CBSE - Class 12 - समाजशास्त्र - पुनरावृति नोट्स

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पुनरावृति नोट्स for Class 12 समाजशास्त्र

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र भारतीय समाज का परिचय भारतीय समाज का परिचय. समाज के बारे में पूर्व जानकारी अथवा समाज के साथ गहरा जुड़ाव सामाजिक अध्ययन की एक शाखा समाजशास्त्रा के लिए लाभप्रद तथा अलाभप्रद दोनों ही रहे हहैं | इसका लाभ यह है की छात्र समाजशास्त्र से सामान्यतः भयभीत नहीं रहते-वे सोचते हैं की इस विषय का ज्ञान उनके लिए कठिन नहीं हो सकता |

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Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र भारतीय समाज की जन सांख्यिकीय संरचना भारतीय समाज की जन सांख्यिकीय संरचना. व्यक्ति शांति तथा  के साथ समाज में रहने की सीख लेता है; जैसे-सहयोग, मिल-जुलकर रहना, चिंतन-मनन करना इत्यादि। आकारिक जनसांख्यिकी के अंतर्गत सांख्यिकी, संख्या, एकत्रीकरण तथा ऑकडीं का स्मरणीय परिमाणीकरण शामिल होते हैं।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र सामाजिक संस्थाएँ निरंतरता और परिवर्तन सामाजिक संस्थाएँ निरंतरता और परिवर्तन. जनसंख्या सिर्फ अलग-अलग असंबधित व्यक्तियों का जमघट नहीं है परन्तु यह विभिन्न प्रकार के तथा आपस में संबधित वर्गों व समुदाय से बना समाज है। भारतीय समाज की तीन प्रमुख संस्थाएँ- जाति, जनजाति, परिवार

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र बाज़ार सामाजिक संस्था के रूप में बाज़ार सामाजिक संस्था के रूप में. बाजार - एक ऐसा स्थान जहां पर वस्तुओं का क्रय विक्रय होता है। जैसे साप्ताहिक सब्जी बाजार आदि। एडम स्मिथ के अनुसार - पूजी वादी अर्थव्यवस्था, स्वयं लाभ से स्वचालित है और यह तब सबसे अच्छे से कार्य करती है, जब हर व्यक्ति खरीददार व विक्रेता तक संगत निर्णय लेते हैं जो उनके हित मे होते है। स्मिथ ने खुले व्यापार का समर्थन किया।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र सामाजिक असमानता और बहिष्कार के स्वरूप सामाजिक असमानता और बहिष्कार के स्वरूप. सामाजिक विषमता – सामाजिक संसाधनों तक असमान पहुँच की पद्धति सामाजिक किषमता कहलाती है। सामाजिक स्तरीकरण - वह व्यवस्था जो एक समाज में लोगों का वर्गीकरण करते हुए एक अधिक क्रमित संरचना में उन्हें श्रेणीबद्ध करती है सामाजिक स्तरीकरण कहलाती है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ. सांस्कृतिक विविधता - भारत में अनेक प्रकार के सामाजिक समूह व समुदाय निवास करते है। जिनकी भाषा, धर्म, पंथ, जाति, प्रजाति अलग-अलग है। इसे ही सांस्कृतिक विविधता कहा जाता है। सांस्कृतिक विविधता के कारण हमारे सामने बड़ी-बड़ी चुनौतिया है जैसे क्षेत्रवाद, सांप्रदायिकता व जातीयता।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र संरचनात्मक परिवर्तन संरचनात्मक परिवर्तन. भारत मे आधुनिक विचार एवं संस्थाए औपनिवेशिक काल की देन है, हमारे देश की संसदीय, विधि एवं शिक्षा व्यवस्था ब्रिटिश प्रारूप व प्रतिमानों पर आधारित है। उपनिवेशवाद ने राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक संरचना में नवीन परिवर्तन किए परन्तु मुख्य संरचनात्मक परिवर्तन - औद्योगिकरण व नगरीकरण है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र सांस्कृतिक परिवर्तन सांस्कृतिक परिवर्तन को चार प्रक्रियों के रूप मे देखा जा सकता है-संस्कृतिकरण, आधुनिकीकरण, (लोकिकीकरण अथवा निरपेक्षीकरण) पश्चिमीकरण संस्कृतिकरण की प्रक्रिया उपनिवेशवाद से पहले भी थी लेकिन बाकी की तीन प्रक्रियाएं उपनिवेशवाद के बाद की देन है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र भारतीय लोकतंत्र की कहानियाँ भारतीय लोकतंत्र की कहानियाँ. अंग्रेजों ने अपनी सुविधा व प्रशासन के लिए पाश्चात्य शिक्षा देकर एक मध्य वर्ग बनया। इन्होने सामाजिक न्याय तथा राष्ट्रवाद का सहारा औपनिवेशिक शासनको चुनौति देने के लिए लिया।के कराची अधिवेशन मे भारतीय संविधान के लिए चर्चा की गई तथा सभी नागरिकों के लिए आर्थिक तथा सामाजिक न्याय पर विचार किया। इन्हे आजादी के बाद भारत में लागू किया गया।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र ग्रामीण समाज में विकास और परिवर्तन ग्रामीण समाज में विकास और परिवर्तन भारतीय समाज प्राथमिक रूप से ग्रामिण समाज है। 2011 की जनगणना के अनुसार 60x लोग गाँव में रहते है। उनका जीवन कृषि तथा उनके संबंधित व्यवसाय पर चलता है तथा भूमि उत्पाद एक महत्त्वपूर्ण साधन है। भारत के विभिन्न भागों के त्यौहार पोंगल (तमिलनाडु), बैसाखी (पंजाब), ओणम (केरल), हरियाली तीज ( हरियाणा), बीहू (असम) तथा ऊगाडी (कर्नाटक) मुख्य रूप से फसल काटने के समय मनाए जाते है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास औद्योगिक समाज में परिवर्तन और विकास शेहरो में कई वर्ग होते हैं. आभिजात्य वर्ग, उच्च वर्ग, उच्च-मध्यम वर्ग,मध्यम वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग तथा गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों का वर्ग.यद्यपि इस तरह के सभी वर्ग समान आधारभूत सुविधाओं का प्रयोग करते हैं

