भारत के महानतम शासकों में से एक था। उसने यूनानियों को देश से बाहर निकाल दिया। जैन परंपरा के अनुसार, अपने शासनकाल के अंतिम दिनों में, चंद्रगुप्त ने राजगद्दी को त्याग दिया और जैन विद्वान भद्रबाहु के प्रभाव में जैन धर्म ग्रहण किया। कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में अपने अंतिम दिन बिताए और 'सलालेखाना' का प्रदर्शन करके मर गए।

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