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Divyanshi Kesherwani 2 days, 3 hours ago

5 september 1920
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R. D. 1 day, 2 hours ago

Kisi karyakram ka point wise lekha
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Harshdeep Singh 2 days, 16 hours ago

Prasid uupneyaas samrat munsi premchand ka janam 1880 mein Varanasi ke lamahi(लमही)mein hua tha. Inka mul naam dhapatrai (धनपत राय) hai.Inki Suruaati shiksha Varanasi m hui thi. Ve ek primary school mein teacher bhi thhe.

Harshdeep Singh 2 days, 17 hours ago

Bhai vo munsi Premchand hai
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Divyanshi Kesherwani 2 days, 3 hours ago

it is available on this app
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Aditya2 Singh 2 days, 21 hours ago

Means Usne humko apni ankho se dekha Ok
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Piyush Dewangan 3 days, 5 hours ago

gaya kalk lise kahte hai

Satyavati Yadav 5 days, 6 hours ago

Bair bhav chhutkar kab shant ras ka kab avirbhav hota hai
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Rani Mishra 💓💗💖 6 days, 18 hours ago

क्या तुम दृश्य लेखन की बात कर रही हो @devanshi jain
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Anshika Garg 1 week ago

Hindi ka sample paper hoga 2021 ka class 11 ka
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Nayanika Mallick 1 week, 4 days ago

काव्य भाग: १. हम तो एक एक करि जाना २. मेरे तो गिरधर गोपाल, पग घुंघरू ३. वे आंखे ४. घर की याद ५. गजल गद्य भाग: १. नमक का दारोगा २. गलता लोहा ३. स्पीति में बारिश ४. जामुन का पेड़ ५. भारत माता वितान भाग: १. भारतीय गायिका में बेजोड़ लता मंगेशकर २. राजस्थान के रजत बूंदे ३. आलो अंधारी। I hope this is helpful for you!!
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Rachna Srivastava 1 week, 4 days ago

Sample paper

Divyanshi Kesherwani 1 week, 5 days ago

han iss pe available hai

Gauri Varshney. 1 week, 5 days ago

Class 11
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Ranjeet Jat 1 week, 6 days ago

𝘼𝙣𝙨. मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा कहा गया है क्योंकि वे साधारण नानबाई नहीं हैं। वे खानदानी नानबाई हैं जो मसीहाई अंदाज़ से रोटी बनाने की कला जानते हैं । अन्य नानबाई रोटी केवल पकाते हैं, पर मियाँ नसीरुद्दीन अपने पेशे को कला मानते हैं । उनके पास छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने का हुनर है। वे अपने को सर्वश्रेष्ठ नानबाई बताते हैं ।
`12. निम्नलिखित गंद्याश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (कोई दो) (6) जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वर-प्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ कोई घूस से काम निकालता था कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौ-बारह थे। पटवारीगिरी का सर्वसम्मानित पद छोड़- छोड़कर लोग इस विभाग की बरकंदाजी करते थे। इसके दारोगा पद के लिए तो वकीलों का भी जी ललचाता था। यह वह समय था जब अंग्रेज़ी शिक्षा और ईसाई मत को लोग एक ही वस्तु समझते थे। फ़ारसी का प्राबल्य था। प्रेम की कथाएँ और श्रृंगार रस के काव्य पढ़कर फारसीदां लोग सर्वोच्च पदों पर नियुक्त हो जाया करते थे क. पाठ के लेखक और पाठ का नाम बताइए। (3) ख. लेखक की भाषा शैली स्पष्ट कीजिए। (3) ग. प्रस्तुत गद्य का आशय स्पष्ट कीजिए। (3) `
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Keshav Chandrakar 1 week, 6 days ago

saat ravati

Keshav Chandrakar 1 week, 6 days ago

saat raawati

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