NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chidiya ki Bacchi

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NCERT Solutions for Class 7 Hindi Chidiya ki Bacchi

NCERT Class 7 Hindi Chapter wise Solutions

  1. हम पंछी उन्मुक्त गगन के
  2. दादी माँ
  3. हिमालय की बेटियाँ
  4. कठपुतली
  5. मिठाईवाला
  6. रक्त और हमारा शरीर
  7. पापा खो गए
  8. शाम-एक किसान
  9. चिड़िया की बच्ची
  10. अपूर्व अनुभव
  11. रहीम के दोहे
  12. कंचा
  13. एक तिनका
  14. खानपान की बदलती तस्वीर
  15. नीलकंठ
  16. भोर और बरखा
  17. वीर कुँवरसिंह
  18. संघर्ष के कारण धनराज
  19. आश्राम का आनुमानित व्यय
  20. विप्लव गायन

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1. किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था?

उत्तर:- माधवदास ने अपनी कोठी संगमरमर से बनवाई थी, उनके पास धन की कोई कमी न थी, वे चिड़िया से यह भी कहते हैं कि उनके पास बहुत सा सोना-मोती है, वे उसके लिए सुंदर-सा सोने का घर बनवा देंगे जिसमें मोतियों की झालर लटकी होगी आदि बातों से हमें पता चलता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था।
शाम को स्वप्न की भाँति गुजारना, पर जी भरकर भी कुछ खाली सा रहता है, मेरा महल भी सूना है, वहाँ कोई चहचहाता नहीं है, तुम्हें देखकर मेरी रागनियों का दिल बहलेगा, मेरा दिल वीरान है वहाँ कब हँसी सुनने को मिलती है आदि बातों से पता चलता है कि संपन्न होने के बावजूद माधवदास सुखी नहीं थे।


2. माधवदास क्यों बार-बार चिड़िया से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही है? क्या माधवदास निःस्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:- माधवदास का बार-बार चिड़िया से यह कहना कि यह बगीचा तुम्हारा ही है यह दर्शाता है कि उन्हें वह चिड़िया बड़ी प्यारी लगी अत: वे उस चिड़िया को अपने पास ही रखना चाहते थे।
माधवदास का यह कहना पूरी तरह से निःस्वार्थ मन से नहीं कहा गया था क्योंकि चिड़िया को देखने के पश्चात अब वे उस चिड़िया को अपने बगीचे में अपनी मन-संतुष्टि के लिए रखना चाहते थे।


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3. माधवदास के बार-बार समझाने पर भी चिड़िया सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्त्व नहीं दे^ रही थी। दूसरी तरफ़ माधवदास की नज़र में चिड़िया की ज़िद का कोई तुक न था। माधवदास और चिड़िया के मनोभावों के अंतर क्या-क्या थे? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:- चिड़िया और माधवदास के मनोभावों में मुख्य अंतर भावनात्मक सुख और भौतिक सुख का था। एक तरफ़ माधवदास के लिए धन-संपत्ति से बढ़कर जीवन में कुछ नहीं था परन्तु दूसरी तरफ़ चिड़िया के लिए ये सारी सुख-सुविधाएँ व्यर्थ थी। उसके लिए अपनी माँ की गोद से प्यारा कुछ नहीं था। इसी कारण चिड़िया जहाँ माधवदास के बार-बार समझाने पर भी सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्त्व नहीं दे रही थी। वहीँ दूसरी ओर धन को ही सर्वोपरि समझने के कारण माधवदास को चिड़िया की घर जाने की ज़िद बेतुकी लग रही थी।


4. कहानी के अंत में नन्हीं चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा? चालीस-पचास या इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।

उत्तर:- कहानी के अंत में नन्हीं चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलना और सीधे अपनी माँ की गोद में पहुँचना की बात पढ़कर हमें अति आनंद हुआ।
यदि इस कहानी का सुखद अंत न होता तो जीवन भर नन्हीं चिड़िया को पिंजरे में रहना पड़ता। वह कभी स्वछंदता की उड़ान न भर पाती और न ही अपनी माँ से मिल पाती। अत: नन्हीं चिड़िया का लालच में न फँसना और सुरक्षित भाग निकलना यह भी बताता है कि स्वतंत्रता से अमूल्य कुछ भी नहीं है।


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5. ‘माँ मेरी बाट देखती होगी’ – नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है। आप अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी ज़िंदगी में माँ का क्या महत्त्व है?