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन. सामाजिक परिवर्तन का केन्द्रीय बिन्दु है। यह आम लोगों के जीवन को प्रभावित का रहा है। मध्यम वर्ग के लिए रोजगार, खुदरा व्यापार बहुराष्ट्रीय कपनियों द्वारा शुरू करना, बड़े विक्री भंडार, युवाओं के लिए समय बिताने की विधियों तथा अन्य क्षेत्र प्रदान कर रहा है। इससे हमारा सामाजिक व सांस्कृतिक जीवन बदल रहा है। चीन तथा कोरिया से रेशम धागों का आयात करने से बिहार के कामगारों पर प्रभाव, बड़े जहाजों द्वारा मछली पकड़ने के कारण भारतीय मछुआरों पर कुप्रभाव, सूडान से गोंद आने पर गुजरात की औरतो के रोजगार में कमी आ रही है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र जनसंपर्क साधन और संचार जनसंपर्क साधन और संचार. मास मिडिया यानि जन संपर्क के साधन टेलीविजन, समाचार पत्र, फिल्में, रेडियों, विज्ञापन, सी. डी. आदि। ये बहुत बड़ी जनसंख्या को प्रभावित करते है। समाज पर इसके प्रभाव दूरी गामी है। इसमें विशाल पूँजी, संगठन तथा औपचारिक प्रबन्धन की आवश्कता है।

Download पुनरावृति नोट्स for CBSE Class 12 समाजशास्त्र सामाजिक आन्दोलन सामाजिक आन्दोलन-ये विश्व को एक आकार देते है। 19वीं सदी में कुछ सुधार आन्दोलन हुए जैसे-जाति व्यवस्था के विरूद्ध, लिंग आधारित, भेदभाव के विरूद्ध, राष्ट्रीय आज़ादी की आन्दोलन।

