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Hum- 1151 Arti Chimankar 4 days, 11 hours ago

Thanks

Gaurav Seth 4 days, 21 hours ago

आँकड़ों में किसी घटना की आवृत्ति संख्या होती है। किसी प्रयोग या अध्ययन में अवलोकन का समय दर्ज / दर्ज किया गया। इन आवृत्तियों को अक्सर हिस्टोग्राम में चित्रमय रूप से दर्शाया जाता है।

In statistics the frequency of an event is the number of times the observation occurred/recorded in an experiment or study. These frequencies are often graphically represented in histograms.

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Yogita Ingle 1 week, 1 day ago

आदर्श माध्य की विशेषताएँ :

  • यह सुस्पष्ट परिभाषित होना चाहिए :
    माध्य को स्पष्टतः परिभाषित होना चाहिए जिससे कि उसका केवल एक ही अर्थ लगाया जा सके।
  • यह समझने में सरल तथा गणना करने में आसान होना चाहिए :
    माध्य ऐसा होना चाहिए कि वह समझने में सरल तथा गणना करने में आसान हो।
  • यह सभी मूल्यों पर आधारित होना चाहिए :
    अच्छे माध्य को श्रेणी के सभी मूल्यों पर आधारित होना चाहिए।: इसके बिना माध्य समंक श्रेणी का सही प्रतिनिधि नहीं बन सकेगा।
  • यह चरम मूल्यों (अधिकतम/न्यूनतम) से कम प्रभावित होना चाहिए :
    किसी भी समंक श्रेणी अत्यधिक छोटे व अत्यधिक बड़े मूल्यों का माध्य पर प्रभाव न्यूनतम होना चाहिए।
  • यह अन्य बीजगणितीय विवेचन में आसान होना चाहिए :
    एक अच्छे सांख्यिकीय माध्य में कुछ ऐसी गणितीय विशेषताएँ होनी चाहिए कि उससे आगे बीजगणितीय विवेचन संभव हो सके। जैसे यदि हमें कुछ समूहों के मध्य मूल्य और आवृत्ति ज्ञात है तो उनसे उन समूहों का सामूहिक माध्य ज्ञात किया जा सकता है।
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Yogita Ingle 1 week, 1 day ago

बहुलक के दो गुण 

  • यह अति सीमान्त पदों से प्रभावित नहीं होता।
  • कभी-कभी एक समूह में दो-या-दो से अधिक बहुलके भी हो सकते हैं।

बहुलक के दो दोष 

  • सभी पदों पर आधारित न होने के कारण इसका बीजीय विवेचन सम्भव नहीं है।
  • कभी-कभी एक समूह में दो-या-दो से अधिक बहुलक भी हो सकते हैं।
  • 1 answers

Gaurav Seth 1 week, 1 day ago

The correlation coefficient is a statistical measure of the strength of the relationship between the relative movements of two variables. The values range between -1.0 and 1.0. A calculated number greater than 1.0 or less than -1.0 means that there was an error in the correlation measurement.

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Gaurav Seth 1 week, 4 days ago

उपभोग, उत्पादन एवं वितरण ये तीन अर्थशास्त्र के मुख्य घटक हैं

उपभोग (consumption) : उपभोग एक क्रिया है जिसके अंतर्गत हम अपनी आवश्यकताओं की प्रत्यक्ष संतुष्टि के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं के उपयोगिता मूल्य का प्रयोग करते है | 

जैसे - 

वस्तुओं का उपभोग (The consumption of Articles) : भोजन लेना, चाय पीना, दूध पीना, कपडे पहना, जूते पहनना, कार चलाना, पुस्तकें पढ़ना आदि वस्तुओं का उपभोग है | 

सेवाओं का उपभोग (The consumption of services): डॉक्टर से ईलाज करवाना, दरजी से कपडे सिलवाना, मोची से जूते पॉलिश करवाना, शिक्षक से शिक्षा लेना, वकील से केस लड़वाना आदि सेवाओं का उपभोग है | 

उत्पादन (Production) : वह प्रक्रिया जिसके द्वारा कच्चे माल को उपयोगी वस्तुओं में परिवर्तित कर उपभोग लायक बनाया जाता है ताकि वस्तु की उपयोगिता तथा सेवाओं में वृद्धि की जा सके, उत्पादन कहलाता है | 

जैसे- गेंहु एवं चीनी जैसे कच्चे माल के उपयोग से बिस्कुट बनना एक उत्पादन क्रिया है | मेडिकल कॉलेज द्वारा छात्रों को डॉक्टर बनाना, लॉ कॉलेज द्वारा छात्रों को वकील बनाना आदि सेवा क्षेत्र में उत्पादन के उदाहरण हैं | 

वितरण (Distribution): वितरण एक क्रिया है जिसमें उत्पादन के कारकों जैसे - भूमि, श्रम, पूँजी एवं उद्यम के बीच आय का सही प्रकार से वितरण, ताकि अधिक से अधिक लाभ अर्जित किया जा सके | यह एक अध्ययन का विषय है जिसे वितरण का सिद्धांत कहा जाता है | 

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Jitender Kumar 2 weeks, 1 day ago

Arthik kiryA Kya ho ti he
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Yogita Ingle 3 weeks, 2 days ago

Secondary data It refers to collection of data by some agency, which already collected the data and processed. The data thus collected is called secondary data.

🌈🌈 3 weeks, 2 days ago

Secondary data: Data collected by someone else for some other purpose (but being utilized by the investigator for another purpose).
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Sangeeta S 3 weeks, 6 days ago

Questions

Gaurav Seth 1 month ago

HRD Minister Ramesh Nishank announced a major CBSE syllabus reduction for the new academic year 2020-21 on July 7 which was soon followed by an official notification by CBSE on the same.

Considering the loss of classroom teaching time due to the Covid-19 pandemic and lockdown, CBSE reduced the syllabus of classes 9 to 12 with the help of suggestions from NCERT.

 

Click on the given link:

<a data-toggle="collapse" href="http://cbseacademic.nic.in/Revisedcurriculum_2021.html#collapse1">Revised Senior Secondary Curriculum (XI-XII)</a>

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Gourav Sharma 1 month ago

नदियों और समुद्रों में नावों और जहाजों से यात्रा तथा व्यापार का प्रारंभ लिखित इतिहास से पूर्व हो गया था। प्राय: साधारण जहाज ऐसे बनाए जाते थे कि आवश्यकता पड़ने पर उनसे युद्ध का काम भी लिया जा सके, क्योंकि जलदस्युओं का भय बराबर बना रहता था और इनसे जहाज की रक्षा की क्षमता आवश्यक थी। ये जहाज डाँड़ों या पालों अथवा दोनों से चलाए जाते थे और वांछित दिशा में ले जाने के लिये इनमें किसी न किसी प्रकार के पतवार की भी व्यवस्था होती थी। स्थलमार्ग से जलमार्ग सरल और सस्ता होता है, इसलिये बहुत बड़ी या भारी वस्तुओं को बहुत दूर के स्थानों में पहुँचाने के लिये आज भी नावों अथवा जहाजों का उपयोग होता है। प्राचीन काल में सभ्यता का उद्भव नौगम्य नदियों या समुद्रतटों पर ही विशेष रूप से हुआ और ये ही वे स्थान थे जहाँ विविध संस्कृतियों की, जातियों के सम्मिलन से, परवर्ती प्रगति का बीजारोपण हुआ।

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