उत्तर:- कहते हैं ईश्वर सभी जगह उपस्थित नहीं रह सकता इसीलिए उसने धरती पर माँ को भेजा जो हर मुश्किल की घड़ी में हमारे साथ रहती है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसकी माँ का होना किसी वरदान से कम नहीं होता। एक बच्चे के लिए उसकी माँ की अहमियत दुनिया में सबसे अधिक होती है। वह न केवल बच्चे को जन्म देती है बल्कि उसका सही ढंग से पालन-पोषण भी करती है। वही बच्चे की पहली दोस्त और अध्यापिका भी होती है। आप कहीं भी चले जाएँ कितने ही बड़े क्यों ना हो जाएँ लेकिन आपको आत्मिक सुकून अपनी माँ के साथ ही मिलता है उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता।


6. इस कहानी का कोई और शीर्षक देना हो तो आप क्या देना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर:- इस कहानी के लिए हम अन्य शीर्षक ‘सच्चा सुख’ दे सकते हैं क्योंकि यहाँ पर जीवन में सच्चा सुख क्या होता है वह एक छोटी सी चिड़िया के माध्यम से बताया गया है।


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7. इस कहानी में आपने देखा कि वह चिड़िया अपने घर से दूर आकर भी फिर अपने घोंसले तक वापस पहुँच जाती है। मधुमक्खियों, चींटियों, ग्रह-नक्षत्रों तथा प्रकृति की अन्य विभिन्न चीज़ों में हमें एक अनुशासनबद्धता देखने को मिलती है। इस तरह के स्वाभाविक अनुशासन का रूप आपको कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है? उदाहरण देकर बताइए।

उत्तर:- ऋतु चक्र,सूर्य और चाँद का उदित और अस्त होना, तारों का रात में चमकना, पृथ्वी का सूर्य के चारों और चक्कर लगाना, पशुओं का भी दिनभर घूम-फिर शाम के समय घर लौटना आदि सभी भी अनुशासन का पालन करते हैं।


8. सोचकर लिखिए कि यदि सारी सुविधाएँ देकर एक कमरे में आपको सारे दिन बंद रहने को कहा जाए तो क्या आप स्वीकार करेंगे? आपको अधिक प्रिय क्या होगा – ‘स्वाधीनता’ या ‘प्रलोभनोंवाली पराधीनता’?
ऐसा क्यों कहा जाता है कि पराधीन व्यक्ति को सपने में भी सुख नहीं मिल पाता।
नीचे दिए गए कारणों को पढ़ें और विचार करें –
क) क्योंकि किसी को पराधीन बनाने की इच्छा रखनेवाला व्यक्ति स्वयं दुखी होता है, वह किसी को सुखी नहीं कर सकता।
ख) क्योंकि पराधीन व्यक्ति सुख के सपने देखना ही नहीं चाहता।
ग) क्योंकि पराधीन व्यक्ति को सुख के सपने देखने का भी अवसर नहीं मिलता।

उत्तर:- सारी सुख-सुविधा मिलने पर भी हम ‘स्वाधीनता’ ही स्वीकार करेंगे न कि ‘प्रलोभनों वाली पराधीनता’, क्योंकि सुविधाएँ कितनी भी क्यों न मिल जाएँ रहना तो हमें किसी के आधीन ही है।
पराधीन व्यक्ति दूसरों के आधीन रहने के कारण सुख से सदा वंचित ही रहता है।


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भाषा की बात^

9. पाठ में पर शब्द के तीन प्रकार के प्रयोग हुए हैं –
क) गुलाब की डाली पर एक चिड़िया आन बैठी।
ख) कभी पर हिलाती थी।
ग) पर बच्ची काँप-काँपकर माँ की छाती से और चिपक गई।
तीनों ‘पर’ के प्रयोग तीन उद्देश्यों से हुए हैं। इन वाक्यों का आधार लेकर आप भी ‘पर’ का प्रयोग कर ऐसे तीन वाक्य बनाइए जिनमें अलग-अलग उद्देश्यों के लिए ‘पर’ के प्रयोग हुए हों।

उत्तर:- 1. जामुन के पेड़ पर तोता बैठा है।
2. उस मोर के पर कितने सुंदर हैं।
3. राधा का रीना पर बहुत अहसान है।


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10. पाठ में तैंने, छनभर, खुश करियो-तीन वाक्यांश ऐसे हैं जो खड़ीबोली हिन्दी के वर्तमान रूप में तूने, क्षणभर, खुश करना लिखे-बोले जाते हैं लेकिन हिन्दी के निकट की बोलियों में कहीं-कहीं इनके प्रयोग होते हैं। इस तरह के कुछ अन्य शब्दों की खोज कीजिए।

उत्तर:- अइयो – आओ
करियो – करना
दियो – देना

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