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CBSE Revision Notes for class 12 समाजशास्त्र

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CBSE Class 12 समाजशास्त्र Chapter-wise Revision Notes

Part-1

  • पाठ - 1 भारतीय समाज-एक परिचय
  • पाठ - 2 भारतीय समाज की जनसांख्यिकीय संरचना
  • पाठ - 3 भारतीय संस्थाए : निरंतरता एवं परिवर्तन
  • पाठ - 4 बाजार के सामाजिक संस्था के रूप में
  • पाठ - 5 सामाजिक विषमता एवं बहिष्कार के स्वरूप
  • पाठ - 6 सांस्कृतिक विविधता की चुनौतियाँ

Part-2

  • पाठ - 1 संरचनात्मक परिवर्तन
  • पाठ - 2 सांस्कृतिक परिवर्तन
  • पाठ - 3 भारतीय लोकतंत्र की कहानियाँ
  • पाठ - 4 ग्रामीण समाज में विकास एवं परिवर्तन
  • पाठ - 5 औद्योगिक समाज में परिवर्तन तथा विकास
  • पाठ - 6 भूमंडलीकरण और सामाजिक परिवर्तन
  • पाठ - 7 जन सम्पर्क साधन और संचार
  • पाठ - 8 सामाजिक आन्दोलन

Free Download of CBSE Class 12 Revision Notes

Key Notes for CBSE Board Students for Class 12. Important topics of all subjects are given in these CBSE notes. These notes will provide you overview of the chapter and important points to remember. These are very useful summary notes with neatly explained examples for best revision of the book.

CBSE Class-12 Revision Notes and Key Points

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CBSE कक्षा 12 समाजशास्त्र
[खण्ड-1] पाठ-1 भारतीय समाज - एक परिचय
पुनरावृत्ति नोट्स

  • समाज के बारे में पूर्व जानकारी अथवा समाज के साथ गहरा जुड़ाव सामाजिक अध्ययन की एक शाखा समाजशास्त्रा के लिए लाभप्रद तथा अलाभप्रद दोनों ही रहे हैं। इसका लाभ यह है की छात्र समाजशास्त्र से सामान्यतः भयभीत नहीं रहते-वे सोचते हैं की इस विषय का ज्ञान उनके लिए कठिन नहीं हो सकता।
  • इसका अलाभकारी पहलु यह है की कभी-कभी समाज के विषय मे पूर्व जानकारी समस्या का कारण बन जाती है। समाजशास्त्र का ज्ञान प्राप्त करने के क्रम मे हमे समाज के बारे में अपनी पूर्व जानकारी को भुला देने अथवा मिटा देने की आवशयकता होती है।
  • समाजशास्त्र हमें इस बात की शिक्षा प्रदान करता है कि विश्व को सकारात्मक दृष्टी से न केवल स्वयं की बल्कि दूसरों की दृष्टि से भी किस प्रकार से देखें।
  • भारतीय समाज तथा उसकी संरचना की समझ से एक सामाजिक मानचित्र की प्राप्ति होती हैं, जिस पर आप स्वयं को एक भौगौलिक मानचित्र की तरह अवस्थित कर सकते हैं।
  • समाजशास्त्र आपका या अन्य लोगों का स्थान निर्धारित करने में मदद करने एवं विभिन्न सामाजिक समूहों के स्थानों का वर्णन करने के अलावा और भी बहुत कुछ कर सकता है।
  • समाजशास्त्र 'व्यक्तिगत परेशानियों' तथा 'सामाजिक मुद्दों' के बीच कड़ी तथा संबंधों का खाका खींचने में सहायक सिद्ध हो सकता है। व्यक्तिगत परेशानियों से यहाँ तात्पर्य उन निजी कष्टों, परेशानियों तथा संदर्भों से हैं, जो हर किसी के जीवन में निहित होते हैं।
  • नई तथा पुरानी पीढ़ियों के बीच 'पीढ़ियों का अंतराल' अथवा 'संघर्ष' एक सामाजिक परिघटना हैं, जो कई समाजों में काफी दिनों से समान रूप से रही है।
  • बेरोजगारी अथवा परिवर्तनशील व्यावसायिक संरचना में परिवर्तन का प्रभाव भी एक सामाजिक मुद्दा रहा है, जिससे विभिन्न वर्गों के लाखों लोग प्रभावित रहे हैं।
  • एक सामाजिक परिदृश्य आपको इस बात की शिक्षा देता है कि किस प्रकार से सामाजिक खाका तैयार करें।
  • भारत के अंतर्गत औपनिवेशिक शासनकाल में भारी कीमत चुकाकर राजनीतिक, आर्थिक तथा प्रशासनिक एकीकरण किया गया। औपनिवेशिक शोषण तथा प्रभुत्व ने भारतीय समाज को कई प्रकार से संत्रस्त किया, लेकिन इसके विरोधाभासस्वरूप उपनिवेशवाद ने अपने शत्रु राष्ट्रवाद को भी जन्म दिया।
  • ऐतिहासिक रूप से, भारतीय राष्ट्रवाद ने ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में ही अपना आकार ग्रहण किया। औपनिवेशिक शासन काल के प्रभुत्व के अनुभवों ने विभिन्न समुदाय के लोगों में एकता तथा ऊर्जा का संचार किया।
  • उपनिवेशवाद ने दो नए वर्गों तथा संप्रदायों को जन्म दिया, जिसने भावी इतिहास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।
  • भारतीय समाज बहुलतावादी समाज है। इसमें भाषा, क्षेत्र, धर्म, जाति तथा रीति-रिवाजों की विभिन्नताएँ हैं। भारतीय समाज आधुनिकीकरण की तरफ बढ़ रहा है।
  • भारतीय आधुनिकीकरण मॉडल के मुख्य मूल्य हैं-समाजवाद, साम्राज्यवाद, धर्मनिरपेक्षता, औद्योगीकरण, प्रजातंत्र, व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा मूलभूत अधिकार।
  • भारत में स्थापित लोकतंत्र जो कि समानता, स्वतंत्रता तथा सार्वभौमिक मताधिकार पर आधारित है, ने भारतीय समाज के परंपरागत ढाँचे को परिवर्तित किया है।
  • औपनिवेशिक काल में एक नई जागरूकता का भाव पैदा हुआ। इस काल में भारतीय लोग समान उद्देश्यों की पूर्ति के लिए एक-दूसरे के साथ हुए। इससे कई प्रकार के आर्थिक, राजनीतिक तथा प्रशासनिक परिवर्तन के आधुनिक रूप सामने आए।
  • ब्रिटिश शासनकाल में परिवर्तन की विभिन्न प्रक्रियाएँ प्रारंभ हुई। इनमें से कुछ पूरी तरह से बाह्य थीं, जबकि कुछ आंतरिक थीं। बाह्य प्रक्रियाओं में शामिल थे- पश्चिमीकरण, आधुनिकीकरण, धर्मनिरपेक्षता, औद्योगीकरण इत्यादि, जबकि संस्कृतिकरण तथा नगरीकरण आंतरिक प्रक्रियाएँ थीं। आधुनिकीकरण तथा पश्चिमीकरण हमारे ब्रिटेन के साथ संबंधों का परिणाम था।
  • उत्पादन में यांत्रिक तकनीक, व्यापार में बाज़ार पद्धति, परिवहन तथा संचार साधनों का विकास, नौकरशाही पर आधारित लोक सेवा की अवधारणा, औपचारिक तथा लिखित कानून, आधुनिक सैन्य संगठन, पृथक प्रशिक्षित विधिक पद्धति तथा आधुनिक औपचारिक शिक्षा पद्धति आदि महत्वपूर्ण कदम थे, जिन्होंने आधुनिकीकरण की पृष्ठभूमि तैयार की।
  • ब्रिटिश उपनिवेशवादी अपने हितों के दृष्टिगत ही सारे कदम उठा रहे थे।
  • परंपरा तथा आधुनिकता ने भारतीय समाज में ढेर सारी समस्याएँ पैदा कर दीं।
  • राजा राम मोहन राय, ईश्वरचंद्र विद्यासागर, केशव चंद्र सेन, दयानंद सरस्वती, रानाडे, तिलक तथा महात्मा गाँधी कुछ ऐसे प्रख्यात नाम थे जिन्होंने सती प्रथा, विधवा पुनर्विवाह पर प्रतिबंध, अस्पृश्यता जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने की दिशा में सामाजिक सुधार आदोलन चलाए।
  • क्योंकि भारत में समाजशास्त्र का उस समय व्यवस्थित रूप से विकास नहीं हुआ था, अत: इसमें भारतीय गाँवों का चित्रण ब्रिटिश नीतियों के अनुरूप किया गया।
  • गाँव भारतीय समाज तथा संस्कृति के स्तंभ रहे हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ईस्ट इंडिया कपनी ने भी भारतीय गाँवों का अध्ययन करने का विचार किया।
  • भारतीय समाज का प्रथम अध्ययन बी०एच० पॉवेल ने सन् 1892 में अपनी किताब 'भारतीय ग्रामीण समुदाय' (The Indian Village Community) के द्वारा किया। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद, भारतीय गाँवों में गरीबी तथा भारतीय स्वतंत्रता आदोलन ने भी कई विद्वानों का ध्यान गाँवों की तरफ आकृष्ट किया।
  • सर चाल्र्स मेटकॉफ , सर जार्ज वुडवर्ड, बडेन पॉवेल तथा फ्रांसिस वुचनैन ने ईस्ट इंडिया कंपनी की तरफ से मद्रास, मैसूर, बिहार इत्यादि के विभिन्न गाँवों तथा शहरों का अध्ययन तथा सर्वेक्षण करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार किया। इसके बाद हरबर्ट रिसले, डी. एवट्सन सी.वी. लुकास, डब्लू जार्ज ब्रिग्स तथा विलियम क्रूक ने भारत की ग्रामीण समस्याओं को समझने का प्रयास किया।
  • मध्यम वर्ग पश्चिमी शिक्षा में रच-बस गया, कितु उसी मध्यम वर्ग ने औपनिवेशिक शासन को चुनौती भी दी।
  • विभिन्न प्रकार के सामाजिक तथा सांस्कृतिक समुदायों का गठन क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर किया गया, जिसने भारतीय परंपरा तथा संस्कृति की रक्षा करने का प्रयास किया। उपनिवेशवाद के कारण बाद में नए समुदायों तथा वर्गों का उदय हुआ, जिन्होंने आगे चलकर इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शहरी मध्यमवर्ग ने राष्ट्रवाद का बिगुल बजाया तथा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सूत्रपात किया।
  • समाजशास्त्र आपको 'स्ववाचक' अथवा 'आत्मवाचक' बनने की शिक्षा देता है। अर्थात् यह स्वयं को देखने तथा आत्मनिरीक्षण करने की शिक्षा देता हैं, परंतु इस आत्मनिरीक्षण में समीक्षा अधिक तथा आत्ममुग्धता कम होनी चाहिए।
  • एक तुलनात्मक सामाजिक मानचित्र आपको समाज में आपके निर्धारित स्थान के बारे में बता सकता है।
  • समाजशास्त्र समाज में विद्यमान विभिन्न प्रकार के समूहों तथा सामूहिकताओं तथा उनके व्यापक प्रभाव के बारे में हमें बताता है; जैसे-राष्ट्र, एक-दूसरे के साथ संबंध तथा व्यक्ति के जीवन के संदर्भ में उसका अर्थ।
  • समाजशास्त्र व्यक्तिगत परेशानियों तथा समाजिक मुद्दों के बीच कड़ी तथा संबंध स्थापित करने हेतु खाका तैयार करने में सहायता करता है। व्यक्तिगत परेशानियों में निजी कष्ट, समस्या या संदर्भ होते हैं, जबकि सामाजिक मुद्दों में पीढ़ियों का अंतराल, बेरोजगारी, सांप्रदायिकता, जातिवाद, लैंगिक असमानता इत्यादि शामिल होते हैं।

 



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